परिभाषा, लक्षण एवं पहचान
“अनव्ययम् अव्ययं भवति इत्यव्ययीभावः”— इस समास में अनव्यय (उत्तरपद) और अव्यय (पूर्वपद) मिलकर अव्यय हो जाता है। “पूर्वपदप्रधानोऽव्ययीभावः”— अव्ययीभाव समास में पूर्वपद प्रधान होता है।
अव्ययीभाव का अर्थ है, ‘अव्यय’ हो जाना। वस्तुतः अव्ययीभाव ‘क्रियाविशेषण’ का कार्य करता है, अर्थात् यह क्रिया की विशेषता बताता है। अव्ययीभाव समास में पहले खण्ड की प्रधानता होती है। अव्ययीभाव का लक्षण हैं—
- पूर्वपद की प्रधानता; इसमें पहला पद उपसर्ग आदि जाति का अव्यय होता है और वही प्रधान होता है।
- सामासिक या समास पद अव्यय हो जाता है।
- समूचा पद ‘क्रियाविशेषण’ का कार्य करता है।
अर्थात् “अव्ययीभाव समास में ‘पूर्वपद की प्रधानता’ होती है, सामासिक या समास पद ‘अव्यय’ हो जाता है और यह समास पद ‘क्रियाविशेषण’ का कार्य करता है।”
उदाहरणार्थ—
- ‘भरपेट’ में अव्ययीभाव समास है। भरपेट = भर + पेट। इसमें ‘पेट’ एक संज्ञापद है, इसलिए विकार होता है— कई पेटों में। परन्तु भरपेट अव्यय (अविकारी) हो गया तो भरपेटों नहीं हो सकता।
- ‘हरघड़ी’ अव्ययीभाव समास है। हरघड़ी = हर + घड़ी। इसमें ‘घड़ी’ एक संज्ञापद है, इसलिए विकार होता है— घड़ियाँ, घड़ियों में। हरघड़ी हो जाने पर हरघड़ियाँ, हरघड़ियों नहीं हो सकता।
यही इस समास की पहचान है।

संस्कृत में सामासिक पद अव्यय हो जाने के कारण वह नपुंसकलिंग की प्रथमा विभक्ति के एकवचन के ही रूप में होता है; जैसे— प्रतिदिन, यथाशक्ति, यथासम्भव, आजन्म, बेकाम, बेखटके, भरसक इत्यादि।
संस्कृत अव्ययीभाव समासों में पहला शब्द अव्यय और दूसरा संज्ञा या विशेषण होता है, किन्तु इस समास के हिन्दी उदाहरणों में पहला शब्द प्रायः संज्ञा या विशेषण होता है; जैसे— रातोंरात, घर-घर, हथोंहाथ, दिनोंदिन।
डॉ० भोलानाथ तिवारी के अनुसार— आजन्म, आजीवन, आमरण, बेखटके, व्यर्थ आदि समास शब्द नहीं हैं। इनका तर्क है कि हिन्दीं में इन्हें समास मानना अशुद्ध है, क्योंकि इनमें ‘आ’, ‘वि’, ‘बे’ हिन्दी में उपसर्ग हैं, शब्द या पद नहीं। यह ध्यान देने की बात है कि ‘आ’, ‘वि’, ‘बे’ आदि का हिन्दी शब्द की तरह स्वतन्त्र प्रयोग नहीं होता।
परन्तु डॉ० वासुदेवनन्दन प्रसाद, डॉ० हरदेव बाहरी और यहाँ तक कि पं० कामताप्रसाद गुरु ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं लगाते हैं।
| संस्कृत | |
|---|---|
| अनु (पीछे/संग‑साथ) | अनुकूल, अनुकृति, अनुदिन, अनुरूप, अनुसार आदि। |
| आ (तक) | आकण्ठ, आकर्षण, आजन्म, आजानुबाहु, आजीव, आजीवन, आभार, आभोग, आमरण, आरक्षण, आरोहण, आशंका, आसमुद्र, आस्वादन, आहत आदि। |
