तत्पुरुष समास

👤 By Pinwas IAS📅 2 September 2026⏱ 1 min read
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“तत्पुरुष समास में अन्तिम पद (उत्तरखंड) प्रधान होता है।” इस समास में साधारणतः प्रथम पद विशेषण और द्वितीय पद विशेष्य होता है। द्वितीय पद, अर्थात् बादवाले पद के विशेष्य होने के कारण इस समास में उसकी प्रधानता रहती है।

तत्पुरुष, कर्मधारय और द्विगु समास

तत्पुरुष, कर्मधारय और द्विगु समास के वर्गीकरण में बहुत भ्रम होता है। पदों की प्रधानता के आधार पर चार प्रकार के समास है। इस वर्गीकरण में कर्मधारय और द्विगु समास नहीं आते हैं। वस्तुतः कर्मधारय समास तत्पुरुष समास का उप-प्रकार और द्विगु समास कर्मधारय समास का उप-भेद है।  

कुछ विद्वानों ने कर्मधारय और द्विगु को भी पृथक मानते हुए छः समास मानते हैं।

सबसे पहले तत्पुरुष समास के वर्गीकरण को स्पष्टरूप से समझ लेते है—

तत्पुरुष समास के भेद— इसके दो मुख्य भेद हैं—

  1. व्यधिकरण तत्पुरुष या तत्पुरुष समास
  2. समानाधिकरण तत्पुरुष या कर्मधारय समास

अधिकरण का अर्थ है— कारक चिह्नों का इतर शब्दों से सम्बन्ध। व्यधिकरण (वि + अधिकरण), अर्थात् दो शब्द भिन्न कारक चिह्नों से परस्पर सम्बद्ध हैं। समानाधिकरण (सम् + अधिकरण), अर्थात् दो शब्द समान कारक चिह्न द्वारा परस्पर सम्बद्ध हैं।

व्यधिकरण तत्पुरुष समास के विग्रह में उसके अवयवों में भिन्न-भिन्न विभक्तियाँ लगती हैं, ये विभक्तियाँ कर्त्ता और सम्बोधन को छोड़कर शेष सभी कारकों की विभक्तियाँ होती हैं। व्यधिकरण तत्पुरुष समास को ही संक्षेप में तत्पुरुष समास कहा जाता है। साथ ही विभक्तियों के आधार पर इनके पहचान के आधार पर व्यधिकरण तत्पुरुष को ‘विभक्तितत्पुरुष’ भी कहा जाता है।

जिस तत्पुरुष समास के विग्रह में दोनों पदों के साथ एक ही (कर्त्ता कारक) विभक्ति आती है, उसे ‘समानाधिकरण तत्पुरुष’ कहते हैं। समानाधिकरण तत्पुरुष को ही संक्षेप में कर्मधारय समास कहते हैं। अर्थात् जिस तत्पुरुष समास में कर्त्ताकारक की प्रथमा विभक्ति छिपी रहती है, उसे ‘समानाधिकरणतत्पुरुष’ अथवा ‘कर्मधारय समास’ कहा जाता है। कर्मधारय समास में दोनों पद परस्पर विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान होते हैं।

अगर इस कर्मधारय का पूर्वपद प्रथमा विभक्ति का संख्या वाचक शब्द है, तो उसे ‘द्विगु समास’ कहा जायेगा। अर्थात् द्विगु समास में पहला पद संख्यावाचक होता है और समस्त पद समूह का बोधक होता है।

इस तरह समानाधिकरण तत्पुरुष का प्रचलित नाम कर्मधारय समास है और यह तत्पुरुष समास का एक उपभेद है। इसी तरह द्विगु समास भी कर्मधारय समास का एक उपभेद है।

तत्पुरुष समास के भेद

तत्पुरुष (व्यधिकरणतत्पुरुष) समासों को पहले पद में लगी हुई कारक की विभक्तियों के नाम पर ही पुकारा जाता है और कारक चिह्नों के आधार पर इसके छः भेद हैं—

