भूमिका
सार-लेखन एक कलात्मक विधा है। इसमें लेख, निबन्ध, प्रतिवेदन, भाषण, पत्र आदि की विषय-सामग्री को छोटा करके लगभग एक-तिहाई रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
सार-लेखन में विषय-सामग्री के सभी मुख्य भाव एवं विचार को सुबोध और सरल भाषा में व्यक्त किया जाता है।
सामान्यतः बड़े-बड़े लेखों, विवरणों, व्याख्यानों तथा पत्रों को रोचक और प्रभावशाली बनाने के लिए विषय-विवरण को विस्तार से प्रस्तुत किया जाता है। पाठक अथवा श्रोता को ठीक प्रकार से विषय को समझाने अथवा स्पष्ट करने के लिए किसी भाव अथवा विचार को बार-बार दोहराया भी जाता है। कभी-कभी अनेक उदाहरणों और उद्धरणों से बात को प्रभावशाली और पुष्ट किया जाता है।
“सार-लेखन में ऐसे विस्तृत विवरण को छोड़ दिया जाता है और मूल भावों, विचारों तथा तथ्यों का क्रमिक संयोजन कर लिया जाता है।”
कार्यालयों में प्राप्त लंबे-लंबे पत्रों, प्रतिवेदनों, आदेशों की मुख्य-मुख्य बातों को सार-रूप में ग्रहण कर थोड़े शब्दों में प्रस्तुत करना एक सामान्य अनिवार्यता है।
सार-लेखन, सारांश और संक्षेपण
सारांश में केवल उस मूल तथ्य को ही संक्षेप में प्रस्तुत किया जाता है जिसका उस अवतरण अथवा गद्य खंड में विस्तार से वर्णन हुआ है। इसमें सभी प्रमुख तथ्यों को प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं, जबकि सार-लेखन में प्रस्तुत अवतरण के सभी महत्त्वपूर्ण तथ्यों का समावेश होता है। आकार-विस्तार की दृष्टि से सारांश, सार-लेखन की अपेक्षा कम शब्दों में होता है। “सारांश” में हमारी दृष्टि मूल भाव-बिंदु पर रहती है, जबकि “सार-लेखन” में हमारी दृष्टि सभी महत्त्वपूर्ण तथ्यों का चुनाव करती है।
“सार-लेखन और संक्षेपण” में अधिक अंतर नहीं है। प्रायः सार-लेखन और संक्षेपण शब्दों का प्रयोग एक ही अर्थ में किया जाता है, किंतु सार-लेखन में जहाँ मूल सामग्री को संक्षिप्त करके एक-तिहाई रूप में सीमित किया जाता है, वहाँ संक्षेपण में ऐसा कोई बंधन नहीं होता है। मूल के अनावश्यक विस्तार को छोड़ते हुए सहज और सरल ढंग अपने शब्दों में उसे छोटा करना होता है।
इसीलिए सार-लेखन, संक्षेपण और संक्षिप्त लेखन को हम एक-दूसरे के पर्याय के रूप में प्रयुक्त होते हुए पाते हैं—
- उत्तर प्रदेश लोक-सेवा आयोग के ‘सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा मुख्य परीक्षा’ के सामान्य हिन्दी के प्रश्न-पत्र के पाठ्यक्रम में “संक्षेपण” का उल्लेख है।
- उत्तर प्रदेश लोक-सेवा आयोग के ‘समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी मुख्य परीक्षा’ के सामान्य हिन्दी और आलेखन के प्रश्न-पत्र में सारांश और सार-लेखन दोनों का उल्लेख है—
- दिये हुए गद्यांश का शीर्षक, सारांश एवं तीन रेखांकित अंशों की व्याख्या।
- किसी दिये हुए सरकारी पत्र का सारणी रूप में सार लेखन।
- संघ लोक-सेवा आयोग के ‘भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी पर अर्हक प्रश्न पत्र’ में संक्षेपण का उल्लेख है।
सार-लेखन, संक्षेपण और संक्षिप्त लेखन को आँग्ल भाषा में Precis-Writing कहते हैं, जबकि सारांश को Summary कहते हैं।
सार लेखन या संक्षिप्त लेखन के रूप
सार लेखन (संक्षिप्त लेखन) के मुख्यतया दो निम्न रूप हैं—
- निरन्तर विधि (Continuous Method)
- पत्र-व्यवहार विधि (Correspondence Method)— इसके भी दो भेद हैं—
- सारिणी रूप या अनुक्रमणिका विधि (Tabular Form or Index Method)
- निरन्तर अनुकथन विधि (Continuous Narrative Method)

