लोकोक्ति एवं मुहावरे | UPPSC Mains | PYQs

2024

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए कि अर्थ स्पष्ट हो जाए।

(i) कोल्हू का बैल

(ii) गूलर का फूल

(iii) गंगा नहाना

(iv) घड़ों पानी पड़ना

(v) हाथ पीले कर देना

(vi) ओखली में सिर दिया तो मूसल का क्या डर

(vii) काठ की हाँडी एक बार चढ़ती है

(viii) नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुने

(ix) रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई

(x) हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा हो

उत्तर—

(i) कोल्हू का बैल

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कठिन परिश्रम करनेवाला

प्रयोग— वह कोल्हू के बैल की तरह हमेशा काम में लगा रहता है।

(ii) गूलर का फूल

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दुर्लभ वस्तु

प्रयोग— खाद्य पदार्थों में शुद्धता अब गूलर का फूल होती जा रही है।

(iii) गंगा नहाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कठिन कार्य पूरा होना

प्रयोग— बेटी की शादी हो गई, गंगा नहाये।

(iv) घड़ों पानी पड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत शर्मिंदा होना

प्रयोग— कार्यालय में घूस लेते हुए पकड़े जाने के बाद राहुल पर घड़ों पानी पड़ गया।

(v) हाथ पीले कर देना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विवाह कर देना

प्रयोग— इस वर्ष मैंने अपनी छोटी कन्या के भी हाथ पीले कर दिये।

(vi) ओखली में सिर दिया तो मूसल का क्या डर

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— कठिन कार्य हाथ में लेने पर कठिनाइयों से नहीं डरना चाहिए

प्रयोग— जब शिखा ने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया, तो उसे पता था कि यह आसान नहीं होगा, लेकिन उसने सोचा, ‘ओखली में सिर दिया तो मूसल का क्या डर’।

(vii) काठ की हाँडी एक ही बार चढ़ती है

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— धोखेबाजी बार-बार नहीं चल सकती

प्रयोग— एक बार तो उसने झूठ बोलकर मुझसे पैसे ले लिए, लेकिन अब वह जानता है कि ‘काठ की हाँडी एक ही बार चढ़ती है’।

(viii) नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुने

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— शक्तिशाली या प्रभावशाली लोगों के बीच किसी कमजोर या महत्त्वहीन व्यक्ति की बात को कोई नहीं सुनता

प्रयोग— दिनेश ने अपनी बात मुख्यमंत्री जी के सामने रखने की कोशिश की, लेकिन नक्कारखाने में तूती की आवाज की तरह, उसकी बात किसी ने नहीं सुनी।

(ix) रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— सर्वनाश हो जाने पर भी घमंड नहीं गया

प्रयोग— वह अपना सब कुछ जुए में हार गया, फिर भी अकड़कर चलता है, उसके ऊपर ‘रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई’ कहावत पूरी तरह लागू होती है।

(x) हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा हो

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बिना किसी विशेष प्रयास या खर्च के अच्छा परिणाम प्राप्त करना

प्रयोग— परीक्षा में बिना ज्यादा पढ़े, अच्छे नंबर आ गये, ‘मानो हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा हो’ गया।

2023

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में इस प्रकार प्रयोग कीजिए कि अर्थ स्पष्ट हो जाये।

(i) बिल्ली के गले में घंटी बाँधना।

(ii) कुएँ में भाँग पड़ना।

(iii) उड़ती चिड़िया के पंख गिनना।

(iv) बहती गंगा में हाथ धोना।

(v) डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना।

(vi) दमड़ी की हाँड़ी गई कुत्ते की जात पहचानी गई।

(vii) नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

(viii) थोथा चना बाजे घना।

(ix) छछूँदर के सिर में चमेली का तेल।

(x) जहाँ देखे तवा परात वहीं गुजारे सारी रात।

उत्तर—

(i) बिल्ली के गले में घंटी बाँधना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— स्वयं को संकट में डालना

प्रयोग— महँगाई और बेरोजगारी से पीड़ित व्यक्ति भी बिल्ली के गले में घंटी बाँधने से कतराते हैं।

(ii) कुएँ में भाँग पड़ना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सभी की बुद्धि भ्रष्ट हो जाना

प्रयोग— आखिर किस-किस को समझाओगे, यहाँ तो कुएँ में ही भाँग पड़ी है।

(iii) उड़ती चिड़िया के पंख गिनना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अनुभवी होना/मन की बात जानना

प्रयोग— गुरुजी के साथ रहते हुए उनका शिष्य अब उड़ती चिड़िया के पंख गिन सकता है।

(iv) बहती गंगा में हाथ धोना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अवसर का लाभ उठाना

प्रयोग— अनेक अवसरवादी विधायक / सांसद सत्तारूढ़ दल में शामिल होकर बहती गंगा में हाथ धोने से नहीं कतराते हैं।

(v) डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुमत से अलग-थलग रहना

प्रयोग— समाज में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो अनेक मुद्दों पर डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना ही पसंद करते हैं।

(vi) दमड़ी की हाँड़ी गई कुत्ते की जात पहचानी गई

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— थोड़ी-सी हानि उठाकर किसी भी वास्तविकता को जान लेना

प्रयोग— सत्तारूढ़ दल के नेताओं को अक्सर विपक्षी दल प्रलोभन देकर उनकी कमजोरियों को पहचानने के लिए हर हथकंडे अपनाकर सच्चाई उगलवा लेते हैं। सत्य कहा गया है दमड़ी की हाँड़ी गई कुत्ते की जात पहचानी गई।

(vii) नाच न जाने आँगन टेढ़ा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपने दोष को बहाना बनाकर टाल देना/अपनी अयोग्यता के लिए साधनों को दोष देना

प्रयोग— परीक्षा में जो विद्यार्थी पूरे पाठ्यक्रम का अध्ययन नहीं करते, वे प्रश्न के आने पर यह कहते हैं कि प्रश्न पाठ्यक्रम के बाहर है। ऐसे विद्यार्थियों को ‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा’ वाली कहावत चरितार्थ करते हैं।

(viii) थोथा चना बाजे घना

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— गुणहीनता में भी गुणी होने का ढोंग करना

प्रयोग— मोहन गणित विषय में बार-बार फेल होता है फिर भी अपने को गणित का विद्वान बताता रहता है। ठीक ही कहा गया है थोथा चना बाजे घना।

(ix) छछूँदर के सिर में चमेली का तेल

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अयोग्य व्यक्ति को मूल्यवान वस्तु की प्राप्ति

प्रयोग— चुनाव जीतने पर अनपढ़ नेताओं पर सरकारी सुख-सुविधाओं की वृद्धि होने लगती है, किन्तु यह ठीक वैसे ही है, जैसे छछूँदर के सिर पर चमेली का तेल।

(x) जहाँ देखे तवा परात वहीं गुजारे सारी रात

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जहाँ कुछ मिलने की उम्मीद होती है, वहाँ लालची व्यक्ति जरूर पहुँचते हैं

प्रयोग— लाला जी के बड़े लड़के के विवाह में ऐसे भी लोग शामिल हो गये, जिनको निमंत्रण नहीं दिया गया था, क्योंकि ऐसे लोगों को उम्मीद थी कि बरात में अच्छा भोजन जरूर मिलेगा। ठीक ही कहा गया है कि जहाँ देखे तवा परात वहीं गुजारे सारी रात।

2022

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

(i) चूहे के चाम से नगाड़ा नहीं बनता

(ii)खूँटे के बल बछड़ा कूदे

(iii) दाल भात में मूसरचन्द

(iv) पराए धन पर लक्ष्मीनारायण

(v) एक ही लकड़ी से सबको हाँकना

(vi) अधजल गगरी छलकत जाय

(vii) लहू के आँसू पीना

(viii) मीठी छुरी चलाना

(ix) निन्यानबे के फेर में पड़ना

(x) जबान में लगाम न देना

हल—

(i) चूहे के चाम से नगाड़ा नहीं बनता

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अत्यधिक सीमित संसाधनों से बड़े कार्य नहीं हो सकते

प्रयोग— बड़े लोग अपना कार्य साधने के लिए सदैव बड़े लोगों की तलाश में रहते हैं, क्योंकि उनको पता होता है कि छोटे आदमियों के सम्पर्क से कोई लाभनहीं। ठीक ही कहा गया है कि चूहे के चाम से नगाड़ा नहीं बनता।

(ii) खूँटे के बल बछड़ा कूदे

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— किसी की शह पाकर अकड़ दिखाना

प्रयोग— मोहन के मौसा जी पुलिस कप्तान क्या बन गये कि वह गाँव के हर छोटे-मोटे मामलों को लेकर थाने में अकड़ दिखाने लगा है। सच ही कहा गया है कि खूँटे के बल बछड़ा कूदे।

(iii) दाल-भात में मूसरचन्द

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बीच में दखल देने वाला

प्रयोग— पारिवारिक झगड़ों में कभी-कभी पड़ोसी भी दखल देने लगते है। सच ही कहा गया है कि दाल-भात में मूसरचन्द।

(iv) पराए धन पर लक्ष्मीनारायण

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दूसरे के धन पर गुलछर्रे उड़ाना

प्रयोग— जैसे ही मोहन को ससुराल की संपत्ति मिली वह रोज-रोज नये सूट सिलवाने लगा। सच ही कहा गया है कि पराए धन पर लोग लक्ष्मीनारायण बन जाते हैं।

(v) एक ही लकड़ी से सबको हाँकना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सबके साथ समान व्यवहार करना

प्रयोग— कक्षा में विद्यार्थी विभिन्न परिवेश से आते हैं। अतः अध्यापक को एक ही लकड़ी से सबको नहीं हाँकना चाहिए।

(vi) अधजल गगरी छलकत जाय

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— ओछा व्यक्ति थोड़े से गुण या धन पर ही इतराने लगता है

प्रयोग— सोहन ने चार अक्षर अंग्रेज़ी क्या पढ़ लिया कि सबको अपनी टूटी-फूटी अंग्रेज़ी से झाड़ता रहता है। ठीक ही कहा गया है कि अधजल गगरी छलकत जाय।

(vii) लहू के आँसू पीना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दुःख सह लेना

प्रयोग— माँ-बाप अपने बच्चों की पढ़ाई में दिन-रात मेहनत मजदूरी करके लहू के आँसू पी लेते हैं लेकिन उफ तक नहीं करते।

(viii) मीठी छुरी चलाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विश्वासघात करना

प्रयोग— कचहरियों में ऐसे अनेक दलाल टहलते रहते हैं, जो बातें तो ऐसी करेंगे जैसे जज साहब उनके लंगोटिया यार हो, लेकिन मौका पाते ही मीठी छुरी चलाने से बाज नहीं आते।

(ix) निन्यानबे के फेर में पड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— धन-संग्रह की चिन्ता में पड़ना

प्रयोग— सेठ जी हर समय हाय पैसा, हाय पैसा करते हुए निन्यानबे के फेर में पड़े रहते हैं।

(x) जबान में लगाम न देना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बिना मतलब का बोलते जाना

प्रयोग— आजकल अनेक राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ता टीवी. प्रोग्रामों में अनाप-सनाप बोलते नजर आते हैं, जैसे लगता है कि इनकी जबान पर कोई लगाम नहीं है।

2021

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ लिखिए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।

(i) जब तक साँस तब तक आस

(ii) जिसका काम उसी को साजै

(iii) चित भी मेरी पट भी मेरी

(iv) झूठ के पाँव नहीं होते

(v) हाथ कंगन को आरसी क्या

(vi) आड़े आना

(vii) आँखें बिछाना

(viii) खाक छानना

(ix) ठन-ठन गोपाल

(x) शैतान की आँत

हल—

(i) जब तक साँस तब तक आस

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अन्त समय तक आशा रखनी चाहिए

प्रयोग— प्रयागराज में ऐसे अनेक प्रतियोगी हैं, जो परीक्षाओं में तब तक लगे रहते हैं, जब तक कि उनकी उम्र सीमा बाकी है। सच कहा गया है कि जब तक साँस तब तक आस।

(ii) जिसका काम उसी को साजै

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जो काम जिसका है, उसे वही ठीक तरह से कर सकता है

प्रयोग— श्याम बिजली मिस्त्री को न बुलाकर स्वयं ही घर की लाइटिंग करने लगा, जिससे सारा सर्किट शार्ट हो गया। पिता जी ने उसे डाँटते हुए कहा कि जब तुम्हें इस काम के बारे में जानकारी नहीं थी, तो बिजली मिस्त्री को क्यों नहीं बुलाए। ठीक ही कहा गया है कि जिसका काम उसी को साजै।

(iii) चित भी मेरी पट भी मेरी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— हर तरह से स्वयं का ही लाभ

प्रयोग— पिता जी के साथ सबसे बड़ी मुसीबत यह रहती है कि वे हरदम अपनी ही मनमानी करते हैं, चाहते हैं कि चित भी उनकी हो और पट भी उन्हीं का हो।

(iv) झूठ के पाँव नहीं होते

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— झूठा आदमी एक बात पर स्थिर नहीं रहता

प्रयोग— झूठे व्यक्ति की बातों में मत आइए, क्योंकि वह जितनी बार आपसे बात कहेगा सब अलग-अलग रहेगी, इसीलिए कहा गया है कि झूठ के पाँव नहीं होते।

(v) हाथ कंगन को आरसी क्या

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता

प्रयोग— भारत में होने वाली लगभग सभी आतंकवादी घटनाओं में पाकिस्तानी नागरिक ही रहते हैं, फिर भी भारत से पाकिस्तान द्वारा प्रमाण माँगा जाता है, यह तो वही बात हुई कि हाथ कंगन को आरसी क्या।

(vi) आड़े आना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बाधक होना / बाधक बनना

प्रयोग— अच्छे गुरु निर्धन विद्यार्थियों की हर तरह से सहायता करते हैं, जिनसे उनकी सफलता में कोई बात आड़े न आए।

(vii) आँखें बिछाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— प्रेम से स्वागत करना

प्रयोग— लंका विजय के बाद जब श्रीराम अयोध्या लौटे, तो अयोध्यावासी आँखें बिछाए खड़े थे।

(viii) खाक छानना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मारा-मारा फिरना

प्रयोग— अज्ञातवास के दौरान पाण्डव खाक छानते रहे।

(ix) ठन-ठन गोपाल

अर्थ— मुहावरा

अर्थ— बिल्कुल खोखला

प्रयोग— कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं, जो लोगों को संस्कारित होने की प्रेरणा देते हैं, किन्तु अन्दर से ठन-ठन गोपाल होते हैं।

(x) शैतान की आँत

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— लम्बी बात

प्रयोग— अल्पज्ञ अक्सर शैतान की आँत वाली बात करते हैं, जिससे लोग उन्हें बहुत ही जानकर समझें।

2020

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ लिखिए और उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।

(i) आठ-आठ आँसू बहाना

(ii) कागज की नाव

(iii) चादर से बाहर पैर फैलाना

(iv) टोपी उछालना

(v) मिट्टी खराब करना

(vi) रंगा सियार होना

(vii) का बरखा जब कृषि सुखाने

(viii) कंगाली में आटा गीला

(ix) नेकी कर कुएँ में डाल

(x) पर उपदेश कुशल बहुतेरे

हल—

(i) आठ-आठ आँसू बहाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— पछताना

प्रयोग— परीक्षा में असफल होने पर लोग आठ-आठ आँसू बहाते हैं।

(ii) कागज की नाव

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— क्षण भंगुर

प्रयोग— संतों की दृष्टि में यह संसार कागज की नाव है।

(iii) चादर से बाहर पैर फैलाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— आय से अधिक व्यय करना

प्रयोग— अधिकतर लोग दिखावे के लिए चादर से बाहर पैर फैलाते हैं।

(iv) टोपी उछालना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— निरादर करना

प्रयोग— हमें अपने से बड़ों की टोपी नहीं उछालनी चाहिए।

(v) मिट्टी खराब करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दुर्दशा करना

प्रयोग— कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सेना की मिट्टी खराब कर दी।

(vi) रंगा सियार होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— छद्मवेशी व्यक्ति

प्रयोग— आजकल बहुत से सफेदपोश रंगे सियार बनकर ठगने का काम करते हैं।

(vii) का बरखा जब कृषि सुखाने

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— हानि हो जाने के बाद उपचार से क्या लाभ

प्रयोग— फैक्ट्री पूरी जल जाने के बाद फायर ब्रिगेड पहुँची सही कहा गया है- का वर्षा जब कृषि सुखाने।

(viii) कंगाली में आटा गीला

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— विपत्ति में और विपत्ति आना

प्रयोग— कोविड-19 काल में श्रमिकों के रोजगार तो समाप्त हुए ही साथ ही काफी श्रमिकों के परिजन भी कोविड-19 संक्रमण से मौत के शिकार हुए। इसे कहते हैं, कंगाली में आटा गीला।

(ix) नेकी कर कुएँ में डाल

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— उपकार करने के बाद भूल जाना

प्रयोग— श्रेष्ठ लोग किसी के संकट आने पर नेकी करके कुएँ में डाल देते हैं, उसका गुणगान नहीं करते।

(x) पर उपदेश कुशल बहुतेरे

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दूसरे को उपदेश देना परन्तु स्वयं पर अमल न करना

प्रयोग— अधिकतर प्रतियोगी छात्र अपने कनिष्ठों को अध्ययन की रणनीति बताते हैं, पर स्वयं ऐसा नहीं करते हैं। सही कहा गया है, ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’।

2019

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) यथा राजा तथा प्रजा

(ii) अरहर की टट्टी गुजराती ताला

(iii) आ बैल मुझे मार

(iv) नौ दो ग्यारह हो जाना

(v) जैसा देश वैसा भेष

(vi) दाल भात में मूसरचन्द

(vii) ऊँची दूकान फीके पकवान

(viii) मान न मान में तेरा मेहमान

(ix) अन्धेर नगरी चौपट राजा

(x) आसमान से गिरा खजूर में अटका

हल—

(i) यथा राजा तथा प्रजा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— एक समान स्वभाव

प्रयोग— वरिष्ठ अधिकारी जनता से जिस तरह से बर्ताव करेंगे, उसी प्रकार से उनके अधीनस्थ भी बर्ताव करेंगे। सही कहा गया है, यथा राजा तथा प्रजा।

(ii) अरहर की टट्टी गुजराती ताला

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ—मामूली वस्तु की रक्षा के लिए अधिक खर्च

प्रयोग— भारत में जीर्ण-शीर्ण भवन को धरोहर के नाम पर सुरक्षित रखने के लिए इतना खर्च किया जाता है कि उतने में नए भवन का निर्माण हो जाएगा। सही कहा गया है, अरहर की टट्टी गुजराती ताला।

(iii) आ बैल मुझे मार

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जान-बूझ कर मुसीबत में पड़ना

प्रयोग— केन्द्र सरकार ने किसान बिल पेश क्या किया कि विपक्षी पार्टियों को बैठे-बिठाये मुद्दा मिल गया और ऊपर से गठबंधन दल की केन्द्रीय मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया, जो ‘आ बैल मुझे मार’ वाली कहावत को चरितार्थ करती है।

(iv) नौ दो ग्यारह हो जाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— भाग जाना

प्रयोग— पुलिस की गाड़ी देखकर उपद्रवी नौ दो ग्यारह हो गये।

(v) जैसा देश वैसा भेष

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— परिस्थिति के अनुसार ढल जाना

प्रयोग— यदि व्यक्ति को जीवन में सफल होना है, तो उसे जैसा देश वैसा भेष अपनाना चाहिए।

(vi) दाल-भात में मूसरचन्द

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बीच में दखल देने वाला

प्रयोग— दो लोगों के विवाद में दाल-भात में मूसरचन्द बनना ठीक नहीं है।

(vii) ऊँची दूकान फीके पकवान

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— प्रदर्शन अधिक वास्तविकता कम

प्रयोग— कुछ प्रतियोगी ऐसे होते हैं कि अभिभावक को देखकर पढ़ने में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि लगता है, वे बहुत कठिन परिश्रम कर रहे हैं, उनके जाते ही वे अपनी पुरानी शैली में आ आते हैं, सही कहा गया है, ‘ऊँची दूकान फीके पकवान’।

(viii) मान न मान मैं तेरा मेहमान

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जबरदस्ती रिश्ते कायम करना

प्रयोग— सफल व्यक्ति से सभी लोग किसी न किसी प्रकार से सम्बन्ध रखना चाहते हैं और यह कहावत चरितार्थ करते हैं कि मान न मान मैं तेरा मेहमान।

(ix) अन्धेर नगरी चौपट राजा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— न्याय, अन्याय एक समान होना

प्रयोग— प्रतियोगी परीक्षाओं में जिस प्रकार धाँधली होने से अयोग्य लोगों का चयन हो जाता है और योग्य चयन से बाहर हो जाते हैं, उसे देखकर यह कहना पड़ता है कि अन्धेर नगरी चौपट राजा।

(x) आसमान से गिरा खजूर में अटका

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— एक मुसीबत से छूटकर दूसरी मुसीबत में फँस जाना

प्रयोग— कोरोना काल में अधिकतर विद्यार्थियों के पैसे एवं खाद्य सामग्री समाप्त हो गए थे, पड़ोसियों एवं मित्रों के सहयोग से तो वे अपना पेट पाल रहे थे कि आवागमन प्रतिबंधित होने से तत्काल अपने गृह जनपद भी न जा सके। यही है, आसमान से गिरा खजूर में अटका।

