विशेष्य और विशेषण

परिचय

परिभाषा : “जिस शब्द से संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता का बोध हो, उसे ‘विशेषण’ कहते हैं।”

विशेषता :

  • विशेषण एक ‘विकारी’ शब्द है, अर्थात् लिंग, वचन, पुरुष आदि के अनुसार इसमें परिवर्तन होता है। उदाहरणार्थ- काला, काली, काले।
  • विशेषण शब्द विशेष्य के अर्थ को सीमित या मर्यादित या परिमित कर देता है। उदाहरणार्थ, ‘गाय’ से ‘गाय-जाति’ के सभी प्राणियों का बोध होता है, परन्तु ‘काली गाय’ कहने पर काली रंग की गायों का बोध होता है, न कि सभी गायों का। यहाँ पर ‘काली’ विशेषण के प्रयोग करने से ‘गाय’ संज्ञा की व्याप्ति सीमित या मर्यादित हो गयी है। दूसरे शब्दों में जो गाय काले रंग की नहीं हैं वे सभी ‘काली गाय’ कहने से समूह-वाह्य हो गयीं।

विशेष्य और प्रविशेषण

विशेषण के साथ दो मुख्य बातें जुड़ी हुई हैं :

  • विशेष्य
  • प्रविशेषण

‘विशेष्य’ उस शब्द को कहते हैं, जिसकी विशेषता विशेषण से प्रकट होती है या बतायी जाती है।

  • उदाहरण- सोहन सुन्दर लड़का है। इस वाक्य में ‘लड़का’ विशेष्य है, क्योंकि ‘सुन्दर’ शब्द इसकी विशेषता बताता है।

‘प्रविशेषण’ उस शब्द को कहते हैं, जो विशेषण की विशेषता को बतलाता है। पं० कमाता प्रसाद गुरु इसे ही ‘अन्तर्विशेषण’ कहा है।

  • उदाहरण- सोहन बहुत तेज छात्र है। इस वाक्य में ‘तेज’ विशेषण है और इस विशेषण का भी विशेषण ‘बहुत’ शब्द बताता है, इसलिये यह (बहुत) प्रविशेषण है। वाक्य में प्रयुक्त ‘छात्र’ शब्द ‘विशेष्य’ है।
अर्जुन बहुत सुन्दर है।

क्षत्रिय बड़े साहसी होते हैं।

प्रयागराज के अमरूद सिन्दूरी लाल रंग के होते हैं।

  • उपर्युक्त वाक्यों में ‘बहुत’, ‘बड़े’ और ‘सिन्दूरी’ प्रविशेषण शब्द हैं जो क्रमशः सुन्दर, साहसी और लाल विशेषण-शब्द की विशेषता बताते हैं।

विशेषण और विशेष्य सम्बन्ध

वाक्य में विशेषण का प्रयोग दो प्रकार से होता है:

  • एक, जब वह विशेष्य (संज्ञा अथवा सर्वनाम) के पूर्व प्रयुक्त होता है। ऐसी स्थिति में वह ‘विशेष्य-विशेषण’ या ‘उद्देश्य-विशेषण’ कहलाता है, यथा-
    • झूठी बात मत बोलो।
    • सतीश चंचल बालक है।
    • प्रभा सुशील बालिका है।
      • इन वाक्यों में ‘झूठी’, ‘चंचल’ और ‘सभ्य’ क्रमशः बात, बालक और बालिका के विशेषण हैं। अतः इन वाक्यों में ‘विशेष्य-विशेषण’ हैं।
  • दूसरा, जब वह विशेष्य के पश्चात् और क्रिया के पहले अर्थात् विशेष्य और क्रिया के बीच आता है। इस स्थिति में वह विशेष्य के बाद में आता है, अतः ‘विधेय- विशेषण’ कहलाता है, यथा-
    • वह बात झूठी थी।
    • मेरा कुत्ता लाल है।
    • उसका लड़का मेहनती है।
      • इन वाक्यों में ‘झूठी’, ‘लाल’ और ‘मेहनती’ क्रमशः बात, कुत्ता और लड़का के विशेषण है। ये विशेषण ‘विशेष्य’ के बाद प्रयुक्त हुए हैं। अतः यहाँ पर ‘विधेय-विशेषण’ सम्बन्ध है।

विशेषण का लिंग और वचन

विशेषण एक ‘विकारी’ शब्द है, जिसका अर्थ है कि इसका लिंग, वचन आदि विशेष्य के लिंग, वचन आदि के अनुसार होते हैं, चाहे विशेषण विशेष्य के पूर्व आये अथवा पश्चात्। यथा –

  • अच्छे लड़के पढ़ते हैं।
  • भारती अच्छी लड़की है।

यदि एक ही विशेषण के अनेक विशेष्य हों, तो विशेषण के लिंग और वचन समीप वाले विशेष्य के लिंग, वचन के अनुरूप होते हैं। यथा –

  • नये पुरुष और नारियाँ …
  • नयी धोती और कुर्ता …

परन्तु यहाँ ध्यातव्य है कि कुछ विशेषण ‘अविकारी’ भी होते हैं, अर्थात् ये विशेषण लिंग निरपेक्ष होते हैं; जैसे – लाल, सुन्दर, चंचल, गोल, भारी, सुडौल इत्यादि।

विशेषण के भेद

  • गुणवाचक विशेषण
  • परिमाणवाचक विशेषण
    • निश्चित परिमाणवाचक विशेषण
    • अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
  • सार्वनामिक विशेषण
    • मौलिक सार्वनामिक विशेषण
    • यौगिक सार्वनामिक विशेषण
  • संख्यावाचक विशेषण
    • गणनावाचक
      • पूर्णांकबोधक
      • अपूर्णांकबोधक
    • क्रमवाचक
    • आवृतवाचक
    • समुदायवाचक
    • प्रत्येकबोधक
    • गुणवाचक विशेषण

विशेष्य और विशेषण

गुणवाचक विशेषण

जिस विशेषण से किसी संज्ञा या सर्वनाम का गुण-दोष, रूप-रंग, आकार-प्रकार, सम्बन्ध, दशा आदि का पता चले उसे ‘गुणवाचक विशेषण’ कहते हैं। विशेषणों में इनकी संख्या सर्वाधिक है। यथा-

  • गुण – वे विद्वान् व्यक्ति हैं। श्यामा शान्त स्वभाव की लड़की है।
  • दोष – सोहन दुष्ट लड़का है। रमा बुरी लड़की है।
  • रूप – वह बहुत ही सुन्दर लड़की है।
  • रंग – श्याम हरी कमीज पहने है। कमला लाल फ्राक पहनी है।
  • आकार – वह मोटा आदमी इधर ही आ रहा है।
  • दशा – दीनू दुर्बल व्यक्ति है। राम स्वस्थ बालक है।

उपर्युक्त वाक्यों में मोटे अक्षरों में दिये गुणवाचक विशेषण संज्ञाओं और सर्वनामों के गुण, दोष, रूप, रंग, आकार, दशा आदि का बोध कराते हैं।

परिमाणवाचक विशेषण

जिस विशेषण से संज्ञा या सर्वनाम के परिमाण अथवा संख्या का बोध हो, उसे ‘परिमाणवाचक विशेषण’ कहते हैं। यथा-

  • मनोहर जीवनभर पूरा सुख भोगता रहा।
  • मुझे थोड़ी चाय दो।
  • मुझे एक किलो चावल दे दो।
  • एक मीटर कपड़े से काम चल जायेगा।
  • यह गाय बहुत दूध देती है।

उपर्युक्त वाक्यों में मोटे अक्षरों में दिये गये शब्द परिमाणवाचक विशेषण हैं। इनसे उन संज्ञाओं के माप-तौल का बोध होता है, जो इन वाक्यों में विशेष्य के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। माप-तौल बतानेवाली सभी विशेषताएँ परिमाणवाचक विशेषण कहलाती हैं।

परिमाणवाचक विशेषण के ‘दो भेद’ होते हैं-

  • निश्चित परिमाणवाचक विशेषण।
  • अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण।

