हिन्दी

टिप्पण (Noting)

भूमिका विभिन्न कार्यों से सम्बन्धित पत्रों का आदान-प्रदान कार्यालयों के मध्य होते रहते हैं, जिस पर सम्बन्धित अधिकारी विचार-विनिमय करते रहते हैं और उचित एवं आवश्यक टिप्पणी (Remark) देते हैं। अधिकारी द्वारा दिया गया विचार/सुझाव/निदेश टिप्पणी (Remark) कहलाती है तथा इस प्रक्रिया को ‘टिप्पण’ (Noting) कहा जाता है। अर्थात् टिप्पण प्रक्रिया है और टिप्पणी उत्पाद

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सरकारी पत्र का सारिणी रूप (Tabular Form) में सार लेखन

सामान्य हिन्दी भूमिका सार-लेखन एक कलात्मक विधा है। इसमें लेख, निबन्ध, प्रतिवेदन, भाषण, पत्र आदि की विषय-सामग्री को छोटा करके लगभग एक-तिहाई रूप में प्रस्तुत किया जाता है। सार-लेखन में विषय-सामग्री के सभी मुख्य भाव एवं विचार को सुबोध और सरल भाषा में व्यक्त किया जाता है। सामान्यतः बड़े-बड़े लेखों, विवरणों, व्याख्यानों तथा पत्रों को

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उपसर्ग

उपसर्ग ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।

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विसर्ग सन्धि (:)

सामान्य हिन्दी परिभाषा विसर्ग के बाद किसी स्वर या व्यंजन के आने के कारण जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं। संस्कृत से हिन्दी में व्यवहृत शब्दों में विसर्ग केवल ‘दुः’ और ‘निः’ उपसर्गों में मिलते हैं। नियम विसर्ग सन्धि से सम्बंधित कुछ नियम अधोलिखित हैं— विसर्ग का ‘ओ’ हो जाना विसर्ग के

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व्यंजन सन्धि या हल् सन्धि

सामान्य हिन्दी परिभाषा किसी व्यंजन के बाद किसी स्वर या व्यंजन के आने के कारण जो परिवर्तन होता है उसे व्यंजन सन्धि कहते हैं, अर्थात् व्यंजन + स्वर / व्यंजन = व्यंजन संधि। व्यंजन संधि को हल् संधि भी कहते हैं, क्योंकि जैसा वर्ण हम लिखते हैं उसमें पहले से ही ‘अ’ स्वर का योग

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