2018

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ स्पष्ट कीजिए और अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) नक्कारखाने में तूती की आवाज

(ii) मक्खी मारना

(iii) तिल का ताड़ बनाना

(iv) सिर आँखों पर बैठाना

(v) हवा का रंग देखना

(vi) ढाक के तीन पात

(vii) गुरु कीजे जान के, पानी पीजे छान के

(viii) कर खेती परदेस को जाए, वाको जनम अकारथ जाए

(ix) फूहड़ चालें, नौ घर हालें

(x) अपनी करनी पार उतरनी

हल—

(i) नक्कारखाने में तूती की आवाज़

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— वरिष्ठों की उपस्थिति में कनिष्ठों को महत्त्वहीन समझना

प्रयोग— परिवार में अक्सर देखा जाता है कि उम्र में छोटे लोगों की बात नक्कारखाने में तूती की आवाज होती है।

(ii) मक्खी मारना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— समय काटना या कोई काम न करना

प्रयोग— बेरोजगारी का एक कारण यह भी है कि ज्यादा पढ़े-लिखे लोग छोटा काम करना नहीं चाहते या छोटा काम करने में अपनी बेइज्जती महसूस करते हैं। अतः कई युवा मक्खी मारते हैं।

(iii) तिल का ताड़ बनाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— छोटी-सी बात को बढ़ा देना

प्रयोग— सत्ताधारी दल की छोटी सी भी भूल को विपक्ष तिल का ताड़ बना देता है।

(iv) सिर आँखों पर बैठाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत सम्मान देना

प्रयोग— भारतीय परम्परा में अतिथि को सिर आँखों पर बैठाया जाता है।

(v) हवा का रंग देखना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— स्थिति को देखकर कार्य करना

प्रयोग— प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए हवा का रंग देखकर रणनीति बनानी चाहिए।

(vi) ढाक के तीन पात

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— हमेशा एक-सी दशा में रहना

प्रयोग— सरकार किसानों के प्रति बहुत सहयोगात्मक भावना रखती है, फिर भी इनकी स्थिति वही ढाक के तीन पात के समान ही है।

(vii) गुरु कीजे जान के, पानी पीजे छान के

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जानकारी प्राप्त कर ही कोई काम करना

प्रयोग— आजकल दलाल बिकी हुई जमीन को दिखाकर पुनः क्रेता को बेच देते हैं, जिससे क्रेता परेशानी में पड़ जाता है। सही कहा गया है, ‘गुरु कीजे जान के पानी पीजे छान के’।

(viii) कर खेती परदेस को जाए, वाको जनम अकारथ जाए

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— खेती रहने पर भी जो व्यक्ति चंद पैसे के लिए परदेस जाता है, उसका जीवन व्यर्थ है

प्रयोग— आजकल युवा पीढ़ी खेती रहने पर भी शर्म के कारण खेती नहीं करना चाह रही है और फैशन के कारण शहरों में जाकर कुछ पैसों के लिए नौकरी कर रही है। सत्य कहा गया है, ‘कर खेती परदेस को जाए, वाको जनम अकारथ जाए’।

(ix) फूहड़ चालें, नौ घर हालें

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— गँवार व्यक्ति का कृत्य दूसरों को भी क्षति पहुँचाता है

प्रयोग— ग्रामीण अंचलों में बिना किसी सैद्धान्तिक एवं प्रयोगात्मक शिक्षा प्राप्त अपने को तथाकथित डॉक्टर कहने वाले मरीजों को ठीक करने की जगह उनकी जान ले लेते है, ठीक ही कहा गया है, ‘फूहड़ चालें, नौ घर हालें’।

(x) अपनी करनी पार उतरनी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपने यत्न से ही फल प्राप्त होता है

प्रयोग— यदि परीक्षा में सफल होना है, तो कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि अपनी करनी पार उतरनी।

2017

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ स्पष्ट कीजिए और अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) कलेजा मुँह को आना

(ii) दिन में तारे दिखाई देना

(iii) साँप छछूँदर की गति होना

(iv) ढाक के वही तीन पात

(v) अन्धे के हाथ बटेर लगना

(vi) यह मुँह और मसूर की दाल

(vii) हारे को हरिनाम

(viii) अधजल गगरी छलकत जाए

(ix) बिंध गया सो मोती, रह गया सो सीप

(x) जैसे कंता घर रहे, वैसे रहे परदेस

हल—

(i) कलेजा मुँह को आना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यधिक घबरा जाना, अत्यधिक दुःख होना

प्रयोग— जंगल सफारी के दौरान अचानक जिप्सी के सामने चीता को देखते ही कलेजा मुँह को आ गया।

(ii) दिन में तारे दिखाई देना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यधिक कष्ट होना

प्रयोग— विराट कोहली की आक्रामक बल्लेबाजी से वेस्टइंडीज टीम के गेंदबाजों को दिन में तारे दिखाई देने लगे।

(iii) साँप छछूँदर की गति होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— असमंजस की स्थिति। दुविधा की स्थिति

प्रयोग— वचन का पालन और पुत्र वियोग उत्पन्न होने की स्थिति से राजा दशरथ की स्थिति साँप छछूँदर की गति सी हो गई थी।

(iv) ढाक के वही तीन पात

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— सदा एक सा रहना

प्रयोग— यह आदमी तरक्की करने वाला नहीं है, जब भी मैंने देखा, इसे वही ढाक के तीन पात स्थिति वाला ही पाया।

(v) अन्धे के हाथ बटेर लगना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बिना प्रयास प्राप्ति होना

प्रयोग— परीक्षा के लिए अधिक तैयारी न करने पर भी मैं पास हो गया। यही समझो कि अन्धे के हाथ में बटेर लग गया।

(vi) यह मुँह और मसूर की दाल

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— योग्यता से बढ़कर वस्तु पाने की अभिलाषा करना

प्रयोग— सुधाकर पढ़ाई में बिल्कुल शून्य है, परन्तु हमेशा सरकारी नौकरी पाने के सपने देखता रहता है। इसी को कहते हैं कि यह मुँह और मसूर की दाल।

(vii) हारे को हरिनाम

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अन्तिम सहारा

प्रयोग— अमेरिका द्वारा आर्थिक सहायता बंद होने से पाकिस्तान के लिए चीन ही हारे को हरिनाम है।

(viii) अधजल गगरी छलकत जाए

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— कम गुणी/ज्ञानी व्यक्ति द्वारा अत्यधिक दिखावा

प्रयोग— दिनेश बारहवीं पास करके स्वयं को बहुत बड़ा विद्वान समझने लगा है। ये तो वही बात हुई कि अधजल गगरी छलकत जाए।

(ix) बिंध गया सो मोती, रह गया सो सीप

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जो वस्तु काम आ जाए वही अच्छी

प्रयोग— गोपीनाथ को कार दुर्घटना में चोट लगने पर पास खड़े टेम्पो से अस्पताल ले जाया गया, जिससे उनकी जान बच गई। सही कहावत है कि बिंध गया सो मोती, रह गया सो सीप।

(x) जैसे कंता घर रहे, वैसे रहे परदेश

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— निकम्मा आदमी का घर या बाहर रहना एक समान है

प्रयोग— राहुल मुम्बई कमाने गया लेकिन कुछ दिनों बाद ही घर लौट आया। ठीक ही कहा गया है, ‘जैसे कंता घर रहे, वैसे रहे परदेश’।

2017 (निरस्त)

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ लिखकर अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) गोटी बैठाना

(ii) घाट-घाट का पानी पीना

(iii) छठी का दूध याद आना

(iv) छाती पर साँप लोटना

(v) तिल का ताड़ बनाना

(vi) पगड़ी उछालना

(vii) साँप सूँघ जाना

(viii) मेंढकी को जुकाम होना

(ix) आधा तीतर, आधा बटेर

(x) नक्कारखाने में तूती की आवाज

हल—

(i) गोटी बैठाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— युक्ति सफल होना

प्रयोग— विराट कोहली ने श्रीलंका के विरुद्ध खेले गए मैच में ऐसी गोटी बैठायी कि एक दिवसीय शृंखला भारत ने 3-0 से जीत ली।

(ii) घाट-घाट का पानी पीना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— घूम फिर कर अनुभव प्राप्त करना

प्रयोग— साम्प्रदायिक पंचाट के सन्दर्भ में अंग्रेजों की चाल असफल रही, उन्हें पता चल गया महात्मा गाँधी घाट-घाट का पानी पिये हैं।

(iii) छठी का दूध याद आना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत कष्ट होना

प्रयोग— कुकृत्यों के कारण मिली सजा इतनी कठोर होती है कि छठी का दूध याद आ जाता है।

(iv) छाती पर साँप लोटना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— ईर्ष्या होना

प्रयोग— भारत की उन्नति देखकर पाकिस्तान की छाती पर साँप लोटता है।

(v) तिल का ताड़ बनाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— छोटी-सी बात को बढ़ा देना

प्रयोग— छोटी सी घटना को मीडिया वाले अपने फायदे के लिए तिल का ताड़ बना कर पेश करते हैं।

(vi) पगड़ी उछालना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बेइज्जत करना

प्रयोग— चुनाव के दौरान प्रत्येक राजनीतिक दल, प्रतिद्वन्द्वी दल की पगड़ी उछालने में लगे रहते हैं।

(vii) साँप सूँघ जाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— गुप-चुप हो जाना

प्रयोग— भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी को घूस लेते हुए सतर्कता टीम ने रंगे हाथ पकड़ा। इस पर कर्मचारी को साँप सूँघ गया।

(viii) मेंढकी को जुकाम होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अयोग्य होने पर योग्य होने का नखरा

प्रयोग— बहुत से ऐसे प्रतियोगी होते हैं, जो उस विषय के जानकार नहीं होते, फिर भी वे मेंढकी को जुकाम होने का अहसास कराते हैं।

(ix) आधा तीतर, आधा बटेर

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बेमेल मिश्रण

प्रयोग— लंदन से लौटे रघु को लुंगी और कोट पहना देखकर उसके पिता बोले यह क्या आधा तीतर, आधा बटेर बने हो।

(x) नक्कारखाने में तूती की आवाज

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बड़ों के रहते छोटों की बात नहीं मानी जाती या महत्त्वहीन होती है

प्रयोग— अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेपाल की बात इस प्रकार अनसुनी कर दी गयी जैसे नक्कारखाने में तूती की आवाज।

2016

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों के अर्थ स्पष्ट कीजिए और अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) उल्टे छुरे से मूँड़ना

(ii) खेत रहना

(iii) गंगा लाभ होना

(iv) लाख से लीख होना

(v) हथेली पर सरसों उगाना

(vi) अशरफी की लूट, कोयले पर मुहर

(vii) छछूँदर के सिर पर चमेली का तेल

(viii) बाप मरे अँधेरे में बेटे का नाम पॉवर हाउस

(ix) हँसुए के ब्याह में खुरपे का गीत

(x) घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध

हल—

(i) उल्टे छुरे से मूँड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बेवकूफ बनाकर काम निकालना

प्रयोग— क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के कुछ अधिकारी अक्सर गरीब किसानों को उलटे छुरे से मूँड़ने की कोशिश करते हैं।

(ii) खेत रहना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— युद्ध में मारा जाना

प्रयोग— राम सजीवन के दोनों पुत्र कारगिल युद्ध में खेत रहे।

(iii) गंगा लाभ होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मृत्यु के पश्चात् मोक्ष / मुक्ति पाना

प्रयोग— उसके जैसे सत्यनिष्ठ, परोपकारी एवं सदाचारी व्यक्ति का गंगा लाभ होना निश्चित है।

(iv) लाख से लीख होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— प्रतिष्ठा नष्ट हो जाना

प्रयोग— भ्रष्टाचार प्रदर्शन सूचकांक में गिरती रैंकिंग से किसी भी देश की प्रतिष्ठा/वैभव लाख से लीख हो जाती है।

(v) हथेली पर सरसों उगाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— असम्भव कार्य करना

प्रयोग— लोक निर्माण विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार एक दिन में समाप्त नहीं हो सकता और न ही ऐसी आशा करनी चाहिए, क्योंकि हथेली पर सरसों नहीं उगायी जा सकती।

(vi) अशरफी की लूट, कोयले पर मुहर

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— महत्त्वपूर्ण/कीमती वस्तुओं को छोड़कर बेकार वस्तुओं की निगरानी

प्रयोग— सरकारें भ्रष्टाचार को समाप्त करने के बजाय काला धन खोजने में लगी हैं, इसे ही कहते हैं कि अशरफी की लूट और कोयले पर मुहर।

(vii) छछूँदर के सिर पर चमेली का तेल

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अयोग्य व्यक्ति को बड़ी/मूल्यवान वस्तु की प्राप्ति

प्रयोग— चुनाव जीतने के बाद नेताओं पर सरकारी सुख-सुविधाओं की धन वर्षा होने लगती है, कहते हैं न कि छछूँदर के सिर पर चमेली का तेल।

(viii) बाप मरे अँधेरे में बेटे का नाम पॉवर हाउस

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— झूठा दिखावा करना

प्रयोग— पाकिस्तान के नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि ऐसा काम करूँगा कि भारत भी हमसे कर्ज लेगा। इसी को कहते हैं बाप मरे अँधेरे में बेटे का नाम पॉवर हाउस।

(ix) हँसुए के ब्याह में खुरपे का गीत

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बेमेल होना

प्रयोग— मुकेश अरबपति व्यवसायी तो खुर्शीद कबाड़ी है, परन्तु फिर भी दोनों की दोस्ती हँसुए के ब्याह में खुरपे के गीत की तरह ही है।

(x) घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपने घर में सम्मान न मिलना, जबकि बाहर सम्मान मिलना

प्रयोग— भारत में बहुतायत इंजीनियर एवं तकनीशियन है, जिन्हें सम्मान प्राप्त नहीं होता, वहीं विदेशों में उन्हें मुँह-माँगा वेतन के साथ सम्मान भी प्राप्त है। इसीलिए कहा जाता है कि घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध।

2015

निम्नांकित मुहावरों और लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए और अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) आग उगलना

(ii) उल्टी माला फेरना

(iii) नाक रगड़ना

(iv) हवा लगना

(v) एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा

(vi) मुँह लगाना

(vii) जैसा देश वैसा भेष

(viii) हजामत बनाना

(ix) जैसे नागनाथ वैसे साँपनाथ

(x) यह मुँह और मसूर की दाल

हल—

(i) आग उगलना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— क्रोध में कठोर वचन बोलना

प्रयोग— आप जब देखो आग उगलते रहते हो, कभी तो शान्ति से बात किया करो।

(ii) उल्टी माला फेरना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अनिष्ट की कामना करना

प्रयोग— अपने पड़ोसी की उन्नति देखकर अक्सर लोग उसके लिए उल्टी माला फेरते हैं।

(iii) नाक रगड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— खुशामद करना

प्रयोग— तुम चाहे लाख नाक रगड़ लो, वह अधिकारी टस से मस नहीं होगा।

(iv) हवा लगना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— प्रभाव पड़ना

प्रयोग— अधिकतर भारतीयों को पश्चिमी सभ्यता की हवा लग गयी है।

(v) एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— एक के साथ दूसरा दोष

प्रयोग— एक तो पाकिस्तान में भुखमरी है, दूसरे वह केवल हथियार संग्रह के लिए अधिक धन खर्च करता है, इसे कहते हैं, ‘एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा’।

(vi) मुँह लगाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विशेष सम्पर्क में रखना

प्रयोग— ओछे लोगों को मुँह नहीं लगाना चाहिए।

(vii) जैसा देश वैसा भेष

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— परिस्थिति के अनुसार ढल जाना

प्रयोग— रमेश शहर में रहकर भी गाँव के रीति-रिवाज नहीं भूला, गाँव जाने पर आज भी वह वहाँ की संस्कृति अपनाता है। इसलिए गाँव वाले कहते हैं, यह तो ‘जैसा देश वैसा भेष’ की तरह रहता है।

(viii) हजामत बनाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— खूब पीटना

प्रयोग— भरे बाजार में लोगों ने चोर को पकड़कर उसकी हजामत बना दी।

(ix) जैसे नागनाथ वैसे साँपनाथ

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दो अवगुणी व्यक्तियों का एक समान होना

प्रयोग— सीमा विवाद पर चीन, भारत से बार-बार बात करता है, किन्तु स्वयं समझौते का उल्लंघन करता है, उसी प्रकार जम्मू-कश्मीर के मामले में पाकिस्तान वही कार्य करता है। इसलिए ‘जैसे नागनाथ वैसे साँपनाथ’।

(x) यह मुँह और मसूर की दाल

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपनी औकात से बढ़कर बात करना

प्रयोग— क्षीणकाय राजेश अक्सर पहलवानों से लड़ने की बात करता है, सत्य कहा गया है कि ‘यह मुँह और मसूर की दाल’।

2014

निम्नांकित मुहावरों एवं लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट करके वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) आँखों का तारा होना

(ii) बाल की खाल निकालना

(iii) आसमान पर दिये जलाना

(iv) वेद वाक्य मानना

(v) उड़ती चिड़िया पहचानना

(vi) आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास

(vii) गुरु कीजै जान, पानी पीजै छान

(viii) छप्पर पर फूस नहीं, ड्योढ़ी पर नाच

(ix) खोदा पहाड़, निकली चुहिया

(x) गये थे रोजा छुड़ाने गले नमाज पड़ी

हल—

(i) आँखों का तारा होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यन्त प्रिय होना

प्रयोग— भूतपूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक डॉ॰ए॰पी॰जे॰ अब्दुल कलाम देशवासियों के आँखों के तारे थे।

(ii) बाल की खाल निकालना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कमियाँ निकालना

प्रयोग— विभिन्न विचारधाराओं की पार्टियाँ संगठित होकर सत्ता हासिल करने के लिए तो सरकार बना लेती हैं, किन्तु समय आने पर बाल की खाल अवश्य निकालती हैं।

(iii) आसमान पर दिये जलाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत सम्पन्न या शक्तिशाली होना। असम्भव कार्य करना

प्रयोग— अभी कल बुद्ध लंगोटी लगाये खेतों में कौआ हँकाया करता था, आज उसका आसमान पर दिया जलता है।

उस कृपण से पैसे निकलवाना आसमान पर दीये जलाने जैसा है।

(iv) वेद वाक्य मानना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— प्रमाणित बात

प्रयोग— आर्यभट्ट का मानना था कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है। यह बात आधुनिक खगोल विज्ञान भी वेद वाक्य के रूप में मानता है।

(v) उड़ती चिड़िया पहचानना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मन की बात जानना

प्रयोग— गुरुजी से कोई बात छिपानी नहीं चाहिए, क्योंकि वे उड़ती चिड़िया पहचानते हैं।

(vi) आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर छोटे कार्य में लग जाना

प्रयोग— श्याम आई॰ए॰एस॰ की परीक्षा की तैयारी करने के लिए घर से प्रयागराज आया, किन्तु इस परीक्षा में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण एकदिवसीय परीक्षाओं में अपना ध्यान केन्द्रित किया तो राकेश ने कटाक्ष किया कि ‘आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास’।

(vii) गुरु कीजै जान, पानी पीजै छान

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जानकारी प्राप्त कर ही कोई काम करना

प्रयोग— विवादित जमीन को खरीदकर रमेश परेशानी में पड़ गया। सत्य कहा गया है कि ‘गुरु कीजै जान, पानी पीजै छान’।

(viii) छप्पर पर फूस नहीं, ड्योढ़ी पर नाच

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दिखावटी ठाट-बाट जबकि वास्तविकता कुछ भी नहीं

प्रयोग— सीमा रहन-सहन से धनवान लगती है, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं। यहाँ ‘छप्पर की फूस नहीं, ड्योढ़ी पर नाच’ जैसी लोकोक्ति चरितार्थ होती है।

(ix) खोदा पहाड़, निकली चुहिया

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अत्यधिक परिश्रम के बाद भी थोड़ा लाभ

प्रयोग— शिखा दिन-रात पढ़ाई में लगा रहता था फिर भी किसी तरह तृतीय श्रेणी में ही उत्तीर्ण हो पाया, जिससे लोग कहने लगे, ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’।

(x) गये थे रोजा छुड़ाने गले नमाज पड़ी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— सुख-प्राप्ति के लिए परेशान होने पर दुःख का पीछे पड़ जाना

प्रयोग— सहायक अध्यापक अवकाश का प्रार्थना-पत्र देने गया था कि उसे ‘अटल पेंशन योजना’ में लगा दिया गया। इसे ही कहते हैं कि ‘गये थे रोजा छुड़ाने, गले नमाज पड़ी’।

2013

निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट करके वाक्य में प्रयोग कीजिए :

(i) उठ जाना।

(ii) उठा न रखना।

(iii) एक आँख से देखना।

(iv) एक लाठी से सबको हाँकना।

(v) खरी-खोटी सुनाना।

(vi) खरी-खरी सुनाना।

(vii) अपनी करनी पार उतरनी।

(viii) यह मुँह और मसूर की दाल।

(ix) तन पर नहीं लत्ता, पान खाएँ अलबत्ता।

(x) नेकी नौ कोस, बदी सौ कोस।

हल—

(i) उठ जाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मरना

प्रयोग— गरीबी और कर्ज से जूझ रहे अधिकतर लोग उठ जाना ही पसन्द करते हैं।

(ii) उठा न रखना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कोई कसर न रखना