(क) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण

जिस विशेषण से किसी संज्ञा के निश्चित माप-तौल का बोध हो, उसे ‘निश्चित परिमाणवाचक विशेषण’ कहते हैं। यथा-

  • सोहन बाजार से चार किलो आटा लाया है।
  • दो मीटर कपड़े से मेरी कमीज बन जाएगी।
  • बाजार जा रहे हो तो एक तोला हींग लेते आना।

उपर्युक्त वाक्यों में ‘चार किलो’, ‘तीन मीटर’ और ‘एक तोला’ एक निश्चित माप-तौल का बोध कराते हैं।

(ख) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण

जिस विशेषण से किसी संज्ञा का कोई निश्चित परिमाण ज्ञात न हो, उसे ‘अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण’ कहते हैं। यथा-

  • सभागार में बहुत आदमी थे।
  • मेले में अनेक पशु-पक्षी थे।
  • विश्वविद्यालय के कुछ विद्यार्थी हड़ताल पर हैं।

उपर्युक्त वाक्यों में ‘बहुत’, ‘अनेक’ और ‘कुछ’ एक अनिश्चित परिमाण का बोध कराते हैं।

सार्वनामिक विशेषण

पुरुषवाचक या निजवाचक सर्वनामों (मैं, तू, वह) को छोड़कर अन्य सर्वनाम जब किसी संज्ञा की विशेषता बतलाएँ, तो उन्हें ‘सार्वनामिक विशेषण’ कहते हैं। यथा-

  • यह आदमी विश्वसनीय है।
  • ये लड़कियाँ कहाँ जा रही हैं?
  • ऐसा आदमी तो देखा नहीं।
  • मेरा घर इसी गाँव में है।
  • आपका पत्र मिला।

उपर्युक्त वाक्यों में यह, ये, ऐसा, मेरा और आपका सर्वनाम क्रमशः आदमी, लड़कियाँ, आदमी, घर और पत्र की विशेषता बतलाते हैं। ये सभी सार्वनामिक विशेषण हैं। सार्वनामिक विशेषण दो प्रकार के होते हैं- एक, मौलिक और द्वितीय, यौगिक।

(क) मौलिक : जो सर्वनाम अपने मूल रूप में किसी संज्ञा की विशेषता बतलाते हैं, उन्हें ‘मौलिक सार्वनामिक विशेषण’ कहते हैं। यथा-

  • यह आदमी ईमानदार है।
  • ये लोग अच्छे हैं।
  • कोई व्यक्ति आया था।

उपर्युक्त वाक्यों में यह, ये और कोई सर्वनाम के मूल रूप हैं और क्रमशः आदमी, लोग और व्यक्ति की विशेषताओं का बोध होता है।

(ख) यौगिक : जो सर्वनाम किसी प्रत्यय के योग से बनकर किसी संज्ञा की विशेषता बतलाते हैं, उन्हें ‘यौगिक सार्वनामिक विशेषण’ कहते हैं। यथा-

  • ऐसा लड़का मिलना कठिन है।
  • कैसा सामान लाये हो?
  • तुम्हारे जैसा आदमी मैंने देखा नहीं।

उपर्युक्त वाक्यों में ऐसा, कैसा और जैसा यौगिक सर्वनाम क्रमशः लड़का, सामान और आदमी की विशेषता बतलाते हैं। अत: ये सभी यौगिक सार्वनामिक विशेषण हैं। इनके अतिरिक्त मेरा, तुम्हारा, आपका, कितना, इतना, उतना, अपना आदि भी यौगिक सर्वनाम हैं।

संख्यावाचक विशेषण

जिस विशेषण से संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध हो, उसे ‘संख्यावाचक विशेषण’ कहते हैं। यथा-

  • यहाँ तीन बालक और चार बालिकाएँ उपस्थित हैं।
  • तीसरा आदमी कहाँ गया?
  • वे दोनों स्कूल गये।
  • यहाँ हर एक आदमी ईमानदार है।

उपर्युक्त वाक्यों में तीन, चार, तीसरा, दोनों, और हर एक शब्द संख्यावाची हैं और ये सभी संज्ञाओं की विशेषता बतलाते हैं।

संख्यावाचक विशेषण के पाँच भेद हैं- गणनावाचक, क्रमवाचक, आवृत्तिवाचक, समुदायवाचक और प्रत्येकबोधक।

(क) गणनावाचक : जो संख्यावाचक विशेषण पूर्णांकबोध और अपूर्णांक बोधक के रूप में गिनने योग्य हों, उन्हें ‘गणनावाचक’ कहते हैं। यथा-

  • पूर्णांकबोधक – दो आदमी जा रहे हैं।
  • अपूर्णांकबोधक – आधा किलो दाल मिली है।

उपर्युक्त वाक्यों में दो संख्या पूर्णांकबोधक रूप में आदमी संज्ञा की विशेषता व्यक्त करती है। आधा अपूर्णांकबोधक संख्या है। ये दोनों संख्यावाचक विशेषण हैं।

(ख) क्रमवाचक : जो संख्यावाचक विशेषण संख्या के क्रमांक को सूचित करते हैं, उन्हें ‘क्रमवाचक’ कहते हैं। यथा-

  • पहला व्यक्ति आगे रहेगा।
  • तीसरा और चौथा आदमी एक-दूसरे के पीछे रहेंगे।

(ग) आवृत्तिवाचक : जो संख्यावाचक विशेषण किसी संख्या की आवृत्ति को सूचित करता है, उसे ‘आवृत्तिवाचक’ कहते हैं। यथा- दूना, तिगुना, चार गुना, दोबारा, तिबारा आदि।

(घ) समुदायवाचक : जो संख्यावाचक विशेषण समूह या समुदाय का बोध कराये, उसे ‘समुदायवाचक’ कहते हैं। यथा-दोनों, तीनों, चारों आदि।

(ङ) प्रत्येकबोधक : जो संख्या एक का बोध कराये, उसे ‘प्रत्येकबोधक’ संख्या कहते हैं। यथा-हरेक, प्रत्येक, एक-एक।

विशेषण की तुलनावस्था

जब दो संज्ञाओं के गुण या अवस्था की तुलना की जाती है तब विशेषण से पूर्व अपेक्षाकृत, की अपेक्षा, की तुलना में, मुकाबले में, से कहीं बढ़कर, से बढ़ चढ़कर आदि का प्रयोग किया जाता है। यथा-

  • शिखा आपकी लड़की से छोटी है।
  • प्रभात का घर तुम्हारे घर से बड़ा है।
  • रमेश की अपेक्षा रवि सुन्दर है।
  • सभी लड़कियों में अपेक्षाकृत ममता तेज है।
  • मोहन के मुकाबले सोहन मोटा है।

उपर्युक्त वाक्यों में मोटे अक्षरों में दिये शब्द दो संज्ञाओं के गुण और अवस्था को तुलनात्मक दृष्टि से दिखाते हैं।

जब दो से अधिक संज्ञाओं के बीच तुलना करते हैं, तब सबसे, सर्वाधिक आदि का प्रयोग करते हैं। यथा-

  • पाँच भाइयों में युधिष्ठिर सबसे बुद्धिमान् है।
  • अर्जुन अपनी कक्षा का सर्वाधिक योग्य छात्र है।

जब दो संज्ञाओं के बीच तुलना होती है, तो विशेषण की स्थिति को ‘उत्तरावस्था’ (Comparative) कहते हैं, दो से अधिक की स्थिति को ‘उत्तमावस्था’ (Superlative) कहते हैं। पर जब कहीं कोई तुलना न की गई हो, अर्थात् एक संज्ञा-पद हो और उसके किसी गुण की चर्चा हो, तब विशेषण की स्थिति में ‘मूलावस्था’ (Positive) कहते हैं।

ऊपर बताये गये तरीके के अलावा विशेषण की मूलावस्था में ‘तर’ और ‘तम’ लगाकर उसके उत्तरावस्था और उत्तमावस्था को तुलनात्मक दृष्टि से दिखाया जाता है। इस प्रकार के कतिपय उदाहरण देखे जा सकते हैं-