| उप (सहायक/समीप) | उपकूल, उपगंगा, उपाचार्य, उपाध्याय, उपायुक्त, उपलब्धि आदि। |
| नि/निः | निकृष्ट, निःस्वार्थ, निर्जन आदि। |
| प्रति (प्रत्येक) | प्रतिदिन, प्रतिसप्ताह, प्रतिवर्ष, प्रत्येक आदि। |
| प्रति (विपरीत/बदले में) | प्रतिक्रिया, प्रतिगामी, प्रतिदिन, प्रतिध्वनि, प्रतिफल, प्रतिमान, प्रत्यक्ष, प्रतिलग्न, प्रतिवर्ती, प्रतिशत, प्रतिसाध्य आदि। |
| यथा (अनुसार) | यथाक्रम, यथानुकूल, यथामति, यथारुचि, यथार्थ, यथालब्ध, यथावत, यथाविधि, यथाशक्ति, यथाशीघ्र, यथासमय, यथासम्भव, यथासाध्य, यथास्थान, यथोचित आदि। |
| यावत् (तक) | यावज्जन्म, यावज्जीवन आदि। |
| वि (बिना) | व्यर्थ आदि। |
| कुछ और उदाहरण | कृपापूर्वक, ध्यानपूर्वक, श्रद्धापूर्वक, निर्विघ्न, निःसंकोच, निर्भय, परोक्ष, सहर्ष, सानंद, सपत्नीक, सपरिवार, मृत्युपर्यन्त, कथनानुसार, नियमानुसार, दिन‑प्रतिदिन। |
| नोट— अव्ययीभाव का उत्तर पद यदि ‘अक्षि’ (नेत्र) हो तो वह पूर्व पद से जुड़कर ‘अक्ष’ हो जाता है; जैसे— प्रत्यक्ष, समक्ष, परोक्ष आदि। | |
हिन्दी में संस्कृति के विपरीत अव्ययीभाव समास कम पाये जाते हैं। पं० कामताप्रसाद गुरु के अनुसार ये तीन प्रकार के हैं—
| हिन्दी/उर्दू | |
|---|---|
| हिन्दी/उर्दू | अनजाने, निघड़क, निडर, निकम्मा, भरपूर, भरपेट, भरसक, रातभर, दिनभर, इकबारगी, दुबारा आदि। |
| उर्दू/फारसी/अरबी | दर-असल, नाहक, बर्जिस, बखूबी, बेआबरू, बेधड़क, बेफायदा, बेवफा, बेशक, बेशर्म, साल-ब-साल, हररोज, हरसाल आदि। |
| मिश्रित | हरघड़ी, हरदिन, बेकाम, बेखटके आदि। |
| नोट— ‘हर’ फारसी का शब्द है जिसका अर्थ है— प्रत्येक, एक-एक। यह विशेषण है, इसलिए इसके योग से बने शब्दों को कर्मधारय समास मानने का भ्रम हो सकता है। परन्तु इन शब्दों का उपयोग ‘क्रिया-विशेषण’ के समान होता है, इसलिए ये अव्ययीभाव समास हैं। | |
प्रति (प्रत्येक) अपनी संज्ञा की द्विरुक्ति मिटाने के लिए लाया जाता है; जैसे— प्रतिदिन, प्रतिवर्ष इत्यादि।
- प्रतिगृह (गृहम् गृहम्) = प्रत्येक घर अर्थात् हर घर
- प्रतिदिन (दिनम् दिनम्) = प्रत्येक दिन अर्थात् हर दिन
- प्रतिवर्ष (वर्षम् वर्षम्) = प्रत्येक वर्ष अर्थात् हर वर्ष
परन्तु हिंदी में प्रति का उपयोग न कर अगली संज्ञा की ही द्विरुक्ति करके अव्ययीभाव समास बनाते हैं। इस समास में हिंदी का प्रथम शब्द बहुधा विकृत रूप में आता है। उदाहरण— आमने-सामने, एकाएक, कानोंकान, कोठे-कोठे, गली-गली, गाँव-गाँव, घर-घर, दिनोंदिन, धीरे-धीरे, धड़ाधड़, धमाधम, नगर-नगर, पल-पल, पहले-पहल, बार-बार, बीचोबीच, रातोंरात, साथ-साथ, हाथोंहाथ (हाथा-हाथी) इत्यादि।
