स्वर सन्धि

सामान्य हिन्दी

एक स्वर के बाद दूसरे स्वर के आने के कारण जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर सन्धि कहते हैं। अर्थात् दो स्वर वर्णों के योग से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे स्वर सन्धि कहते हैं।

स्पष्टीकरण : स्वर + स्वर = स्वर सन्धि; जैसे—

  • एक + अंत = एकांत (अ + अ = आ)।

स्वर सन्धि के भेद

इस सन्धि के पाँच भेद हैं—

  • दीर्घ सन्धि
  • गुण सन्धि
  • वृद्धि सन्धि
  • यण सन्धि
  • अयादि सन्धि

दीर्घ सन्धि

अकः सवर्णे दीर्घः — दो सवर्ण स्वर के योग से दीर्घ स्वर बनता है। यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि वे चाहे ह्रस्व हों या दीर्घ हों।

ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ, ऋ) या दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ, ॠ) के बाद क्रमशः ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ, ऋ) या दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ, ॠ) आये तो दोनों मिलकर दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ, ॠ) हो जाते हैं; जैसे—

  • अ + अ = आ
    • अद्य + अवधि = अद्यावधि
    • अधिक + अंश = अधिकांश
    • अधिक + अधिक = अधिकाधिक
    • अन्य + अन्य = अन्यान्य
    • अन्न + अभाव = अन्नाभाव
    • अर्ध + अंगिनी = अर्धांगिनी
    • अस्त + अचल = अस्ताचल
    • आग्नेय + अस्त्र = आग्नेयास्त्र
    • उत्तम + अंग = उत्तमांग
    • ऊह + अपोह = उहापोह
    • एक + अंत = एकांत
    • कल्प + अन्त = कल्पान्त
    • कुश + अग्र = कुशाग्र
    • कूर्म + अवतार = कुर्मावतार
    • कृत + अंत = कृतान्त
    • कोण + अर्क = कोणार्क
    • कोष + अध्यक्ष = कोषाध्यक्ष
    • क्रोध + अग्नि = क्रोधाग्नि
    • गीत + अंजलि = गीतांजलि
    • गौरव + अन्वित = गौरवान्वित
    • चरण + अमृत = चरणामृत
    • जागृत + अवस्था = जागृतावस्था
    • जीवन + अनुकूल = जीवनानुकूल
    • त्रिपुर + अरि = त्रिपुरारि
    • दाव + अनल = दावानल
    • दिवस + अंत = दिवसांत
    • दुःख + अंत = दुखान्त
    • दृष्ट + अंत = दृष्टान्त
    • देव + अर्चन = देवार्चन
    • देश + अनुराग = देशानुराग
    • देश + अन्तर = देशान्तर
    • देश + अभिमान = देशाभिमान
    • देह + अंत = देहांत
    • दैत्य + अरि = दैत्यारि
    • दैन्य + अवस्था = दैन्यावस्था
    • धन + अर्थी = धनार्थी
    • धन + अन्ध = धनान्ध
    • धर्म + अर्थ = धर्मार्थ
    • ध्यान + अवस्थित = ध्यानावस्थित
    • नयन + अभिराम = नयनाभिराम
    • नाग + अधिराज = नागाधिराज
    • नार + अयन = नारायण
    • निम्न + अंकित = निम्नांकित
    • पर + अधीन = पराधीन
    • परम + अर्थ = परमार्थ
    • परम + अणु = परमाणु
    • पीत + अम्बर = पीताम्बर
    • पुष्प + अंजलि = पुष्पांजलि
    • पुष्प + अवली = पुष्पावली
    • पुस्तक + अर्थी = पुस्तकार्थी
    • प्रधान + अध्यापक = प्रधानाध्यापक
    • ब्रह्म + अस्त्र = ब्रह्मास्त्र
    • मत + अनुसार = मतानुसार
    • मद + अंध = मदांध
    • यवन + अवनि = यवनावनि
    • युग + अनुसार = युगानुसार
    • योजन + अवधि = योजनावधि
    • रस + अयन = रसायन
    • राम + अयन = रामायण
    • राम + अवतार = रामावतार
    • विश्व + अमित्र = विश्वामित्र
    • विषम + अंग = विषमांग
    • वीर + अंगना = वीरांगना
    • वृद्ध + अवस्था = वृद्धावस्था
    • वेद + अंत = वेदांत
    • शब्द + अर्थ = शब्दार्थ
    • शरण + अर्थी + शरणार्थी
    • शश + अंक = शशांक
    • शत + अब्दी = शताब्दी
    • शरीर + अंत = शरीरांत
    • शस्त्र + अस्त्र = शस्त्रास्त्र
    • शास्त्र + अर्थ = शास्त्रार्थ
    • शिव + अयन = शिवायन
    • शेष + अंश = शेषांश
    • स + अवधान = सावधान
    • सत्य + अर्थी = सत्यार्थी
    • सर्व + अधिक = सर्वाधिक
    • सार + अंश = सारांश
    • सुर + अनुकूल = सुरानुकूल
    • सूर्य + अस्त = सूर्यास्त
    • स्थान + अंतर = स्थानान्तर
    • स्मर + अरि = स्मरारि
    • स्व + अधीन = स्वाधीन