प्रयोग— लोक सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सत्तासीन होने के लिए कुछ भी उठा न रखा।

(iii) एक आँख से देखना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— समान भाव से देखना

प्रयोग— माँ अपनी सभी सन्तानों को एक आँख से देखती है।

(iv) एक लाठी से सबको हाँकना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सभी के लिए समान नीति अपनाना

प्रयोग— विद्यालयों में अक्सर देखा जाता है कि मंद एवं कुशाग्र बुद्धि वाले बच्चों को शिक्षक एक ही लाठी से हाँकते हैं, जबकि मंद बुद्धि वाले बच्चों को प्यार देने की आवश्यकता होती है।

(v) खरी-खोटी सुनाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— भला-बुरा कहना

प्रयोग— गुरुजी ने अपने विद्यार्थी को पुस्तक चोरी करने के लिए खूब खरी-खोटी सुनायी।

(vi) खरी-खरी सुनाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— साफ-साफ कह देना

प्रयोग— पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की भारत-यात्रा पर भारतीय प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को खरी-खरी सुनायी।

(vii) अपनी करनी पार उतरनी।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपने यत्न से ही फल प्राप्त होता है

प्रयोग— प्रतियोगी छात्रों को सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करना ही होगा, क्योंकि ‘अपनी करनी पार उतरनी’।

(viii) यह मुँह और मसूर की दाल।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपनी औकात से बढ़कर बात करना

प्रयोग— क्षीणकाय महेश ठीक से चल भी नहीं पाता, किन्तु पहलवानों से लड़ने की बात करता है। सच है ‘यह मुँह और मसूर की दाल’।

(ix) तन पर नहीं लत्ता, पान खाएँ अलबत्ता।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— झूठी रईसी दिखाना

प्रयोग— कर्ज में डूबे रहने के बावजूद राम ने जिस प्रकार भोज में व्यय किया है वह ‘तन पर नहीं लत्ता, पान खायें अलबत्ता’ की कहावत को चरितार्थ करता है।

(x) नेकी नौ कोस, बदी सौ कोस।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बुराई का प्रसार अच्छाई की तुलना में दूर तक और ज्यादा होता है

प्रयोग— रणधीर एक सद्गुण-सम्पन्न लड़के के नाम से जाना जाता है, किन्तु एक दिन अपने मित्र सुधीर के साथ किसी काम गया था। सुधीर सिगरेट पीता है। इसकी चर्चा उसके गाँव से लेकर रिश्तेदारों तक हो गई। सच कहा गया है कि ‘नेकी नौ कोस बदी सौ कोस’।

2012

निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट करके वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) गंगा नहाना।

(ii) न तीन में न तेरह में।

(iii) घड़ों पानी पड़ना।

(iv) उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई।

(v) कोयले की दलाली में हाथ काले।

(vi) गूलर का फूल होना।

(vii) घाट-घाट का पानी पीना।

(viii) भागते भूत की लंगोटी भली।

(ix) अन्धे पीसें कुत्ते खाएँ।

(x) फूल झड़ना।

हल—

(i) गंगा नहाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कठिन कार्य पूर्ण करना

प्रयोग— मंत्री महोदय की औचक निरीक्षण की आहट से अधिकारीगण दिन-रात अपने कार्यों में लगकर गंगा नहाए।

(ii) न तीन में न तेरह में।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जो किसी गिनती में न हो

प्रयोग— शेखर अपने व्यवहार के कारण ‘न तीन में है न तेरह में’।

(iii) घड़ों पानी पड़ना।

वर्ग— मुहावरा 

अर्थ— अत्यन्त लज्जित होना

प्रयोग— श्याम अपने पिता की जेब से पैसे निकाल रहा था कि उसके पिता ने उसे पैसे निकालते देख लिया, श्याम पर घड़ों पानी पड़ गया।

(iv) उतर गयी लोई तो क्या करेगा कोई।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— प्रतिष्ठा के नष्ट होने पर कोई क्या बिगाड़ सकता है

प्रयोग— पूर्व मंत्री जी की घोटाले उजागर होने के बाद और संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त हो गये। सही ही है, ‘जब उतर गई लोई, तब क्या करेगा कोई’।

(v) कोयले की दलाली में हाथ काले।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बुरी संगत से कलंक लगना

प्रयोग— शराबी व्यक्ति से दोस्ती करके मोहन अन्य दोस्तों के बीच शराबी के नाम से ही जाना गया। इसी को कहते हैं, ‘कोयले की दलाली में हाथ काले’।

(vi) गूलर का फूल होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— किसी व्यक्ति या वस्तु का दर्शन दुर्लभ होना

प्रयोग— आजकल चरित्रवान व्यक्ति गूलर के फूल हो गये हैं।

(vii) घाट-घाट का पानी पीना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत अनुभव प्राप्त करना

प्रयोग— शहरी होकर भी तुम रामलाल को धोखा नहीं दे सकते, क्योंकि रामलाल ने भी घाट-घाट का पानी पीया है।

(viii) भागते भूत की लंगोटी भली।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— आशा के विपरीत जो मिले वही बहुत

प्रयोग— विद्यार्थियों को गत वर्ष छात्रवृत्ति नहीं मिली, परन्तु इस वर्ष केवल 100 रूपये प्रत्येक के लिए आया। इस राशि की प्राप्ति हेतु ही विद्यार्थी टूट पड़े, क्योंकि भागते भूत की लंगोटी भली होती है।

(ix) अन्धे पीसें कुत्ते खाएँ।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— किसी के परिश्रम का लाभ अयोग्य द्वारा उठाना

प्रयोग— जनता की गाढ़ी कमाई का लाभ राजनेता खूब उड़ाते है, जिससे अन्धे पीसें कुत्ते खाएँ वाली कहावत चरितार्थ होती है।

(x) फूल झड़ना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मृदुभाषी होना

प्रयोग— प्रवचन में महात्मा जी का व्याख्यान ऐसा था कि मानो फूल झड़ रहे हों।

2011

निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) तोता चश्मी करना।

(ii) बालू से तेल निकालना।

(iii) कानी के ब्याह में सौ जोखम।

(iv) छत्तीस का अंक होना।

(v) खिसियानी बिल्ली खम्भा नोंचे।

(vi) कालिख पोतना।

(vii) नौ दो ग्यारह होना।

(viii) अनदेखा चोर शाह बराबर।

(ix) करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।

(x) घोड़ा घास से यारी करेगा तो खायेगा क्या?

(xi) नौ नगद न तेरह उधार।

(xii) गंगा गये गंगादास, जमुना गये जमुनादास।

हल—

(i) तोता चश्मी करना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कृतघ्न, स्नेह रहित

प्रयोग— पुत्र ने अपने पिता के साथ तोता चश्मी जैसा व्यवहार किया।

(ii) बालू से तेल निकालना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— असम्भव कार्य करना

प्रयोग— आसमान के तारे गिनना बालू से तेल निकालने के समान कार्य है।

(iii) कानी के ब्याह में सौ जोखम।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— एक कमी होने पर अनेक कमियाँ निकालना

प्रयोग— सहायक अध्यापक को एक दिन विद्यालय पहुँचने में देर क्या हुई कि प्रधानाध्यापक ने उन पर कर्तव्य-उल्लंघन के साथ कई दोष मढ़ दिए। सत्य ही है कि कानी के ब्याह में सौ जोखम होते हैं।

(iv) छत्तीस का अंक होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— एक-दूसरे के विपरीत होना

प्रयोग— साम्प्रदायिक शक्तियाँ राष्ट्रीय एकता में बाधक होती हैं, जबकि राष्ट्रीय एकता किसी देश को विकास के पथ पर अग्रसर करती है, इन दोनों में छत्तीस का अंक होता है।

(v) खिसियानी बिल्ली खम्भा नोंचे।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— कार्य में असफल होने पर अटपटा कार्य करना

प्रयोग— मैच हारने पर टीम के कप्तान ने विपक्षी खिलाड़ियों के साथ अभद्रता का परिचय देकर खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे की कहावत चरितार्थ कर दी।

(vi) कालिख पोतना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अपमान करना

प्रयोग— हमारे राजनेता/अभिनेता या प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जब भी अमेरिकी दौरे पर जाते हैं, तो वहाँ के सुरक्षा कर्मियों द्वारा बार-बार तलाशी के नाम पर उन पर कालिख पोती जाती है।

(vii) नौ दो ग्यारह होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— भाग जाना

प्रयोग— उग्रवादी संगठन समाज विरोधी कार्यों के लिए योजनाएँ बना रहे थे कि वहाँ पुलिस बल के पहुँचते ही वे नौ दो ग्यारह हो गए।

(viii) अनदेखा चोर शाह बराबर।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बिना प्रमाण के ईमानदार

प्रयोग— लिपिक की भर्ती के लिए अधिकारी रिश्वत ले रहा था, एक आवेदक ने इसकी शिकायत मंत्री से की तो मंत्री ने कहा, “हम इसकी जाँच कराएँगे, क्योंकि अनदेखा चोर शाह बराबर होता है”।

(ix) करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ—प्रयत्न करते रहना चाहिए, सफलता मिलेगी

प्रयोग— अधिकांश प्रतियोगी छात्र एक-दो बार असफल होने पर निराश हो जाते हैं, जबकि उन्हें यह पता होना चाहिए कि ‘करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’।

(x) घोड़ा घास से यारी करेगा तो खायेगा क्या?

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— पारिश्रमिक लेने में संकोच न करना

प्रयोग— महाविद्यालय में नकल कराने के लिए प्रत्येक परीक्षार्थी से पैसे वसूले जा रहे थे, इस पर एक कर्मचारी ने प्रबंधक से अपने पुत्र के लिए पैसे न लेने की सिफारिश की तो प्रबंधक ने कहा, “घोड़ा घास से यारी करेगा तो खायेगा क्या?”

(xi) नौ नगद न तेरह उधार।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— नगद बेचना उधार बेचने से अच्छा है

प्रयोग— व्यापारी ने अपने ग्राहक से कहा तुम्हारा बकाया बहुत दिनों का हो गया है। अब और उधार नहीं दूँगा, “अब नौ नगद न तेरह उधार”।

(xii) गंगा गये गंगादास, जमुना गये जमुनादास।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अवसरवादी होना

प्रयोग— आज के राजनेता मौका-परस्त होते हैं, लाभ देखकर पार्टी बदलने के साथ अपनी नीतियों को भी बदल लेते हैं। यही प्रक्रिया वे बार-बार अपनाते हैं। इसी को कहते हैं, “गंगा गये गंगादास, जमुना गये जमुनादास”।

2010

नीचे लिखे मुहावरों और लोकोक्तियों का अर्थ बताकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) अपना उल्लू सीधा करना।

(ii) उड़ती चिड़िया पहचानना।

(iii) एक का तीन बनाना।

(iv) गाल बजाना।

(v) घड़ों पानी पड़ जाना।

(vi) घी कहाँ गिरा, खिचड़ी में।

(vii) जैसी बहै बयार, पीठ तब तैसी दीजै।

(viii) तू डाल-डाल मैं पात-पात।

(ix) नीम हकीम खतरे जान।

(x) सब धान बाईस पसेरी।

हल—

(i) अपना उल्लू सीधा करना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— स्वार्थ सिद्ध करना

प्रयोग— आजकल व्यक्तियों में समाज सेवा का भाव नहीं रह गया है। वे अपना उल्लू सीधा करने के लिए समाज सेवक बनते हैं।

(ii) उड़ती चिड़िया पहचानना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मन की बात जानना

प्रयोग— गुरुजनों के सामने झूठ नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि वे उड़ती चिड़िया पहचानते हैं।

(iii) एक का तीन बनाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यधिक लाभ प्राप्त करना

प्रयोग— खाद्य सामग्रियों में दुकानदार मिलावट कर एक का तीन बनाते हैं।

(iv) गाल बजाना।

अर्थ— मुहावरा

अर्थ— बकवास करना

प्रयोग— भारत-चीन सीमा विवाद में चीन हमेशा गाल बजाता रहता है।

(v) घड़ों पानी पड़ जाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यन्त लज्जित होना

प्रयोग— भारतीय विदेश सेवा की पूर्व राजनयिक माधुरी गुप्ता जब पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में पकड़ी गयीं, तो उन पर घड़ों पानी पड़ गया।

(vi) घी कहाँ गिरा, खिचड़ी में।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— लापरवाही के बावजूद भी वस्तु का सदुपयोग होना

प्रयोग— अधिकांश प्रतियोगी वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के से चयन कर लेते हैं और वे प्रश्न सही हो जाते हैं। इसे ही कहते हैं, “घी कहाँ गिरा खिचड़ी में”।

(vii) जैसी बहै बयार, पीठ तब तैसी दीजै।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अवसर के अनुकूल बनना

प्रयोग— ईमानदार थानेदार को समझाते हुए उसके कनिष्ठ ने कहा साहब जैसी बहै बयार, पीठ तब तैसी दीजै।

(viii) तू डाल-डाल मैं पात-पात।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— चालाकी समझ जाना

प्रयोग— सांसद महोदय ने अपने विरोधियों से कहा, हमें क्या समझते हो तू डाल-डाल मैं पात-पात।

(ix) नीम हकीम खतरे जान।

वर्ग— लोकोक्ति

वर्ग— अल्पज्ञ से सदा खतरे की सम्भावना होना

प्रयोग— झोला छाप डॉक्टर से इलाज कराने में सदा जान का खतरा रहता है, क्योंकि उनके लिए नीम हकीम खतरे जान वाली उक्ति चरितार्थ होती है।

(x) सब धान बाईस पसेरी।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— सबको एक समान मानकर व्यवहार करना

प्रयोग— प्रजातंत्र की यही सबसे बड़ी खामी है कि यहाँ सब धान बाईस पसेरी तौला जाता है, योग्य-अयोग्य का विचार नहीं किया जाता।

2009

निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट करते हुए, उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) अँगूठा दिखाना।

(ii) आगबबूला होना।

(iii) एक थैली के चट्टे-बट्टे।

(iv) एक और एक ग्यारह।

(v) उल्टी गंगा बहाना।

(vi) कफन सिर पर बाँधना।

(vii) खाक छानना।

(viii) धज्जियाँ उड़ाना।

(ix) बाँह पकड़ना।

(x) बाएँ हाथ का खेल।

हल—

(i) अँगूठा दिखाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मदद करने से मना करना

प्रयोग— बचपन में राधा ने विभा की काफी मदद की, किन्तु जब राधा, विभा से सहायता माँगने गयी, तो उसने उसे अँगूठा दिखा दिया।

(ii) आग बबूला होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यन्त क्रोधित होना

प्रयोग— श्रीराम द्वारा सीता स्वयंवर में शिवजी का धनुष तोड़ने पर परशुराम जी आग बबूला हो गए थे।

(iii) एक थैली के चट्टे-बट्टे।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— समान आदत और स्वभाव वाले

प्रयोग— विपक्षी दल संसद या विधानमंडल में तो सरकार की हर नीतियों का विरोध करते हैं, किन्तु वास्तविकता यह होती है कि ये आपस में एक-दूसरे के सहयोगी होते हैं, क्योंकि ये एक थैली के चट्टे-बट्टे होते हैं।

(iv) एक और एक ग्यारह।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— संगठन में शक्ति का होना

प्रयोग— बांग्लादेश की स्वतंत्रता के युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ भारत एवं बांग्लादेश एक और एक ग्यारह हो गये थे।

(v) उल्टी गंगा बहाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— उल्टा कार्य करना

प्रयोग— भारत कुछ वस्तुओं (यथा कला एवं दस्तकारी) में सम्पन्न है तथा उन वस्तुओं का निर्यात करता है, जबकि कुछ लोग उन्हीं विदेशी वस्तुओं को मँगाकर उल्टी गंगा बहाते हैं।

(vi) कफन सिर पर बाँधना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— हर प्रकार की बाधा झेलने को तैयार रहना

प्रयोग— भारतीय सेना के जवान हमेशा कफन सिर पर बाँधकर तैयार रहते हैं।

(vii) खाक छानना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— भटकते रहना

प्रयोग— सीता जी की खोज करते हुए श्रीराम वन-वन खाक छानते रहे।

(viii) धज्जियाँ उड़ाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बुरी तरह परास्त करना

प्रयोग— कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना की धज्जियाँ उड़ा दी थीं।

(ix) बाँह पकड़ना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— आश्रय चाहना। सहायता प्राप्त करना

प्रयोग— तिब्बती गुरु दलाईलामा ने भारत की बाँह पकड़ ली है।

(x) बाएँ हाथ का खेल।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत आसान कार्य

प्रयोग— राजनीतिज्ञों के लिए कानून नाम की कोई चीज नहीं रह गई है, उनके लिए सत्ता का दुरुपयोग कर कानून में परिवर्तन करना बायें हाथ का खेल हो गया है।

2008

निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) तू भी रानी मैं भी रानी, कौन भरेगा पानी।

(ii) रस्सी जल गयी पर ऐंठन न गयी।

(iii) श्रीगणेश करना।

(iv) अंधे पीसें कुत्ते खाएँ।

(v) नानी याद आना।

(vi) ढाक के तीन पात।

(vii) जले पर नमक छिड़कना।

(viii) आँखों का पानी गिरना।

(ix) खुशामदी टट्टू होना।

(x) टाँय-टाँय फिस होना।

उत्तर—

(i) तू भी रानी मैं भी रानी, कौन भरेगा पानी।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अहम के टकराव के कारण काम शुरू न हो पाना

प्रयोग— गंगा सफाई के लिए सभी नेता बात करते हैं, किन्तु जब सफाई की बात आती है तो ‘तू भी रानी मैं भी रानी, कौन भरेगा पानी’ वाली स्थिति आ जाती है।

(ii) रस्सी जल गयी पर ऐंठन न गयी।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— सर्वनाश होने पर भी घमण्ड नहीं जाना

प्रयोग— सेठ रामनाथ की हवेली जलकर राख हो गयी तथा उनका सारा धन नष्ट हो गया, फिर भी उनका वही रौब है। यह देखकर लोग कहने लगे कि रस्सी जल गयी पर ऐंठन न गयी।

(iii) श्रीगणेश करना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— शुभारम्भ करना

प्रयोग— मंत्री महोदय ने अपने दौरे के दौरान कई परियोजनाओं का श्रीगणेश किया।

(iv) अन्धे पीसें कुत्ते खाएँ।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— किसी के परिश्रम का लाभ अयोग्य द्वारा उठाना

प्रयोग— जनता की गाढ़ी कमाई का लाभ राजनेता खूब उड़ाते है, जिससे अन्धे पीसें कुत्ते खाएँ वाली कहावत चरितार्थ होती है।

(v) नानी याद आना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— परेशानी में पड़ जाना

प्रयोग— विद्यार्थी पूरे साल घूमते रहते हैं, जब परीक्षा सिर पर आती है तो उन्हें नानी याद आ जाती है।

(vi) ढाक के तीन पात।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— हमेशा एक-सी दशा में रहना

प्रयोग— कामचोर आदमी चाहे दिल्ली जाए अथवा मुम्बई, वह हमेशा ढाक के तीन पात ही रहता है।

(vii) जले पर नमक छिड़कना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दुःखी को और दुःखी करना

प्रयोग— एक तो कबीर की दुर्घटना में आँख चली गयी, दूसरे लोग उसे डाँटने लगे। यह तो उसके ऊपर जले पर नमक छिड़कने जैसा हुआ।

(viii) आँखों का पानी गिरना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— निर्लज्ज होना

प्रयोग— सुधा की आँखों का पानी गिर गया है, इसीलिए वह सबके सामने भद्दे मजाक करती है।

(ix) खुशामदी टट्टू होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मुँह पर बड़ाई करने वाला

प्रयोग— कनिष्ठ अधिकारी अपने ज्येष्ठ अधिकारियों के खुशामदी टट्टू होते हैं।

(x) टाँय-टाँय फिस्स होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बुरी तरह असफल होना

प्रयोग— सत्ताधारी दल चुनाव के उपरान्त पुनः सत्ता में आने के बाद कई योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सोच रहा था, किन्तु चुनाव में मिली कड़ी हार से उसकी योजनाएँ टाँय-टाँय फिस्स हो गयी।

2008 (विशेष चयन)

निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों का अर्थ स्पष्ट करके वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) उल्लू सीधा करना।

(ii) आँख का काँटा होना।

(iii) गिरगिट की तरह रंग बदलना।

(iv) अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना।

(v) आस्तीन का साँप।

(vi) खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

(vii) अन्धे के हाथ बटेर लगना।

(viii) घर की मुर्गी दाल बराबर।

(ix) कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा।

(x) थोथा चना बाजे घना।

हल—

(i) उल्लू सीधा करना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— स्वार्थ सिद्ध करना

प्रयोग— आजकल नेतागण जनता को बहलाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं।

(ii) आँख का काँटा होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— शत्रु होना

प्रयोग— भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करने वाले अधिकारियों को ऐसे लोग आँख का काँटा समझते हैं।