मूलावस्थाउत्तरावस्थाउत्तमावस्था
अधिकअधिकतरअधिकतम
उच्चउच्चतरउच्चतम
कोमलकोमलतरकोमलतम
गुरुगुरुतरगुरुतम
प्रियप्रियतरप्रियतम
निकृष्टनिकृष्टतरनिकृष्टतम
निम्ननिम्नतरनिम्नतम
बृहत्बृहत्तरबृहत्तम
महत्महत्तरमहत्तम
लघुलघुतरलघुतम
सुन्दरसुन्दरतरसुन्दरतम

हिन्दी में विशेषणों की तुलना के लिये ‘तर’ या ‘तम’ प्रत्ययों का प्रयोग स्वाभाविक रूप से नहीं होता। यहाँ उच्चतर के स्थान पर ‘से ऊँचा’, उच्चतम के स्थान पर ‘सबसे ऊँचा’ का प्रयोग अधिक होता है। यह हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल भी है।

संस्कृत में तुलना के लिये ‘तर’ और ‘तम’ प्रत्ययों के अलावा ‘ईयस’ तथा ‘इष्ठ’ प्रत्ययों का भी प्रयोग होता है। पर ऐसे शब्द कम ही हैं, जिनमें ईयस तथा इष्ठ का प्रयोग हुआ हो और वे हिन्दी में प्रचलित हों। इनमें भी हिन्दी में मुख्यतः इनके उत्तमावास्था वाले रूप ही अधिक प्रयोग में आते हैं। यथा- ज्येष्ठ, कनिष्ठ, वरिष्ठ, श्रेष्ठ।

समस्या यह है कि हिन्दी में ये इष्ठ प्रत्ययवाले विशेषण मूलावस्था वाले विशेषण की तरह प्रयुक्त होते हैं और इसी आधार पर इनमें ‘तर’ और ‘तम’ प्रत्यय जोड़ देने का प्रचलन है, जो कि गलत है। यथा- श्रेष्ठ < श्रेष्ठतर < श्रेष्ठतम।

फारसी में ऐसी तुलना के लिये विशेषणों में ‘तर’ तथा ‘तरीन’ लगाने का प्रचलन है, जिसे हिन्दी में नहीं अपनाया है। फिर भी कुछ प्रयोग हिन्दी में पर्याप्त प्रचलित हैं; यथा – ज्यादातर, बदतर, बेहतर, बेहतरीन आदि।

हिन्दी की मौलिक स्थिति संस्कृत से भिन्न है। हिन्दी में तुलना करने पर विशेषणों के रूप ज्यों-के-त्यों बने रहते हैं, उनमें विकार या परिवर्तन नहीं होता है। उदाहरणार्थ:

  • श्याम मोहन से अधिक ईमानदार है।
  • दिलीप की पुस्तक प्रदीप के पुस्तक से कीमती है।
  • अनूप अपने वर्ग में सबसे तेज विद्यार्थी है।

इन वाक्यों में ‘ईमानदार’, ‘कीमती’ और ‘तेज’ विशेषण हैं। दो व्यक्तियों/वस्तुओं की तुलना से इन शब्दों के रूप नहीं बदले हैं। हिन्दी में ‘से’, ‘अपेक्षा’, ‘सामने’, ‘बनिस्बत’, ‘सबमें’, ‘सबसे’ लगाकर विशेषणों की तुलना की जाती है। कुछ और उदाहरण –

  • वह रहीम की बनिस्बत अच्छा है।
  • सुशील की अपेक्षा गणेश अधिक शिष्ट है।
  • यह सबसे अच्छी पुस्तक है।

कुल मिलाकर निष्कर्ष यह है कि संस्कृतनिष्ठ हिन्दी भाषा में ‘तर’ और ‘तम’ प्रत्यय लगाकर तत्सम विशेषण शब्दों का प्रयोग किया जाता है जबकि ‘से’, ‘अपेक्षा’, ‘सामने’, ‘बनिस्बत’, ‘सबमें’, ‘सबसे’ लगाकर विशेषणों शब्दों का प्रयोग हिन्दी भाषा के मौलिक स्वरूप के अनुरूप ही है। अतः रीतियाँ साथ-साथ चल रहीं है। जो विशेषण संस्कृत से आकर ‘तर’ और ‘तम’ के साथ प्रचलित हो चले हैं वे भी चल रहे हैं और हिन्दी के अपने भी।

विशेषण का पद परिचय

विशेषण के पद-परिचय में संज्ञा और सर्वनाम की भाँति लिंग, वचन, कारक और विशेष्य बताना चाहिए।

उदाहरण –

१. यह आपको आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अमूल्य गुणों की थोड़ी-बहुत जानकारी अवश्य करायेगा।

इस वाक्य में अमूल्य और थोड़ी-बहुत विशेषण हैं। इसका पद-परिचय इस प्रकार है —

  • अमूल्य – विशेषण, गुणवाचक, पुल्लिंग, बहुवचन, अन्यपुरुष, सम्बन्धवाचक, ‘गुणों’ इसका विशेष्य।
  • थोड़ी-बहुत – विशेषण, अनिश्चित संख्यावाचक, स्त्रीलिंग, कर्मवाचक, ‘जानकारी’ इसका विशेष्य।

२. उस पागल आदमी को इतने पैसे किसने दिये?

  • उस – सार्वनामिक (संकेतवाचक) विशेषण, पुल्लिंग, एक वचन, कर्म कारक, आदमी का विशेषण।
  • पागल – गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, कर्मकारक, आदमी का विशेषण।
  • इतने – परिणामवाचक विशेषण, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्मकारक पैसे का विशेषण।

३. घोड़े ने इस तालाब से बहुत जल पिया।

  • इस – सार्वनामिक (संकेतावाचक) विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, अपादान कारक, तालाब का विशेषण।
  • बहुत – अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एक वचन, कर्म कारक जल का विशेषण।

विशेषण की रचना और उसके प्रयोग

१. ‘आकारान्त’ विशेषण पुल्लिंग में प्रायः आकारान्त ही रहते हैं, परन्तु स्त्रीलिंग में ईकारान्त हो जाते हैं। यथा-

पुल्लिंगस्त्रीलिंग
अच्छा लड़काअच्छी लड़की
बड़ा आदमीबड़ी स्त्री
छोटा लड़काछोटी लड़की

संस्कृत में विशेषण का रूपान्तर विशेष्य के लिंग-वचन से निर्धारित होता है। परन्तु हिन्दी में केवल ‘आकारान्त’ विशेषण में ऐसा रूपान्तर होता है। यथा-

संस्कृत हिन्दी
दुष्ट व्यक्तिदुष्ट व्यक्ति
दुष्टा स्त्रीदुष्ट स्त्री

विशेष: संस्कृत में ‘सुन्दर’ का स्त्रीलिंग रूप ‘सुन्दरी’ और ‘सुशील’ का ‘सुशीला’ होता है, लेकिन हिन्दी में यह रूप परिवर्तन नहीं होता। यथा- सुन्दर पुरुष, सुन्दर स्त्री।

२. पुल्लिंग में विभक्ति या परसर्ग लगने पर उसमें परिवर्तन आ जाता है। यथा-

एकवचनबहुवचन
अच्छा घोड़ाअच्छे घोड़े
अच्छे घोड़े कोअच्छे घोड़ों को
अच्छा लड़काअच्छे लड़के
अच्छे लड़के कोअच्छे लड़कों को

विशेष: अच्छा का बहुवचन अच्छे होता है, परन्तु विभक्ति या परसर्ग लगने पर अच्छे का प्रयोग एकवचन और बहुवचन दोनों में होता है।

३. ‘आकारान्त’ विशेषण बहुवचन में प्रायः ‘एकारान्त’ में परिवर्तित हो जाते जाते हैं। यथा-

एकवचनबहुवचन
बडाबड़े
थोड़ाथोड़े
छोटाछोटे
अच्छाअच्छे

४. कुछ विशेषण स्त्रीलिंग और पुल्लिंग में समान होते हैं। उनमें कोई विकार अथवा परिवर्तन नहीं होता है। यथा-