पत्र-व्यवहार का सारिणी रूप
सरकारी-पत्र में उल्लिखित तथ्यों को सारिणी रूप में सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करने की विधि को सरकारी पत्र-व्यवहार का सारिणी रूप (Tabular Form) कहा जाता है।
आवश्यकता—
- सरकारी पत्र को सारिणी रूप में प्रस्तुत करने की आवश्यकता तब होती है, जब एक ही विषय पर कई पत्र अथवा कई उत्तर प्राप्त हुए हों तो उन सभी को कार्यालय के प्राधिकारी के समक्ष सारिणी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
महत्त्व—
- स्थान की बचत— इसके अन्तर्गत किसी अधिकारी द्वारा विभिन्न प्राधिकारियों को एक ही विषय पर प्राप्त पत्रों अथवा उत्तरों को संक्षिप्त आधार पर सारिणी रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
- समय की बचत— सारिणी रूप विधि का प्रयोग समय की बचत हेतु अत्यल्प समय में सारगर्भित तथ्यों को जानने के लिए किया जाता है।
- शीघ्र निर्णय— इस विधि के द्वारा अधिकारी सारिणी रूप में प्रस्तुत पत्रों के सार का अवलोकन कर संदर्भित विषय पर शीघ्रता-पूर्वक निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।
दिये गये पत्र (पत्रों) का सारिणी रूप में प्रस्तुतीकरण
- सबसे पहले हम “सारिणी रूप” की हेडिंग लिखेंगे।
- अब एक सारणी बनायेंगे, जिसमें 6 स्तम्भ (Column) और प्राप्त पत्रों या उत्तर के अनुसार रो (Row) होंगी।
- स्तम्भ-1 : क्रम संख्या
- स्तम्भ-2 : पत्र संख्या
- स्तम्भ-3 : तिथि
- स्तम्भ-4 : प्रेषक
- स्तम्भ-5 : प्रेषिती
- स्तम्भ-6 : विषय-वस्तु
सारिणी रूप (प्रारूप)
| क्र० सं० | पत्र संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 |
| … | … | … | … | … | … |
सारिणी रूप : सावधानियाँ
क्रमवार समावेश—
- प्राप्त पत्रों को तिथिवार क्रम में समायोजित करना चाहिए।
प्रेषक और प्रेषिती—
- स्तम्भ-4 में प्रेषक अधिकारी एवं स्तम्भ-5 प्राप्तकर्ता (प्रेषिती) अधिकारी के नाम नहीं लिखा जाना चाहिए।
- सामान्यतया केवल उनके (प्रेषक व प्रेषिती) पदनाम एवं संक्षिप्त कार्यालय का नाम लिखा जाना चाहिये।
विषय-वस्तु—
- स्तम्भ-6 में प्राप्त पत्र का संक्षिप्त लेख अत्यन्त ही बुद्धिमत्ता से यथा-सम्भव अत्यन्त ही सूक्ष्म रूप से तथा स्पष्टतः केवल एक ही वाक्यांश में लिखा जाना चाहिये।
- यह एक वाक्य जो भी लिखा जाय एक छोटा एवं साधारण प्रकार का होने के साथ-साथ अत्यन्त ही सांकेतिक एवं पूर्ण रूप से अर्थपूर्ण होना चाहिये।
- केवल अपवाद-स्थिति को छोड़ते हुये स्तम्भ-6 में सामान्यता प्रथम वाक्य आरम्भ करने के पूर्व इस प्रकार के मान्य शब्दों का प्रयोग करना चाहिये; जैसे— ‘निवेदन करते हुये’, ‘अपेक्षा करते हुये’, ‘सूचित करते हुये’, ‘सुझाव देते हुये’, ‘परामर्श देते हुये’, ‘प्रार्थना करते हुये’, ‘जानकारी कराते हुये’, ‘जानकारी करते हुये’, ‘आख्या देते हुये’ आदि लिखा जाना चाहिये।
संलग्नक—
- यदि किसी पत्र में संलग्नक का उल्लेख रूप-पत्र में किया जा रहा है तो स्तम्भ-1 में केवल मुख्य पत्र का ही क्रमांक लिखा जाना चाहिये और संलग्नक को स्तम्भ-2 से 6 में विवरण सहित दर्शाते हुये, इसका कोई अलग क्रम संख्या नहीं दिया जाना चाहिये।
- अर्थात् उक्त रूप-पत्र में केवल प्राप्त मुख्य पत्र आदि का ही उल्लेख होना चाहिये।
- जहाँ तक स्तम्भ सख्या-1 का सम्बंध है, और इसके निमित्त संलग्नक का कोई उल्लेख स्तम्भ सख्या-1 में नहीं किया जाना चाहिये।
- स्तम्भ संख्या-6 में जब कोई ऐसा संक्षिप्त लेख संलग्नक के सम्बंध में लिखा जा रहा हो तो लेख के आगे कोष्ठक में यह लिखा जाना चाहिये (क्र० सं०… का संलग्नक) ताकि यह विदित हो सके कि अमुक पत्र के संलग्नक में अमुक सूचना अथवा सुझाव प्राप्त हुआ है।
PYQs — UPPSC: RO/ARO (Mains) Exam
2021: निम्नलिखित सरकारी पत्र का सारिणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए—