    • स्व + अध्याय – स्वाध्याय
    • स्व + अर्थ = स्वार्थ
    • स्व + अर्थी = स्वार्थी
    • स्व + अवलंबन = स्वावलंबन
    • स्वर्ण + अवसर = स्वर्णावसर
    • हिम + अंचल = हिमांचल
  • अ + आ = आ
    • अन + आवृष्टि = अनावृष्टि
    • अन्न + अभाव = अन्नाभाव
    • आम + आशय = आमाशय
    • आयत + आकार = आयताकार
    • उप + आसना = उपासना
    • एक + आध = एकाध
    • एक + आसन = एकासन
    • एक + आकार = एकाकार
    • कुठार + आघात = कुठाराघात
    • कुश + आसन = कुशासन
    • कुसुम + आयुध = कुसुमायुध
    • खग + आसन = खगासन
    • गर्भ + आधान = गर्भाधान
    • गुरुत्व + आकर्षण = गुरुत्वाकर्षण
    • घन + आनंद = घनानंद
    • चतुर + आनन = चतुरानन
    • छात्र + आवास = छात्रावास
    • देव + आगमन = देवागमन
    • देव + आलय = देवालय
    • दोष + आरोपण = दोषारोपण
    • धर्म + आत्मा = धर्मात्मा
    • नव + आगत = नवागत
    • नित्य + आनन्द = नित्यानन्द
    • न्याय + आलय = न्यायालय
    • परम + आत्मा = परमात्मा
    • परम + आनंद = परमानंद
    • परम + आवश्यक = परमावश्यक
    • पुस्तक + आलय = पुस्तकालय
    • प्राण + आयाम = प्राणायाम
    • फल + आहारी = फलाहारी
    • ब्रह्म + आनन्द = ब्रह्मानन्द
    • भय + आकुल = भयाकुल
    • भोजन + आलय = भोजनालय  
    • मकर + आकृत = मकराकृत
    • मतस्य + आकार = मतस्याकार
    • मरण + आसन्न = मरणासन्न
    • महत्त्व + आकांक्षा = महत्त्वाकांक्षा
    • रत्न + आकर = रत्नाकर
    • राज्य + आगर = राज्यगार
    • राम + आधार = रामाधार
    • राम + आश्रय – रामाश्रय
    • वाचन + आलय = वाचनालय
    • विषम + आदि = विषमादि
    • विस्मय + आदि = विस्मयादि
    • शरण + अर्थी = शरणार्थी
    • शिव + आलय = शिवालय
    • शुभ + आगमन = शुभागमन
    • शुभ + आरंभ = शुभारंभ
    • संग्रह + आलय = संग्रहालय
    • स + आग्रह = साग्रह
    • स + आकार = साकार
    • स + आनंद = सानंद
    • सत्य + आग्रह = सत्याग्रह
    • सत्य + आग्रही = सत्याग्रही
    • सिंह + आसन = सिंहासन
    • स्थान + आपन्न = स्थानापन्न  
    • स्व + अधीनता = स्वाधीनता
    • स्वर्ग + आरोहण = स्वर्गारोहण
    • हत + आश = हताश
    • हिम + आच्छादित = हिमाच्छादित
    • हिम + आलय = हिमालय
    • हृदय + आनन्द = हृदयानन्द
  • आ + अ = आ
    • आज्ञा + अनुपालन = आज्ञानुपालन
    • आज्ञा + अनुसार = आज्ञानुसार
    • आत्मा + अवलम्बन = आत्मावलम्बन
    • कदा + अपि = कदापि
    • करुणा + अवतार = करुणावतार
    • कृपा + अर्थ = कृपार्थ
    • तथा + अपि = तथापि
    • तथा + अस्तु = तथास्तु
    • दिशा + अंतर = दिशांतर
    • दीक्षा + अंत = दीक्षांत
    • परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी
    • पुरा + अवशेष = पुरावशेष
    • महा + अमात्य = महामात्य
    • माया + अधीन = मायाधीन
    • यथा + अर्थ = यथार्थ
    • युवा + अवस्था = युवास्था
    • रस + आआतल = रसातल
    • रेखा + अंकित = रेखांकित
    • रेखा + अंश = रेखांश
    • वर्षा + अंत = वर्षांत
    • विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
    • विद्या + अनुराग = विद्यानुराग
    • विद्या + अध्ययन = विद्याध्ययन
    • विद्या + अभ्यास = विद्याभ्यास
    • व्यवस्था + अनुसार = व्यवस्थानुसार
    • शिक्षा + अर्थी = शिक्षार्थी
    • सहायता + अर्थ = सहायतार्थ
    • सीमा + अंकित = सीमांकित
    • सीमा + अंत = सीमांत
    • सेवा + अर्थ = सेवार्थ
  • आ + आ = आ
    • आत्मा + आनंद = आत्मानंद
    • कारा + आगार = कारागार
    • गदा + आघात = गदाघात
    • चिकित्सा + आलय = चिकित्सालय
    • झगड़ा + आलू = झगड़ालू
    • दया + आनंद = दयानंद
    • प्रतीक्षा + आलय = प्रतीक्षालय
    • प्रेक्षा + आगार = प्रेक्षागार
    • मदिरा + आलय = मदिरालय
    • महा + आत्मा = महात्मा
    • महा + आनंद = महानंद
    • महा + आशय = महाशय
    • रचना + आकार = रचनाकार
    • रचना + आत्मक = रचनात्मक
    • राजा + आज्ञा = राजाज्ञा
    • वार्ता + आलाप = वार्तालाप
