विसर्ग सन्धि (:)

सामान्य हिन्दी

परिभाषा

विसर्ग के बाद किसी स्वर या व्यंजन के आने के कारण जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं। संस्कृत से हिन्दी में व्यवहृत शब्दों में विसर्ग केवल ‘दुः’ और ‘निः’ उपसर्गों में मिलते हैं।

नियम

विसर्ग सन्धि से सम्बंधित कुछ नियम अधोलिखित हैं—

विसर्ग का ‘ओ’ हो जाना

विसर्ग के पूर्व ‘अ’ तथा विसर्ग के बाद सघोष व्यंजन होने पर विसर्ग का ‘उ’ हो जाता है परन्तु ‘गुण सन्धि’ के अनुसार अ और उ मिलकर ‘ओ’ हो जाता है; जैसे—

  • अधः + गति = अधोगति
  • अधः + घात = अधोघात
  • अधः + भाग = अधोभाग
  • अधः + लोक = अधोलोक
  • तपः + धन = तपोधन
  • तपः + भूमि = तपोभूमि
  • तपः + बल = तपोबल
  • तपः + मय = तपोमय
  • तपः + वन = तपोवन
  • तमः + गुण = तमोगुण
  • तेजः + मय = तेजोमय
  • तेजः + राशि = तेजोराशि
  • दिवः + ज्योति = दिवोज्योति
  • पयः + द = पयोद (बादल)
  • पयः + धर = पयोधर (बादल, समुद्र)
  • पयः + धि = पयोधि (समुद्र)
  • पुरः + हित = पुरोहित
  • मनः + अनुकूल = मनोनुकूल
  • मनः + अभिराम = मनोभिराम
  • मनः + ज = मनोज
  • मनः + ज्ञ = मनोज्ञ
  • मनः + दशा = मनोदशा
  • मनः + नयन = मनोनयन
  • मनः + बल = मनोबल
  • मनः + भाव = मनोभाव
  • मनः + योग = मनोयोग
  • मनः + रंजन = मनोरंजन
  • मनः + रथ = मनोरथ
  • मनः + रम = मनोरम
  • मनः + रमा = मनोरमा
  • मनः + राज्य = मनोराज्य
  • मनः + वेग = मनोवेग
  • मनः + विकार = मनोविकार
  • मनः + विज्ञान = मनोविज्ञान
  • मनः + विनोद = मनोविनोद
  • मनः + हर = मनोहर
  • यशः + गान = यशोगान
  • यशः + दा = यशोदा
  • यशः + धन = यशोधन
  • यशः + धरा = यशोधरा
  • यशः + लाभ = यशोलाभ
  • रजः + गुण = रजोगुण
  • वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
  • सरः + ज = सरोज
  • सरः + रूह = सरोरूह
  • सरः + वर = सरोवर

‘पुनः’ और ‘अंतः’ का ‘अः’ का ‘र्’ हो जाता है; जैसे—

  • अंतः + अग्नि = अंतरग्नि
  • अंतः + आत्मा = अंतरात्मा
  • अंतः + गत = अंतर्गत
  • अंतः + द्वन्द्व = अंतर्द्वन्द्व
  • अंतः + धान = अंतर्धान
  • अंतः + राष्ट्रीय = अंतर्राष्ट्रीय
  • अंतः + लोक = अंतर्लोक
  • पुनः + अपि = पुनरपि
  • पुनः + जन्म = पुनर्जन्म
  • पुनः + मुद्रण = पुनर्मुद्रण
  • पुनः + रचना = पुनर्रचना

विसर्ग का ‘र्’ हो जाना

विसर्ग से पहले ‘अ’ या ‘आ’ को छोड़कर कोई दूसरा स्वर हो अथवा ‘इः’ व ‘उः’ हो और दूसरे शब्द का पहला वर्ण सघोष हो (अर्थात् कोई स्वर हो अथवा किसी वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण हो व्यंजन हो अथवा य, र, ल, व में से कोई हो) तो विसर्ग का ‘र्’ हो जाता है; जैसे—