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० सं० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 725(2)/ 12(क)/ 21-22 | 20 जनवरी, 2022 | सचिव, शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ। | शिक्षा निदेशक, उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज। | मुझे आपसे कहने का निदेश हुआ है कि राजकीय महाविद्यालयों में अनुमोदित एवं अस्थायी रूप से तीन वर्ष से अधिक समय से कार्यरत अध्यापकों का स्थायीकरण प्रक्रिया प्रारंभ की जाय तथा जिन अध्यापकों की गोपनीय आख्या नियमानुसार नहीं है, उनकी स्थायीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगायी जाय। |
2017: निम्नलिखित सरकारी पत्र का सारिणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए—

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० सं० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 2810 (02) 15/2017 | … | सचिव, जल संसाधन एवं नदी विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली। | मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ। | मुझे आपको सूचित करने का आदेश हुआ है कि उ०प्र० में गंगा एवं अन्य नदियों में प्रदूषण के बढ़ने से जलीय जीवों व पर्यावरण के लिए संकट हो रहा। इसको नियंत्रित करने के निम्न उपाय किये जाएँ। 1. तटवर्ती क्षेत्र में उचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन। 2. सभी कारखानों में शोधन-संयंत्र की स्थापना। 3. विद्युत-शवदाह-गृहों का निर्माण तथा तटों पर पौध रोपण। 4. खुले में शौच मुक्ति अभियान को सफल बनाने के लिए कार्यवाही। |
2016 (Re-exam): निम्नलिखित सरकारी पत्र का सारिणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए।

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० सं० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 325(02) 10/2020 | … | उप निदेशक, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली। | निदेशक, भाषा विभाग, उ०प्र० सरकार, लखनऊ। | देवनागरी लिपि के मानक रूप को निर्धारित करने के लिए भारत सरकार ने सन् 1961 में जो विशेषज्ञ समिति गठित की थी, उसने अपने सिफारिशें पुस्तक रूप में दे दी हैं जिसमें आपके प्रश्नों का निराकरण भी है। |
2014: निम्नलिखित सरकारी पत्र का सारिणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए।

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० सं० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. | 2415(02) 21(ग) 2015 | … | सचिव, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली। | मुख्य सचिव, शिक्षा उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ। सूचनार्थ प्रति— 1. ……………… 2. ……………… | उत्तर प्रदेश में हुई उच्चतर शिक्षा संस्थानों में प्रवेश की विसंगतियों के संदर्भ में अवांछित लोगों पर कड़ी नजर रखते हुए उचित और सख्त कार्यवाही हेतु। |
2013: निम्नलिखित सरकारी पत्र का सारिणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए।

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० सं० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. | 151(01)18 (ख) 2013-14 | … | सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार – नई दिल्ली। | मुख्य सचिव, उ. प्र. सरकार, लखनऊ। | उत्तर प्रदेश में बढ़ती आतंकवादी घटनाओं को रोकने हेतु अतिरिक्त सतर्कता और यदि आवश्यकता हो तो संवेदनशील स्थानों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती के संदर्भ में। |
2010 (Special Selection): निम्नलिखित सरकारी पत्र का सारिणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए।