    • विद्या + आनंद = विद्यानंद
    • विद्या + आलय = विद्यालय
    • शिला + आरोपण = शिलारोपण
    • श्रद्धा + आनंद = श्रद्धानंद
    • श्रद्धा + आलु = श्रद्धालु
  • इ + इ = ई
    • अति + इव = अतीव
    • अभि + इष्ट = अभीष्ट
    • गिरि + इन्द्र = गिरीन्द्र
    • कपि + इन्द्र = कपीन्द्र
    • कवि + इच्छा = कवीच्छा
    • कवि + इन्द्र = कवीन्द्र
    • क्षिति + इन्द्र = क्षितीन्द्र
    • प्रति + इत = प्रतीत
    • प्रति + इति = प्रतीति
    • मुनि + इन्द्र = मुनीन्द्र
    • रवि + इन्द्र = रवीन्द्र
    • हरि + इच्छा = हरीच्छा
  • इ + ई = ई
    • अधि + ईक्षण = अधीक्षण
    • अधि + ईश्वर = अधीश्वर
    • कपि + ईश = कपीश
    • कपि + ईश्वर = कपीश्वर
    • कवि + ईश = कवीश
    • कवि + ईश्वर = कवीश्वर
    • क्षिति + ईश = क्षितीश
    • गिरि + ईश = गिरीश
    • परि + ईक्षण = परीक्षण
    • परि + ईक्षा = परीक्षा
    • बुद्धि + ईश = बुद्धीश
    • मुनि + ईश्वर = मुनीश्वर
    • रति + ईश = रतीश
    • वारि + ईश = वारीश
    • हरि + ईश = हरीश
  • ई + इ = ई
    • देवी + इच्छा = देवीच्छा
    • नदी + इन्द्र = नदीन्द्र
    • नारी + इच्छा = नारीच्छा
    • पत्नी + इच्छा = पत्नीच्छा
    • फणी + इन्द्र = फणीन्द्र
    • महती + इच्छा = महतीच्छा
    • मही + इन्द्र = महीन्द्र
    • योगी + इन्द्र = योगीन्द्र
    • लक्ष्मी + इच्छा = लक्ष्मीच्छा
    • शची + इन्द्र = शचीन्द्र
    • सती + इच्छा = सतीच्छा
  • ई + ई = ई
    • गौरी + ईश = गौरीश
    • जानकी + ईश = जानकीश
    • नदी + ईश = नदीश (समुद्र)
    • नारी + ईश्वर = नारीश्वर
    • पृथ्वी + ईश = पृथ्वीश
    • पृथ्वी + ईश्वर = पृथ्वीश्वर
    • भारती + ईश्वर = भारतीश्वर
    • मही + ईश = महीश
    • रजनी + ईश = रजनीश
    • लक्ष्मी + ईश = लक्ष्मीश
    • श्री + ईश = श्रीश
    • सती + ईश = सतीश
  • उ + उ = ऊ
    • कटु + उक्ति = कटूक्ति
    • गुरु + उपदेश = गुरूपदेश
    • भानु + उदय = भानूदय
    • मधु + उत्सव = मधूत्सव
    • मृत्यु + उपरान्त = मृत्यूपरान्त
    • लघु + उक्ति = लघूक्ति
    • लघु + उत्तम = लघूत्तम
    • लघु + उत्तर = लघूत्तर
    • विधु + उदय = विधूदय
    • साधु + उपदेश = साधूपदेश
    • सु + उक्ति = सूक्ति
  • उ + ऊ = ऊ
    • अंबु + ऊर्मि = अंबूर्मि
    • धातु + ऊष्मा = धातूष्मा
    • बहु + ऊर्ध्व = बहूर्ध्व
    • बहु + ऊर्ज = बहुर्ज
    • भानु + ऊर्ध्व = भानूर्ध्व
    • मंजु + ऊषा = मंजूषा
    • लघु + ऊर्मि = लघूर्मि
    • लघु + ऊर्जा = लघूर्जा
    • सिंधु + ऊर्मि = सिंधूर्मि
  • ऊ + उ = ऊ
    • चमू + उत्तम = चमूत्तम
    • भू + उत्तम = भूत्तम
    • भू + उत्सर्ग = भूत्सर्ग
    • भू + उदार = भूदार
    • भू + उद्गार = भूद्गार
    • भू + उद्धार = भूद्धार
    • भू + उपरि = भूपरि
    • भू + उर्जित = भूर्जित
    • वधू + उत्सव = वधूत्सव
    • वधू + उपकार = वधूपकार
    • वधू + उपालम्भ = वधूपालम्भ
    • वधू + उल्लास = वधूल्लास
    • साधू + उत्सव = साधूत्सव
    • स्वयम्भू + उदय = स्वयम्भूदय
  • ऊ + ऊ = ऊ
    • भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व
    • भू + ऊर्जा = भूर्जा
    • भू + ऊष्मा = भूष्मा
    • भ्रू + ऊर्ध्व = भ्रूर्ध्व
    • वधू + ऊर्जा = वधूर्जा
    • वधू + ऊर्मि = वधूर्मि
    • वधू + ऊहनम् = वधूहनम्
    • सरयू + ऊर्मि = सरयूर्मि
  • ऋ / ॠ + ऋ / ॠ = ॠ (हिन्दी में दीर्घ ‘ॠ’ का प्रयोग नहीं होता, उसके स्थान पर ह्रस्व ‘ऋ’ का ही प्रयोग होता है।) अर्थात् हिन्दी में ऋ + ऋ = ऋ होता है।
    • पितृ + ऋण = पितॄण (संस्कृत में) / पितृण (हिन्दी में)
    • भ्रातृ + ऋद्धि = भ्रातृद्धि
    • मातृ + ऋण = मातॄण (संस्कृत में) / मातृण (हिन्दी में)
    • मातृ + ऋणाम् = मातॄणाम् (संस्कृत में) / मातृणाम् (हिन्दी में)
    • मातृ + ऋद्धि = मातॄद्धि (संस्कृत में) / मातृद्धि (हिन्दी में)
    • होतृ + ऋकार = होतॄकार (संस्कृत में) / होतृकार (हिन्दी में)