पुल्लिंगस्त्रीलिंग
सुखी लड़कासुखी लड़की
दुखी पुरुषदुखी स्त्री
सुन्दर बालकसुन्दर बालिका

५. विशेषण का संज्ञा की तरह प्रयोग प्राय: देखने को मिलता है। जब इन विशेषणों का संज्ञा की तरह प्रयोग होता है, तब इनके रूप संज्ञा के समान चलते हैं, न कि विशेषण के समान। यथा-

  • अमीरों और गरीबों के बीच खाई बढ़ती जा रही है।

इस संदर्भ में यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि ‘सामान्यतः विशेषण के साथ परसर्ग नहीं लगता, विशेष्य के साथ लगता है, परन्तु विशेषण जब संज्ञा के रूप में प्रयुक्त होता है तब परसर्ग लगता है।’

  • बड़ों की बात माननी चाहिए।
  • वीरों ने सब कुछ कर दिखाया।
  • उसने सुन्दरी से पूछा।
  • विद्वानों का आदर करना चाहिए।

उपर्युक्त उदाहरणों में बड़ों, वीरों, सुन्दरी और विद्वानों शब्दों का प्रयोग ‘संज्ञा’ के रूप में हुआ है, इनके साथ क्रमशः की, ने, से और का परसर्ग प्रयुक्त हैं।

६. उपसर्गों की सहायता से भी विशेषण बनाये जा सकते हैं। यथा-

उपसर्गशब्दउपसर्ग युक्त शब्द
प्रतिकूलप्रतिकूल
गुणसगुण
निर्गुणनिर्गुण
प्रभूतप्रभूत
दुर्गमदुर्गम
निःकपटनिष्कपट

७. संज्ञा-पदों प्रत्यय लगाकर विशेषण बनाया जाता है। यथा-

संज्ञाप्रत्ययविशेषण
धर्मइकधार्मिक
जातिइयजातीय
गुलाबगुलाबी
राष्ट्रईयराष्ट्रीय
चमकईलाचमकीला
इतिहासइकऐतिहासिक
प्यासप्यासा
श्रीमान् (मत्)श्रीमान्
धनवान्धनवान्

८. स्वतंत्र रूप में विशेषणों की संख्या कम है। आवश्यकतानुरूप संज्ञा से ही विशेषणों को बनाया जाता है।

शब्द संग्रह 

संज्ञा (विशेष्य)विशेषण
स्वर 
अंकअंकित
अंकनअंकित
अंकुरअंकुरित
अंकुरणअंकुरणीय
अंकुशअंकुशित
अंगआंगिक
अंशआंशिक
अँचलआँचलिक
अर्थआर्थिक
अग्निआग्नेय
अपेक्षाअपेक्षित
अनुशासनअनुशासित
अभ्यासअभ्यस्त, अभ्यासी
अतृप्तिअतृप्त
अन्तअन्तिम, अन्त्य
अन्तरआन्तरिक
अणुआणविक
अभिषेकअभिषिक्त
अरण्यआरण्य, आरण्यक
अवयवआवयविक
अवरोधअवरुद्ध
अवश्यआवश्यक
अनुष्ठानआनुष्ठानिक, अनुष्ठित
अनुभवअनुभवी, आनुभाविक
अनुभूतिअनुभूत
अनुक्रमआनुक्रमिक
अनुपातआनुपातिक
अनुरागअनुरागी
अनुमतिअनुमत, अनुमत्यर्थ
अनुमानअनुमानित, अनुमेय
अनुश्रुतिअनुश्रुत
अन्यायअन्यायी
अक्लअक्लमन्द
अधिकारअधिकारी, आधिकारिक
अलंकारअलंकृत, आलंकारिक
अधिक्रम, अधिक्रमणअधिक्रान्त
अधिक्षेपअधिक्षिप्त
अध्यात्मआध्यात्मिक
अनादरअनादृत
अपकारअपकारी
अकर्मअकर्मण्य, अकर्म
अकस्मात्आकस्मिक
अज्ञानअज्ञानी, अज्ञान
अजयअजित
अतिरंजनअतिरंजित
अध्यापनअध्यापित
अध्ययनअधीत
अनासक्तिअनासक्त
अनुमोदनअनुमोदित
अनुरक्तिअनुरक्त
अनुशंसाअनुशंसित
अनुवादअनुवादित, अनूदित, अनुवाद्य
अनुशासनअनुशासित
अनीतिअनैतिक
अपमानअपमानित
अपराधअपराधी
अभिनयअभिनेय
आकलनआकलित
आकल्पआकल्पित
आचरणआचरित, आचरणीय
आडम्बरआडम्बरी
आत्माआत्मीय, आत्मिक
आदरआदरणीय, आदृत
आधारआधारित, आधृत
आसनआसीन
आसमानआसमानी
आरम्भआरम्भिक
आराधनाआराध्य
अवतारअवतीर्ण
अवश्रुतिअवश्रुत
आसक्तिआसक्त
आकाशआकाशीय
आक्रमणआक्रान्त
आभूषणआभूषित
आचरणआचरित
आश्रयआश्रित
आदिआदिम, आद्य
आकर्षआकर्षक
आकर्षणआकृष्ट
आयुआयुष्मान्
आरोपआरोपित
आरोहणआरूढ़
आवेश, आवेशनआवेशित
आशंकाआशंकित
आशंसाआशंसित
आशाआशान्वित
आश्चर्यआश्चर्यान्वित, आश्चर्यित
इच्छाऐच्छिक, इष्ट, इच्छित
इज़्ज़तइज़्ज़तदार
इतिहासऐतिहासिक
इनामइनामी
इन्द्रियऐन्द्रिय, ऐन्द्रियक
इहऐहिक
इहलोकइहलौकिक, ऐहलौकिक
ईक्षाईक्षित
ईजादईजादी
ईडाईडित
ईप्साईप्सित, ईप्सु
ईमानईमानदार
ईर्ष्याईर्ष्यालु, ईर्ष्य
ईश्वरईश्वरीय
ईसाईसवी, ईसाई
ईहाईहित 
उक्तिउक्त
उक्षणउक्षित
उत्क्षेप, उत्क्षेपणउत्क्षिप्त
उत्तरउत्तरी
उत्तेजनाउत्तेजित
उत्पत्तिउत्पन्न
उत्पातउत्पातक, उत्पाती
उदीचीउदीच्य, औदीच्य
उद्धरण, उद्धृतांशउद्धृत, उद्धरणीय
उन्मीलनउन्मीलित
उन्मेषउन्मिष
उन्मुक्तिउन्मुक्त
उन्मूलनउन्मूल, उन्मूलित
उपासनाउपासनीय, उपास्य
उपेक्षाउपेक्षित, उपेक्षणीय
उत्कर्षउत्कृष्ट
उद्योगऔद्योगिक
उपहारउपहारी, उपहारिन्
उपनिषद्औपनिषदिक
उपन्यासऔपन्यासिक
उपार्जनउपार्जित
उपदेशउपदिष्ट, उपदेशक, उपदेशात्मक, औपदेशिक
उपनिवेशऔपनिवेशिक
उच्चारणउच्चरित, उच्चारणीय, औच्चारणिक
उतावल, उतावलापनउतावला, उतावली
उत्साहउत्साहित, उत्साही
उत्सेकउत्सेकी
उत्पीड़नउत्पीड़ित
उदयउदित
उदाहरणउद्हृत, उद्धृत
उदीचीउदीच्य, औदीच्य
उदुम्बरऔदुम्बर
उद्बोधनउद्बोधनीय, उद्बोधक, उद्बोधित
उद्वेगउद्विग्न
उन्नतिउन्नत
उपजउपजाऊ
उत्तरीउत्तरी
उपकारउपकृत, उपकारक
उपचरणउपचरित
उपचर्या, उपचारउपचारक, उपचारी
उपद्रवउपद्रवी
उपनतिउपनत
उपनय, उपनयनउपनीत
उपमाउपमित, उपमेय
उपयोगउपयुक्त, उपयोगी
उल्लंघनउल्लंघित
उपलब्धिउपलब्ध
उपस्थितिउपस्थित
उपागमउपागत
उल्लासउल्लसित
उल्लेखउल्लेखनीय, उल्लेख्य
उष्म, उष्माउष्ण
ऊँचाईऊँचा
ऊपरऊपरी
ऊर्जाउर्ज, ऊर्जस्वल, ऊर्जस्वित, ऊर्जस्वी, ऊर्जित
ऊर्मिउर्मिल
ऊहाऊहात्मक
ऋणक्षणी
ऋतुआर्त्तव
ऋद्धिऋद्ध
ऋषिआर्ष
एकान्तएकान्तिक
एकीकरणएकीकृत
एषणएषणीय, एष्य
एहसानएहसानमंद
ऐशऐयाश
ओछापन, ओछाईओछा
ओजओजस्वी
ओष्ठओष्ठ्य
ओहदाओहदेदार
औचित्यउचित
औत्सुक्यउत्सुक