(iii) गिरगिट की तरह रंग बदलना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अवसरवादी होना

प्रयोग— स्वार्थी व्यक्ति गिरगिट की तरह रंग बदलता रहता है।

(iv) अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अपनी प्रशंसा स्वयं करना

प्रयोग— पूर्ववर्ती केन्द्रीय सरकार में मंत्रियों द्वारा घोटालों पर घोटाले किये जा रहे थे, किन्तु सरकार बार-बार भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक मजबूत लोकपाल की बात कर रही थी और प्रधानमंत्री जी अपनी स्वच्छ छवि की दुहाई दे रहे थे। इसे ही कहते हैं अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना।

(v) आस्तीन का साँप।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विश्वासघाती

प्रयोग— मोहन ने अपने पुत्र को इतने लाड-प्यार से पाला, उसे क्या पता था कि वही एक दिन आस्तीन का साँप होगा।

(vi) खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अत्यधिक परिश्रम के बाद भी थोड़ा लाभ

प्रयोग— राकेश दिन-रात पढ़ाई में लगा रहता था, किन्तु इतने परिश्रम के बाद भी वह तृतीय श्रेणी में ही उत्तीर्ण हो सका। इस पर उसके घर वालों ने कहा खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

(vii) अंधे के हाथ बटेर लगना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बिना परिश्रम के ही उपलब्धि प्राप्त होना

प्रयोग— राकेश की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पूर्ण नहीं थी, किन्तु वह परीक्षा पास कर गया। यह तो अन्धे के हाथ बटेर लगने जैसी बात हो गई।

(viii) घर की मुर्गी दाल बराबर।

वर्ग— लोकोक्ति  

अर्थ— अपने घर में गुणी व्यक्ति को कम सम्मान मिलना

प्रयोग— भारतीय प्रतिभाओं को अपने देश में उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा है, जबकि विदेशों में इन्हें यश एवं सम्मान प्राप्त हो रहा है। इसका कारण यह है कि इन्हें सरकार घर की मुर्गी दाल बराबर मानती है।

(ix) कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— असंगत वस्तुओं/व्यक्तियों को एकत्र कर कुछ बनाना

प्रयोग— गठबन्धन सरकार इच्छानुसार कार्य नहीं कर सकती, क्योंकि मंत्रिमण्डल विभिन्न पार्टियों के सदस्यों द्वारा बने होते हैं, जो कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा होते हैं।

(x) थोथा चना बाजे घना।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— ओछे व्यक्ति को आडम्बर की आवश्यकता होती है

प्रयोग— अल्पज्ञ अपने विचारों को ऐसे प्रस्तुत करता है, कि ऐसा लगता है कि वह सब कुछ जानता है। ऐसे लोगों पर थोथा चना बाजे घना वाली उक्ति चरितार्थ होती है।

2007

निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों में से किन्हीं दस के अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) अपना-सा मुँह लेकर रह जाना।

(ii) आँखों पर चर्बी छाना।

(iii) ऊँची दुकान, फीका पकवान।

(iv) एक थैली के चट्टे-बट्टे।

(v) घाट-घाट का पानी पीना।

(vi) छठी का दूध याद आना।

(vii) ढोल की पोल होना।

(viii) दर किनार कर देना।

(ix) आधा तीतर आधा बटेर।

(x) अंधों में काना राजा।

(xi) आगे कुआँ, पीछे खाईं।

(xii) उतर गई लोई, क्या करेगा कोई।

(xiii) का बरखा जब कृषि सुखाने।

(xiv) खग जाने खग की ही भाषा।

(xv) गँजेड़ी यार किसके, दम लगाके खिसके।

हल—

(i) अपना-सा मुँह लेकर रह जाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— किसी कार्य में असफल होने पर लज्जित होना

प्रयोग— चुनाव में निवर्तमान प्रधान जी ने अपने प्रतिद्वन्द्वी को पराजित करने का पूर्ण प्रयास किया, परन्तु स्वयं पराजित हो गए और अपना-सा मुँह लेकर रह गए।

(ii) आँखों पर चर्बी छाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मदान्ध होना

प्रयोग— अनुराग अब किसी को नहीं पहचानता क्योंकि उसकी आँखों पर चर्बी छा गयी है।

(iii) ऊँची दुकान, फीका पकवान।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— नाम के अनुरूप गुण न होना

प्रयोग— वर्तमान समय में साधु-संन्यासी ऐसे क्रिया-कलापों में व्यस्त रहते हैं कि लोगों को कहना पड़ता है, ऊँची दुकान फीका पकवान।

(iv) एक थैली के चट्टे-बट्टे।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— समान आदत और स्वभाव वाले

प्रयोग— आजकल नेतागण बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, किन्तु यथार्थता में सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं।

(v) घाट-घाट का पानी पीना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अनुभवी होना

प्रयोग— राम सजीवन कभी धोखा नहीं खा सकता, क्योंकि उसने घाट-घाट का पानी पीया है।

(vi) छठी का दूध याद आना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत परेशान या हैरान होना

प्रयोग— रंजन ने सज्जन को ऐसा थप्पड़ मारा कि उसे छठी का दूध याद आ गया।

(vii) ढोल की पोल होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दिखावा/असलियत छिपाना

प्रयोग— आजकल के नेताओं पर विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये ढोल की पोल होते हैं।

(viii) दर किनार कर देना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अलग-थलग कर देना

प्रयोग— घोटाले में पकड़े गये मंत्री को प्रधानमंत्री ने मंत्रिपरिषद् से हटाकर दर किनार कर दिया।

(ix) आधा तीतर आधा बटेर

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बेमेल मिश्रण

प्रयोग— धार्मिक पुस्तकों के बीच फिल्मी पुस्तकों को रखना आधा तीतर आधा बटेर के समान है।

(x) अंधों में काना राजा

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मूर्खों के बीच कुछ चतुर

प्रयोग— गाँव में अनपढ़ व्यक्तियों के बीच थोड़ा पढ़ा-लिखा व्यक्ति अन्धों में काना राजा के समान होता है।

(xi) आगे कुआँ, पीछे खाई

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— चारों तरफ कठिनाई ही कठिनाई

प्रयोग— ईमानदार अधिकारियों को आगे कुआँ, पीछे खाई दिखाई देता है, क्योंकि एक तरफ उन्हें अपने कर्त्तव्य से भी पीछे हटने का डर रहता है, तो दूसरी तरफ मंत्री की नाराजगी का।

(xii) उतर गई लोई, क्या करेगा कोई

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— प्रतिष्ठा धूमिल होने के बाद कोई क्या बिगाड़ सकता है

प्रयोग— प्रेमी युगल को अब किसी बात का डर नहीं रह गया है, क्योंकि जब उतर गई लोई, तो क्या करेगा कोई।

(xiii) का बरखा जब कृषि सुखाने

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— समय पर वस्तु न मिलने पर वह वस्तु व्यर्थ हो जाती है

प्रयोग— राम गोपाल के बीमार बेटे की मृत्यु होने के बाद डॉक्टर उसके घर पहुँचे। यह देखकर लोग कहने लगे कि ‘का बरखा जब कृषि सुखाने’।

(xiv) खग जाने खग की ही भाषा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जो जिस संगति में रहता है, उसका भेद जानता है

प्रयोग— राजनेता की दाँव-पेंच की भाषा राजनेता ही समझ सकता है, सामान्य व्यक्ति नहीं, क्योंकि खग जाने खग की ही भाषा।

(xv) गँजेड़ी यार किसके, दम लगाके खिसके

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— स्वार्थी व्यक्ति स्वार्थ सिद्ध करने के बाद मुँह फेर लेता है

प्रयोग— परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद छात्र अपने गुरुजन की तरफ देखते तक नहीं। उनके इस व्यवहार को देखकर कहा जाता है कि गँजेड़ी यार किसके, दम लगाके खिसके।

2006

निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों में से किन्हीं दस के अर्थ बतलाते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) तीन तेरह होना।

(ii) पहाड़ टूट पड़ना।

(iii) पौ बारह होना।

(iv) हाथ पैर मारना।

(v) सिर उठाना।

(vi) टाँग मारना।

(vii) दाँत काटी रोटी।

(viii) चिराग तले अँधेरा।

(ix) आँख के अन्धे गाँठ के पूरे।

(x) आँख के अन्धे नाम नयनसुख।

(xi) आगे नाथ न पीछे पगहा।

(xii) कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली।

(xiii) आम के आम गुठलियों के दाम।

(xiv) अधजल गगरी छलकत जाय।

हल—

(i) तीन तेरह होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— तितर-बितर होना

प्रयोग— आंदोलनकारी इकट्ठा होकर जुलूस निकालने वाले ही थे कि तभी पुलिस आ गई और वे तीन तेरह हो गये।

(ii) पहाड़ टूट पड़ना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अचानक विपत्ति का आना

प्रयोग— रामनाथ का एकमात्र कमाऊ पूत रेल दुर्घटना में मारा गया, जिससे उसके परिवार पर अचानक पहाड़ टूट पड़ा।

(iii) पौ बारह होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अधिक लाभ होना

प्रयोग— राम सजीवन विधायक चुन लिये गये तथा उनकी पत्नी भी जिला पंचायत अध्यक्ष चुन ली गईं, अब तो उनकी पौ बारह हो गई।

(iv) हाथ पैर मारना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— असफल प्रयत्न करना

प्रयोग— बिल्ली पिंजड़े में बन्द होने के बाद बाहर निकलने के लिए हाथ पैर मारती है।

(v) सिर उठाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विद्रोह करना

प्रयोग— औरंगजेब ने अपने पिता के विरुद्ध सिर उठाया था।

(vi) टाँग मारना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विघ्न डालना

प्रयोग— विधान मण्डल में जब जन-कल्याणकारी कार्यों पर चर्चा चल रही थी, तो कुछ विधायकों ने बीच में ही बेवजह टाँग मार दी।

(vii) दाँत काटी रोटी।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— घनिष्ठ मित्रता

प्रयोग— कृष्ण और सुदामा में दाँत काटी रोटी थी।

(viii) चिराग तले अँधेरा।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपना दोष दिखाई न देना

प्रयोग— हर व्यक्ति दूसरे की बुराई खोजता है और उसका उपहास करता है, किन्तु वह भूल जाता है कि चिराग तले अँधेरा होता है।

(ix) आँख के अन्धे गाँठ के पूरे।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— मूर्ख होते हुए भी धनवान होना

प्रयोग— सेठ मोहनलाल निरक्षर हैं, किन्तु उनके पूर्वजों की सम्पत्ति इतनी है कि क्षेत्र में उनकी चर्चा ‘आँख के अन्धे गाँठ के पूरे’ रूप में होती है।

(x) आँख के अन्धे नाम नयनसुख।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— नाम के विपरीत गुण

प्रयोग— मिठाईलाल हमेशा दूसरों के लिए कटु भाषा का प्रयोग करता है। इसलिए उसे लोग ‘आँख का अन्धा नाम नयनसुख’ कहते हैं।

(xi) आगे नाथ न पीछे पगहा।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जिसका कोई न हो

प्रयोग— लालता प्रसाद निःसन्तान है, फिर भी अधिक धन कमाने के चक्कर में परेशान रहता है। उसे लोग समझाते हैं कि इतना मत परेशान हो, क्योंकि तुम्हारी स्थिति आगे नाथ न पीछे पगहा वाली है।

(xii) कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दो असमान व्यक्तियों की तुलना

प्रयोग— सोहन धनाढ्य परिवार से सम्बन्ध रखता है। वह अपने मित्र कमल से हर छोटी बात पर कहता है कि तुम्हारी क्या औकात? “कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली”।

(xiii) आम के आम गुठलियों के दाम।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दोहरा लाभ

प्रयोग— किसान गेहूँ की कटाई करने के बाद गेहूँ तो बेचते ही हैं, साथ ही इसका भूसा भी बेच देते हैं। इस प्रकार उनके लिए आम के आम गुठलियों के दाम वाली उक्ति चरितार्थ होती है।

(xiv) अधजल गगरी छलकत जाय।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— कम ज्ञान अधिक दिखावा

प्रयोग— अल्पज्ञ व्यक्ति बड़ी-बड़ी बातें करता है, मानो कि काफी विद्वान हो। ऐसे व्यक्ति को लोग कहते हैं, ‘अधजल गगरी छलकत जाय’।

2005

निम्नलिखित मुहावरों/लोकोक्तियों में से किन्हीं दस के अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) लकीर का फकीर होना।

(ii) चींटी के पर निकलना।

(iii) घी के दिये जलाना।

(iv) टेढ़ी खीर होना।

(v) घोड़े बेचकर सोना।

(vi) कोढ़ में खाज होना।

(vii) अपनी खिचड़ी अलग पकाना।

(viii) उल्टी गंगा बहाना।

(ix) अधजल गगरी छलकत जाय।

(x) हाथ कंगन को आरसी क्या।

(xi) उल्टे बाँस बरेली को।

(xii) जस दूल्हा तस बनी बराता।

(xiii) घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध।

(xiv) एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा।

(xv) एक तो चोरी, दूसरे सीना जोरी।

हल—

(i) लकीर का फकीर होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— पुराने रीति रिवाजों का अनुसरण करना

प्रयोग— आजकल के युवा लकीर का फकीर होना पसन्द नहीं करते हैं।

(ii) चींटी के पर निकलना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— नष्ट होने के करीब होना

प्रयोग— अपराधियों के दुस्साहस भरे कार्यों को देखकर लोग कहने लगे कि आजकल चींटियों के पर निकल आये हैं।

(iii) घी के दिये जलाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— खुशियाँ मनाना

प्रयोग— श्रीराम के वनवास से अयोध्या वापस आने पर वहाँ के लोगों ने घी के दिये जलाये थे।

(iv) टेढ़ी खीर होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कठिन कार्य

प्रयोग— भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसना टेढ़ी खीर हो गयी है।

(v) घोड़े बेचकर सोना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— निश्चिन्त हो जाना

प्रयोग— सोमेश अपनी बेटी की शादी करने के बाद घोड़े बेचकर सो रहा है।

(vi) कोढ़ में खाज होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— एक दुःख पर दूसरा दुःख आना

प्रयोग— चुनाव में प्रधान जी की हार हुई और दूसरे दिन उनका बीमार बेटा भी चल बसा, इसी को कोढ़ में खाज कहते हैं।

(vii) अपनी खिचड़ी अलग पकाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अलग होना/स्वार्थी होना

प्रयोग— यदि सभी अपनी खिचड़ी अलग पकाने लगें तो देश और समाज की उन्नति होने से रही।

(viii) उल्टी गंगा बहाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— उल्टा कार्य करना, परम्परा विरुद्ध कार्य करना

प्रयोग— भारत कुछ वस्तुओं (यथा-कला एवं दस्तकारी) में सम्पन्न है तथा उन वस्तुओं का निर्यात करता है, जबकि कुछ लोग उन्हीं विदेशी वस्तुओं को मँगाकर उल्टी गंगा बहाते हैं।

(ix) अधजल गगरी छलकत जाय।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अल्प ज्ञान या गुण होने पर अधिक दिखावा करना

प्रयोग— निरक्षर व्यक्ति थोड़ा-सा ज्ञान प्राप्त कर लेने के बाद अपने को विद्वान समझने लगता है, जबकि विद्वान व्यक्ति ऐसा नहीं करता, क्योंकि उसके ऐसा करने से अधजल गगरी छलकत जाय वाली उक्ति चरितार्थ होती है।

(x) हाथ कंगन को आरसी क्या।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं

प्रयोग— मुम्बई हमले में यह ज्ञात हो गया कि आतंकवाद को बढ़ावा किसने दिया। सत्य ही है हाथ कंगन को आरसी क्या।

(xi) उल्टे बाँस बरेली को।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— विपरीत कार्य

प्रयोग— जिन वस्तुओं को सरकार निर्यात करती है, उन्हीं वस्तुओं में अधिक गुणवत्ता समझकर कभी-कभी आयात भी करती है। इसी को कहते हैं, ‘उल्टे बाँस बरेली को’।

(xii) जस दूल्हा तस बनी बराता।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपने समान ही संगत रखना

प्रयोग— चोरी, डकैती करने वाले गोलू को अपने समान तीन चोर और मिल गये। अब इनका ‘जस दूल्हा तस बनी बराता’ वाला हाल हो गया।

(xiii) घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— पास की वस्तु का महत्त्व न होना

प्रयोग— देश में बौद्धिक सम्पदा का उपयोग सरकार उचित पारिश्रमिक देकर नहीं कर पा रही है, जबकि विदेश में उन्हें पारिश्रमिक के साथ सम्मान भी प्राप्त होता है। इसीलिए कहा गया है कि घर का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध।

(xiv) एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दोहरा कटुत्व। एक के साथ दूसरा दोष।

प्रयोग— मनोज एक तो पढ़ने में कमजोर है दूसरे अपने सहपाठियों के साथ मारपीट करता है। ऐसे लोगों के लिए एक तो करेला, दूजे नीम चढ़ा वाली कहावत सिद्ध होता है।

(xv) एक तो चोरी, दूसरे सीना जोरी।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— गलती करके रौब गाँठना

प्रयोग— श्याम ने एक तो अपने सहपाठियों के साथ झगड़ा किया, दूसरे उन सहपाठियों को विद्यालय में धमकी भी देता है। यहाँ एक तो चोरी, दूसरे सीना जोरी वाली कहावत सिद्ध होती है।

2004

निम्नलिखित लोकोक्तियों एवं मुहावरों में से किन्हीं दस का अर्थ लिखकर वाक्यों में उनका प्रयोग कीजिए और बताइए कि वह मुहावरा है या लोकोक्ति—

(क) आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास।

(ख) एक हाथ से ताली नहीं बजती।

(ग) काठ की हाँड़ी बार-बार नहीं चढ़ती।

(घ) आम के आम गुठलियों के दाम।

(च) दूर के ढोल सुहावने होते हैं।

(छ) हर्र लगे न फिटकरी रंग चोखा।

(ज) नाम बड़े दर्शन थोड़े।

(झ) बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद।

(ट) ऊँची दुकान फीके पकवान।

(ठ) गाल बजाना।

(ड) मुट्ठी गरम करना।

(ढ) अँगूठा छाप होना।

(त) पट्टी पढ़ना।

हल—

(क) आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर छोटे कार्य में लग जाना

प्रयोग— नरेश, समाचार-पत्र तो इसलिए शुरू किया था कि वह जनता की समस्याओं को बेबाक छापेगा, किन्तु वह तो नेताओं की झूठी तारीफ छापकर पैसा बनाने लगा। यह क्या हुआ, आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास।

(ख) एक हाथ से ताली नहीं बजती।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— केवल एकपक्षीय सक्रियता से कार्य पूरा नहीं होता

प्रयोग— अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत हमेशा आतंकवाद का विरोध करता रहा, जबकि इसको प्रश्रय देने वालों को सबसे आगे आना चाहिए, क्योंकि एक हाथ से ताली नहीं बजती।

(ग) काठ की हाँड़ी बार-बार नहीं चढ़ती।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— कपटपूर्ण व्यवहार एक बार ही चलता है

प्रयोग— पाकिस्तान से सम्बन्ध सुधारने के लिए भारत ने कई दौर की वार्ता की, किन्तु बदले में ‘कारगिल युद्ध’ जैसा परिणाम मिला। अब भारत सतर्क हो गया है, क्योंकि काठ की हाँड़ी बार-बार नहीं चढ़ती।

(घ) आम के आम गुठलियों के दाम।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दोहरा लाभ

प्रयोग— गन्ने का रस तो वह बेचता ही है गन्ने का छीलन भी वह गौशाला वाले को बेच देता है जिससे उसे आम के आम गुठलियों के दाम मिल जाते हैं।

(च) दूर के ढोल सुहावने होते हैं।

वर्ग— लोकोक्ति

वर्ग— अपरिचित और अप्राप्त वस्तु अच्छी लगती है

प्रयोग— जितेन्द्र को चीन का बना कपड़ा अधिक पसन्द है, जबकि भारत का बना कपड़ा काफी अच्छा होता है। ठीक ही कहा गया है, दूर के ढोल सुहावने होते हैं।

(छ) हर्र लगे न फिटकरी रंग चोखा होय।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बिना कुछ खर्च किये काम बन जाना

प्रयोग— संदीप इतना निर्लज्ज है कि चाहता है कि बिना एक पैसा खर्च किए हर काम हो जाये। इसी को कहते है कि हर्र लगे न फिटकरी रंग चोखा होय।

(ज) नाम बड़े दर्शन थोड़े।

वर्ग— लोकोक्ति

वर्ग— प्रसिद्धि के अनुसार गुण न होना

प्रयोग— नेता जी की जितनी तारीफ मैंने सुनी थी उनके दर्शन करने पर मैंने उन्हें उतना पाया नहीं। नाम बड़े और दर्शन थोड़े होने वाली उक्ति चरितार्थ हो गई।

(झ) बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— मूर्ख किसी अच्छी वस्तु का महत्त्व नहीं समझ सकता

प्रयोग— राष्ट्रीय स्वतंत्रता में खादी वस्त्रों का प्रचार-प्रसार अत्यधिक हुआ, जो आज भी प्रासंगिक है, किन्तु इन वस्त्रों से आजकल लोग मुँह मोड़ते हैं। सत्य कहा गया है कि बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद।