गुण सन्धि

आद्यगुणः

‘अ’ या ‘आ’ के बाद यदि ‘इ’ या ‘ई’, ‘उ’ या ‘ऊ’, ‘ऋ’ आये तो उनके स्थान पर क्रमशः ‘ए’, ‘ओ’, ‘अर्’ हो जाते हैं; जैसे—

  • अ + इ = ए
    • उप + इन्द्र = उपेन्द्र
    • कमल + इन्दु = कमलेन्दु
    • गज + इन्द्र = गजेन्द्र
    • जित + इन्द्रिय = जितेन्द्रिय
    • देव + इन्द्र = देवेन्द्र
    • धर्म + इन्द्र = धर्मेन्द्र
    • नर + इन्द्र = नरेन्द्र
    • पुष्प + इन्द्र = पुष्पेन्द्र
    • पूर्ण + इन्दु = पूर्णेन्दु
    • पूर्ण + इन्द्र = पूर्णेन्द्र
    • प्र + इत = प्रेत
    • बाल + इन्दु = बालेन्दु
    • भारत + इन्दु = भारतेन्दु
    • मृग + इन्द्र = मृगेन्द्र
    • राघव + इन्द्र = राघवेन्द्र
    • राज + इन्द्र = राजेन्द्र
    • वीर + इन्द्र = वीरेन्द्र
    • शुभ + इन्द्र = शुभेन्द्र
    • शुभ + इच्छा = शुभेच्छा
    • शुभ + इच्छु = शुभेच्छु
    • सत्य + इन्द्र = सत्येन्द्र
    • सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र
    • स्व + इच्छा = स्वेच्छा
  • अ + ई = ए
    • कमल + ईश = कमलेश
    • खग + ईश = खगेश
    • गण + ईश = गणेश
    • दिन + ईश = दिनेश
    • देव + ईश = देवेश
    • नर + ईश = नरेश
    • परम + ईश्वर = परमेश्वर
    • सर्व + ईश्वर = सर्वेश्वर
    • सुर + ईश = सुरेश
    • सोम + ईश = सोमेश
  • आ + इ = ए
    • महा + इन्द्र = महेन्द्र
    • यथा + इष्ट = यथेष्ट
    • रमा + इन्द्र = रमेन्द्र
    • रसना + इन्द्रिय = रसनेन्द्रिय
    • राजा + इन्द्र = राजेन्द्र
  • आ + ई = ए
    • उमा + ईश = उमेश
    • उर्मिला + ईश = उर्मिलेश
    • गुडाका + ईश = गुडाकेश 
    • धरा + ईश = धरेश
    • महा + ईश = महेश
    • महा + ईश्वर = महेश्वर
    • रमा + ईश = रमेश
    • राका + ईश = राकेश
    • राजा + ईश = राजेश
    • लंका + ईश = लंकेश
    • लंका + ईश्वर = लंकेश्वर
  • अ + उ = ओ
    • चन्द्र + उदय = चन्द्रोदय
    • जल + उदय = जलोदय
    • देश + उपकार = देशोपकार
    • नर + उत्तम = नरोत्तम
    • नव + उन्मेष = नवोन्मेष
    • नील + उत्पल = नीलोत्पल
    • पद + उन्नति = पदोन्नति
    • पर + उपकार = परोपकार
    • परम + उत्सव = परमोत्सव
    • पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम
    • पूर्व + उदय = पूर्वोदय
    • प्र + उत्साहन = प्रोत्साहन
    • प्राप्त + उदक = प्राप्तोदक
    • बाल + उचित = बालोचित
    • मानव + उचित = मानवोचित
    • रोग + उपचार = रोगोपचार
    • लोक + उक्ति = लोकोक्ति
    • लोक + उपयोग = लोकोपयोग
    • लोक + उपचार = लोकोपचार
    • वसंत + उत्सव = वसंतोत्सव
    • वार्षिक + उत्सव = वार्षिकोत्सव
    • विवाह + उत्सव = विवाहोत्सव
    • वीर + उचित = वीरोचित
    • वेद + उक्त = वेदोक्त
    • वेद + उक्ति = वेदोक्ति
    • स + उद्देश्य = सोद्देश्य
    • सर्व + उदय = सर्वोदय
    • सर्व + उपरि = सर्वोपरि
    • सूर्य + उदय = सूर्योदय
    • हित + उपदेश = हितोपदेश
  • अ + ऊ = ओ
    • उच्च + ऊर्ध्व = ऊच्चोर्ध्व
    • जल + ऊर्मि = जलोर्मि