‘क’ वर्ग

संज्ञा (विशेष्य)विशेषण
कल्पनाकल्पित, काल्पनिक
कत्लकातिल
कंगूराकंगूरेदार
कर्जकर्जदार, कर्जखोर
कर्मकर्मी, कर्मठ, कर्मण्य
कंकड़कँकड़ीला
कत्थाकत्थई
कथनकथनीय, कथ्य
कथाकथित
करुणाकरुण, कारुणिक
कण्ठकण्ठ्य
कपटकपटी
कपूरकपूरी
कमाईकमाऊ
कम्पकम्पित
कलंककलंकित
कलमकलमी
कलियुगकलियुगी
कलुषकलुषित
कल्लोलकल्लोलित, कल्लोलिनी
कसरतकसरती
काँटाकँटीला
कागजकागजी
कामकामी, कामुक, काम्य
कायाकायिक
कालकालिक, कालीन
किताबकिताबी
किस्मतकिस्मतवर, किस्मतवाला
कुटुम्बकौटुम्बिक
कठिनताकठिन
कड़वापनकड़वा
कुकर्मकुकर्मी
कुत्साकुत्सित, कुत्स्य
कुलकुलीन
कुण्डलकुण्डलाकार, कुण्डली
कृपाकृपालु
कृषिकृषित, कृष्ट, कृष्य, कृषक
केन्द्रकेन्द्रीय, केन्द्रित
केसरकेसरिया
कैवल्यकेवल
कोपकुपित, कोपित
कौटिल्यकुटिल
कौमकौमी
क्रमक्रमिक
क्रयक्रीत
क्रोधक्रुद्ध
क्लेशक्लिष्ट
क्षणक्षणिक
क्षमाक्षम्य
क्षयक्षय, क्षीण
क्षारक्षारीय
क्षुधाक्षुधित
क्षेत्रक्षेत्रीय
क्षोभक्षुब्ध
खण्डखण्डित
खर्चखर्चीला
खजूरखजूरी
खतराखतरनाक
खपरा, खपड़ाखपरैल, खपड़ैल
खल्वखल्वाट
खानाखाऊ
खानखानिज
खानदानखानदानी
खारखारा
खूनखूनी
खेलखेलाड़ी, खिलाड़ी
खेदखिन्न
ख्यातिख्यात
गंगागांगेय
गंदगीगंदा
गंधगंध्य
गंधकगंधकी, गंधकीय
गंधर्वगांधर्व
गणनागणनीय, गण्य
गफ़लतगफ़लती, गाफ़िल
गरीबीगरीब
गलतीगलत
गर्मीगर्म
ग़मग़मखोर, ग़मगीन, ग़मज़दा
गमनगमनीय, गम्य
गम्भीरता, गाम्भीर्यगम्भीर
गवेषणगवेषक, गवेषणीय, गवेषित, गवेषी
गर्वगर्वीला
गाँठगँठीला, गाँठदार
गाँवगँवार, गँवारू, गँवई
गायनगेय
ग्रामग्रामीण, ग्राम्य
ग्रासग्रस्त
ग्रहणग्राह्य, गृहीत
गुंठनगुंठित
गुंडितगुंड
गुंफ, गुंफनगुंफित
गुणगुणवान्, गुणी
गुलाबगुलाबी
ग़ुस्साग़ुस्सैल, गुस्सेवर
गृहस्थगार्हस्थ्य
गेरूगेरुआ
गश्तगश्ती
गोत्रगोत्रीय
गौरवगौरवित, गौरवान्वित
घटनाघटनीय, घटित
घनिष्ठताघनिष्ठ
घमण्डघमण्डी
घरघरेलू, घराऊ
घर्ष, घर्षणघर्षित, घर्णी
घातघातक
घावघायल
घूमनाघुमन्तू
घृणाघृणित, घृण्य, घृणास्पद
घोषणाघोषित

‘च’ वर्ग

विशेष्यविशेषण
चर्चाचर्चित
चरित्रचारित्रिक
चक्षुचाक्षुष, चक्षुष्य, चक्षुष्मान
चश्मचश्मदीद
चपलताचपल
चाचाचचेरा
चालाकीचालाक
चाहचहेता
चन्द्रचान्द्र
चम्पाचम्पई
चिन्ताचिन्तनीय, चिन्त्य, चिन्तित
चित्रचित्रित, चितेरा
चिरजीवनचिरंजीवी, चिरजीवी
चिह्नचिह्नित
चीनचीनी
चारचौथा
चक्रचक्रित
चौमासचौमासा
चाचाचचेरा
चुनावचुनिंदा
चुम्बकचुम्बकीय
चुम्बनचुम्बित
चुस्तीचुस्त
चूड़ीचूड़ीदार
चेतना
चेष्टाचेष्टित
चैतचैती
च्युतिच्युत
छलछलिया, छली
छबि (छवि)छबीला
छायाछायादार, छायाभ
छिद्रछिद्रक, छिद्रयुक्त, छिद्रित
छेदछेदक
जड़ियाजड़ाऊ
जड़ता, जड़त्वजड़
जहरजहरीला
जनपदजनपदीय
जरूरतजरूरी
जवानीजवान, जवाँ
जिगीषाजिगीषु
जातिजातीय, जात्य
जटाजटिल
जयजयी
जलजलीय
जल्दीजल्द
जागरणजाग्रत्, जागरित
जालजाली
जादूजादूनजर, जादूफरेब
जंगलजंगली
जवाबजवाबी
जनपदजनपदीय
जिजीविषाजिजीविषु
जिज्ञासाजिज्ञासु
जिस्मजिस्मानी
जीवजैव, जैविक
जीवनजीवित
जुआजुआड़ी
जुदाईजुदा
जूठ, जूठनजूठा
जुझारजुझारू
जेबजेबी
जेहनजहीन
जोगीजोगिया
जोशजोशीला
ज्योतिषज्योतिष्मान्, ज्योतिषिक, ज्यौतिष
ज्वालाज्वलित
ज्ञपित, ज्ञप्तिज्ञप्ति
ज्ञानज्ञानी, ज्ञेय
ज्ञातिज्ञातेय
ज्ञापन, ज्ञापज्ञापित, ज्ञाप्य
झंकारझंकृत
झंझटझंझटिया, झंझटी
झक, झकनाझक्की
झगड़ाझगड़ालू
झालरझालरदार
झूठझूठा
झिलमिलाझिलमिल
झेंपझेंपू

‘ट’ वर्ग

विशेष्यविशेषण
टकसालटकसाली
टूट, टूटनटूटा
ठंड, ठंडकठंडा
ठंढ, ठंढकठंढा
ठूँठठूँठा
ठठोलीठठोल
ठालाठाली
ठहरावठहराऊ
ठिहारीठिहार
ठेठपनठेठ
डंकडंकदार
डरडरपोक
डरानाडरावना
डाकडाकीय
डाहडाही, डाहभरा
डीनडीनक
ढंगढंगी
ढालढलवाँ, ढालू 
ढिठाईढीठ
ढीलढीला
ढोंगढोंगी