पुश्तानपुश्त, साल-दर-साल, आदि शब्दों में दर (फारसी) और आन (संस्कृत अनु) अव्ययों का प्रयोग हुआ है। ये शब्द भी अव्ययीभाव समास के उदाहरण है।
कभी-कभी द्विरुक्त शब्दों के बीच में ‘वा’, ‘ही’ अथवा ‘आ’ आता है; जैसे— मन-ही-मन, घर-ही-घर, आप-ही-आप, मुँहामुँह, सरासर (पूर्णतया), एकाएक।
इन द्विरुक्ति समस्त पदों का उपयोग संज्ञा और सर्वनाम की तरह भी होता है; जैसे—
- कौड़ी-कौड़ी जोड़कर
- उसकी नस-नस में जहर भरा है
- तिल-तिल भारत भूमि जीत यवनों के कर से
उपर्युक्त उदाहरणों में कौड़ी-कौड़ी, नस-नस और तिल-तिल कर्मधारय समास हैं।
संज्ञाओं के समान अव्ययों की द्विरुक्ति से भी अव्ययीभाव समास होता है; जैसे— बीचोबीच, धड़ाधड़, पहले-पहल, बराबर, धीरे-धीरे इत्यादि।
अव्ययीभाववाले पदों का विग्रह— ऐसे समस्तपदों को तोड़ने में, अर्थात् उनका विग्रह करने में हिन्दी में बड़ी कठिनाई होती है, विशेषतः संस्कृत के समस्त पदों का विग्रह करने में हिन्दी में जिन समस्त पदों में द्विरुक्तिमात्र होती है, वहाँ विग्रह करने में केवल दोनों पदों को अलग कर दिया जाता है। जैसे—
- (संस्कृत) प्रतिदिन— दिन-दिन; यथाविधि— विधि के अनुसार; यथाक्रम— क्रम के अनुसार, यथाशक्ति— शक्ति के अनुसार; यथासम्भव— सम्भावना के अनुसार; यथासाध्य— साध्य के अनुसार; आजन्म— जन्म तक; आमरण— मरण तक; यावज्जीवन— जब तक जीवन है; व्यर्थ— बिना अर्थ का।
अव्ययीभाव समास का मुख्य पाणिनि-सूत्र है—
“अव्ययं विभक्तिसमीपसमृद्धिव्यूद्ध्यर्थाभावात्ययासं प्रति शब्द प्रादुर्भावपश्चाद्यथाऽनुपूर्व्ययौगपद्यसादृश्यसम्पत्तिसाकल्यान्तवचनेषु।”
विभक्ति, सामीप्य, समृद्धि, व्वृद्धि (ऋद्धि का अभाव), अर्थाभाव, अत्यय (अतीत होता), असम्प्रति (वर्तमान काल में युक्त न होना), शब्द प्रादुर्भाव (प्रसिद्धि), पश्चात् यथार्थ, आनुपूर्व्य (अनुक्रम), यौगपद्य (एक ही समय में होना), सादृश्य, सम्पत्ति (आत्मानुरूपता), साकल्य (सम्पूर्णता) और अन्त इन अर्थों में से किसी भी अर्थ में वर्तमान अव्यय का समर्थ सुबन्त के साथ समास होता है। जैसे—
| अव्ययीभाव समास (संस्कृत) | |
|---|---|
| विभक्ति | अधिहरि = हरि में |
| अध्यात्म = आत्मा में | |
| समीप | उपनदी = नदी के समीप |
| उपगंगा = गंगा के समीप | |
| उपनगर = नगर के समीप | |
| समृद्धि | सुमन्द्र = मद्रवासियों की समृद्धि |
| सुभिक्षा = भिक्षाटन की समृद्धि | |
