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लोप विराम / वर्जन-चिह्न— (…)

लोप विराम को ‘वर्जन-चिह्न’ भी कहते हैं। लोप विराम से कुछ अंश के लुप्त रहने का बोध होता है और किसी अवतरण का कोई अंश अप्रकाशित रखने में अथवा कुछ ही अंश लिखकर सम्पूर्ण का बोध कराने में इस विराम का प्रयोग करते हैं। लोप चिह्न सदैव तीन के गुणे में लगते हैं; जैसे— संबन्धित

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विवरण चिह्न / अपूर्ण विराम / न्यून विराम — (: और :—)

अपूर्ण विराम (Colon or Colon Dash) को न्यून विराम और विवरण-चिह्न भी कहा जाता है। इस विराम की आवश्यकता अत्यन्त आकस्मिक होने पर अथवा किसी कथन में एक से अधिक उदाहरण देने पर अथवा किसी उद्धरण द्वारा कोई अभिप्राय व्यक्त करने की दशा में उद्धरण के पहले ‘अपूर्ण विराम’ का प्रयोग किया जाता है। ‘अपूर्ण

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हंसपद चिह्न (^)

जब लेखन में कोई अंश छूट जाता है तो उसे दिखाने के लिए हंसपद चिह्न (^) का प्रयोग किया जाता है। हंसपद चिह्न को त्रुटि विराम चिह्न भी कहा जाता है। हंसपद चिह्न (^) प्रयोग के उदाहरण— परिश्रमी राम बहुत ^ है। एराधा यहाँ आ ^ गी। संबन्धित लेख—

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कोष्ठक चिह्न ( )

कोष्ठक का प्रयोग वाक्य के अंतर्गत किसी पद का अर्थ देने या स्पष्ट करने के लिए किया जाता है; जैसे— कोष्ठक का प्रयोग वाक्य के अंतर्गत किसी संदर्भ प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है; जैसे— कोष्ठक का प्रयोग क्रम संख्या इंगित करने के लिए किया जाता है; जैसे— कोष्ठक का प्रयोग भाव या मनोदशा

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उद्धरण चिह्न

उद्धरण चिह्न के दो रूप हैं— इकहरे उद्धरण चिह्न (‘ ’) किसी व्यक्ति या लेखक का उपनाम, पुस्तक, समाचारपत्र, लेख का शीर्षक इत्यादि का नाम इकहरे उद्धरण चिह्न के साथ लिखा जाता है। अर्थात् जहाँ कोई विशेष शब्द, पद, वाक्य-खण्ड इत्यादि उद्धृत किये जायें वहाँ इकहरे उद्धरण लगते हैं; जैसे— व्याकरण, तर्क, अलंकार आदि साहित्यिक

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