(ट) ऊँची दुकान फीके पकवान।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— प्रदर्शन तो अधिक और सार की बात कम

प्रयोग— अंग्रेज़ी स्कूलों में चमक-दमक तो अधिक होती है, किन्तु वे बच्चों का वास्तविक विकास करने पर ध्यान कम देते हैं। यही है ऊँची दुकान फीके पकवान।

(ठ) गाल बजाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बकवास करना

प्रयोग— आतंकवाद के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की वार्ता हुई, तो पाकिस्तान केवल गाल बजाता रहा।

(ड) मुट्ठी गरम करना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— रिश्वत देना

प्रयोग— आजकल बाबू या अधिकारी की मुट्ठी गरम किए बिना किसी दफ्तर में काम नहीं हो सकता।

(ढ) अँगूठा छाप होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— निरक्षर होना

प्रयोग— शिक्षा का अधिकार लागू होने के साथ सरकार का उद्देश्य है कि समाज में कोई अँगूठा छाप न रहे, फिर भी यदि ऐसा होता है, तो निश्चित ही यह समाज के लिए अभिशाप है।

(त) पट्टी पढ़ाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— भुलावा देना

प्रयोग— आतंकवाद पर जब भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता होती है, तो पाकिस्तान हमेशा पट्टी पढ़ाता है।

2004 (विशेष चयन)

निम्नलिखित लोकोक्तियों और मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में उनका प्रयोग कीजिये :

(क) अंधों में काना राजा।

(ख) अधजल गगरी छलकत जाय।

(ग) आँख के अंधे नाम नयनसुख।

(घ) घर का भेदी लंका ढाहे।

(च) नक्कारखाने में तूती की आवाज।

(छ) अपना उल्लू सीधा करना।

(ज) आँख का काजल चुराना।

(झ) आसमान सिर पर उठाना।

(ट) कच्चा चिट्ठा खोलना।

हल—

(क) अंधों में काना राजा।

वर्ग— मुहावरा  

अर्थ— अयोग्य व्यक्तियों में कम अयोग्य व्यक्ति का अधिक महत्त्व

प्रयोग— गाँव के भोले-भाले गँवार लोगों के बीच में चुनाव में राजनेता अपना लाभ प्राप्त करने के लिए अन्धों में काना राजा को ढूँढ़ते हैं।

(ख) अधजल गगरी छलकत जाय।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— थोड़ा-सा ज्ञान या धन प्राप्त कर लेने पर बहुत अधिक इतराना

प्रयोग— निरक्षर व्यक्ति थोड़ा-सा ज्ञान प्राप्त कर लेने के बाद अपने को विद्वान समझता है, जबकि विद्वान व्यक्ति ऐसा नहीं करता, क्योंकि ऐसा करने से अधजल गगरी छलकत जाय वाली उक्ति चरितार्थ होती है।

(ग) आँख के अन्धे नाम नयनसुख।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— नाम के विपरीत गुण

प्रयोग— विवेक के मूर्खता भरे कार्यों से उसके घर वाले हमेशा परेशान रहते हैं, इसलिए लोग कहते हैं, ‘आँख के अन्धे नाम नयनसुख’।

(घ) घर का भेदी लंका ढाहे।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— आपसी फूट अत्यधिक हानिकारक होती है

प्रयोग— जयचन्द ने मुहम्मद गोरी से मिलकर घर का भेदी लंका ढाए वाली उक्ति चरितार्थ कर दी थी।

(च) नक्कारखाने में तूती की आवाज।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बड़ों के सामने छोटे का महत्त्व कम होना

प्रयोग— विद्वत सभा में गाँव का किसान अनायास बोलने लगा। उसका बोलना नक्कारखाने में तूती की आवाज जैसा ही था।

(छ) अपना उल्लू सीधा करना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— स्वार्थ सिद्ध करना

प्रयोग— आजकल व्यक्तियों में समाज सेवा का भाव नहीं रह गया। वे अपना उल्लू सीधा करने के लिए समाज सेवक बनते हैं।

(ज) आँख का काजल चुराना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सफाई से चोरी करना

प्रयोग— आजकल चोर इतने चालाक हो गये हैं कि देखते ही देखते आँखों का काजल चुरा लेते हैं।

(झ) आसमान सिर पर उठाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत अधिक जिद करना

प्रयोग— छोटे बच्चे अपनी मनचाही वस्तु पाने के लिए आसमान सिर पर उठा लेते हैं।

(ट) कच्चा चिट्ठा खोलना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सारे भेद खोलना

प्रयोग— लोग अपना काम निकालने के लिए दूसरे का कच्चा चिट्ठा खोलने की धमकी देते हैं।

2003

अधोलिखित लोकोक्तियों और मुहावरों में से किन्हीं पाँच लोकोक्तियों और पाँच मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में उनका प्रयोग कीजिए :

  1. अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना।
  2. अपनी खिचड़ी अलग पकाना।
  3. हाथ-पाँव फूलना।
  4. एक थैली के चट्टे-बट्टे होना।
  5. कुएँ में बाँस डालना।
  6. थाली का बैंगन होना।
  7. आधा तीतर आधा बटेर।
  8. आँख का अंधा गाँठ का पूरा।
  9. आगे नाथ न पीछे पगहा।
  10. उँगली पकड़कर पहुँचा पकड़ना।
  11. एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा।
  12. दाल-भात में मूसल चन्द।

हल—

1. अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— आत्मप्रशंसा करना

प्रयोग— दीपक ने कभी अंग्रेज़ी नहीं पढ़ी है। अंग्रेज़ी के दो-चार शब्द सीखकर दिन भर लोगों को अंग्रेजी समझाता रहता है और कहता है कि मुझसे अच्छी अंग्रेज़ी किसी को नहीं आती। यही है, ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’।

2. अपनी खिचड़ी अलग पकाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अलग होना। स्वार्थी होना

प्रयोग— गठबन्धन की राजनीति में छोटी पार्टियाँ समर्थन तो दे देती हैं, परन्तु जैसे अवसर मिलता है, वैसे ही वे दूसरी पार्टी में शामिल हो जाती हैं। यह अपनी खिचड़ी अलग पकाने जैसा ही है।

3. हाथ-पाँव फूलना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— घबड़ा जाना

प्रयोग— शेर की दहाड़ सुनकर शिकारी के हाथ-पाँव फूल गये।

4. एक थैली के चट्टे-बट्टे होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— समान आदत और स्वभाव वाले

प्रयोग— आजकल के सभी नेतागण एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं।

5. कुएँ में बाँस डालना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— गहराई की थाह लगाना। अच्छी तरह से जाँच-पड़ताल करना

प्रयोग— सभी दलों के राजनेता एक ही थैली के चट्टे-बट्टे है, कोई भी भरोसे के लायक नहीं है।

6. थाली का बैंगन होना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अस्थिर चित्त वाला व्यक्ति

प्रयोग— गोलू पर कभी विश्वास मत करना। वह देखने मात्र से ही थाली का बैंगन लगता है।

7. आधा तीतर आधा बटेर।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बेमेल मिश्रण

प्रयोग— चप्पल के साथ पैंट और पैंट के ऊपर कुर्ता, यह तो आधा तीतर आधा बटेर वाली उक्ति को चरितार्थ कर रहे हो।

8. आँख का अंधा गाँठ का पूरा।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— मूर्ख किन्तु सम्पन्न

प्रयोग— मालिक में कोई खास अक्ल नहीं है, पर उसकी फैक्ट्री से उसको खूब आमदनी होती है। इसी को कहते हैं, ‘आँख का अंधा गाँठ का पूरा’।

9. आगे नाथ न पीछे पगहा।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बिल्कुल स्वतंत्र

प्रयोग— संजय की बराबरी मत करो, क्योंकि उसके आगे नाथ न पीछे पगहा है।

10. उँगली पकड़कर पहुँचा पकड़ना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— जरा-सा सहारा मिलते ही कुछ और पाने की लालसा करना

प्रयोग— पहले तो किराये पर मकान लिया, अब मालिक बनने की ताक में हो, यानी उँगली पकड़कर पहुँचा पकड़ना चाहते हो।

11. एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दोहरा कटुत्व

प्रयोग— मनीषा एक तो पढ़ने में कमजोर है और दूसरे शिक्षकों के प्रति उसका व्यवहार ठीक नहीं है। ऐसे लोगों के लिए ही कहा गया है, ‘एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा’।

12. दाल-भात में मूसलचन्द।

वर्ग— लोकोक्ति

वर्ग— बीच में दखल देने वाला

प्रयोग— हम दोनों के बीच में तर्क-वितर्क हो ही रहा था कि रामदेव का दाल-भात में मूसल चन्द की भाँति बीच में बोलना मुझे अच्छा नहीं लगा।

2002

लोकोक्तियों और मुहावरों में से किन्हीं पाँच लोकोक्तियों और मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में उनका प्रयोग कीजिए—

(क) अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

(ख) आप भला तो जग भला।

(ग) अंधे के आगे रोवे, अपने दीदा खोवे।

(घ) जल में गाड़ी नाव पर, थल गाड़ी पर नाव।

(च) जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ।

(छ) दूध का जला छाछ को भी फूँक-फूँक कर पीता है।

(ज) बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाय।

(झ) होनहार बिरवान के होत चीकने पात।

(ट) अंधे की लकड़ी।

(ठ) आँखें बिछाना।

(ड) उल्लू सीधा करना।

(ढ) काठ का उल्लू।

(त) खून पसीना एक करना।

(थ) बाएँ हाथ का खेल।

(द) बीड़ा उठाना।

(ध) साँप छछूँदर की दशा।

हल—

(क) अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— समूह के द्वारा किया जा सकने वाला कार्य अकेला व्यक्ति नहीं कर सकता

प्रयोग— भारत को स्वस्थ बनाने के लिए सभी मिलकर कार्य करें। तुम अकेले इस देश को स्वस्थ नहीं बना सकते, क्योंकि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

(ख) आप भले तो जग भला।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— सभी अपने जैसा दिखायी देना

प्रयोग— बुद्धिमान व्यक्ति को सभी लोग बुद्धिमान दिखते हैं। सच ही कहा है- आप भले तो जग भला।

(ग) अंधे के आगे रोवे, अपने दीदा खोवे।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— मूर्ख/कठोर व्यक्ति को उपदेश देना व्यर्थ है

प्रयोग— अधिकारियों के सामने अपनी व्यथा कहना अंधे के आगे रोवे अपने दीदा खोवे वाली उक्ति के समान है।

(घ) जल में गाड़ी नाव पर, थल गाड़ी नाव पर।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— विपरीत परिस्थितियाँ।

प्रयोग— जगत् में विषमताएँ दृष्टिगोचर होती रहती हैं जहाँ जल में गाड़ी नाव पर, थल गाड़ी पर नाव देखने को अक्सर मिल जाता है।

(च) जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— कठिन परिश्रम से सफलता मिलती है

प्रयोग— राजेन्द्र की मेहनत रंग लायी। आखिर उसने हाईस्कूल की परीक्षा में अपने विद्यालय का नाम रोशन कर ही दिया। सच ही कहा है जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ।

(छ) दूध का जला छाछ को फूँक-फूँक कर पीता है।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— एक बार धोखा खाया हुआ व्यक्ति आगे सतर्क रहता है

प्रयोग— किसी काम में हानि हो जाने पर दूसरा काम करने में भी डर लगता है भले ही उसमें डर की सम्भावना न हो। ठीक ही कहा गया है कि दूध का जला छाछ को फूँक-फूँक कर पीता है।

(ज) बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाय।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— व्यक्ति जैसा कर्म करेगा वैसा फल पायेगा

प्रयोग— अनिल ने अपना पूरा समय मौज-मस्ती में गवाँ दिया और परीक्षाफल आने के समय कह रहा था कि मैं कक्षा में प्रथम स्थान लाऊँगा। पता चला कि वह फेल हो गया, अतः यह बात सत्य है, ‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से खाय’।

(झ) होनहार बिरवान के होत चीकने पात।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बचपन से ही अच्छे लक्षणों का दिखायी देना

प्रयोग— प्रतिभाशाली व्यक्ति की पहचान तो बचपन से ही हो जाती है। सुभाष चन्द्र बोस तो बचपन से ही विद्रोही थे। वे बचपन में ही अंग्रेज़ों को खदेड़ने का खेल खेलते थे। सही ही कहा है, ‘होनहार बिरवान के होत चीकने पात’।

(ट) अंधे की लकड़ी।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— एकमात्र सहारा

प्रयोग— शिवकुमार अपने माँ-बाप के लिए अन्धे की लकड़ी के समान है।

(ठ) आँखें बिछाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— प्रेमपूर्वक स्वागत करना

प्रयोग— लंदन ओलम्पिक में रजत पदक जीतने के बाद स्वदेश वापसी पर देशवासियों ने सुशील कुमार के लिए आँखें बिछा दी।

(ड) उल्लू सीधा करना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— स्वार्थ सिद्ध करना

प्रयोग— विकास भवन कार्यालय में जितेन्द्र बहुत ही चालाक है, वह सभी अधिकारियों से अपना उल्लू सीधा करवा लेता है।

(ढ) काठ का उल्लू।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— निपट मूर्ख

प्रयोग— विमल ने राजू से कहा कि मैं तो राहुल को बहुत बुद्धिमान समझता था, लेकिन वह किसी काठ के उल्लू से कम नहीं।

(त) खून पसीना एक करना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कठिन परिश्रम करना

प्रयोग— सुनयन अपना खून पसीना एक करके बहुत दिनों में कुछ धन इकट्ठा कर पाया था, परन्तु उसके नालायक बेटे ने सब नष्ट कर दिया।

(थ) बाएँ हाथ का खेल।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत सरल

प्रयोग— यह राजनीति के गिरते स्तर की पराकाष्ठा ही कही जायेगी कि राजनीतिज्ञों के लिए सत्ता एवं कानून का बेहद नाजायज ढंग से इस्तेमाल उनके बायें हाथ का खेल बन गया है।

(द) बीड़ा उठाना।

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— किसी कार्य के लिए दृढ़ निश्चय करना

प्रयोग— अजय ने अपने भाई की हत्या का बदला लेने का बीड़ा उठा लिया।

(ध) साँप छछूँदर की दशा।

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— असमंजस या दुविधा

प्रयोग— माँ-पत्नी के झगड़े में माँ की ओर से बोलूँ या पत्नी की ओर से बोलूँ, ‘मेरी तो साँप छछूँदर की दशा’ हो गयी है।

2001

मुहावरा की विशेषता बताते हुए निम्नलिखित में से पाँच मुहावरों और पाँच लोकोक्तियों का अर्थ लिखिये तथा वाक्यों में प्रयोग कीजिये :

(i) आँख फेरना, (ii) मुँह की खाना, (iii) हाथ जोड़ना, (iv) ईंट से ईंट बजाना, (v) आँच न आने देना, (vi) गाल बजाना, (vii) पट्टी-पढ़ाना, (viii) कौआ चला हंस की चाल, (ix) अधजल गगरी छलकत जाय, (x) अगस्त यात्रा, (xi) लक्ष्मण रेखा, (xii) आगे नाथ न पीछे पगहा, (xiii) रहेगा न बाँस न बजेगी बांसुरी, (xiv) चार दिनों की चाँदनी, (xv) जिसकी लाठी उसकी भैंस।

हल—

मुहावरा

‘मुहावरा’ उस पदबंध अथवा वाक्यांश को कहते हैं जिसका अर्थ शाब्दिक या कोशगत न होकर विलक्षण और लाक्षणिक होता है। अर्थात् ऐसा वाक्यांश या पदबंध, जो सामान्य अर्थ के स्थान पर किसी विलक्षण अर्थ की प्रतीति कराये, ‘मुहावरा’ कहलाता है।

विशेषताएँ

इसकी कुछ विशेषताएँ अधोलिखित हैं—

  1. मुहावरे का प्रयोग वाक्य के प्रसंग में होता है, अलग नहीं होता है।
  2. मुहावरा अपना असली रूप कभी नहीं बदलता, अर्थात् उसे पर्यायवाची शब्दों में अनूदित नहीं किया जा सकता।
  3. मुहावरे का शब्दार्थ नहीं, उसका अवबोधक अर्थ ही ग्रहण किया जाता है।
  4. मुहावरे का अर्थ प्रसंगानुसार होता है।
  5. मुहावरे भाषा की समृद्धि और सभ्यता के विकास के मापक है।
  6. समाज और देश की तरह मुहावरे भी बनते-बिगड़ते हैं।
  7. हिन्दी के अधिकतर मुहावरों का सीधा सम्बन्ध शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों से है।

मुहावरों व कहावतों का अर्थ व वाक्य प्रयोग

(i) आँख फेरना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सहायता न करना/ध्यान न देना

प्रयोग— गरीबी में रिश्तेदार तो क्या मित्र भी आँखें फेर लेते हैं।

(ii) हाथ जोड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विनती करना

प्रयोग— हाथ जोड़ने में क्या बुराई है; तुम छोटे तो हो नहीं जाओगे रमेश के पिता ने उसे समझाते हुए कहा।

(iii) मुँह की खाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बुरी तरह हारना

प्रयोग— औरंगजेब को दक्षिण में हमेशा मुँह की खानी पड़ी।

(iv) ईंट से ईंट बजाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बुरी तरह तोड़-फोड़ करना

प्रयोग— नादिरशाह दिल्ली 57 दिन रहा उसने इतने दिन में दिल्ली की ईंट से ईंट बजा दी।

(v) आँच न आने देना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— जरा सा भी कष्ट न होने देना

प्रयोग— कंस ने गोकुल में बड़े-बड़े राक्षस भेजे पर श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों पर जरा सी आँच नहीं आने दी।

(vi) गाल बजाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— डींगें मारना

प्रयोग— रावण को लग रहा था कि अंगद व्यर्थ की गाल बजा रहे थे।

(vii) पट्टी पढ़ाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बुरी सलाह देना

प्रयोग— न जाने किसने उसको उलटी पट्टी पढ़ा दी, कि वह मुझे भी इस प्रकरण में दोषी समझ रहा है।

(viii) कौआ चला हंस की चाल

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दूसरों की नकल उतारना

प्रयोग— आजकल आरकेस्ट्रा की धुन पर हर कोई प्रभु देवा ही बनाना चाहता है इसे ही कहते हैं, ‘कौआ चला हंस की चाल’।

(ix) अधजल गगरी छलकत जाए

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— थोड़ा ज्ञान अधिक बखान

प्रयोग— एमबीबीएस प्रथम वर्ष में एडमिशन के बाद दूबे का लड़का छगन अपने को न्यूरोसर्जन समझने लगा है।

(x) अगस्त यात्रा

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विजय यात्रा

प्रयोग— भारतीय क्रिकेट टीम विश्वकप के लिए अगस्त यात्रा पर जा चुकी है।

(xi) लक्ष्मण रेखा

वर्ग—मुहावरा

अर्थ— निषिद्ध क्षेत्र। अनुशासित क्षेत्र। मर्यादा। पार न करने योग्य सीमा। मर्यादा व आचरण की वह सीमा रेखा जिसका उल्लंघन वर्जित हो

प्रयोग— भारतीय सीमा पर तैनात सैनिक टुकड़ियाँ घुसपैठियों के लिए लक्ष्मण रेखा ही हैं।  

(xii) आगे नाथ न पीछे पगहा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त व्यक्ति

प्रयोग— लालचंद का हाल न पूछो, जहाँ कह दो चल देंगे, भाई उनके तो न आगे नाथ है न पीछे पगहा।

(xiii) न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी

वर्ग— लोकोक्ति  

अर्थ— विवाद का मूल कारण ही नष्ट कर देना

प्रयोग— यदि यह पुस्तक ही झगड़े का कारण है तो मैं इसे फाड़कर फेंक देता हूँ, ‘न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी’।

(xiv) चार दिन की चाँदनी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— थोड़े दिन का सुख

प्रयोग— घूमना फिरना बस चार दिन की चाँदनी जैसा है कुछ पढ़ लो जिन्दगी सँवर जायेगी।

(xv) जिसकी लाठी उसकी भैंस

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— ताकत ही अधिकार है

प्रयोग— इजराइल ने गाजा पट्टी पर अपना अधिकार कायम रखते हुए यह सिखा दिया कि जिसकी लाठी उसकी भैंस।

2000

मुहावरों और लोकोक्तियों में अंतर स्पष्ट करते हुए किन्हीं पाँच मुहावरों और पाँच लोकोक्तियों के अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) धूप में बाल सफेद करना, (ii) टका सा मुँह लेकर रह जाना, (iii) उल्टे छूरे से मूँडना, (vi) न तीन में न तेरह में, (v) पानी पीकर जात पूछना, (vi) बहती गंगा में हाथ धोना, (vii) नारद होना, (viii) मुट्ठी गरम करना, (ix) नानी याद आना, (x) थोथा चना बाजे घना, (xi) छछूँदर के सिर में चमेली का तेल, (xii) ओखली में सिर दिया तो मूसल से क्या डरना, (xiii) घर का भेदी लंका ढावै, (xiv) जस दूलह तस बनी बराता, (xv) पढ़े फारसी बेचै तेल।