  • आशीः + वाद = आशीर्वाद
  • दुः + आचार = दुराचार
  • दुः + आत्मा = दुरात्मा
  • दुः + आशा = दुराशा
  • दुः + उपयोग = दुरुपयोग
  • दुः + ग = दुर्ग
  • दुः + गन्ध = दुर्गन्ध
  • दुः + गम = दुर्गम
  • दुः + गुण = दुर्गुण
  • दुः + जन = दुर्जन
  • दुः + दशा = दुर्दशा
  • दुः + दिन = दुर्दिन
  • दुः + धर्ष = दुर्घर्ष
  • दुः + नाम = दुर्नाम
  • दुः + नीति = दुर्नीति
  • दुः + बल = दुर्बल
  • दुः + भाग्य = दुर्भाग्य
  • दुः + यश = दुर्यश
  • दुः + ऊह = दुरूह
  • दुः + लक्ष्य = दुर्लक्ष्य
  • दुः + लाभ = दुर्लाभ
  • दुः + वचन = दुर्वचन
  • दुः + वह = दुर्वह
  • दुः + वासना = दुर्वासना
  • निः + अंक = निरंक
  • निः + अक्षर = निरक्षर
  • निः + अन्तर = निरन्तर
  • निः + अपराध = निरपराध
  • निः + अर्थक = निरर्थक
  • निः + आदर = निरादर
  • निः + आधार = निराधार
  • निः + आमिष = निरामिष
  • निः + आशा = निराशा
  • निः + आहार = निराहार
  • निः + ईक्षण = निरीक्षण
  • निः + ईह = निरीह
  • निः + उत्तर = निरुत्तर
  • निः + उपाय = निरुपाय
  • निः + उत्साह = निरुत्साह
  • निः + ऊर्मि = निरूर्मि
  • निः + एकीभाव = निरेकीभाव
  • नि + ऐक्य = निरैक्य
  • निः + औषधस = निरौषध
  • निः + गम = निर्गम
  • निः + गुण = निर्गुण
  • निः + घोष = निर्घोष
  • निः + जन = निर्जन
  • निः + जर = निर्जर
  • निः + जल = निर्जल
  • निः + जीव = निर्जीव
  • निः + झर = निर्झर
  • निः + दय = निर्दय
  • निः + धन = निर्धन
  • निः + धारण = निर्धारण
  • निः + बल = निर्बल
  • निः + भय = निर्भय
  • निः + मम = निर्मम
  • निः + मल = निर्मल
  • निः + यात = निर्यात
  • निः + लज्ज = निर्लज्ज
  • निः + लेप = निर्लेप
  • निः + विकार = निर्विकार
  • निः + विघ्न = निर्विघ्न   
  • निः + हार = निर्हार
  • प्रादुः + भाव = प्रादुर्भाव
  • बहिः + मुख = बहिर्मुख
  • बहिः + गति = बहिर्गत

परन्तु ‘इः’ के बाद ‘र’ हो, तो इः के स्थान पर ‘ई’ हो जाता है; जैसे—

  • निः + रज = नीरज
  • निः + रव = नीरव
  • निः + रोग = नीरोग
  • निः + रोगी = नीरोगी
  • निः + रस = नीरस

विसर्ग का ‘श्’ हो जाना

विसर्ग के बाद यदि ‘च’ या ‘छ’ हो, तो विसर्ग का ‘श्’ हो जाता है; जैसे—

  • दुः + चक्र = दुश्चक्र
  • दुः + चरित्र = दुश्चरित्र
  • निः + चय = निश्चय
  • निः + चल = निश्चल
  • निः + चिन्त = निश्चिन्त
  • निः + चेष्ट = निश्चेष्ट
  • निः + छल = निश्छल
  • निः + छिद्र = निश्छिद्र
  • पुनः + चर्चा = पुनश्चर्चा
  • प्रायः + चित्त = प्रायश्चित
  • हरिः + चन्द्र = हरिश्चन्द्र

विसर्ग का ‘ष्’ हो जाना

विसर्ग से पूर्व यदि ‘इ’ या ‘उ’ हो और बाद में क, ख, ट, ठ, प या फ हो तो विसर्ग का ‘ष्’ हो जाता है; जैसे—

  • आविः + कार = आविष्कार
  • चतुः + कोण = चतुष्कोण
  • चतुः + पद = चतुष्पद
  • चतुः + पाद = चतुष्पाद
  • दुः + कर = दुष्कर
  • दुः + कर्म = दुष्कर्म
  • दुः + काल = दुष्काल
  • दुः + कूल = दुष्कूल
  • दुः + चिंता = दुश्चिंता
  • दुः + ट = दुष्ट
  • दुः + परिणाम = दुष्परिणाम
  • दुः + पान = दुष्पान
  • दुः + पुत्र = दुष्पुत्र
  • दुः + प्रकृति = दुष्प्रकृति
  • दुः + प्रवृत्ति = दुष्प्रवृत्ति
  • दुः + फल = दुष्फल
  • निः + कंटक = निष्कंटक
  • निः + कपट = निष्कपट
  • निः + करुण = निष्करुण  
  • निः + कर्म = निष्कर्म
  • निः + कलंक = निष्कलंक
  • निः + काम = निष्काम  
  • निः + कारण = निष्कारण
  • निः + ठुर = निष्ठुर
  • निः + पंक = निष्पंक
  • निः + पाप = निष्पाप
  • निः + प्राण = निष्प्राण
  • निः + फल = निष्फल
  • धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
  • बहिः + कार = बहिष्कार

परन्तु दुःख (दुः + ख) में विसर्ग का लोप नहीं होता है।

विसर्ग का ‘ष्’ हो जाना

यदि विसर्ग के बाद ट या ठ हो, तो विसर्ग का ‘ष्’ हो जाता है; जैसे—

  • धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
  • ततः + ठकार = ततष्ठकार

