प्रत्यय | UPPSC Mains | PYQs

2024

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को पृथक् कीजिए।

पावक, पाणिनीय, झाडू, शक्ति, बलिष्ठ।

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्ययप्रयुक्त प्रत्यय
पावकपौ + अकअक
पाणिनीयपाणिनि + ईयईय
झाड़ूझाड़ + ऊ
शक्तिशक् + तिति
बलिष्ठबल + इष्ठइष्ठ

2023

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को पृथक् कीजिए।

वैष्णव, ग्रामीण, वाणिज्य, गड़रिया, कौन्तेय

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्यय प्रयुक्त प्रत्यय
वैष्णवविष्णु + अ
ग्रामीणग्राम + ईनईन
वाणिज्यवाणिज + य
गड़रियागाड़र (गाडर) + इयाइया
कौन्तेयकुन्ती + एयएय

2022

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को अलग कीजिए।

देव, पूज्य, कौन्तेय, पौराणिक, तन्द्रालु

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्यय प्रयुक्त प्रत्यय
देवदिव् + अ
पूज्यपूज् + य
कौन्तेयकुन्ती + एयएय
पौराणिकपुराण + इकइक
तन्द्रालुतन्द्रा + आलुआलु

2021

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को अलग कीजिए।

अपनापा, वैदिक, राधेय, गुरुता, ग्रामीण

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्यय प्रयुक्त प्रत्यय
अपनापाअपना + आपाआपा
वैदिकवेद + इकइक
राधेयराधा + एयएय
गुरुतागुरु + ताता
ग्रामीणग्राम + ईनईन

2020

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को अलग कीजिये।

क्रीड़ा, मिठाई, मरियल, भिक्षुक, धमकी

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्यय प्रयुक्त प्रत्यय
क्रीड़ाक्रीड् + आ
मिठाईमीठा + ई
मरियलमर + इयलइयल
भिक्षुकभिक्षा (भिक्ष्) + उक (उक्)उक (उक्)
धमकीधमक + ई

2019

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को विलग कीजिए।

शैव, नीलिमा, दाक्षिणात्य, खुर्दबीन, वर्तमान।

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्यय प्रयुक्त प्रत्यय
शैवशिव + अ
नीलिमानील + इमाइमा
दाक्षिणात्यदक्षिण + त्यत्य
खुर्दबीनखुर्द + बीनबीन
वर्तमानवर्त (वृत्) + मान (शानच्)मान

2018

निम्नलिखित उपसर्गों / प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :

अधि, परि, भर, अठ, नि, खुश, इक, आइन, आई, अक्कड़

उत्तर—

नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। उपसर्ग का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— अधि, परि, नि, खुश

प्रत्यय— अठ, इक, आइन, आई, अक्कड़

भर— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— भरपेट (भर + पेट), रातभर (रात + भर), क्षणभर (क्षण + भर)।

प्रत्ययनिर्मित शब्द
अठकर्मठ
इकप्राकृतिक
आइनठकुराइन
आईभलाई
अक्कड़बुझक्कड़

2017

निम्नलिखित उपसर्गों / प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :

वि, उत्, दु, अप, निर्, इतर, आलु, नी, घ्न, प्र

उत्तर—

नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। उपसर्ग का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— वि, उत्, दु, अप, निर्

प्रत्यय— इतर, आलु, नी, घ्न

प्र— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— प्रक्रिया (प्र + क्रिया), विप्र (वि + प्र)।

प्रत्यय निर्मित शब्द
इतरआर्येतर
आलुकृपालु
नीशेरनी
घ्नकृतघ्न
प्र विप्र

2017 (निरस्त पेपर)

निम्नलिखित उपसर्गों / प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :

अक, मान, इम, चित्, इया, परा, अपि, सम्, दुर्, अध

उत्तर—

नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। उपसर्ग का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— परा, सम्, दुर्, अध 