‘त’ वर्ग

विशेष्यविशेषण
तंत्रतांत्रिक
तंगीतंग
तंदूरतंदूरी
तंद्रातंद्रालु, तंद्रिल
तटतटवर्ती, तटीय
तटस्थतातटस्थ
तत्परतातत्पर
तपस्यातपस्वी
तबाहीतबाह
तम, तमस्तामसिक
तमाशातमाशाई
तरंगतरंगित, तरंगी
तरणतारण
तरलतातरल
तरुणाईतरुण
तर्कतार्किक
तलबतलबगार
तल्खीतल्ख 
ताक़तताक़तवर
ताज़गीताज़ा
तापतप्त
तालुतालव्य
तिरस्कारतिरस्कृत
तिरोधानतिरोहित
तिरोभावतिरोभूत
तिलस्मतिलस्मी
तीक्ष्णतातीक्ष्ण
तीखापनतीखा
तुकतुकांत
तुतलाहटतोतला
तुनकतुनकमिजाज
तुन्डतुन्डिल
तुन्दतुन्दिल
तुलनातुलनात्मक, तुलनीय
तुलातुल्य
तृप्तितृप्त
तुष्टितुष्ट
तृषातृषित, तृष्य
तृष्णातृषित, तृष्णालु, तृषावंत
तेजतेजस्वी
तेलतेलहा, तेलिया
तैराकीतैराक
त्यागत्याज्य, त्यागी
तत्त्वतात्त्विक
त्वरात्वरित
थकन, थकानथका, थकित
थलथलीय
थोथथोथरा, थोथा
दंशदंशक, दंशन, दंशित, दंशी
दक्षतादक्ष
दण्डदण्डनीय
दनुदनुज
दबावदब्बू
दमनदमनकारी, दमनात्मक
दम्पत्तिदाम्पत्य
दम्भदम्भी
दर्शनदर्शनीय, दार्शनिक
दलदलीय
दलनदलित
दशरथदाशरथ, दाशरथि
दाखिलादाखिल
दागदागी
दानदानी
दानादानेदार
दामदामी
दारिद्रय, दरिद्रतादरिद्र
दाहदग्ध
दम्पतिदाम्पत्य
दयादयालु, दयामय
दरियादरियाई
दर्पदर्पित
दस्तदस्तावर
दन्तदन्त्य
दगादगाबाज
दुःखदुःखी
दुबलापनदुबला
दुर्गतिदुर्गत
दुर्विनयदुर्विनीत
दूतदौत्य
दूषणदूषित
दिनदैनिक
दिमागदिमागी
दिवालादिवालिया
दीनतादीन
दीप्तिदीप्त, दीप्तिमान्
दीनानीदीवान
दृढ़तादृढ़
देवदिव्य, दैवी, दैविक
देशदेशीय
दोषदोषी
दर्ददर्दनाक
दुनियादुनियावी
दौलतदौलतमंद
द्रवद्रवित
धनधनी, धनवान्, धनवंत, धनाढ्य
धर्मधार्मिक
धुन्धधुँधला
धूमधूमिल
धृष्टताधृष्ट
धृतिधृतिमान्
धैर्यधीर
ध्वंसध्वंसक
नकलनकलची
नगरनागरिक
नरकनारकीय
निवेदननिवेदित
नियमनियमित
निराकरणनिराकृत
निराकरणनिराकृति
निर्वासननिर्वासित
निशानैश, नैश्य
निश्रेयस (निःश्रेयस)नैश्श्रेयस
निसर्गनैसर्गिक
निषेधनिषिद्ध
नीतिनैतिक
नाटकनाटकीय
नामनामी
नावनाविक
नाशनाशमय, नाशमान्, नाशवान्
निपुणतानिपुण
नियमनियमित
नियुक्तिनियुक्त
नियोजननियोजित, नियोजनीय, नियोज्य, नियुक्त
निन्दानिन्द्य, निन्दनीय
निष्ठानैष्ठिक, निष्ठावान
निष्कासननिष्कासित
निश्चयनिश्चित
निजनिजी
निद्रानिद्रालु
निर्माणनिर्मित
न्यायन्यायी, न्यायिक
न्यासन्यस्त
नमकनमकीन
निषेधनिषिद्ध
नुमाइशनुमाइशी
नोकनुकीला
न्यूनतान्यून

 ‘प’ वर्ग

विशेष्यविशेषण
पंकपंकिल
पंक्तिपांक्तेय
पड़ोसपड़ोसी
पठनपठनीय
पयपयस्वी
परखपारखी
पशुपाशविक
परलोकपारलौकिक
परितोषपरितोषक
परिभाषापारिभाषिक
परिवारपारिवारिक
परीक्षापरीक्षित
पर्वतपर्वतीय
पहाड़पहाड़ी
पाणिनिपाणिनीय
पाचनपाचक
पानपेय
पालनपालनीय, पालित, पाल्य
प्रमाणप्रामाणिक
प्रवंचनाप्रवंचित
प्रशंसाप्रशंसनीय, प्रशंसित
प्रसंगप्रासंगिक
प्रचीनताप्राचीन
पापपापी
पितापैतृक
पिशाचपैशाचिक
पीछापिछला
परिचयपरिचित
पल्लवपल्लवित
पेटपेटू
प्राचीप्राच्य
प्रणामप्रणम्य
प्राणप्राणद, प्राणी
पुच्छपुच्छल
पुलकपुलकित
पुश्तपुश्तैनी
पुष्टिपौष्टिक
पुस्तकपुस्तकीय
पृथुपृथुल
पूजापूज्य, पूजनीय
पत्थरपथरीला
पश्चिमपाश्चात्य, पश्चिमीय, पश्चिमी
पक्षपाक्षिक
प्रदानप्रदत्त
प्राप्तिप्राप्त
प्रार्थनाप्रार्थित, प्रार्थनीय
पानीपेय
पराजयपराजित
प्रेमप्रेमी
प्रस्तावप्रस्तावित, प्रस्तुत
पूर्वपूर्वी
प्यारप्यारा
प्रतिबिम्बप्रतिबिम्बित
प्रतिषेधप्रतिषिद्ध, प्रतिषेधक
प्रसव, प्रसूतिप्रसूत
पाठकपाठकीय
प्रातःकालप्रातःकालीन
पशुपाशविक, पाशव
पुरापुरातन
पुराणपौराणिक
पृथ्वीपार्थिव
प्रथमप्राथमिक
प्रकृतिप्राकृतिक
प्रवेशप्रविष्ट
प्रेषणप्रेषित, प्रेषणीय, प्रेष्य
परस्परपारस्परिक
प्रवासप्रवासी
प्रान्तप्रान्तीय
पाठपाठ्य
प्रतिष्ठाप्रतिष्ठित
पीड़ापीड़ित
प्रदेशप्रादेशिक
प्रौढ़ता, प्रौढ़त्वप्रौढ़
पथपाथेय
पुरुषपौरुषेय
प्रतीक्षाप्रतीक्षित
पतनपतित
पुष्पपुष्पित
पल्लवपल्लवित
परिवर्तनपरिवर्तित
प्यासप्यासा
पुरातत्त्वपुरातात्त्विक
प्राचीप्राच्य
प्रणामप्रणम्य
फलफलित, फलद
फ़सलफ़सली
फ़सादफ़सादी
फ़िक्रफ़िक्रमंद
फुर्तीफुर्तीला
फेनफेनिल
फ़ौजफ़ौजी
बलबलिष्ठ
बनबनैला
बखेड़ाबखेड़िया
बलबलिष्ठ
बुलन्दीबुलन्द
बाजारबाजारू
बाधाबाधित
बालकबाल्य
बर्फबर्फीला
बिलगावबिलग
बिहारबिहारी
बेवक़ूफ़ीबेवक़ूफ़
बेवफ़ाईबेवफ़ा
बोझबोझिल
बुजुर्गबुजुर्गाना
बुभुक्षाबुभुक्षित
बुभुत्साबुभुत्सु
बुद्धबौद्ध
बुद्धिबौद्धिक
ब्याहब्याहता
भंगुरताभंगुर
भंजनभंजनीय
भक्तिभक्ति
भक्षणभक्षणीय, भक्षित, भक्ष्य
भगवत्भागवत
भड़कभड़कदार, भड़कीला
भलाईभला
भव्यताभव्य
भाग्यभाग्यवान्, भाग्यशाली
भारभारी
भयभयानक
भारतभारतीय
भावभावुक
भाषाभाषाई, भाषिक
भूखभूखा
भूतभौतिक
भूमिभौमिक
भूगोलभौगोलिक
भूषणभूषित
भेषजभेषजीय, भेषज्य
भोजनभोज्य, भोजनीय
भ्रमभ्रमित, भ्रामक
भ्रंशभ्रंशी
मंगलमांगलिक, मंगलमय
मगधमागध
मजहबमजहबी
मज़ाक़मज़ाक़िया
मज़ामज़ेदार
मतलबमतलबी
मतिमतिमान
मत्स्यमात्स्य
मथुरामाथुर
मननमननशील
मन (मनस्)मनस्वी (मनस्विन्)
मात्सर्यमात्सर
माधुर्यमधुर
मध्यममाध्यमिक
मनीषामनीषित, मनीषी
मनुमानव
मनुष्यमानुषिक
मरणमरणशील
मलमलिन
महिषमाहिष
मांसमांसल
मात्रामात्रिक
मानमान्य
मानवमानवीय
मानसमानसिक
मातामातृक
मालमालदार
मासमासिक
माहमाहवारी
मामाममेरा
मायामायिक, मायावी
मिथिलामैथिल
मिठासमीठा
मुखमौखिक, मुखर
मुमुक्षामुमुक्षु
मुमूर्षामुमूर्षु
मूलमौलिक
मूर्च्छामूर्च्छित
मूर्तिमूर्त
मृत्युमर्त्य
मेधामेधावी
मैलमैला
मोहमुग्ध, मोहित
मौसामौसेरा
मर्ममार्मिक
मर्दमर्दाना