विसर्ग का ‘स्’ हो जाना

यदि विसर्ग के बाद त, थ हो तो विसर्ग का ‘स्’ हो जाता है; जैसे —

  • दुः + तर = दुस्तर
  • दुः + थकार = दुस्थकार
  • निः + तार = निस्तार
  • निः + तारण = निस्तारण
  • निः + तेज = निस्तेज
  • मनः + ताप = मनस्ताप

विसर्ग का सुरक्षित रहना

यदि विसर्ग से पहले ‘अ’ हो और बाद में क, ख, प, फ में से कोई वर्ण हो तो विसर्ग सुरक्षित रहता है; जैसे—

  • अंतः + करण = अंतःकरण
  • अंतः + पुर = अंतःपुर
  • अधः + पतन = अधःपतन
  • अधः + फलित = अधःफलित
  • प्रातः + काल = प्रातःकाल
  • पयः + पान = पयःपान
  • मनः + कल्पित = मनःकल्पित
  • रजः + कण = रजःकण

परन्तु ‘नमः’, ‘पुरः’, ‘भाः’ और ‘श्रेयः’ का क्रमशः ‘नमस्’, ‘पुरस्’, ‘भास्’ और ‘श्रेयस्’ होता है; यथा—

  • नमः + कार = नमस्कार
  • पुरः + कार = पुरस्कार
  • भाः + कर = भास्कर
  • श्रेयः + कर = श्रेयस्कर

यदि अः, इः, उः के बाद त, थ, स हो, तो विसर्ग का स् हो जाता है; जैसे—

  • नमः + ते = नमस्ते
  • मनः + पाप = मनस्ताप
  • निः + तेज = निस्तेज
  • निः + सहाय = निस्सहाय
  • दुः + तर = दुस्तर
  • दुः + संधि = दुस्संधि
  • दुः + सह = दुस्सह

अः, इः, उः के बाद स, ष, स हो तो विसर्ग सुरक्षित रहता है अथवा श, ष, स का द्वित्व हो जाता है; जैसे—

  • अंतः + शक्ति = अंतःशक्ति, अंतश्शक्ति
  • चतुः + षष्टि = चतुःषष्टि, चतुष्षष्टि
  • नमः + शिवाय = नमःशिवाय, नमश्शिवाय
  • दुः + शासन = दुःशासन, दुश्शासन
  • दुः + शील = दुःशील, दुश्शील
  • दुः + सह = दुःसह, दुस्सह
  • दुः + साहस = दुःसाहस, दुस्साहस
  • निः + शंक = निःशंक, निश्शंक
  • निः + शब्द = निःशब्द, निश्शब्द
  • निः + संकोच = निःसंकोच, निस्संकोच
  • निः + संग = निःसंग, निस्संग
  • निः + संदेह = निःसंदेह, निस्संदेह
  • निः + संतान = निःसंतान, निस्संतान
  • निः + सहाय = निःसहाय, निस्सहाय
  • निः + सार = निःसार, निस्सार
  • पुनः + स्मरण = पुनःस्मरण, पुनस्स्मरण
  • हरिः + शेते = हरिःशेते, हरिश्शेते

इ का ई और उ का ऊ हो जाना

विसर्ग से पूर्व ‘इ’ या ‘उ’ हो और बाद में ‘र’ आये, तो ‘इ’ या ‘उ’ का क्रमशः ‘ई’ और ‘ऊ’ हो जाता है; जैसे—

  • निः + रव = नीरव
  • निः + रस = नीरस
  • निः + रोग = नीरोग
  • दुः + राज = दूराज

विसर्ग के पहले और बाद में ‘अ’ होने पर ‘ओकार’ व लुप्ताकार (ऽ) होना

यदि विसर्ग के आगे-पीछे ‘अ’ हो तो पहला ‘अ’ और विसर्ग मिलकर ‘ओ’ हो जाता है और बादवाले ‘अ’ का लोप होकर उसके स्थान पर लुप्ताकार (ऽ) का चिह्न लग जाता है। जैसे—

  • कः + अपि = कोऽपि
  • कुशलः + अभिलाषी = कुशलोऽभिलाषी
  • तथः + अपि = तथाऽपि
  • नमः + अस्तु = नमोऽस्तु
  • प्रथमः + अध्यायः = प्रथमोऽध्याय
  • पंचमः + अध्याय = पंचमोऽध्याय
  • मनः + अनुकूल = मनोऽनुकूल
  • मनः + अभिलषित = मनोऽभिलषित
  • मनः + अभिलाषा = मनोऽभिलाषा
  • यशः + अभिलाषी = यशोऽभिलाषी

परन्तु यदि विसर्ग के बाद ‘अ’ के स्थान पर कोई अन्य स्वर आये, तो यह नियम नहीं लगेगा वरन् विसर्ग का लोप हो जायेगा; जैसे—

  • अतः + एव = अतएव
  • तपः + उत्तम = तप उत्तम
  • सद्यः + आलस्य = सद्य आलस्य

सन्धि

स्वर सन्धि

व्यंजन सन्धि

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