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० सं० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. | 443(01)/15(ख) 2012-13 | … | सचिव, शिक्षा-विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ। | शिक्षा निदेशक (उ.शि.), उ. प्र., इलाहाबाद। | राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा अनुमोदन के उपरान्त राजकीय महाविद्यालयों में तीन वर्ष से अधिक कार्यरत शिक्षकों के स्थायीकरण तथा जिन शिक्षकों की गोपनीय आख्या प्रतिकूल है उनके स्थायीकरण की रोक के सन्दर्भ में। |
2010: निम्नलिखित सरकारी पत्र का सारिणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए।

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० स० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. | … | … | कृषि मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ। | जिलाधीश महोदय, फैज़ाबाद। | फैज़ाबाद जिले में सूखे की समस्या से निपटने हेतु उ. प्र. सरकार के सचिव ने 1 करोड़ का ड्रॉफ्ट भेजकर आवश्यक कदम उठाये जाने का निर्देश देते हुए, उसकी तत्काल सूचना सरकार को भेजने के संदर्भ में। |
PYQs — UKPSC RO/ARO (Mains) Exam
2024: निम्नलिखित पत्र का सारणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए :

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० सं० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. | 5672/प्रशासन /2020 | 06 दिसंबर, 2020 | सचिव, स्वास्थ्य विभाग, उत्तराखंड शासन, देहरादून। | 1. निदेशक, स्वास्थ्य निदेशालय, हल्द्वानी, नैनीताल। 2. समस्त जिलाधिकारी, उत्तराखंड। | मसूरी मंडल क्षेत्र में बाढ़ का खतरा कम हुआ है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में मलेरिया और मस्तिष्क ज्वर बढ़ता जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में समन्वित योजना लागू की गई है, चिकित्सक दल गाँवों का दौरा कर रहे हैं और मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। बचाव के उपायों का प्रचार युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। विस्तृत सूचना शासन को शीघ्र भेजी जाएगी। |
2021: निम्नलिखित पत्र का सारणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए :

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० सं० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. | 3276/प्रशासन/2013 | 06 दिसम्बर, 2013 | सचिव (उच्च शिक्षा), उत्तराखण्ड शासन, देहरादून। | 1. निदेशक, उच्च शिक्षा निदेशालय, हल्द्वानी, नैनीताल। 2. समस्त जिलाधिकारी, उत्तराखण्ड। | प्रदेश के राजकीय तथा अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में शैक्षणिक एवं अन्य कार्यों में शुचिता लाये जाने के हेतु, जिसमें— अवकाश कलेण्डर बनाना, शिक्षकों के लिए शिक्षण हेतु समय व अन्य कार्यों हेतु समय निर्धारण, उपस्थिति जाँच, पाठ्यक्रम पूरा करने हेतु शिक्षक कार्यक्रम बनाये, राष्ट्रीय सम्मेलन/सेमीनार/कार्यशाला में शिक्षकों का भाग लेने, साथ ही बिना अवकाश के अनुपस्थिति पर कटौती/निलंबन की कार्यवाही, छात्रों के परिचय-पत्रों की जाँच और अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण कर शासन को रिपोर्ट भेजें जाने के संबंध में। |
2007: निम्नलिखित सरकारी पत्र का सारिणी रूप (Tabular Form) में सार लिखिए।

हल—
सारिणी रूप(Tabular Form)
| क्र० सं० | पत्र-संख्या | तिथि | प्रेषक | प्रेषिती | विषय-वस्तु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. | 309/25/2009(25) | 15-1-2009 | आर.डी. स्वामी, अपर सचिव, भारत सरकार। | कुलपति, समस्त विश्वविद्यालय। | भारत सरकार द्वारा शोधार्थियों को 5,000/- रुपये प्रतिमाह प्रति छात्र शोध-वृत्ति देने का निर्णय और इसके लिए विश्वविद्यालय के विविध संकायों में शोधार्थियों की सूची एवं उनपर आनेवाले व्यय-भार को शीघ्र मंत्रालय को भेजने के संदर्भ में। |