    • दीर्घ + ऊपल = दीर्घोपल
    • नव + ऊढ़ा = नवोढ़ा
    • समुद्र + ऊर्मि = समुद्रोर्मि
    • सूर्य + ऊर्जा = सूर्योर्जा
  • आ + उ = ओ
    • गंगा + उदक = गंगोदक
    • महा + उत्सव = महोत्सव
    • महा + उदय = महोदय
    • महा + उदधि = महोदधि
    • महा + उद्यम = महोद्यम
    • महा + उपकार = महोपकार
    • महा + उपदेश = महोपदेश
    • महा + उपदेशक = महोपदेशक
    • महा + उष्ण = महोष्ण
    • यथा + उचित = यथोचित
    • विद्या + उन्नति = विद्योन्नति
  • आ + ऊ = ओ
    • गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि
    • दया + ऊर्मि = दयोर्मि
    • महा + ऊरु = महोरु
    • महा + ऊर्जस्वी = महोर्जस्वी
    • महा + ऊर्ध्व = महोर्ध्व
    • महा + ऊर्जा = महोर्जा
    • महा + ऊर्मि = महोर्मि
    • महा + ऊष्मा = महोष्मा
  • अ + ऋ = अर्
    • देव + ऋषि = देवर्षि
    • ब्रह्म + ऋषि = ब्रह्मर्षि
    • राज + ऋषि = राजर्षि
    • सप्त + ऋषि = सप्तर्षि
  • आ + ऋ = अर्
    • महा + ऋषि = महर्षि
    • महा + ऋण = महर्ण
    • राजा + ऋषि = राजर्षि

वृद्धि सन्धि

वृद्धरेचि

‘अ’ या ‘आ’ के बाद यदि ‘ए’ या ‘ऐ’, ‘ओ’ या ‘औ’ आये तो उनके स्थान पर क्रमशः ‘ऐ’, ‘औ’ हो जाते हैं; जैसे—

  • अ + ए = ऐ
    • अद्य + एव = अद्यैव
    • अन + एकान्त = अनैकान्त
    • एक + एक = एकैक
    • एक + एव = एकैव
    • जीव + एषणा = जीवैषणा  
    • तत्र + एव = तत्रैव
    • दार + एषणा = दारैषणा
    • दिन + एक = दिनैक
    • धन + एषणा = धनैषणा 
    • लोक + एषणा = लोकैषणा
    • वित्त + एषणा = वित्तैषणा
  • अ + ऐ = ऐ
    • देव + ऐश्वर्य = देवैश्वर्य
    • धन + ऐश्वर्य + धनैश्वर्य
    • धर्म + ऐक्य = धर्मैक्य
    • नव + ऐश्वर्य = नवैश्वर्य
    • भाव + ऐक्य = भावैक्य
    • मत + ऐक्य = मतैक्य
    • मम + ऐश्वर्य = ममैश्वर्य
    • विचार + ऐक्य = विचारैक्य
    • विश्व + ऐक्य = विश्वैक्य
  • आ + ए = ऐ
    • एकदा + एव = एकदैव
    • तथा + एव = तथैव
    • सदा + एव = सदैव
    • सर्वदा + एव = सर्वदैव
  • आ + ऐ = ऐ
    • धरा + ऐश्वर्य = धरैश्वर्य
    • रमा + ऐश्वर्य = रमैश्वर्य
    • राजा + ऐश्वर्य = राजैश्वर्य
    • महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य
  • अ + ओ = औ
    • उष्ण + ओदन = ऊष्णौदन
    • घृत + ओदन = घृतौदन
    • जल + ओक = जलौक
    • जल + ओध = जलौध
    • जल + ओस = जलौस
    • दंत + ओष्ठ = दंतौष्ठ
    • परम + ओज = परमौज
    • परम + ओजस्वी = परमौजस्वी
    • वन + ओषधि = वनौषधि
    • सुंदर + ओदन = सुंदरौदन
  • अ + औ = औ
    • देव + औदर्य = देवौदार्य
    • परम + औदार्य = परमौदार्य
    • परम + औषध = परमौषध
    • वीर + औदार्य = वीरौदार्य
  • आ + ओ = औ
    • महा + ओज = महौज
    • महा + ओजस्वी = महौजस्वी
    • महा + ओषधि = महौषधि
  • आ + औ = औ
    • महा + औदार्य = महौदार्य
    • महा + औघ = महौघ
    • महा + औषध = महौषध
    • महा + औत्सुक्य = महौत्सुक्य
    • सदा + औत्सुक्य = सदौत्सुक्य