| व्यृद्धि (समृद्धि का अभाव) | दुर्यवन = यवनों की दुर्गति |
| दुर्भिक्ष = भिक्षा का अभाव | |
| अर्थाभाव | निर्मक्षिक = मक्खियों का अभाव |
| निर्विघ्न = विघ्नों का अभाव | |
| अत्यय (समाप्ति, बीत जाना) | अतिहिमम् = हिम का नाश |
| अतिरोग = रोग का नाश | |
| असम्प्रति (वर्तमान काल में युक्त न होना) | अतिनिद्र = इस समय नींद उचित नहीं |
| अतिस्वप्न = इस समय सोना उचित नहीं | |
| शब्द-प्रादुर्भाव (प्रसिद्धि) |
इतिहरि = ‘हरि’ शब्द का प्रकट होना इतिविष्णु = विष्णु शब्द का प्रकट होना |
| पश्चात् | अनुविष्णु = विष्णु के पीछे |
| अनुराम = राम के पीछे | |
| यथा | अनुरूप = रूप के योग्य |
| अनुगुण = गुण के योग्य | |
| प्रतिगृह = घर-घर | |
| प्रतिदिन = दिन-दिन | |
| यथाशक्ति = शक्ति भर | |
| यथाबलम् = बल भर | |
| सहरि = हरि की समानता | |
| सरूपम् = रूप की समानता | |
| आनुपूर्व्य (अनुक्रम) | अनुज्येष्ठ = ज्येष्ठ के क्रम से |
| अनुवर्णन् = वर्ण के क्रम से | |
| यौगपद्य (एक ही समय पर होना) | सचक्रम् = चक्र के साथ |
| सहर्षम् = हर्ष के साथ | |
| सादृश्य | ससखि = मित्र जैसा |
| सवर्ण = वर्ण के समान | |
| सम्पत्ति (आत्मानुरूपता) | सुक्षत्र = राजाओं की सम्पत्ति |
| सुक्षत्रिय = क्षत्रियों की सम्पत्ति | |
| साकल्य (सम्पूर्णता) | सतृण = तिनके को बिना छोड़े |
| मर्यादा | आमरण = मरने तक |
| आजीवन = जीवन भर | |
| अन्तवचन | साग्नि = अग्नि ग्रंथ तक |
अव्ययीभाव समास के भेद
अव्ययीभाव समास के दो भेद बताये गये हैं—
- अव्ययपदपूर्व, पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा या विशेषण; जैसे— आमरण, यथाशक्ति, उपगगंगा आदि।
- नामपदपूर्व, पहला पद संज्ञा या विशेषण परन्तु वह अव्यय का तरह व्यवहार करता है; जैसे— विवेकपूर्वक, कथनानुसार, मृत्युपर्यन्त आदि।
अव्ययीभाव समास संग्रह
| समास | विग्रह |
| अकारण | बिना कारण का |
| अतिरिक्त | आवश्यकता से अधिक / बचा हुआ |
| अतिसार | अति (बार-बार) सार अर्थात् पतले दस्त |
| अतीन्द्रिय | इन्द्रियों से परे |
| अत्यधिक | अति (बहुत) अधिक अर्थात् बहुत ज्यादा / सीमा से आगे |
| अत्यन्त | अति (अधिक) अन्त (सीमा) अर्थात् बहुत अधिक |
| अत्यल्प | अति (बहुत) कम |
| अत्युत्तम | अति (बहुत) उत्तम |
| अनुकरण | अनु (पीछे) करण (कृत्य) अर्थात् देखा-देखी किया जानेवाला कार्य |
| अनुकृति | कृति के समान या देखा-देखी |
| अनुगंगा | अनु (साथ या संग) गंगा अर्थात् गंगा के किनारे |
| अनुचिंतन | अनु (बार-बार) चिंतन अर्थात् सतत चिंतन |
| अनुरूप | रूप के योग्य |