‘अन्तःस्थ’ व्यंजन

विशेष्यविशेषण
यशयशस्वी
यज्ञयाज्ञिक
यदुयादव
यात्रायात्रिक
युक्तियुक्त
योद्धायोद्धव्य, योध्य
युयुत्सायुयुत्सु
योगयोगी, यौगिक
रंगरंगीन, रँगीला
रक्तरक्तिम
रचनारचित
रतिरत
रमणरमणीय
रसरसीला, रसिक
रसायनरासायनिक
रसीदरसीदी
राक्षसराक्षसी
राजराजकीय, राजसी
राजनीतिराजनीतिक
राजस्वराजस्वी
राजाराजसी
राधाराधेय
राष्ट्रराष्ट्रीय
राहराही
रिहाईरिहा
रसरसिक, रसीला
रुद्ररौद्र
रुचिरुचिर
रूढ़िरूढ़
रूपरूपवान्
रेतरेतीला
रोगरोगी
रोचि (रोचिस्)रोचिष्णु
रोजरोजाना
रोबरोबीला
रोमरोमिल
रोमांचरोमांचित, रोमांचक
लंगलंगड़ा
लँगोटलँगोटिया
लंपटतालंपट
लक्षणलाक्षणिक, लक्ष्य
लखनऊलखनवी
लघुलाघव
लज्जालज्जित, लज्जालु
लाजलजालू, लज्जित
लाठीलठैत
लाड़लाड़ला
लाभलभ्य, लब्ध
लेखलिखित
लोकलौकिक
लोभलुब्ध, लोभी
लोहालौह
वंदनवंदनीय, वंदित, वंद्य
वंशवंशीय
वत्सवत्सल
वधवध्य
वनवन्य
वन्दनावन्द्य, वन्दनीय
वर्जनवर्जनीय, वर्ज्य, वर्जित
वर्णनवर्णनीय, वर्णित, वर्ण्य
वर्षवार्षिक
वसन्तवासन्त, वासन्तक, वासन्तिक, वसन्ती
वस्तुवास्तव, वास्तविक
वादवादी
वायुवायवीय, वायव्य
वास्तववास्तविक
विकल्पवैकल्पिक
विकारविकारी, विकृत
विकासविकसित, विकासनीय
विकिरणविकीर्ण
विकृतिविकृत
विगलनविगलित
विचारवैचारिक, विचारणीय
वैचित्र्यविचित्र
विजयविजयी, विजेता
विद्याविद्यावान्
विद्युतवैद्युत्, वैद्युतिक
विद्वानवैदुष्य
विधानवैधानिक, विहित
विधिविधिक, वैध
विनयविनीत, विनयी
विपर्ययविपर्यस्त, विपरीत
विभक्तिविभक्त
विभाजनविभाजित, विभाज्य
विपत्ति, विपदविपन्न
विमानवैमानिक
वियोगवियुक्त, वियोगी
विलायतविलायती
विरतिविरत
विरहविरही
विरोधविरुद्ध, विरोधी, विरोधक 
विलासविलासी
विवादविवाद्य, विवादी, विवादास्पद
विवाहवैवाहिक
विवेकविवेकी
विशेषविशिष्ट
विषविषाक्त
विषयविषयी
विषादविषण्ण
विष्णुवैष्णव
विज्ञानवैज्ञानिक
विश्वासविश्वसनीय, विश्वस्त, विश्वासी
विस्तारविस्तृत, विस्तीर्ण
विस्मयविस्मित
विपत्तिविपन्न
विपद्विपन्न
वेतनवैतनिक
वेदवैदिक
व्यक्तिवैयक्तिक
व्यवसायव्यावसायिक, व्यवसायी
व्यवस्थाव्यवस्थित
व्यवहारव्यावहारिक
व्याकरणवैयाकरण
व्याख्याव्याख्येय
व्यापारव्यापारिक

‘ऊष्म’ व्यंजन

विशेष्यविशेषण
शंकाशंकालु , शंकित
शकशक्की
शरणशरणागत, शरण्य
शरद्शारदीय
शरीरशारीरिक
शर्तशर्तिया
शहरशहरी
शहादतशहीद
शानशानदार
शान्तिशान्त
शापशापित
शासनशासित, शासक
शास्त्रशास्त्री, शास्त्रीय
शिकारशिकारी
शिक्षाशिक्षित, शैक्षिक
शिवशैव
शीलशिष्ट
शोकशोकाकुल, शोकातुर, शोकार्त
शोषणशोषित, शोषी, शोषणीय
शोभाशोभित
शौक़शौक़ीन
शक्तिशाक्त
श्यामश्यामल
श्लाघाश्लाघनीय, श्लाघ्य
श्लेषश्लिष्ट
शृंगारशृंगारिक
श्रमश्रम, श्रमिक, श्रमित, श्रमी
श्रद्धाश्रद्धेय, श्रद्धालु
श्रांतिश्रांत
श्रुतिश्रुत
श्रोतश्रौत
संकेतसांकेतिक
संकोचसंकोचित, संकुचित
संकल्पसंकल्पित
संक्षेपसंक्षिप्त
संख्यासंख्येय, सांख्यिक
संघातसांघातिक
संचयसंचित
संध्यासांध्य
संयोगसंयुक्त
संश्लेषणसंश्लिष्ट
संसारसांसारिक
संस्कृतिसांस्कृतिक
सन्तापसन्तप्त
सन्देहसन्दिग्ध
सप्ताहसाप्ताहिक
सभासभ्य
समयसामयिक
समरसामरिक
समाजसामाजिक
समाससामासिक
समुदायसामुदायिक
समुद्रसमुद्री, सामुद्र, सामुद्रिक
सम्पत्तिसम्पन्न, साम्पत्तिक
सम्पादकसम्पादकीय
सम्प्रदायसाम्प्रदायिक
सम्बन्धसम्बद्ध, सम्बन्धी, सम्बन्धित
सम्मानसम्मान्य, सम्मानित
सम्भावनासम्भावित
सम्भाषणसम्भाष्य
सरकारसरकारी
सहकारसहकारी
सागरसागरीय
साहससाहसिक
साहित्यसाहित्यिक
सिद्धान्तसैद्धान्तिक
सिन्धुसैन्धव
सीमासीमित
सुखसुखी
सुगन्धसुगन्धित
सुरसुरीला
सुरभिसुरभित
सूचनासूचित
सूर्यसौर
सोनासुनहला, सुनहरा
स्तुतिस्तुत्य
स्त्रीस्त्रैण
स्थानस्थानिक, स्थानीय
स्नायुस्नायविक
स्मरणस्मरणीय
स्मृतिस्मृत, स्मार्त
स्वदेशस्वदेशी, स्वादेशिक
स्वप्नस्वप्निल
स्वभावस्वाभाविक
स्वर्गस्वर्गिक, स्वर्गीय
स्वर्णस्वर्णिम
स्वादस्वादु
स्वास्थ्यस्वस्थ
हठहठी
हवाहवाई
हर्षहर्षित
हल्हलन्त
हवाहवाई
हृदयहार्दिक
हँसीहँसोड़
हिंदहिंदी
हितहितैषी
हिंसाहिंसक
हेमन्तहेमन्ती