हल—

मुहावरों एवं लोकोक्तियों में अंतर—

लोकोक्ति या कहावतमुहावरा
लोकोक्तियाँ विशेष अर्थ देती हैं, पर उनका कोशगत अर्थ भी बना रहता है।मुहावरे अपना शाब्दिक/कोशगत अर्थ छोड़कर नया अर्थ देते हैं।
लोकोक्तियाँ स्वयं में एक स्वतंत्र वाक्य होती हैं। प्रयोग में आने पर उनमें कोई परिवर्तन नहीं होता।मुहावरा वाक्यांश होता है। उसका क्रियारूप लिंग, वचन, कारक के अनुसार बदल जाता है।
लोकोक्ति के अंत में क्रियापद का होना आवश्यक नहीं है।मुहावरे के अंत में क्रियापद अवश्य होता है।
लोकोक्तियों के अन्त में ‘ना’ आना आवश्यक नहीं।मुहावरों के अन्त में बहुधा ­‘ना’ आ जाता है; जैसे— खाक छानना, चलता बनना, चाँदी काटना
माध्यम की आवश्यकता नहीं, अर्थात् स्वतंत्र प्रयोग होता है।माध्यम की आवश्यकता होती है। स्वतंत्र प्रयोग नहीं।
फल से सम्बन्धित होता है।फल से कोई सम्बन्ध नहीं होता है।
चमत्कार उत्पन्न करना, अर्थ को साधारण प्रयोग से प्रभावशाली बनाने जैसा कुछ नहीं होता। इसका कार्य कथन के खण्डन-मण्डन अथवा विरोध को रेखांकित करने का होता है।चमत्कार उत्पन्न करना, अर्थ को साधारण से प्रभावशाली बनाना।  
कथन में व्यक्त अनुभव या विचार का सारगर्भित और स्थायी निचोड़ है।मुहावरा बात को कहने की रीति या पद्धति है।
उद्देश्य और विधेय दोनों का पूर्ण विधान होता है। अर्थ स्पष्ट होता है।उद्देश्य, विधेय का पूर्ण विधान नहीं होता वाक्य के प्रयोग के बिना अर्थ का कोई बोध नहीं।

मुहावरों व लोकोक्तियों का अर्थ व वाक्य-प्रयोग—

(i) धूप में बाल सफेद करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अनुभव की कमी

प्रयोग— चाची को व्यवहार का बड़ा ज्ञान है लगता है उन्होंने अपने बाल धूप में सफेद नहीं किये हैं।

(ii) टका सा मुँह लेकर रह जाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— खिसिया जाना। लज्जित होना या करना

प्रयोग— जब मैंने उसकी पोल खोली तो वह टका सा मुँह लेकर रह गया।

(iii) उल्टे छूरे से मूँडना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत कष्ट देना

प्रयोग— अपराधी की दोषसिद्धि के बाद पुलिस उसको उल्टे छूरे से ही मुड़ती है।

(vi) न तीन में न तेरह में

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अत्यन्त उपेक्षित

प्रयोग- जाति बहिष्कृत होने के बाद राम लाल न तीन में रहा न तेरह में।

(v) पानी पीकर जात पूछना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— काम हो जाने के बाद ऊँच-नीच देखना। काम करने के बाद जाँच-पड़ताल करना।

प्रयोग— पण्डित जी को भूख लगी तो मलिन बस्ती में खाना लिया खाने के बाद लगे जाति पूँछने यह तो वही बात हुई कि पानी पीकर जात पूछना।

(vi) बहती गंगा में हाथ धोना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अवसर का लाभ उठाना

प्रयोग— तेल से भरा टैंकर क्या पलटा पूरा गाँव बाल्टी, डिब्बा आदि लेकर पहुँच गया तेल उठाने। इसे ही कहते हैं, ‘बहती गंगा में हाथ धोना’।

(vii) मुट्ठी गरम करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— घूस देना

प्रयोग— आजकल बिना मुट्ठी गरम किये काम ही नहीं होता।

(viii) नारद होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— इधर की बात उधर करना

प्रयोग— राहुल पक्का नारद है उसे कोई बात बताना मत।

(ix) नानी याद आना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— डर जाना

प्रयोग— नदी में जैसे ही नहाने उतरे दूर घड़ियाल के दिखते ही सबको नानी याद आ गयी।

(x) थोथा चना बाजे घना

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— गुण कम दिखावा अधिक

प्रयोग— घर में खाने को अनाज तक नहीं और रामलाल भोज देने की बात कर रहा है इसे ही कहते हैं ‘थोथा चना बाजे घना’।

(xi) छछूँदर के सिर में चमेली का तेल

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अयोग्य व्यक्ति का सम्मान करना

प्रयोग— राजनीति में कभी-कभी छछूँदर के सिर पर चमेली का तेल रखना ही पड़ता है।

(xii) ओखली में सिर दिया तो मूसल से क्या डरना

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— काम शुरू करने पर कठिनाई आती ही है।

प्रयोग— घर बनवाने का काम शुरू करने पर अचानक बारिश शुरू हो गयी फिर भी राकेश ने यह कहकर काम बन्द नहीं करवाया कि जब ओखली में सिर दिया तो मूसल से क्या डरना।

(xiii) घर का भेदी लंका ढावै

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— घर की फूट भली नहीं होती है

प्रयोग— रावण को मारे जाने के पीछे विभीषण का राम से जा मिलना था इसे ही कहा जाता है घर का भेदी लंका ढावै।

(xiv) जस दुल्हा तस बनी बराता

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जैसा व्यक्ति वैसे सहयोगी

प्रयोग— शिवशंकर की बारात में सभी थे भूत, प्रेत, देवता इत्यादि। भूतनाथ की बारात वैसी ही थी जैसे भगवान शिव हैं इसे ही कहते हैं ‘जस दुल्हा तस बनी बराता’।

(xv) पढ़े फारसी बेचे तेल

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— योग्यतानुसार कार्य न मिलना। सब कुछ भाग्य के अधीन है

प्रयोग— बहुत सारे पढ़-लिखे नव-युवक वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण पकौड़े तल रहे। इसे ही कहते हैं, ‘पढ़े फारसी बेचे तेल’।

1999

मुहावरों और लोकोक्तियों में अन्तर स्पष्ट करते हुए किन्हीं पाँच लोकोक्तियों के अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

(i) कोढ़ में खाज होना, (ii) आँखें नीची होना, (iii) कान लगाना, (iv) गागर में सागर भरना, (v) एक आँख से देखना, (vi) दाँतों तले उंगली दबाना, (vii) नाक का बाल होना, (viii) बालू से तेल निकालना, (ix) अधजल गगरी छलकत जाय, (x) का वर्षा जब कृषि सुखानी, (xi) अंधे के हाथ बटेर, (xii) आगे नाथ न पीछे पगहा, (xiii) उल्टे बाँस बरेली को, (xiv) घायल की गति घायल जाने, (xv) जस दूल्हा तस बनी बरात।

हल—

मुहावरों एवं लोकोक्तियों में अंतर—

लोकोक्ति या कहावतमुहावरा
लोकोक्तियाँ विशेष अर्थ देती हैं, पर उनका कोशगत अर्थ भी बना रहता है।मुहावरे अपना शाब्दिक/कोशगत अर्थ छोड़कर नया अर्थ देते हैं।
लोकोक्तियाँ स्वयं में एक स्वतंत्र वाक्य होती हैं। प्रयोग में आने पर उनमें कोई परिवर्तन नहीं होता।मुहावरा वाक्यांश होता है। उसका क्रियारूप लिंग, वचन, कारक के अनुसार बदल जाता है।
लोकोक्ति के अंत में क्रियापद का होना आवश्यक नहीं है।मुहावरे के अंत में क्रियापद अवश्य होता है।
लोकोक्तियों के अन्त में ‘ना’ आना आवश्यक नहीं।मुहावरों के अन्त में बहुधा ­‘ना’ आ जाता है; जैसे— खाक छानना, चलता बनना, चाँदी काटना
माध्यम की आवश्यकता नहीं, अर्थात् स्वतंत्र प्रयोग होता है।माध्यम की आवश्यकता होती है। स्वतंत्र प्रयोग नहीं।
फल से सम्बन्धित होता है।फल से कोई सम्बन्ध नहीं होता है।
चमत्कार उत्पन्न करना, अर्थ को साधारण प्रयोग से प्रभावशाली बनाने जैसा कुछ नहीं होता। इसका कार्य कथन के खण्डन-मण्डन अथवा विरोध को रेखांकित करने का होता है।चमत्कार उत्पन्न करना, अर्थ को साधारण से प्रभावशाली बनाना।  
कथन में व्यक्त अनुभव या विचार का सारगर्भित और स्थायी निचोड़ है।मुहावरा बात को कहने की रीति या पद्धति है।
उद्देश्य और विधेय दोनों का पूर्ण विधान होता है। अर्थ स्पष्ट होता है।उद्देश्य, विधेय का पूर्ण विधान नहीं होता वाक्य के प्रयोग के बिना अर्थ का कोई बोध नहीं।

मुहावरों व लोकोक्तियों का अर्थ और वाक्य प्रयोग

(i) कोढ़ में खाज होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कष्ट और अधिक बढ़ जाना

प्रयोग— आँख के आपरेशन से वापस आये तो गिर कर हाथ तुड़वा बैठे इसे कहते हैं, ‘कोढ़ में खाज’।

(ii) आँख नीची होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— लज्जित होना

प्रयोग— ऐसा काम मत करो कि आँखें नीची हों।

(iii) कान लगाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— ध्यान से सुनना

प्रयोग— सारे विद्यार्थी अध्यापक की बातों पर कान लगाये हैं।

(iv) गागर में सागर भरना

वर्ग—मुहावरा

अर्थ— अल्प शब्दों में बहुत कुछ कहना

प्रयोग— कविवर विहारी के दोहे गागर में सागर की तरह है।

(v) एक आँख से देखना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— समान नजर

प्रयोग— भीष्म कौरव और पाण्डवों को सदैव एक आँख से देखते थे।

(vi) दाँतों तले उँगली दबाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— आश्चर्यचकित होना

प्रयोग— जलती आग में जिस तरह रामदास को उसके बेटे ने बचाया उसे देखकर लोग दाँतों तले उंगली दबाने लगे।

(vii) नाक का बाल होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यन्त प्रिय

प्रयोग— राधा का भाई उसके लिए नाक की बाल है।

(viii) बालू से तेल निकालना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— असम्भव काम

प्रयोग— खरगोश की सींग ढूँढने जा रहे हो यह कभी नहीं मिलेगा यह तो वैसे ही हैं कि बालू से तेल निकाल लो।

(ix) अधजल गगरी छलकत जाय

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अल्प ज्ञान और बड़बोलापन

प्रयोग— हाईस्कूल पास करने के बाद रमेश की हालत यह हो गयी थी कि किसी भी विषय पर बोलने से नहीं चूकता था चाहे वह विषय क्वांटम भौतिकी ही क्यों न हो इसे ही कहते हैं अधजल गगरी छलकत जाये।

(x) का वर्षा जब कृषि सुखानी

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— समय रहते काम न करने पर उपयोगिता नष्ट हो जाती है

प्रयोग— परीक्षा बाद पढ़ाई शुरू करना वैसा ही है ‘का वर्षा जब कृषि सुखाने; समय चूकि पुनि का पछिताने’।

(xi) अंधे के हाथ बटेर

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अयोग्य व्यक्ति को अचानक अच्छी चीज मिल जाना

प्रयोग— अचानक प्रतियोगी परीक्षाओं में वेटिंग लिस्ट जारी होने के बाद राहुल को नौकरी मिल गयी इसे ही कहते हैं, ‘अन्धे के हाथ बटेर लगना’।

(xii) आगे नाथ न पीछे पगहा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जिम्मेदारी मुक्त होना

प्रयोग— रामू के पुत्र की मृत्यु के बाद उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं उसकी हालत उस कहावत जैसी है जिसमें कहा गया है, ‘आगे नाथ न पीछे पगहा’।

(xiii) उल्टे बाँस बरेली को

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— परम्परा के विपरीत काम करना

प्रयोग— रामदास की बहू बैठी रहती है उसकी वृद्ध सास उसे सुबह की चाय पहुँचाती है इसे ही कहते हैं, ‘उल्टे बाँस बरेली को’।

(xiv) घायल की गति घायल जाने

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— पीड़ा वही समझता है जिसे पीड़ा हो

प्रयोग— मेरे गिरने पर तुम सब हँस रहे हो; शायद गिरने के बाद के चोट से तुम लोग नावाकिफ हो; सच ही कहा है, ‘घायल की गति घायल ही जाने’।

(xv) जस दुल्हा तस बनी बरात

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जैसा व्यक्ति वैसा उसका साथ

प्रयोग— भगवान शिव की बरात देखकर लगता था कि पूरी सृष्टि ही स्वांग करके चल रही हो सच ही कहा है, ‘जस दुल्हा तस बनी बरात’।

1998

किन्हीं पाँच मुहावरों और पाँच कहावतों का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) अपना उल्लू सीधा करना, (ii) आकाश पाताल का अंतर होना, (iii) आपे से बाहर होना, (iv) गरदन पर छुरी फेरना, (v) घाट-घाट का पानी पीना, (vi) चुल्लू भर पानी में डूबना, (vii) छठी का दूध याद आना, (viii) जीती मक्खी निगल जाना, (ix) अंधों में काना राजा, (x) अपनी करनी पार उतरनी, (xi) एक और एक ग्यारह, (xii) काला अक्षर भैंस बराबर, (xiii) घर का भेदी लंका ढाहे, (xiv) नाच न जाने आँगन टेढ़ा, (v) भूखे भजन न होय गोपाला।

हल—

(i) अपना उल्लू सीधा करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अपना मतलब साधना

प्रयोग— आजकल सभी अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं।

(ii) आकाश-पाताल का अन्तर होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत ज्यादा अन्तर होना

प्रयोग— दुल्हे-दुल्हन की उम्र में आकाश-पाताल का अन्तर है।

(iii) आपे से बाहर होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यन्त क्रोधित होना

प्रयोग— दुर्योधन को देखते ही महाबली भीम आपे से बाहर हो गये।

(iv) गरदन पर छुरी फेरना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अहित करना

प्रयोग— पाकिस्तान का बस चले तो भारत की गरदन पर वह छुरी फिरा ही दे।

(v) घाट-घाट का पानी पीना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अनुभवी होना

प्रयोग— रमेश के साथ साझे में व्यापार करना ठीक है उसने घाट-घाट का पानी पिया है इसलिए व्यापार में घाटा नहीं होगा।

(vi) चुल्लू भर पानी में डूब मरना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— लज्जित होना

प्रयोग— दोषी साबित होने पर रमेश को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।

(vii) छठी का दूध याद दिला देना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सबक सिखाना

प्रयोग— 1971 की लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को छठी का दूध याद दिला दिया।

(viii) जीती मक्खी निगल जाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— जानबूझकर अशोभनीय कार्य करना  

प्रयोग— इस निर्दोष के विरुद्ध गवाही दूँ, मुझसे यह जीती मक्खी नहीं निगली जाएगी।

(ix) अन्धों में काना राजा

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कम पढ़े लिखे में थोड़ा पढ़ा लिखा होना

प्रयोग— पाँचवीं पास रमेश गाँव भर की चिट्ठी बाँचता है वह अनपढ़ों के बीच अन्धों में काना राजा ही तो है।

(x) अपनी करनी पार उतरनी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जो जैसा करता है वही भरता है।

प्रयोग— बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से होय इसे ही कहते हैं, ‘अपनी करनी पार उतरनी’।

(xi) एक और एक ग्यारह

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— संगठन में शक्ति

प्रयोग— समाज में सबको मिलकर रहना चाहिए क्योंकि एक और एक दो नहीं बल्कि ग्यारह होते हैं।

(xii) काला अक्षर भैंस बराबर

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— मूर्ख व्यक्ति/अनपढ़

प्रयोग— रमेश के लिए सारी किताबें एक जैसी हैं क्योंकि वह अनपढ़ है उसी के लिए कहा गया है कि ‘काला अक्षर भैंस बराबर’।

(xiii) घर का भेदी लंका ढाहे

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— घर के अन्दर अलगाव घर का नाश करा देता है

प्रयोग— रावण ने विभीषण का त्याग किया, विभीषण ने रावण की मृत्यु का कारण बताकर उसकी हत्या करवाई सच ही कहा है कि ‘घर का भेदी लंका ढाहे’।

(xiv) नाच न जाने आँगन टेढ़ा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपनी कमी दूसरों पर आरोपित करना

प्रयोग— ठीक से अभिनय न कर पाने का कारण अपने वस्त्रों को देना यह तो वही बात हुई नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

(v) भूखे भजन न होय गोपाला

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— खाली पेट कोई काम नहीं हो सकता

प्रयोग— लगातार पढ़ते रहने का भी मन नहीं करता क्योंकि भूख लग जाती है सच ही कहा है कि भूखे भजन न होय गोपाला।

1997

निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों में से किन्हीं दस का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) मन की मन में रहना, (ii) अक्ल के अंधे, (iii) आँखों में खून उतरना, (iv) मुँह पर नाक न होना, (v) कलई खोलना, (vi) खून पसीना एक करना, (vii) छप्पर फाड़ कर देना, (viii) दो नावों पर पैर रखना, (ix) पेट का पानी न पचना, (x) मन के लड्डू खाना, (xi) रंगा सियार होना, (xii) आँख के अंधे नाम नैनसुख, (xiii) आगे नाथ न पीछे पगहा, (xiv) उल्टे बाँस बरेली को, (xv) हाथ कंगन को आरसी क्या, (xvi) चोर की दाढ़ी में तिनका, (xvii) एक अनार सौ बीमार, (xviii) भई गति साँप छछूँदर केरी, (xix) घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुँजाने, (xx) गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास।

हल—

(i) मन की मन में रहना

वर्ग— मुहावरे

अर्थ— अपनी बातें अपने तक सीमित रखना। इच्छाएँ पूरी न होना

प्रयोग— मन की मन ही में रखना अच्छा होता है, यदि मन की मन में न रहे तो हो सकता है कोई दुखी भी हो सकता है और कोई सुखी भी।

(ii) अक्ल के अंधे

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— प्रचण्ड मूर्ख

प्रयोग— रावण अक्ल का अन्धा ही था जिसने श्रीराम के रूप में नारायण को नहीं पहचाना।

(iii) आँखों में खून उतरना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यन्त क्रोधित होना

प्रयोग— देश के खिलाफ बातें सुनकर मेरी आँखों में खून उतर आया था।

(iv) मुँह पर नाक न होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सम्मान या मान मर्यादा का ध्यान न होना

प्रयोग— तुम कुछ भी बोलकर निकल जाओगे ऐसा मत सोचना ध्यान रखना कि मेरे मुँह पर भी नाक है।

(v) कलई खोलना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— भेद छल का पर्दाफाश करना

प्रयोग— एक चोर के पकड़े जाने पर सारे चोरों तथा उनके द्वारा की गयी चोरियों की कलई खुल जाती है।

(vi) खून पसीना एक करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कठोर परिश्रम करना

प्रयोग— भारतीय किसान खून पसीना एक किये रहते हैं तब जाकर राष्ट्र पोषण हो पाता है।

(vii) छप्पर फाड़ कर देना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बिना परिश्रम के देना

प्रयोग— जब भगवान सहारा बनते हैं तो छप्पर फाड़ कर मिलता है।

(viii) दो नावों पर पैर रखना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अस्पष्ट स्थिति

प्रयोग— एक साथ पढ़ाई और खेल दोनों नहीं हो सकते; रोहित के पिताजी उसे समझाते हुए कह रहे थे कि दो नावों की सवारी ठीक नहीं।

(ix) पेट का पानी न पचना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बात को गोपनीय न रख पाना

प्रयोग— सीमा प्रायः एक की बात दूसरे से कह देती हैं उसके पेट का पानी नहीं पचता।

(x) मन के लड्डू खाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— काल्पनिक सुख में डूबे रहना

प्रयोग— मन के लड्डू खाते रहोगे तो यथार्थ के लड्डू नहीं मिलेंगे।

(xi) रंगा सियार होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— वास्तविकता छिपा कर बड़ा बनना, छद्मवेशी व्यक्ति, कपटी, धोखेबाज, धूर्त

प्रयोग— रवि अपना मुण्डन करा लिया तिलक लगाकर अब वह पण्डिताई करता है इसी को कहते हैं रंगा सियार।

(xii) आँख के अन्धे नाम नैन सुख

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जैसा नाम वैसा काम न होना

प्रयोग— नाम ईश्वर काम शैतानों के इसे ही कहते हैं आँख के अन्धे नाम नैन सुख।

(xiii) आगे नाथ न पीछे पगहा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बेसहारा/एकदम अकेला/जिम्मेदारी मुक्त

प्रयोग— पंकज अनाथ है अब वह कहीं भी आये जाये कुछ भी करे कोई नियन्त्रण नहीं सच ही कहा है आगे नाथ न पीछे पगहा।

(xiv) उल्टे बाँस बरेली को

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— परम्परा विरुद्ध काम

प्रयोग— खानदानी परिवार की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि उनके यहाँ कोई भी काम परम्परा विरुद्ध हुआ तो लोग कहने लगते हैं कि हवेली में भी उल्टे बाँस बरेली को।