प्रत्यय— अक, मान, इम, चित्, इया

अपि— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— अपिगीर्ण (अपि + गीर्ण), अद्यापि (अद्य + अपि)।

प्रत्ययनिर्मित शब्द
अकअधीक्षक
मानश्रीमान
इमस्वर्णिम
चित्कदाचित्
इयारसोइया

2016

निम्नलिखित उपसर्गों और प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :

परि, दुस्, आ, भर, सु, आइन, इक, एरा, वाँ, हरा

उत्तर—

नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। उपसर्ग का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— परि, दुस्, आ, भर, सु

प्रत्यय— आइन, इक, एरा, वाँ, हरा

भर— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— भरपेट (भर + पेट), रातभर (रात + भर)।

प्रत्यय निर्मित शब्द
आइन चौधराइन
इकऐतिहासिक
एरालुटेरा
वाँदसवाँ
हराइकहरा

2015

निम्नलिखित शब्दों से उपसर्गों और प्रत्ययों को अलग कीजिए :

अध्यादेश, विख्यात, अभ्यास, अत्युत्तम, सुजन, त्यागी, परीक्षक, सरलता, पत्रकार, शिष्या।

उत्तर—

नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दों में से उपसर्ग और प्रत्यय निर्मित शब्दों को पृथक करना है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय निर्मित शब्दों को पहचानकर उनका संग्रह करेंगे। उपसर्ग-निर्मित शब्दों का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— अध्यादेश, विख्यात, अभ्यास, अत्युत्तम, सुजन।

प्रत्यय— त्यागी, परीक्षक, सरलता, पत्रकार, शिष्या।

शब्दशब्द + प्रत्ययप्रयुक्त प्रत्यय
त्यागीत्याग + ई
परीक्षकपरीक्षा (परीक्ष्) + अकअक
सरलतासरल + ताता
पत्रकारपत्र + कारकार
शिष्यशिष्य + आ

2014

निम्नलिखित शब्दों से प्रत्ययों को अलग कीजिए :

चितेरा, अच्छाई, नैतिक, मझला, उड़ान।

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्ययप्रयुक्त प्रत्यय
चितेराचित + एराएरा
अच्छाईअच्छा + ई
नैतिकनीति + इकइक
मझलामझ (मध्य) + लाला
उड़ानउड़ (उड्) + आनआन

2013

निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्ययों को अलग कीजिए :

बतंगड़, घुमंतू, भनक, झंझट, बेलन

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्ययप्रयुक्त प्रत्यय
बतंगड़बात + अंगड़बतंगड़
घुमंतूघूमना (घूम्) + तूतू
भनकभन + क
झंझटझंझ + ट
बेलनबेल (बल्) + अनअन

2012

निम्नलिखित पदों में शब्द एवं प्रत्यय विभाजित करते हुए उनमें प्रयुक्त ‘कृदन्त’ एवं ‘तद्धित’ प्रत्ययों का नामोल्लेख भी कीजिए :

हँसोड़, बोली, देवरानी, ठकुराइन, रायता

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्ययप्रयुक्त प्रत्यय
हँसोड़हँसना (क्रिया) + ओड़ओड़ (कृत प्रत्यय)
बोलीबोलना (क्रिया) + ईई (कृत प्रत्यय)
देवरानीदेवर (संज्ञा, पुल्लिंग) + आनीआनी (तद्धित प्रत्यय /स्त्री-प्रत्यय)
ठकुराइनठाकुर (संज्ञा, पुल्लिंग) + आइनआइन (तद्धित प्रत्यय /स्त्री-प्रत्यय)
रायताराय (संज्ञा) + ताता (तद्धित प्रत्यय)

2011

कृत् और तद्धित प्रत्यय में क्या अन्तर है? दोनों के दो-दो उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—