अपवाद :

  • अ या आ के आगे ‘ओष्ठ्य शब्द’ का योग हो तो विकल्प से ‘ओ’ या ‘औ’ होता है; जैसे—
    • अधर + ओष्ठ = अधरोष्ठ / अधरौष्ठ
    • दन्त + ओष्ठ = दन्तोष्ठ / दन्तौष्ठ
    • बिंब + ओष्ठ = बिंबोष्ठ / बिंबौष्ठ

यण सन्धि

इकोऽयणचि

यदि ‘इ’ या ‘ई’, ‘उ’ या ‘ऊ’ और ‘ऋ’ के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो ‘इ’ के स्थान पर ‘य्’ और ‘उ’ के स्थान पर ‘व्’ और ‘ऋ’ के स्थान पर ‘र्’ हो जाता है तथा पहले शब्द का अंतिम व्यंजन स्वर रहित हो जाने से दूसरे शब्द का प्रारम्भिक स्वर उसके साथ जुड़ जाता है; जैसे—

  • इ + अ = य् + अ = य
    • अति + अधिक = अत्यधिक
    • अति + अर्थ = अत्यर्थ
    • अति + अन्त = अत्यन्त
    • अति + अल्प = अत्यल्प
    • अधि + अयन = अध्ययन
    • प्रति + अंग = प्रत्यंग
    • प्रति + अक्ष = प्रत्यक्ष
    • प्रति + अन्तर = प्रत्यन्तर
    • प्रति + अर्पण = प्रत्यर्पण
    • यदि + अपि = यद्यपि
    • रीति + अनुसार = रीत्यनुसार
  • इ + आ = य् + आ = या
    • अग्नि + आशय = अग्नाशय
    • अति + आचार = अत्याचार
    • अति + आनंद = अत्यानंद
    • अति + आवश्यक = अत्यावश्यक
    • अधि + आदेश = अध्यादेश  
    • अनि + आय = अन्याय
    • इति + आदि = इत्यादि
    • अभि + आगत = अभ्यागत
    • अभि + आस = अभ्यास
    • परि + आवरण = पर्यावरण
    • प्रति + आख्यान = प्रत्याख्यान
    • प्रति + आघात = प्रत्याघात
    • प्रति + आरोपण = प्रत्यारोपण
    • वि + आकुल = व्याकुल
    • वि + आप्त = व्याप्त
    • वि + आयाम = व्यायाम
    • वि + आवर्तन = व्यावर्तन
  • इ + उ = य् + उ = यु
    • अति + उक्ति = अत्युक्ति
    • अति + उत्तम = अत्युत्तम
    • अति + उष्ण = अत्युष्ण
    • अभि + उत्थान = अभ्युत्थान
    • अभि + उदय = अभ्युदय
    • उपरि + उक्त = उपर्युक्त
    • प्रति + उत्पन्न = प्रत्युत्पन्न  
    • प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर
    • प्रति + उपकार = प्रत्युपकार
    • वि + उत्पत्ति = व्युत्पत्ति
  • इ + ऊ = य् + ऊ = यू
    • अति + ऊष्म = अत्यूष्म
    • अति + ऊर्ध्व = अत्यूर्ध्व
    • नि + ऊन = न्यून
    • प्रति + ऊष = प्रत्यूष
    • प्रति + ऊषा = प्रत्यूषा
    • प्रति + ऊह = प्रत्यूह 
    • वि + ऊह = व्यूह
  • इ + ए = य् + ए = ये
    • अधि + एता = अध्येता
    • अधि + एषणा = अध्येषणा
    • प्रति + एक = प्रत्येक
  • इ + ऐ = यै
    • अति + ऐश्वर्य = अत्यैश्वर्य
  • इ + ओ = य् + ओ = यो
    • अति + ओज = अत्योज
    • दधि + ओदन = दध्योदन
  • इ + औ = य् + औ = यौ
    • अति + औदार्य = अत्यौदार्य
    • अति + औचित्य = अत्यौचित्य
  • ई + अ = य् + य = य
    • नदी + अम्बु = नद्यम्बु
    • नदी + अर्पण = नद्यर्पण
    • देवी + अंग = देव्यंग
    • देवी + अर्थ = देव्यर्थ
    • देवी + अर्पण = देव्यर्पण
    • देवी + अर्पित = देव्यर्पित
  • ई + आ = य् + आ = या
    • देवी + आगम = देव्यागम
    • देवी + आगमन = देव्यागमन
    • देवी + आलय = देव्यालय
    • नदी + आगम = नद्यागम
    • नदी + आमुख = नद्यामुख  
    • सखी + आगमन = सख्यागमन
    • सरस्वती + आराधन = सरस्वत्याराधन
  • ई + उ = य् + उ = यु
    • नदी + उद्गम = नद्युद्गम
    • नारी + उक्ति = नार्युक्ति   
    • नारी + उचित = नार्युचित
    • नारी + उद्धार = नार्युद्धार
    • सखी + उचित = सख्युचित
    • सखी + उवाच = सख्युवाच
    • स्त्री + उचित = स्त्र्युचित
    • स्त्री + उपयोगी = स्त्र्युपयोगी
  • ई + ऊ = यू
    • नदी + ऊर्मि = नद्यूर्मि
  • ई + ऐ = य् + ऐ = यै
    • देवी + ऐश्वर्य = देव्यैश्वर्य
    • नदी + ऐश्वर्य = नद्यैश्वर्य
    • सखी + ऐक्य = सख्यैक्य
    • सखी + ऐश्वर्य = सख्यैश्वर्य
  • ई + ओ = यो
    • देवी + ओज = देव्योज
  • ई + औ = यौ
    • देवी + औदार्य = देव्यौदार्य
    • वाणी + औचित्य = वाण्यौचित्य
  • उ + अ = व् + अ = व
    • अनु + अय = अन्वय
    • अनु + अर्थ = अन्वर्थ
    • ऋतु + अन्त = ऋत्वन्त
    • तनु + अंगी = तन्वंगी
    • पशु + अधम = पश्वधम
    • बहु + अंग = बह्वंग
    • मधु + अरि = मध्वरि (विष्णुजी)
    • मनु + अन्तर = मन्वन्तर
    • शिशु + अंग = शिश्वंग
    • सु + अच्छ = स्वच्छ
    • सु + अल्प = स्वल्प
    • सु + अस्ति = स्वस्ति
  • उ + आ = व् + आ = वा
    • अनु + आदेश = अन्वादेश
    • गुरु + आदेश = गुर्वादेश  
    • मधु + आचार्य = मध्वाचार्य
    • मधु + आलय = मध्वालय
    • मनु + अंतर = मन्वंतर
    • लघु + आदि = लघ्वादि
    • साधु + आचार = साध्वाचार
    • सु + आगत = स्वागत
  • उ + इ = व् + इ = वि
    • अनु + इत = अन्वित
    • अनु + इति = अन्विति