(xv) हाथ कंगन को आरसी क्या

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता

प्रयोग— होटल की व्यवस्था दिखाने के बाद मैनेजर ने रामू से कहा कोई होटल में ठहरने का खर्च पूछे तो उसे यह पेपर पकड़ा देना इस पर सबका मूल्य लिखा है इस पर रामू ने कहा मालिक इसे ही कहते हैं कि हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फारसी क्या।

(xvi) चोर की दाढ़ी में तिनका

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दोषी व्यक्ति अपनी पोल खुद ही दे देता है

प्रयोग— अक्सर दोषी व्यक्ति, जब कभी किसी गलती के बारे में बात की जाती है तो वह बँगले झाँकने लगता है सच ही कहा है कि चोर की दाढ़ी में तिनका होता है।

(xvii) एक अनार सौ बीमार

वर्ग— लोकोक्ति  

अर्थ— एक वस्तु के कई ग्राहक

प्रयोग— क्षेत्र के लिए शीत गृह का आवंटन होने के बाद रामपुर क्षेत्र के लोग भी उसे अपने क्षेत्र में आवंटित करने का प्रयास करने लगे; सच ही कहा है ‘एक अनार सौ बीमार’।

(xviii) भई गति साँप छछूँदर केरी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दुविधा की स्थिति

प्रयोग— पढ़ाने गये तो पता चला गणित पढ़ानी है; मैं तो अँग्रेजी का अध्यापक हूँ मेरी हालत तो ऐसी हो गयी है जिसे कहते हैं भई गति साँप छछूँदर केरी।

(xix) घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपनी स्थिति से अधिक दिखावा

प्रयोग— ठण्ड में पशमीना शाल का हल्ला मचाकर सूती चादर ओढ़ने वालों के बारे में ही कहा गया है कि ‘घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने’।

(xx) गंगा गये गंगादास, जमुना गये जमुनादास

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अवसरवादिता।

प्रयोग— कुछ लोगों की आदत होती है कि उनके सामने जो व्यक्ति आता है, उसी की प्रशंसा करने लगते हैं, ऐसे लोगों के लिए ही कहा जाता है- गंगा गए गंगा दास, जमुना गये जमुना दास।

1996

निम्नलिखित मुहावरों और कहावतों में से किन्हीं दस का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) अँगूठा दिखाना, (ii) अपना उल्लू सीधा करना, (iii) अपनी खिचड़ी अलग पकाना, (iv) आँखें बिछाना, (v) आँखों में धूल झोंकना, (vi) अंडा सेना, (vii) अंधे के हाथ बटेर लगना, (viii) उँगलियों पर नचाना, (ix) उल्टे छुरे से मूँडना, (x) ओले पड़ना, (xi) कान खड़े होना, (xii) कच्चा चिट्ठा खोलना, (xiii) ऊँट के मुँह में जीरा, (xiv) खाक में मिलना, (xv) खयाली पुलाव पकाना, (xvi) घात लगाना, (xvii) उल्टी गंगा बहाना, (xviii) छक्के छुड़ाना, (xix) ढाक के तीन पात, (xx) बाग-बाग होना।

हल—

(i) अँगूठा दिखाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मना करना। समय पर धोखा देना।

प्रयोग— उस व्यक्ति से सजग रहना जरूरत पर वह अंगूठा दिखा देता है।

(ii) अपना उल्लू सीधा करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अपनी ही भलाई चाहना। स्वार्थ सिद्ध करना

प्रयोग— प्रत्येक राजनीतिक दल पहले अपना उल्लू सीधा करते है राष्ट्र तो बाद में आता है।

(iii) अपनी खिचड़ी अलग पकाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— एकदम अलग रहना

प्रयोग— परिवार में खेती पर बात हो रही थी, रमेश को नौटंकी देखने जाने की पड़ी थी वह अपनी खिचड़ी अलग ही पकाता है।

(iv) आँखें बिछाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— स्वागत करना

प्रयोग— हमें मेहमाननवाजी आँखें बिछाकर करनी चाहिए।

(v) अंडा सेना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— समय गँवाना

प्रयोग— अंडा सेते रहने से बने काम भी बिगड़ जाते हैं यदि राहुल चारपाई पर अंडे न सेते रहता तो उसकी ट्रेन न छूटती।

(vi) आँखों में धूल झोंकना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— धोखा देना

प्रयोग— चोर चौकीदार की आँखों में धूल झोंककर घर में दाखिल हुए।

(vii) अन्धे के हाथ बटेर लगना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अचानक कीमती चीज मिल जाना

प्रयोग— दिनेश को लॉटरी में बाइक मिली वह इतराने लगा इधर गाँव वाले कहने लगे कि इसे ही कहते हैं अन्धे के हाथ बटेर लगना।

(viii) उँगलियों पर नचाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— परेशान करना

प्रयोग— ग्राम प्रधान पंचायत सदस्यों को अपनी उँगलियों पर नचाता है।

(ix) उल्टे छुरे से मूँड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दुःख देना

प्रयोग— माफ करना भी कोई चीज है कि नहीं तुम तो राहुल को बात-बात में उल्टे छुरे से मुड़ देते हो।

(x) ओले पड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विपत्ति पड़ना

प्रयोग— आलू की खुदायी के बाद खेत में आलू के ढेर पर अचानक ओले पड़े सारा आलू चोटिल होकर खराब हो गया; इसे ही कहते हैं सिर मुँडाते ही ओले पड़ना।

(xi) कान खड़े होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सावधान होना

प्रयोग— परीक्षा कक्ष में परीक्षक अपने कान खड़े रखते हैं।

(xii) कच्चा चिट्ठा खोलना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सारा भेद प्रकट करना

प्रयोग— उससे दोस्ती तो ठीक पर तुम उसे अपना भेद मत देना वह कभी भी तुम्हारा कच्चा चिट्ठा खोल सकता है।

(xiii) ऊँट के मुँह में जीरा

वर्ग— मुहावरा  

अर्थ— बहुत खाने वाले को अल्प भोजन

प्रयोग— पहलवान की थाली में दो पूड़ियाँ देखकर राम ने कहा यह क्या यह तो ऊँट के मुँह में जीरा है।

(xiv) खाक में मिलना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— नष्ट होना

प्रयोग— भूकम्प इतना तेज था कि सारे घर खाक में मिल गये।

(xv) खयाली पुलाव पकाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मुंगेरी सपने में मगन रहना। व्यर्थ की कल्पना करना

प्रयोग— क्रिकेट मैच के खयाली पुलाव पकाते-पकाते सौरव के सामने जब क्रिकेट टूर्नामेन्ट आ गया तो उसकी हालत खराब हो गयी।

(xvi) घात लगाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अवसर की तलाश करना। अवसर तलाशना

प्रयोग— पुलिस अपराधी को पकड़ने के लिए घात लगाये बैठी थी।

(xvii) उल्टी गंगा बहाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— परम्परा विरुद्ध काम करना

प्रयोग— पाँचों वक्त के नमाजी मियाँ नियाज आजकल सिनेमा देख रहे हैं इसे ही कहते हैं उल्टी गंगा बहाना।

(xviii) छक्के छुड़ाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— परेशान करना। हरा देना

प्रयोग— पाण्डव सेना ने कौरव सेना के छक्के छुड़ा दिये।

(xiv) ढाक के तीन पात

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— स्थिति/हालात में परिवर्तन न होना

प्रयोग— नौकरी तो मिल गयी मगर समय पर वेतन न मिलने के कारण घर के हालात जस के तस हैं इसे ही कहते हैं ढाक के तीन पात।

(xx) बाग-बाग होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— प्रसन्न होना

प्रयोग— रणजी क्रिकेट टीम में चयन के बाद रोहित के पिता का दिल बाग-बाग हो गया है।

1995

निम्नलिखित मुहावरों और कहावतों में से किन्हीं दस का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) अमरबेल बनना, (ii) उलटी गंगा बहाना, (iii) गुड़ गोबर करना, (iv) जूतियाँ चटकाते फिरना, (v) तीन पाँच करना, (vi) पहाड़ टूट पड़ना, (vii) बालू की भीत, (viii) काला अक्षर भैंस बराबर, (ix) सूरज को दीपक दिखाना, (x) आँख का काँटा बनना, (xi) ईद का चाँद होना, (xii) अपनी करनी पार उतरनी, (xiii) अधजल गगरी छलकत जाय, (xiv) एक अनार सौ बीमार, (xv) खोदा पहाड़ निकली चुहिया, (xvi) जल में रहकर मगर से बैर, (xvii) भागते चोर की लंगोटी ही सही, (xviii) उलटे बाँस बरेली को, (xix) कोयले की दलाली में काले हाथ, (xx) हाथ कंगन को आरसी क्या।

हल—

(i) अमरबेल बनना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— पराश्रित रहना। दृढ़तापूर्वक चिपकना

प्रयोग— व्यक्ति को अमरबेल बनने से बचना चाहिए।

पदोन्नति चाहिए तो मंत्रीजी के साथ अमर बेल बन जाओ।

(ii) उलटी गंगा बहाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— प्रतिकूल कार्य, उलटा काम करना

प्रयोग— हमारे घर में आकर तुम कुछ खर्च करने लगो, यह तो उलटी गंगा बहाना है।

(iii) गुड़ गोबर करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बने काम को बिगाड़ना

प्रयोग— सब्जी बहुत अच्छी बनी थी नमक का ध्यान न रखकर उसने सब गुड़ गोबर कर दिया।

(iv) जूतियाँ चटकाते फिरना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— इधर-उधर व्यर्थ चक्कर लगाना

प्रयोग— वह सारा दिन निकम्मों की तरह इधर-उधर जूतियाँ चटकाते रहता है।

(v) तीन पाँच करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कपट की बात करना। इधर की उधर करना

प्रयोग— संजीव और महेश सदैव तीन पाँच किया करते हैं।

(vi) पहाड़ टूट पड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— भयानक विपत्ति का आ पड़ना

प्रयोग— असमय पिता का साया सिर से उठना सिर पर पहाड़ टूट पड़ने जैसा होता है।

(vii) बालू की भीत

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— क्षणिक

प्रयोग— जीवन बालू की भीत है न जाने कब ढह जाये कुछ नहीं कहा जा सकता।

(viii) काला अक्षर भैंस बराबर

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अनपढ़

प्रयोग— इस गाँव के सभी लोग काला अक्षर भैंस बराबर ही हैं।

(ix) सूरज को दीपक दिखाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— ज्ञानी के सामने अल्प ज्ञान का प्रदर्शन करना

प्रयोग— कक्षा पाँच पास विद्यार्थी गणित से परास्नातक को जोड़-घटाव की विधि समझा रहा था यह तो वही बात हुई कि वह सूरज को दीपक दिखा रहा था।

(x) आँख का काँटा बनना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मन में चुभना या खटकना

प्रयोग— मुझे बुरा बोलने के बाद वह मेरी आँख का काँटा बना हुआ है।

(xi) ईद का चाँद होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दुर्लभ होना

प्रयोग— लम्बी ड्यूटी के बाद घर आने पर सब कहते हैं तुम तो ईद का चाँद हो गये थे।

(xii) अपनी करनी पार उतरनी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जो जैसा करता है वैसा भरता है

प्रयोग— रमेश चोरी करते पकड़ा गया अब जेल में है सच ही कहा गया है अपनी करनी पार उतरनी।

(xiii) अधजल गगरी छलकत जाय

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अल्प ज्ञान का अधिक प्रदर्शन

प्रयोग— चार शब्द अँग्रेजी का सीखने के बाद रोहित बात-बात में अँग्रेजी का प्रयोग करता है यह तो वही बात हुई अधजल गगरी छलकत जाये।

(xiv) एक अनार सौ बीमार

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— एक वस्तु के बहुत अधिक चाहने वाले

प्रयोग— आजकल बेरोजगारी इतनी बढ़ गयी है कि एक पद चपरासी का और कई लाख लोगों के फार्म बात तो वही हुई कि एक अनार सौ बीमार।

(xv) खोदा पहाड़ निकली चुहिया

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अधिक परिश्रम का कम फल

प्रयोग— लगातार परिश्रम के बाद भी अपेक्षित परिणाम से कम परिणाम मिलना इस बात को चरितार्थ करता है कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

(xvi) जल में रहकर मगर से बैर

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जहाँ जिसकी चलती हो उससे बैर नहीं करनी चाहिए

प्रयोग— अखाड़े में जाकर उस्ताद को ही ललकार दिया, अच्छा नहीं किया। मैंने समझाया था कि जल में रहकर मगर से बैर नहीं करते।

(xvii) भागते चोर की लंगोटी ही सही

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जाते धन का अत्यल्प भाग भी मिल जाये तो ठीक

प्रयोग— चोर सारा समान ले जा चुके थे; मगर कुछ पुराने बरतन बाहर छोड़ गये थे मैंने सब उठा लिया कहावत याद आ गयी कि भागते भूत की लंगोटी ही सही।

(xviii) उलटे बाँस बरेली को

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— विपरीत कार्य करना

प्रयोग— मैंने उसे कई बार समझाया कि सदैव देश काल परिस्थिति के अनुकूल कार्य करो परन्तु उसका प्रत्येक काम उल्टे बाँस बरेली जैसा होता है।

(xix) कोयले की दलाली में काले हाथ

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जैसी करनी वैसी भरनी। बुरी संगति में कलंक लगता है।

प्रयोग— चोरी का माल सस्ते में बेचने पर साहू को तो जेल हुई और साथ में उसका कारिंदा भी फँस गया, सच ही कहा है कि कोयले की दलाली में हाथ काला होता ही है।

(xx) हाथ कंगन को आरसी क्या

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता

प्रयोग— मैंने गणित पढ़ी है कोई सवाल लगवा लो; मेरे लिए हाथ कंगन को आरसी क्या।

1994

निम्नलिखित मुहावरों और कहावतों में से किन्हीं दस का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) आँचल पकड़ना, (ii) आग पर पानी डालना, (iii) आँख रखना, (iv) उधार खाये बैठना, (v) उल्टी माला फेरना, (vi) कलेजा मुँह को आना, (vii) गुल खिलना, (viii) खून सफेद हो जाना, (ix) चींटी के पर निकलना, (x) घर में गंगा बहना, (xi) दाना-पानी उठना, (xii) खग जाने खग ही की भाषा, (xiii) जो गुड़ खाए सो कान छिदाये, (xiv) झूठ के पाँव नहीं होते, (xv) तीन में न तेरह में, (xvi) बाँह गहे की लाज, (xvii) लिखे ईसा पढ़े मूसा, (xviii) मुँह में राम बगल में छूरी, (xix) समय चूकि पुनि का पछताने, (xx) फिसल पड़े तो हर गंगा।

हल—

(i) आँचल पकड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सहारा लेना

प्रयोग— जब तुम्हारा आँचल पकड़ लिया है तो मुझे क्या चिंता।

(ii) आग पर पानी डालना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— क्रोध शान्त करना। झगड़ा शान्त करना

प्रयोग— झगड़े रूपी आग में कभी घी का काम मत करो, बल्कि उस आग पर पानी डालो, झगड़ा शान्त होगा।

(iii) आँख रखना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— ध्यान रखना

प्रयोग— केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो इस पूरे प्रकरण पर अपना ध्यान रखे हुए है।

(iv) उधार खाये बैठना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— हठ करना। प्रतीक्षा में रहना

प्रयोग— तुम उससे बदला लेने का क्या उधार खाए बैठे हो!

रोहित अपने दुश्मन से बदला लेने का उधार खाये बैठा है।

(v) उल्टी माला फेरना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विपरीत कार्य करना। अहित सोचना।

प्रयोग— सदैव सीधा सोचो। उल्टी माला फेरने वाले सफल नहीं होते।

(vi) कलेजा मुँह को आना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— व्याकुल होना। दुःख होना

प्रयोग— मरीज़ की चीत्कार का ध्यान आते ही कलेजा मुँह को आता है।

(vii) गुल खिलना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कुछ अप्रत्याशित होना। विलक्षण बात होना

प्रयोग— माता-पिता के घर से दूर जाते ही बच्चों ने पड़ोसियों से मार-पीट कर लिया इसे ही कहते हैं गुल खिलना।

(viii) खून सफेद हो जाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत अधिक डर लगना

प्रयोग— गली वाले कब्रिस्तान से गुजरते वक्त बहुतों का खून सफेद हो जाता है।

(ix) चींटी के पर निकलना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विनाश का काल नजदीक होना

प्रयोग— सरहद पार से गोली बारी की बढ़ती घटनाओं पर रक्षा मंत्री ने पाक को कहा लगता है कि चींटी के पर निकल आये हैं।

(x) घर में गंगा बहना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— लाभ ही लाभ

प्रयोग— घर में वृद्धों की सेवा करना या उनका होना ही घर में गंगा बहने जैसा है।

तुम्हारे ही चार-चार भैंसें हैं, दूध की इफरात है, घर में दूध की गंगा बहती है।

(xi) दाना-पानी उठना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— रोजी रोजगार खतम होना। स्थानान्तरण होना

प्रयोग— कब किसका कहाँ से दाना-पानी उठ जाये कुछ कहा नहीं जा सकता।

(xii) खग जाने खग ही की भाषा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— समान गुण वाले एक दूसरे की भाषा समझते हैं

प्रयोग— उन्हें भागना था कनखियों से बात की दोनों भाग गये, इसे कहते हैं खग जाने खग ही की भाषा।

(xiii) जो गुड़ खाये सो कान छिदाये

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— लाभ पाने के लिए कष्ट उठाना

प्रयोग— पैराजम्पिंग के लिए कैडेट्स को तैयार करते वक्त शर्त थी कि एक सफल पैराग्लाइडिंग के बाद एक दिन की छुट्टी यह तो वही बात हुई कि जो गुड़ खाये सो कान छिदाये।

(xiv) झूठ के पाँव नहीं होते

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— झूठ को छिपाया नहीं जा सकता

प्रयोग— उत्तर-प्रतिउत्तर में तुम पकड़े जाओगे क्योंकि झूठ के पाँव नहीं होते।

(xv) तीन में न तेरह में

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— सम्मान के अयोग्य

प्रयोग— अपनी करनी के कारण रोहित आज न तीन में है न तेरह में।

(xvi) बाँह गहे की लाज

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— शरणागत की रक्षा

प्रयोग— सुग्रीव ने श्रीराम से कहा कि प्रभु बाँह गहे की लाज रखो।

(xvii) लिखे ईसा पढ़े मूसा

प्रयोग— लोकोक्ति

अर्थ— किसी बात का किसी को पता न चलने देना

प्रयोग— दोनों की बातचीत किसी को समझ न आयी ऐसा लग रहा था जैसे लिखे ईसा पढ़े मूसा वाली बात हो।

(xviii) मुँह में राम बगल में छूरी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— मन में कपट होना

प्रयोग— कालनेमि का चरित्र मुँह में राम बगल में छूरी वाला था।

(xix) समय चूकि पुनि का पछिताने

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अवसर का लाभ न ले पाना

प्रयोग— समय पर कार्य कर लो वरना कहा गया है कि समय चूकि पुनि का पछिताने।

(xx) फिसल पड़े तो हर गंगा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अनिच्छित कार्य को भी इच्छित बताना।

प्रयोग— गंगा स्नान का मन नहीं रामू काका जब संगम पर अचानक फिसल कर गंगा में गिरे तो बोल पड़े हर गंगा सब हँस दिया सच ही कहा है फिसल पड़े तो हर गंगा।

1993

निम्नलिखित मुहावरों और कहावतों में से किन्हीं दस का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(i) अन्धे की लकड़ी, (ii) नाकों चने चबाना, (iii) अपना उल्लू सीधा करना, (iv) चार दिन की चाँदनी, (v) आस्तीन का साँप, (vi) ईद का चाँद, (vii) श्रीगणेश करना, (viii) गड़े मुर्दे उखाड़ना, (ix) घर का न घाट का, (x) अन्धे के आगे रोना अपना दीदा खोना, (xi) अंधों में काना राजा, (xii) उँगली पकड़ कर पहुँचा पकड़ना, (xiii) ऊँची दुकान फीका पकवान, (xiv) काला अक्षर भैंस बराबर, (xv) खोदा पहाड़ निकली चुहिया, (xvi) मुँह में राम बगल में छुरी, (xvii) चौबे जी गये थे छब्बे बनने रह गये दुबे, (xviii) नीम हकीम खतरे जान, (xix) हाथ कंगन को आरसी क्या?, (xx) होनहार बिरवान के होत चीकने पात।

हल—

(i) अन्धे की लकड़ी

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— एकमात्र सहारा

प्रयोग— श्रवण कुमार अपने पिता के लिए अन्धे की लकड़ी थे।

(ii) नाकों चने चबाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यधिक परिश्रम करना

प्रयोग— संघ लोक सेवा आयोग की प्रशासनिक सेवा में सफल होने के लिए नाकों चने चबाने पड़ते हैं।

(iii) अपना उल्लू सीधा करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अपना मतलब निकालना

प्रयोग— सुरेश हर समय अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में रहता है।

(iv) चार दिन की चाँदनी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अल्प समय का सुख

प्रयोग— चार दिन की चाँदनी में व्यक्ति को अधिक उत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि दुःख शाश्वत है।