  1. कर्मकारक की विभक्ति लगने पर ‘कर्मतत्पुरुष’ (द्वितीया तत्पुरुष)
  2. करणकारक की विभक्ति लगने पर ‘करणतत्पुरुष’ (तृतीया तत्पुरुष)
  3. सम्प्रदानकारक की विभक्ति लगने पर ‘सम्प्रदानतत्पुरुष’ (चतुर्थी तत्पुरुष)
  4. अपादानकारक की विभक्ति लगने पर ‘अपादानतत्पुरुष’ (पंचमी तत्पुरुष)
  5. सम्बन्धकारक की विभक्ति लगने पर ‘सम्बन्ध-तत्पुरुष’ (षष्ठी तत्पुरुष)
  6. अधिकरणकारक की विभक्ति लगने पर ‘अधिकरणतत्पुरुष’ (सप्तमी तत्पुरुष)

कर्त्ता (प्रथमा विभक्ति) और संबोधन (अष्टमी विभक्ति) को छोड़ शेष छह कारकों की विभक्तियों के अर्थ में तत्पुरुष समास होता है। अर्थात् यहाँ ध्यान देनेवाली बात है कि इसमें कर्त्ता-कारक और सम्बोधन को छोड़कर शेष छह कारक शामिल हैं।

तत्पुरुष समास में बहुधा दोनों पद संज्ञा या पहला पद संज्ञा और दूसरा विशेषण होता है। ‘द्वितीयातत्पुरुष’, ‘तृतीयातत्पुरुष’, ‘चतुर्थीतत्पुरुष इत्यादि संस्कृत में ही कहे जाते हैं। हिन्दी में ‘कर्मतत्पुरुष’, ‘करणतत्पुरुष’ आदि ही कहने को परिपाटी है, क्योंकि हिन्दी में कारक की विभक्तियों को प्रथमा, द्वितीया, तृतीया आदि नहीं कहा जाता। इसे ‘विभक्तितत्पुरुष’ भी कहा जाता है।

वैयाकरणों ने तत्पुरुष समास के चार और प्रकार बताये हैं—

  1. अलुक् तत्पुरुष
  2. उपपद तत्पुरुष
  3. नञ् तत्पुरुष
  4. प्रादि तत्पुरुष

चारों का संदर्भ संस्कृत में है।

इस तरह तत्पुरुष समास का क्षेत्र बहुत विस्तृत है।

तत्पुरुष समास

तत्पुरुष (व्यधिकरणतत्पुरुष)

तत्पुरुष (व्यधिकरणतत्पुरुष) अर्थात् तत् (उस) का पुरुष। इसमें ‘का’ (कारक चिह्न) का लोप हुआ। इसी प्रकार ‘हवनसामग्री’ का अर्थ है— हवन के लिए सामग्री। इसमें (हवनसामग्री) ‘के लिए’ (कारक चिह्न) का लोप हुआ। “तत्पुरुष समास में अन्तिम पद (उत्तरखंड) प्रधान होता है।” इस समास में साधारणतः प्रथम पद विशेषण और द्वितीय पद विशेष्य होता है। द्वितीय पद, अर्थात् बादवाले पद के विशेष्य होने के कारण इस समास में उसकी प्रधानता रहती है।

“उत्तरपदार्थप्रधानः तत्पुरुषः”

दो उदाहरण लेते है— राजपुरुष व हवनसामग्री। व्याकरण में अर्थात् वाक्य के अंतर्गत उत्तरखंड (पुरुष या सामग्री) के ही रूप बदलेंगे, पूर्वखंड के नहीं; जैसे— राजपुरुषों ने, हवनसामग्री से। इसका कारण यह है कि पूर्वखंड तो मात्र विशेषण का कार्य करता है, जबकि उत्तरपद विशेष्य का और प्रधानता उत्तरखंड की रहती है। राजपुरुषों और हवनसामग्री में पूर्वखंड (राज और हवन) विशेषण की तरह और उत्तरखंड (पुरुष और सामग्री) विशेष्य की तरह व्यवहार कर रहा है।