अनु + इष्ट = अन्विष्ट

  • जनु + इत = जन्वित
    • धातु + इक = धात्विक
  • उ + ई = वी
    • अनु + ईक्षण = अन्वीक्षण
    • अनु + ईक्षा = अन्वीक्षा  
  • उ + ए = व् + ए = वे
    • अनु + एषक = अन्वेषक
    • अनु + एषण = अन्वेषण
    • प्रभु + एषणा = प्रभ्वेषणा
  • उ + ऐ = वै
    • अल्प + ऐश्वर्य = अल्पैश्वर्य
  • उ + ऋ = व् + ऋ = वृ
    • मधु + ऋते = मध्वृते
  • उ + ओ = व् + ओ = वो
    • गुरु + ओदन = गुर्वोदन
    • मधु + ओदन = मध्वोदन
    • लघु + ओष्ठ = लघ्वोष्ठ
  • उ + औ = व् + औ = वौ
    • गुरु + औदार्य = गुर्वौदार्य
    • मधु + औषध = मध्वौषध
  • ऊ + अ = व् + अ = व
    • भू + अन्त = भ्वन्त
    • वधू + अंग = वध्वंग
    • वधू + अर्थ = वध्वर्थ
    • सरयू + अम्बु = सरय्वम्बु
  • ऊ + आ = व् + आ = वा
    • भू + आदि = भ्वादि
    • वधू + आगमन = वध्वागमन
    • वधू + आदेश = वध्वादेश
  • ऊ + इ = वि
    • वधू + इष्ट = वध्विष्ट
  • ऊ + ई =  वी
    • वधू + ईर्ष्या = वध्वीर्ष्या
  • ऊ + ए = वे
    • वधू + एषण = वध्वेषण
  • ऊ + ऐ = व् + ऐ = वै
    • वधू + ऐश्वर्य = वध्वैश्वर्य
  • ऋ + अ = र् + अ
    • धातृ + अंश = धात्रंश
    • पितृ + अनुदेश = पित्रनुदेश
    • पितृ + अनुमति = पित्रनुमति
    • मातृ + अंग = मात्रंग
    • मातृ + अनुदेश = मात्रनुदेश
    • मातृ + अनुमति = मात्रनुमति
  • ऋ + आ = र् + आ
    • पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
    • पितृ + आदेश = पित्रादेश
    • पितृ + आनन्द = पित्रानन्द
    • मातृ + आदेश = मात्रादेश
    • मातृ + आज्ञा = मात्राज्ञा
    • मातृ + आनंद = मात्रानंद
  • ऋ + इ = र् + इ
    • पितृ + इच्छा = पित्रिच्छा
    • मातृ + इच्छा = मात्रिच्छा
  • ऋ + उ = रु
    • पितृ + उपदेश = पित्रुपदेश
    • मातृ + उपदेश = मात्रुपदेश
  • ऋ + ए = रे
    • भ्रातृ + एषणा = भ्रात्रेषणा
  • ऋ + ओ = रो
    • भ्रातृ + ओक = भ्रात्रोक