(v) आस्तीन का साँप

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— छुपा हुआ शत्रु

प्रयोग— रोशन को मैं अपना मित्र समझता था पर वह तो आस्तीन का सौंप निकला।

(vi) ईद का चाँद

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बहुत इन्तजार के बाद

प्रयोग— सेना की नौकरी से आने वाला जवान अपने परिवार के लिए ईद का चाँद ही होता है।

(vii) श्रीगणेश करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— शुरुआत करना

प्रयोग— पण्डित जी सत्यनारायण कथा का श्रीगणेश करिए।

(viii) गड़े मुर्दे उखाड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— पुरानी बातों को लेकर झगड़ना

प्रयोग— रोहित की आदत ही गड़े मुर्दे उखाड़ने वाली है।

(ix) घर का न घाट का

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कहीं का न रह पाना

प्रयोग— धोबी का कुत्ता न घर का रह पाता है न घाट का।

(x) अन्धे के आगे रोना अपना दीदा खोना

वर्ग— लोकोक्ति   

अर्थ— असंवेदनशील से संवेदनशीलता की उम्मीद व्यर्थ है।

प्रयोग— स्वार्थी व्यक्ति से परमार्थ की उम्मीद वैसे ही है जैसे अन्धे के आगे रोना अपना दीदा खोना।

(xi) अन्धों में काना राजा

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कम ज्ञानियों के बीच थोड़ा अधिक जानकार ही शाह होता है।

प्रयोग— जिस गाँव में कोई पाँचवीं भी पास नहीं था वहाँ छठी दर्जे का रामलाल खुद को सबसे बड़ा ज्ञानी यह तो वैसे ही है जैसे अन्धों में काना राजा।

(xii) उँगली पकड़ कर पहुँचा पकड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— धीरे-धीरे कब्जा करना।

प्रयोग— ट्रेन में पहले लोग थोड़ी सी जगह माँगते हैं फिर उन्हें उनका सामान भी सीट पर ही चाहिए यह तो ऐसी ही बात हुई जैसे कि उँगली पकड़कर पहुँचा पकड़ना।

(xiii) ऊँची दुकान फीका पकवान

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दिखाना अधिक लेकिन होना औसत से भी कम

प्रयोग— अभिनेताओं की साज-सज्जा से लगा कि मंचन बहुत अच्छा होगा लेकिन नाट्यमंचन बहुत ही बुरा था यह तो वही बात हुई; ऊँची दुकान फीके पकवान।

(xiv) काला अक्षर भैंस बराबर

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— मूर्ख व्यक्ति

प्रयोग— हरिया के लिए कोई भी पुस्तक काला अक्षर भैंस बराबर ही है।

(xv) खोदा पहाड़ निकली चुहिया

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— परिश्रम अधिक परिणाम कम

प्रयोग— दिन रात पढ़ाई के बाद सोहन को मात्र उत्तीर्णांक से कुछ ही नम्बर अधिक मिले इसके बाद उसने अपना सिर धुना और कहा “खोदा पहाड़ निकली चुहिया।”

(xvi) मुँह में राम बगल में छुरी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— ऊपर से सज्जन अन्दर से डाकू

प्रयोग— कालनेमि का चरित्र मुँह में राम बगल में छुरी जैसा था जिसे हनुमान जी ने समझ लिया।

(xvii) चौबे जी गये छब्बे बनने रह गये दुबे

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अधिक के लालच में जो था उसे भी गवाँ देना

प्रयोग— सोने चाँदी का व्यापार ठीक चल रहा था, धन्ना सेठ ने रत्नों और हीरों का काम करना चाहा उसकी पूँजी डूब गयी यह तो वही बात हुई कि चौबे जी गये छब्बे बनने रह गये दूबे।

(xviii) नीम हकीम खतरे जान

वर्ग— लोकोक्ति  

अर्थ— अयोग्य व्यक्ति से कभी योग्यता का काम नहीं लेना चाहिए

प्रयोग— साँप के काटने के बाद ओझा गुनी के चक्कर लगाने से ही राधा की मौत हुई सच ही कहा है कि नीम हकीम खतरे जान।

(xix) हाथ कंगन को आरसी क्या?

वर्ग— लोकोक्ति  

अर्थ— प्रत्यक्ष के लिए प्रमाण की क्या आवश्यकता

प्रयोग— पढ़े लिखे आदमी से चाहे फारसी पढ़वा लो शायद इसीलिए कहा गया है हाथ कंगन को आरसी क्या पढ़े लिखे को फारसी क्या।

(xx) होनहार बिरवान के होत चिकने पात

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— वर्तमान की स्थिति भविष्य के बारे में बता देती है

प्रयोग— राम अपना प्रत्येक काम व्यवस्थित करता था आज वह एक बड़ी कम्पनी का CEO है सही ही कहा गया है कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात।

1992

निम्नलिखित मुहावरों और कहावतों में से किन्हीं दस का अर्थ लिखिए और वाक्यों में उनका प्रयोग कीजिए :

(i) न घर का न घाट का, (ii) अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना, (iii) नौ दो ग्यारह होना, (iv) हाथ पर हाथ धरना, (v) माथेपर बल पड़ना, (vi) अधजल गगरी छलकत जाय, (vii) एक चना भाड़ नहीं फोड़ता, (viii) आँखें बिछाना, (ix) एक साथ दो नाव पर चढ़ना, (x) जले पर नमक छिड़कना, (xi) आप भला तो जग भला, (xii) रंग बदलना, (xiii) हवा में मुक्का मारना, (xiv) नाच न जाने आंगन टेढ़ा, (xv) भैंस के आगे बीन बजाना, (xvi) टेढ़ी खीर, (xvii) मुँह लगाना, (xviii) बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाय।

हल—

(i) न घर का न घाट का

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कहीं का न होना

प्रयोग— बड़ी नौकरी के लालच में मैंने अपनी पुरानी नौकरी भी छोड़ दी अब मैं पूरी तरह बेरोजगार हूँ। ऐसी हालत हो गयी है जैसे धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का।

(ii) अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अपनी तारीफ खुद करना

प्रयोग— जब देखो तब सुनील अपनी तारीफें करने लगता है उसे इस बात की समझ नहीं कि खुद मुँह मियाँ मिट्ठू बनना अच्छी बात नहीं।

(iii) नौ दो ग्यारह होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— भाग जाना

प्रयोग— पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गये।

(iv) हाथ पर हाथ धरना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— बेकार बैठना

प्रयोग— कुछ करो तब खाओ, यूँ ही हाथ पर हाथ धरकर बैठना अच्छी बात नहीं।

(v) माथे पर बल पड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— चिन्ता करना या क्रोध करना

प्रयोग— प्रत्येक परिस्थिति में शान्त रहना सद्गुण है। हर बात पर माथे पर बल डालना उचित नहीं होता।

(vi) अधजल गगरी छलकत जाए

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— कम ज्ञान वाले व्यक्ति का अधिक ज्ञान बघारना।

प्रयोग— अधजल गगरी छलकत जाए प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों से बहस नहीं करनी चाहिए।

(vii) एक चना भाड़ नहीं फोड़ता

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अकेला व्यक्ति कुछ खास नहीं कर पाता।

प्रयोग— राष्ट्र निर्माण एक व्यक्ति के बस की बात नहीं क्योंकि कहा गया है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।

(viii) आँखें बिछाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— स्नेहपूर्वक सम्मान करना।

प्रयोग— मन्त्री जी के स्वागत में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कब से आँखें बिछायी हैं।

(ix) एक साथ दो नाव पर चढ़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— ऐसे दो काम एक साथ करना जिनका साथ में पूरा होना सम्भव नहीं। या खुद को दुविधा में रखना।

प्रयोग— मैं राजनीति और धर्म को एक साथ नहीं मिला सकता यदि ऐसा होता है तो वह दो नावों पर पैर रखने जैसा होगा।

(x) जले पर नमक छिड़कना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दुखी को और दुखी करना

प्रयोग— परीक्षा में फेल होने के बाद रमेश के माता-पिता ने उसकी पढ़ाई भी छुड़वा दी यह तो वैसा ही है जैसे कि कोई जले पर नमक ही छिड़क दे।

(xi) आप भला तो जग भला

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— यदि व्यक्ति खुद ठीक है तो उसके लिए सभी ठीक होते हैं।

प्रयोग— समझदार माँ-बाप अपने बच्चे को यही सिखाते हैं कि आप भला तो जग भला।

(xii) रंग बदलना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— स्वभाव में परिवर्तन

प्रयोग— अधिकार पाने के बाद लोगों के रंग अक्सर बदल ही जाते हैं।

(xiii) हवा में मुक्का मारना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— व्यर्थ का क्रोध।

प्रयोग— लंका जलाए जाने के बाद लंकावासी हवा में मुक्के मार रहे थे।

(xiv) नाच न जाने आँगन टेढ़ा

वर्ग— लोकोक्ति  

अर्थ— ढंग से काम न कर पाने का दोष दूसरों पर मढ़ना।

प्रयोग— अच्छा गाना न गाने का दोष आरकेस्ट्रा पर मढ़कर राकेश ने जो किया उसे ही कहते हैं नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

(xv) भैंस के आगे बीन बजाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मूर्ख के आगे ज्ञान की बात करना या व्यर्थ का उपदेश

प्रयोग— जीवन में मूर्ख से पाला पड़े तो उसे दो-पैसे दे दो क्योंकि उसे समझाना वैसा ही है जैसे भैंस के आगे बीन बजाना।

(xvi) टेढ़ी खीर

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कठिन काम

प्रयोग— वर्तमान विश्व कूटनीति को समझना टेढ़ी खीर है।

(xvii) मुँह लगाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सिर चढ़ा लेना। ढीठ बना देना।

प्रयोग— सुलेमान को उसके पिता ने इतना मुँह लगा लिया है कि वह अब उनसे भी बहस करता है।

(xviii) बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाय

वर्ग—लोकोक्ति  

अर्थ— जो किया सो ही मिलता है।

प्रयोग— जिन्दगी भर बच्चों को चोरी सिखाते रहे बच्चे भी चोर बन गये यह तो वैसे ही है जैसे बोया पेड़ बबूल का आम कहाँ से खाय।

1991

निम्नलिखित मुहावरों और कहावतों में से किन्हीं दस के अर्थ लिखिये और वाक्यों में उनका प्रयोग भी कीजिये—

(i) घर की खेती, (ii) खग जाने खग की ही भाषा, (iii) चुपड़ी और दो-दो, (iv) ठिकाना करना, (v) मन में चोर बैठना, (vi) हाथ पैर मारना, (vii) माथा ठनकना, (viii) मरे को मारे शाह मदार, (ix) नदी नाव संयोग, (x) चलता करना, (xi) बासी बचे न कुत्ता खाय, (xii) नाक रगड़ना, (xiii) कौवा चला हंस की चाल, (xiv) हाथ डालना, (xv) उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई, (xvi) पानी पीकर जात पूछना, (xvii) देशी कुतिया बिलाती बोली, (xviii) नंगे बड़े परमेश्वर से।

हल—

(i) घर की खेती

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— आसानी से उपलब्ध

प्रयोग— मोहन को मेरे घर की प्रत्येक चीज घर की खेती ही लगती है।

(ii) खग जाने खग की ही भाषा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— समान गुण वाले आपस की बात समझते हैं।

प्रयोग— एक डॉ॰ की लिखावट फार्मासिस्ट ही समझता है, सच ही है खग जाने खग ही की भाषा।

(iii) चुपड़ी और दो-दो

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अच्छी वस्तु का पर्याप्त मात्रा में होना

प्रयोग— पिताजी जब भी कोई खाने की चीज लाते थे तो वह सबको पर्याप्त से अधिक ही मिलती थी यह तो वैसे ही था जैसे चुपड़ी और दो-दो।

(iv) ठिकाना करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— रोजी-रोजगार के लिए स्थान ढूँढ़ना।

प्रयोग— अधिकतर कामकाजी लोगों ने मुम्बई में अपना ठिकाना इसलिए कर लिया है ताकि उनकी गृहस्थी चल सके।

(v) मन में चोर बैठना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मन में कपट होना।

प्रयोग— पाकिस्तान के मन में चोर है।

(vi) हाथ पैर मारना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यधिक प्रयास करना

प्रयोग— संघ लोक सेवा आयोग में सफल होने के लिए मालविका ने बहुत हाथ पैर मारा।

(vii) माथा ठनकना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— सन्देह होना/करना।

प्रयोग— पुलिस को देखते ही रोहित भागने लगा, ऐसा करते देखकर पुलिस का माथा ठनक गया।

(viii) मरे को मारे शाह मदार

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— परेशान को और परेशान करना।

प्रयोग— बीमार व्यक्ति को डॉक्टर ने इतना ज्यादा इलाज का खर्च बता दिया कि वह बेसुध हो गया, यह तो वही बात हुई कि मरे को मारे शाह मदार।

(ix) नदी नाव संयोग

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— सहयोग और सहयोगी दोनों का अचानक मिलना

प्रयोग— श्रीराम और वानरराज सुग्रीव की भेंट नदी नाव संयोग जैसी थी।

(x) चलता करना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— रवाना कर देना।

प्रयोग— लगातार अनुपस्थिति से नाराज कार्यालय अधिकारी ने विनोद को कार्यालय से चलता किया।

(xi) बासी बचे न कुत्ता खाये

वर्ग— लोकोक्ति  

अर्थ— जरूरत भर उपयोग करना

प्रयोग— जरूरत भर का उपयोग वस्तुओं को व्यर्थ होने से बचाता है ऐसा इसलिए क्योंकि न बासी बचेगा न कुत्ता खायेगा।

(xii) नाक रगड़ना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— विनती करना

प्रयोग— आजादी के लिए क्रान्तिकारियों ने कभी अंग्रेजों के आगे नाक नहीं रगड़ी।

(xiii) कौवा चला हंस की चाल

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— व्यर्थ की नकल करना।

प्रयोग— दस नम्बर की जर्सी पहनकर क्रिकेट खेलने वाला वरुण कभी तेन्दुलकर नहीं हो सकता। यह वैसे ही है जैसे कौवा चला हंस की चाल।

(xiv) हाथ डालना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दखल देना

प्रयोग— न्याय के लिए सामाजिक मुद्दों में हाथ डालना उचित ही हैं।

(xv) उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— हया उतर जाने पर व्यक्ति किसी की परवाह नहीं करता।

प्रयोग— वह व्यक्ति तीसरी बार चोरी करते पकड़ा गया फिर भी कैसे हँस रहा है सच ही कहा गया है कि उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई।

(xvi) पानी पीकर जात पूछना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— काम हो जाने के बाद नीचा दिखाना।

प्रयोग— जब भूख लगी तब तो नन्दी पण्डित ने छक कर ढाबे पर पूड़ियाँ खायी; अब ढाबे वाले की जात पूछ रहे हैं यह तो वही बात हुई पानी पीकर जात पूछना।

(xvii) देशी कुतिया बिलायती बोली

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— जो न हो वही खुद को दिखाना।

प्रयोग— चार बार कोर्ट कचहरी घूमने के बाद रामू अपने को जज ही समझने लगा है यह तो वही बात हुई जैसे, देशी कुतिया बिलायती बोली।

(xviii) नंगे बड़े परमेश्वर से

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दुष्ट व्यक्ति से सब डरते हैं।

प्रयोग— रामू इतना दुष्ट है कि उससे उसके माँ बाप भी डरते हैं सच ही कहा है नंगे बड़े परमेश्वर से।

1990

निम्नलिखित मुहावरों और कहावतों में से किन्हीं दस के अर्थ लिखिए और वाक्यों में उनका प्रयोग करो—

(i) सिर आँखों पर, (ii) साँप सूँघना, (iii) आसमान सिर पर उठाना, (iv) गाँठ बाँधना, (v) किराये का टट्टू होना, (vi) टेढ़ी खीर, (vii) उल्टी खोपड़ी, (viii) जमीन आसमान के कुलाबे मिलाना, (ix) पीठ में छुरा भोंकना, (x) अपने मुँह मिट्ठू बनना, (xi) नाच न आवे आँगन टेढ़ा, (xii) मीठी छूरी चलाना, (xiii) न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी, (xiv) जिसकी लाठी उसी की भैंस, (xv) आप डूबे तो जग डूबा, (xvi) किसी का घर जले कोई तापे, (xvii) सूत न कपास जुलाहे में लट्ठम-लट्ठा, (xviii) जैसा देश वैसा भेष, (xix) फिसल पड़े तो हर गंगा।

हल—

(i) सिर आँखों पर

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यन्त सम्मानपूर्वक

प्रयोग— माता-पिता की आज्ञा सदैव सिर आँखों पर रखिए।

(ii) साँप सूँघना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अत्यन्त भयभीत होना

प्रयोग— खड़ी चढ़ाई देखकर ड्राइवर को मानो साँप सूँघ गया हो।

(iii) आसमान सिर पर उठाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— उपद्रव करना, हो हल्ला मचाना।

प्रयोग— श्याम को फुटबाल टीम में शामिल न करने पर उसने तो आसमान ही सिर पर उठा लिया।

(iv) गाँठ बाँधना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दृढ़ निश्चय करना। याद रखना

प्रयोग— बड़ों की बात माननी है, यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए।

(v) किराये का टट्टू होना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— धन के लालच में काम करना

प्रयोग— धन के लालच में बार-बार मालिक बदलने से अच्छा है अपनी रोजी रोटी का इन्तजाम खुद कर ले।

(vi) टेढ़ी खीर

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— दुष्कर काम

प्रयोग— व्यापारिक हितों की रक्षा करते हुए WTO में अपना पक्ष रखना कूटनीतिक टेढ़ी खीर है।

(vii) उल्टी खोपड़ी

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— नासमझ। मूर्ख।

प्रयोग— दुर्योधन उल्टी खोपड़ी का व्यक्ति था, उसने भगवान की बात भी नहीं मानी।

(viii) जमीन आसमान के कुलाबे मिलाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— कार्यपूर्ति के हर सम्भव प्रयास करना। शेखी बघारना या बहुत डींग हाँकना

प्रयोग— परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए श्याम ने जमीन आसमान के कुलाचे मिला दिये।

जमीन आसमान के कुलाबे मिलाना तो कोई उपेन्द्र से सीखे।

(ix) पीठ में छूरा भोंकना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— धोखा देना।

प्रयोग— जयचन्द द्वारा पीठ में छुरा भोंकने के कारण ही पृथ्वीराज चौहान गोरी के हाथों पराजित हुए।

(x) अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— अपनी प्रशंसा आप करना।

प्रयोग— सुमित हर बात में अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनने लगता है।

(xi) नाच न आवे आँगन टेढ़ा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अपनी अज्ञानता दूसरों पर मढ़ना।

प्रयोग— गायन प्रतियोगिता में अपने खराब गाने के पीछे आरकेस्ट्रा को जिम्मेदार ठहराना इस उक्ति को चरितार्थ करता है नाच न आवे आँगन टेढ़ा।

(xii) मीठी छूरी चलाना

वर्ग— मुहावरा

अर्थ— मधुर बातों से व्यंग करना

प्रयोग— समझदार अध्यापक छड़ी कम मीठी छूरी अधिक चलाते हैं जिससे समझदार विद्यार्थी और अधिक सजग हो सकें।

(xiii) न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— असम्भव सी लगने वाली शर्त

प्रयोग— काम करने का मन न होने पर मोहन ऐसी शर्त रख देता है कि वह काम करना ही न पड़े यह ऐसा लगता है कि ‘न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी’।

(xiv) जिसकी लाठी उसकी भैंस

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— ताकत से कुछ मनवाने का प्रयास करना

प्रयोग— पाण्डवों को राज्य में हिस्सा न देकर कौरव जिसकी लाठी उसकी भैंस कहावत को चरितार्थ कर रहे थे।

(xv) आप डुबे तो जग डुबा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— पहले स्वयं की चिन्ता करना।

प्रयोग— व्यक्ति को इतना अधिक आत्म-केन्द्रित नहीं होना चाहिए कि अपने सिवाय कुछ और सुझे ही न, यह तो वही बात हो गयी कि आप डुबे तो जग डुबा।

(xvi) किसी का घर जले कोई तापे

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— दूसरों की बरबादी में भी लाभ ढूँढना।

प्रयोग— कुछ लोगों की आदत होती है कि दूसरों की हानि में भी उन्हें अपना ही भला सूझता है। यह तो वही बात हुई घर जले किसी का तो कोई तापने के ही चक्कर में है।

(xvii) सूत न कपास जुलाहे में लट्ठम-लट्ठा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— बिना किसी वजह के लड़ाई करना।

प्रयोग— आजकल के झगड़े का कोई कारण नहीं होता बल्कि सारे झगड़े सूत न कपास जुलाहे में लट्ठम-लट्ठा जैसे ही होते हैं।

(xviii) जैसा देश वैसा भेष

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— समय-परिस्थिति के अनुकूल चलना

प्रयोग— सफल लोग सदैव जैसा देश वैसा भेष रखते हैं।

(xix) फिसल पड़े तो हर गंगा

वर्ग— लोकोक्ति

अर्थ— अनिच्छित कार्य को भी इच्छित बताना। प्रयोग— कुछ लोगों की आदत होती है कि किसी भी परिस्थिति का लाभ उठाने में वे चुकते नहीं ऐसे लोग के बारे में ही कहावत है कि फिसल पड़े तो हर गंगा।


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