कृत् प्रत्ययतद्धित प्रत्यय
कृत् प्रत्यय क्रिया या धातु के अंत में प्रयुक्त होते हैं।संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के पीछे लगनेवाले प्रत्यय को ‘तद्धित प्रत्यय’ कहा जाता है।
कृत् प्रत्यय के योग से बने शब्द ‘कृदन्त’ कहलाते है।तद्धित प्रत्यय के योग से बने शब्द को ‘तद्धितांत’ कहलाते हैं।
उदाहरण— अर्चना, क्रोधउदाहरण— मानव, अच्छा
क्रिया/धातुकृत प्रत्ययकृदन्त शब्द तद्धित प्रत्ययतद्धितांत
अर्च्अनाअर्चनामानवतामानवता
क्रुध्क्रोधअच्छाअच्छाई  

2010

निम्नलिखित शब्दों के मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए :

मिठाई, लुटेरा, खंडहर, पथरीला, इकहरा।

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्ययप्रयुक्त प्रत्यय
मिठाईमीठ (मीठा) + आईआई
लुटेरालूट (लूटना) + एरालुटेरा
खंडहरखंड + हरहर
पथरीलापथर (पत्थर) + ईला  ईला
इकहराइक (एक) + हराहरा

2009

मूल शब्द और प्रत्यय पृथक् करके दर्शाइए :

मानवता, दार्शनिक, समझदार, ममेरा, पीड़ित।  

उत्तर—

शब्दशब्द + प्रत्ययप्रयुक्त प्रत्यय
मानवतामानव + ताता
दार्शनिकदर्शन + इकइक
समझदारसमझ + दारदार
ममेरामामा + एराएरा
पीड़ितपीड़ा + इतइत

2008 (विशेष चयन)

निम्नलिखित शब्दों में से पाँच कृदन्त एवं तद्धित प्रत्यय छाँटिए :

(i) लेखक, (ii) मिठास, (iii) चमकीला, (iv) चिकनाहट, (v) भिक्षुक, (vi) पूजनीय, (vii) व्यक्तित्व, (viii) आध्यात्मिक

उत्तर—

क्र॰ स॰शब्दशब्द + प्रत्ययप्रयुक्त प्रत्यय
(i)लेखकलिखना (लिख्) + अकअक (कृत)
(ii)मिठासमीठा + आसआस (तद्धित)
(iii)चमकीलाचमक + ईलाईला (तद्धित)
(iv)चिकनाहटचिकना + आहटआहट (तद्धित)
(v)भिक्षुकभिक्षा (भिक्ष्) + उक (उक्)उक (उक्) (तद्धित)
(vi)पूजनीयपूज (पूज्) + अनीयअनीय (कृत)
(vii)व्यक्तित्वव्यक्ति + त्वत्व (तद्धित)
(viii)आध्यात्मिकअध्यात्म + इकइक (तद्धित)

2008

‘कृदन्त’ और ‘तद्धित’ प्रत्यय में क्या अन्तर है? उपयुक्त उदाहरण देते हुए अपना कथन स्पष्ट कीजिए।

उत्तर—

कृत् प्रत्ययतद्धित प्रत्यय
कृत् प्रत्यय क्रिया या धातु के अंत में प्रयुक्त होते हैं।संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के पीछे लगनेवाले प्रत्यय को ‘तद्धित प्रत्यय’ कहा जाता है।
कृत् प्रत्यय के योग से बने शब्द ‘कृदन्त’ कहलाते है।तद्धित प्रत्यय के योग से बने शब्द को ‘तद्धितांत’ कहलाते हैं।
उदाहरण— अर्चना, क्रोधउदाहरण— मानव, अच्छा
क्रिया/धातुकृत प्रत्ययकृदन्त शब्द तद्धित प्रत्ययतद्धितांत
स्थाप्अनास्थापना  विज्ञान इकवैज्ञानिक
कम्कामसंख्याइकी  सांख्यिकी   

2005

“प्रत्यय” को परिभाषित करते हुए किन्हीं दस प्रत्ययों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर—