| अनुसार | जैसा सार है |
| अनुस्मारक | पीछे (अनु) स्मृति दिलानेवाला (स्मारक) |
| आकण्ठ (आकंठ) | कण्ठ तक |
| आजन्म | जन्म तक |
| आजानुबाहु | घुटनों (जानु) तक बाहु |
| आजीवन | जीवन भर |
| आपादमस्तक | पाद (पैर) से मस्तक तक |
| आमरण | मरण तक |
| उपकूल | कूल के समीप |
| चक्रपाणिदर्शनार्थ | चक्र है पाणि में जिसके, उसके दर्शन के अर्थ |
| दरहकीकत | वास्तव में |
| दिनानुदिन | दिन के बाद दिन |
| निधड़क | बिना धड़क के |
| निर्भय | बिना भय का |
| निर्विवाद | बिना विवाद के |
| परोक्ष | अक्षि से परे |
| प्रतिक्षण | प्रत्येक क्षण / हर क्षण |
| प्रतिघात | विपरीत (प्रति) घात / घात के बदले घात |
| प्रतिदिन | दिन-दिन / हर दिन |
| प्रतिध्वनि | विपरीत (प्रति) ध्वनि / ध्वनि की ध्वनि |
| प्रतिफल | प्रति फल अर्थात् परिणाम |
| प्रतिमान | प्रति मान अर्थात् नमूना |
| प्रतिमास | हर मास (मास-मास) या प्रत्येक मास |
| प्रत्यंग | अंग-अंग / हर (प्रति) अंग |
| प्रत्यक्ष | अक्षि (आँख) के प्रति (आगे) |
| प्रत्युत्तर | प्रति (बदले में) उत्तर |
| प्रत्युपकार | उपकार के प्रति / उपकार के बदले में (प्रति) उपकार |
| प्रत्येक | एक-एक / हर एक |
| बखूबी | खूबी के साथ |
| बतौर | तौर के साथ |
| बदस्तूर | दस्तूर के साथ |
| बाकलम | कलम के साथ |
| बारम्बार | बार-बार |
| बेकाम | बिना काम का |
| बेखटके | बिने खटके के |
| बेफायदा | बिना फायदे का |
| बेरहम | बिना रहम के |
| बेलाग | बिना लाग का |
| बेशऊर | बिना शऊर का |
| बेशर्म | बिना शर्म के |
| पलपल | प्रत्येक पल / हर पल |
| भरपेट | भर पेट (पेट-भर) |
| मनमाना | मन के अनुसार |
| यथाकर्म | कर्म के अनुसार |
| यथाक्रम | क्रम के अनुसार |
| यथायोग्य | जितना योग्य है |
| यथारुचि | रुचि के अनुसार |
| यथाविधि | विधि के अनुसार |
| यथाशीघ्र | जितना शीघ्र हो |
| यथार्थ | अर्थ के अनुसार / जैसा (वास्तव में) अर्थ है |
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| यथासमय | समय के अनुसार |
| यथासम्भव | सम्भावना के अनुसार |
| यथासाध्य | जितना साधा जा सके / जहाँ तक हो सके / जितना किया जा सके |
| यथासामर्थ्य | सामर्थ्य के अनुसार |
| यथास्थान | निर्धारित स्थान के अनुसार |
| यथास्थिति | जैसी स्थिति है |
| यथोचित | यथा उचित या जैसा चाहिए वैसा |
| यावज्जीवन | जीवन भर |
| लाजवाब | जिसका जवाब न हो |
| व्यर्थ | बिना अर्थ का |
| समक्ष | अक्षि के सामने |
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