पदवादक विशेषण

हिन्दी और संस्कृत भाषा में कुछ ऐसे विशेषण प्रयुक्त होते हैं, विशेष प्रकार के पदों या विशेष्यों के पहले आते हैं। दूसरे शब्दों में ये शब्द विशेषण-विशेष्य युग्म में आते हैं। कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं :-

विशेषणविशेष्य
अगाधसागर
अनन्यभक्ति, भक्त, प्रेम
अनुपमछवि
अप्रत्याशितघटना
अमानुषिकअत्याचार, व्यवहार
आकुलहृदय, प्राण
उद्भटयोद्धा, विद्वान
उर्वरभूमि
ओजस्वीभाषण
करूणक्रन्दन
कलुषितकार्य, हृदय
गगनचुम्बीअट्टालिका, शिखर
चतुरबालक
चालूबाज़ार, लड़का
तरुणहृदय
दुर्लभबन्धु
दूषितहवा, वातावरण
नश्वरजगत्, शरीर
निन्दितकार्य
निर्जलाएकादशी
नीरसविषय
नीलकमल
पंचभौतिकशरीर
पुष्टशरीर
प्रगाढ़प्रेम, निद्रा
प्रत्यक्षप्रमाण
प्रचण्डमार्तण्ड, पुरुष
फलितज्योतिष
भीषणयुद्ध
भौतिकशरीर, जगत्
मधुरभाषण, भोजन, वाणी, स्वर
मनोरमछवि, दृष्य
मरणासन्नस्थिति
मानसिककष्ट
यशस्वीनेता
विफलमनोरथ
विशालहृदय
शस्यश्यामलाभूमि
शारीरिककष्ट, बल, श्रम
शुभ्रवसन
श्रान्तपथिक
सजलनेत्र, मेघ
सततप्रयास
सदयहृदय
सफल, भग्नमनोरथ
स्निग्धहृदय, दृष्टि, पदार्थ
स्नेहमयीभगिनी, माता
स्वर्णिमसुयोग, उषा, अक्षर
स्वादिष्टभोजन
हृदयविदारकसमाचार, दृश्य
हार्दिकप्रेम, बधाई
क्षुब्धहृदय

विशेषण से संज्ञा निर्माण

विशेषण के अन्त में संस्कृत और हिन्दी के ‘तद्धित-प्रत्यय’ लगाकर भाववाचक संज्ञा निर्माण किया जाता है। ये प्रत्यय हैं – ता, त्व, अ, य, आ, इ, इमा, अन, ई, आई, आहट, आयट, पन, आस, आपा इत्यादि।

विशेषणभाववाचक संज्ञा
अंकितअंकन
अधिकअधिकता, आधिक्य
अन्धअन्धेरा
अच्छाअच्छाई
अपनाअपनापन
अभिलषितअभिलाषा
अराजकअराजकता
आवश्यकआवश्यकता
ईमानदारईमानदारी
उपकृतउपकार
उत्कृष्टउत्कृष्टता
उपस्थितउपस्थिति
ऊँचाऊँचाई
एकएकता, एकत्व
ऐतिहासिकऐतिहासिकता
कड़वाकड़वाहट
कठोरकठोरता
कुशलकुशलता, कौशल
कर्मनिष्ठकर्मनिष्ठता
कुरूपकुरूपता
करूणकारुण्य
खट्टाखटास, खटाई
ख़ामोशख़ामोशी
खुशखुशी
ख्यातख्याति
गरमगरमी
गरीबगरीबी
गम्भीरगम्भीरता, गाम्भीर्य
गहनगहनता
गुरुगुरुता, गुरुत्व, गौरव
गृहस्थगृहस्थी
घनाघनत्व
घनिष्ठघनिष्ठता
चतुरचतुराई, चातुर्य, चातुरी
चालाकचालाकी
चिकनाचिकनाई, चिकनाहट
चौड़ाचौड़ाई
जटिलजटिलता
जड़जड़त्व
जातीयजातीयता
जड़जड़त्व
जितेन्द्रियजितेन्द्रियता
ठाकुरठकुराई
ढीठढिढाई
तीव्रतीव्रता
तीक्ष्णतीक्ष्णता
दक्षदक्षता
दग़ाबाज़दग़ाबाज़ी
दिलचस्पदिलचस्पी
दीनदीनता, दैन्य
दुष्टदुष्टता
दुकानदारदूकानदारी
धन्यधन्यता
धार्मिकधार्मिकता
नवाबनवाबी
नम्रनम्रता
नीचानिचाई
नेकनेकी
पण्डितपाण्डित्य, पण्डिताई
पराजितपराजय
परिश्रमीपरिश्रम
परिवर्तितपरिवर्तन
पागलपागलपन
पौराणिकपौराणिकता
प्रतिकूलप्रतिकूलता
प्रतिपादितप्रतिपादन
प्रयुक्तप्रयोग, प्रयुक्ति
प्राचीनप्राचीनता
प्रामाणिकप्रामाणिकता
प्रांतीयप्रांतीयता
फ़क़ीरफ़क़ीरी
फलितफलन
बड़ाबड़ाई
बदबदी
बहुतबहुतायत
बेईमानबेईमानी
बुराबुराई
बूढ़ाबुढ़ापा
बेवफ़ाबेवफ़ाई
बेवक़ूफ़बेवक़ूफ़ी
भलाभलाई
भावुकभावुकता
भारतीयभारतीयता
भीषणभीषणता
मधुरमधुरता, माधुर्य
मनोरममनोरमता
महान्महत्ता
मीठामिठास
मूर्खमूर्खता
मौलिकमौलिकता
मलिनमलिनता
मर्दमर्दानगी
मुखरमुखरता
मोटामोटापा
यथेष्टयथेष्टता
योग्ययोग्यता
रसीलारसीलापन
राजनीतिकराजनीतिकता
राष्ट्रीयराष्ट्रीयता
रौद्ररौद्रता
लघुलघुता, लघुत्व, लाघव
लम्बालम्बाई
ललितलालित्य, ललिताई
लाललालिमा, ललाई, लाली
विधवावैधव्य
विभक्तविभाजन, विभक्ति
विश्वसनीयविश्वसनीयता
विस्मृतविस्मृति, विस्मरण
वीरवीरता, वीरत्व
शठशठता
शिष्टशिष्टता
श्लीलश्लीलता
श्यामश्यामता
संगृहीतसंग्रह
सभ्यसभ्यता
सरलसरलता
सहायकसहायता, साहाय्य
सावधानसावधानी
साहित्यिकसाहित्यिकता
सिद्धसिद्धि
सुखदसुख
सुन्दरसुन्दरता, सौन्दर्य
सुस्तसुस्ती
स्थापितस्थापन, स्थापित
स्निग्धस्निग्धता
स्वस्थस्वास्थ्य
स्वीकृतस्वीकृति
स्पष्टस्पष्टता
हकहकदार
हीनहीनता
हार्दिकहार्दिकता
हराहरापन

पत्र लेखन

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