परिभाषा— “प्रत्यय उस शब्दांश/अक्षर/अक्षर-समूह को कहते हैं जो किसी शब्द या धातु के पीछे लगकर कोई नया शब्द बनाता है।”

दस प्रत्यय और उससे निर्मित शब्द—

क्र॰ स॰प्रत्ययशब्द
1.अ (कृत)(बुध से) बोध
2.अन (कृत)(गम् से) गमन
3.अना (कृत)(अर्च् से) अर्चना
4.आ (कृत)(ईर्ष्य् से) ईर्ष्या
5.ति (कृत)(कृति से) कृति
6.अ (तद्धित)(मनु से) मानव
7.अंतर (तद्धित)(अर्थ से) अर्थांतर
8.इक (तद्धित)(अलंकार से) आलंकारिक
9.ता (तद्धित)(नवीन से) नवीनता
10.त्व (तद्धित)(अमर से) अमरत्व

2004 (विशेष चयन)

उपसर्ग और प्रत्यय का अन्तर स्पष्ट कीजिये और दोनों के चार-चार उदाहरण देकर उनसे शब्द बनाइये।

उत्तर—

उपसर्ग और प्रत्यय : अन्तर

उपसर्गप्रत्यय
उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।प्रत्यय कुछ ऐसे शब्दांश है जो किसी मूल शब्द या धातु के बाद लगकर नये शब्दों का निर्माण करते हैं।
उपसर्ग स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं।प्रत्यय स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु शब्द के बाद जुड़कर नये शब्दों का निर्माण करते हैं।
अविकारी शब्दांश होते हैं।अविकारी शब्दांश है।
उपसर्ग शब्दों के पूर्व में जुड़कर शब्द में नई विशेषता या अर्थ प्रकट करता है और कभी-कभी शब्द के व्याकरणिक कोटि में भी परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— प्र + हार = प्रहार (नई विशेषता); निः + स्वार्थ (संज्ञा) = निःस्वार्थ (विशेषण)।प्रत्यय शब्दों के बाद में जुड़कर शब्द के व्याकरणिक रूप और अर्थ में परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— कृ (क्रिया) + तव्य = कर्त्तव्य (संज्ञा)। 
शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।
ये भाषा के आधार के पर तीन प्रकार के हैं— संस्कृत, हिन्दी और उर्दू के उपसर्ग।ये शब्द रचना की प्रकृति के आधार पर दो प्रकार के हैं— कृत और तद्धित प्रत्यय।
उदाहरण—उदाहरण—
उपसर्गशब्दप्रत्ययशब्द
अतिअत्युक्तिवाला (कृत)गानेवाला (गाना + वाला)
अधःअधोगमनअन (कृत)नयन (नी + अन)
अनुअन्वेषणता (तद्धित)मानवता
अवअवमूल्यनपन (तद्धित)अपनापन

2002

उपसर्ग और प्रत्यय का अन्तर स्पष्ट करके अधोलिखित शब्दों में जुड़े प्रत्यय पृथक् कीजिए :

जड़िया, बोली, खेलाड़ी, कतरनी, गुणवान्, गमनीय, लघुतर, पुत्रवत्।

उत्तर—

उपसर्ग और प्रत्यय में अन्तर—

उपसर्गप्रत्यय
उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।प्रत्यय कुछ ऐसे शब्दांश है जो किसी मूल शब्द या धातु के बाद लगकर नये शब्दों का निर्माण करते हैं।
उपसर्ग स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं।प्रत्यय स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु शब्द के बाद जुड़कर नये शब्दों का निर्माण करते हैं।
अविकारी शब्दांश होते हैं।अविकारी शब्दांश है।
उपसर्ग शब्दों के पूर्व में जुड़कर शब्द में नई विशेषता या अर्थ प्रकट करता है और कभी-कभी शब्द के व्याकरणिक कोटि में भी परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— प्र + हार = प्रहार (नई विशेषता); निः + स्वार्थ (संज्ञा) = निःस्वार्थ (विशेषण)।प्रत्यय शब्दों के बाद में जुड़कर शब्द के व्याकरणिक रूप और अर्थ में परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— कृ (क्रिया) + तव्य = कर्त्तव्य (संज्ञा)। 
शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।
ये भाषा के आधार के पर तीन प्रकार के हैं— संस्कृत, हिन्दी और उर्दू के उपसर्ग।ये शब्द रचना की प्रकृति के आधार पर दो प्रकार के हैं— कृत और तद्धित प्रत्यय।