अयादि सन्धि

एचोऽयवायावः

यदि ‘ए’, ‘ऐ’, ‘ओ’, ‘औ’ के बाद कोई भिन्न स्वर आये तो; क्रमशः ‘अय्’, ‘आय्’, ‘अव्’ और ‘आव्’ हो जाता है।

  • ‘ए’ का ‘अय्’ हो जाता है; अर्थात् ए + अ = अय् + अ = अय
    • ने + अ = नय
    • ने + अन = नयन
    • चे + अन = चयन
    • शे + अन = शयन
  • ‘ऐ’ का ‘आय्’ हो जाता है; अर्थात् ऐ + अ = आय् + अ = आय; ऐ + इ = आय् + इ = आयि
    • नै + अक = नायक
    • गै + अक = गायक
    • गै + अन = गायन
    • गै + इका = गायिका
    • दै + अक = दायक  
    • दै + इनी = दायिनी
    • नै + इका = नायिका
    • विधै + अक = विधायक
    • विनै + अक = विनायक
    • सै + अक = सायक
  • ‘ओ’ का ‘अव्’ हो जाता है; अर्थात् ओ + अ = अव् + अ = अव
    • गो + अन = गवन
    • पो + अन = पवन
    • पो + इत्र = पवित्र
    • भो + अति = भवति
    • भो + अन = भवन
    • श्रो + अन = श्रवण (पद में ‘र’ होने के कारण ‘न’ के स्थान पर ‘ण’ हो गया है।)
    • हो + अन = हवन
  • ‘ओ’ का ‘अव्’ हो जाता है; अर्थात् ओ + इ = अव् + इ = अवि
    • पो + इत्र = पवित्र
    • गो + इनि = गविनि
  • ‘ओ’ का ‘अव्’ हो जाता है; अर्थात् ओ + ई = अव् + ई = अवी
    • गो + ईश = गवीश
    • रो + ईश = रवीश
  • ‘ओ’ का ‘अव्’ हो जाता है; अर्थात् ओ + ए = अव् + ए = अवे
    • गुरो + ए = गुरवे
    • विष्णो + ए = विष्णवे
  • ‘औ’ का ‘आव्’ हो जाता है; अर्थात् औ + अ = आव् + अ = आव
    • द्वौ + अपि = द्वावपि
    • धौ + अक = धावक
    • पौ + अक = पावक
    • पौ + अन = पावन
    • भौ + अन = भावन
    • श्रौ + अन = श्रावण (पद में ‘र’ होने के कारण ‘न’ के स्थान पर ‘ण’ हो गया है।)
    • पौ + अक = पावक
    • सौ + अन = सावन
  • ‘औ’ का ‘आव्’ हो जाता है; अर्थात् औ + इ = आव् + इ = आवि
    • नौ + इक = नाविक
    • भौ + इन = भाविन
    • भौ + इनी = भाविनी
  • ‘औ’ का ‘आव्’ हो जाता है; अर्थात् औ + उ = आव् + उ = आयु
    • भौ + उक = भावुक

स्वर सन्धि के अपवाद

  • गुण सन्धि :
    • अक्ष + ऊहिनी = अक्षौहिणी (अ + ऊ = ओ; परन्तु यहाँ ‘औ’ है।)
    • दश + ऋण = दशार्ण (अ + ऋ = अर्; परन्तु यहाँ ‘आर्’ है।)
    • प्र + ऊढ़ = प्रौढ़ (अ + ऊ = ओ; परन्तु यहाँ ‘औ’ है।)
    • मुख + ऋत = मुखार्त (अ + ऋ = अर्; परन्तु यहाँ ‘आर्’ है।)
    • स्व + ईर = स्वैर (अ + ई = ए; परन्तु यहाँ ‘ऐ’ है।)
  • अन्य + अन्य = अन्यऽन्य
  • उत् + स्थान = उत्थान
  • कुल + अटा = कुलटा
  • नमः + कार = नमस्कार
  • पर + अक्ष = परोक्ष
  • भा + कर = भास्कर
  • मार्त + अण्ड = मार्तण्ड
  • लंब + ओष्ठ = लंबोष्ठ
  • वाचः + पति = वाचस्पति
  • सम् + कृति = संस्कृति
  • सार + अंग = सारंग

सन्धि

व्यंजन सन्धि

विसर्ग सन्धि

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