शब्द से प्रत्यय का अलगाव—

शब्द (कृदन्त)शब्द + प्रत्यय प्रत्यय
जड़ियाजड़ना + इयाइया
बोलीबोलना + ई
खेलाड़ीखेलना + आड़ीआड़ी
कतरनीकतर + नी  नी
गुणवान्गुण + वान्वान्
गमनीयगम (गम्) + अनीयअनीय
लघुतरलघु + तरतर
पुत्रवत्पुत्र + वत्वत्

2000

प्रत्यय को परिभाषित करते हुए निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय अलग कीजिए :

बुराई, लड़कपन, गानेवाला, बंधुत्व, सुन्दरता।

उत्तर—

परिभाषा— “प्रत्यय उस शब्दांश/अक्षर/अक्षर-समूह को कहते हैं जो किसी शब्द या धातु के पीछे लगकर कोई नया शब्द बनाता है।”

शब्द शब्द + प्रत्यय प्रत्यय
बुराईबुरा + आईआई
लड़कपनलड़का + पनपन
गानेवालागाना + वालावाला
बंधुत्वबंधु + त्वत्व
सुन्दरतासुन्दर + ताता

1998

शब्द निर्माण में उपसर्ग और प्रत्यय का क्या महत्त्व है? निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग अलग कीजिए :

सदाचार, दुराचार, अध्यक्ष, पराजय, समादर।

उत्तर—

शब्द-निर्माण में उपसर्ग और प्रत्यय का महत्त्व

  • मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ भाषा का भी विकास होता है। नये-नये आयामों को अभिव्यक्त करने के लिए भाषा में नये-नये शब्दों के निर्माण की आवश्यकता होती है। इन शब्दों के निर्माण के लिए ही उपसर्ग, प्रत्यय और समास का प्रयोग होता है।
  • जिस भाषा में नवीन शब्दों के निर्माण की जितनी क्षमता होगी वह भाषा उतनी ही समृद्ध होगी।
  • शब्दों के निर्माण की दो विधियाँ है—
    • एक, शब्दांशों से— इसमें उपसर्ग और प्रत्यय आते हैं।
    • दो, शब्दों से— इसमें समास आता है।
  • उपसर्ग और प्रत्यय दोनों अविकारी शब्दांश है।
  • उपसर्ग मूल शब्दों के पूर्व लगकर नये-नये शब्दों का निर्माण करता है।
  • प्रत्यय धातु या शब्दों के बाद जुड़कर नये-नये शब्दों का निर्माण करता है।

इस तरह उपसर्ग और प्रत्यय दोनों भाषा की अभिव्यक्ति को नये-नये शब्द-निर्माण में सहायता करके उसे समृद्धि बनाते हैं। 

नोट— यहाँ हम केवल प्रत्यय की बात कर रहे हैं तो शब्दों से उपसर्ग को अलग करने का संग्रह उपसर्ग वाले लेख में किया गया है।

टिप्पणी

2007, 2006, 2004, 2003, 2001, 1999 के प्रश्न-पत्रों में प्रत्यय सम्बन्धित प्रश्न नहीं आये थे। 1997, 1996, 1995, 1994, 1993, 1992, 1991 और 1990 के प्रश्न-पत्रों में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों से सम्बन्धित प्रश्न नहीं पूछे गये थे।


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