एक और उदाहरण लेते हैं— पर्णकुटी = पर्ण की कुटी; यहाँ पहला पद ‘पर्ण’ उत्तर पद ‘कुटी’ की विशेषता बताता है, अर्थात् उत्तर पद प्रधान है।

इस तरह तत्पुरुष समास के अधोलिखित लक्षण हैं—

  1. अन्तिम पद (उत्तरखंड) प्रधान होता है।
  2. पूर्व पद विशेषण का कार्य करता है।
  3. उत्तर पद विशेष्य का कार्य करता है।
  4. व्याकरण अर्थात् वाक्य में उत्तर पद में बदलाव होता है, न कि पूर्व पद में।
तत्पुरुष

कारक चिह्न के आधार पर भेद

कर्मतत्पुरुष (द्वितीया तत्पुरुष)

कर्मतत्पुरुष समास में ‘को’ कारक चिह्न का लोप होता है; जैसे—

  • आशातीत — आशा को अतीत (लाँधकर गया हुआ)
  • कठफोड़ा — काठ फोड़नेवाला
  • कष्टापन्न — कष्ट को आपन्न (प्राप्त)
  • गगनचुम्बी — गगन को छूनेवाली
  • गिरहकट — गिरह (जेब) काटनेवाला
  • गृहागत — गृह को आगत।
  • घरफूँक — घर को फूँकना
  • चिड़ीमार — चिड़िया को मारनेवाला
  • चित्तचोर — चित्त को चुरानेवाला
  • परलोकगमन — परलोक को जाना
  • मनोहर — मन को हरनेवाला
  • मुँहतोड़ — मुँह को तोड़नेवाला
  • शरणागत — शरण लेने को आया हुआ
  • सुखप्रद — सुख को देने वाला
  • स्वर्गप्राप्त — स्वर्ग को प्राप्त

करणतत्पुरुष (तृतीय तत्पुरुष)

करणतत्पुरुष समास में ‘से’ या ‘के द्वारा’ कारक चिह्न का लोप होता है; जैसे—

  • अकालपीड़ित — अकाल से पीड़ित
  • आँखोदेखा — आँखों से देखा
  • आचारकुशल — आचार से कुशल  
  • ईश्वरदत्त — ईश्वर द्वारा दिया हुआ
  • ईश्वरप्रदत्त — ईश्वर से प्रदत्त
  • कपड़छना — कपड़े से छना हुआ
  • कष्टसाध्य — कष्ट (कठिनाई) से साध्य (किया हुआ)
  • गुणयुक्त — गुणों से युक्त
  • तुलसीकृत — तुलसी द्वारा कृत, तुलसी से कृत (रचित या बनाया हुआ)
  • नीतियुक्त — नीति से युक्त
  • पदयात्रा — पद से यात्रा
  • प्रकृतिदत्त — प्रकृति द्वारा दत्त (प्रदत्त)
  • प्रेतभीत — प्रेत से भीत (डरा हुआ)
  • भयभीत — भय से भीत (डरा हुआ)
  • भुखमरा — भूख से मरनेवाला
  • मदमाता — मद से माता
  • मदांध — मद से अंधा
  • मनमाना — मन से माना
  • मुँहमाँगा — मुँह से माँगा
  • रोगग्रस्त — रोग से ग्रस्त
  • वज्राहत — वज्र से आहत
  • वाग्युद्ध — वाक् से युद्ध
  • वृकभीत— वृक (भेड़िये) से भीत (डर)
  • व्याघ्रभीत— व्याघ्र से भीत (डरा हुआ)
  • शराहत — शर से आहत
  • शिरोधार्य — शिर (सम्मान) से धारण करना
  • शोकाकुल — शोक से आकुल
  • सर्पभीत— सर्प से भीत (डरा हुआ)

सम्प्रदान

सम्प्रदान तत्पुरुष समास में ‘के लिए’ कारक चिह्न का लोप होता है; जैसे—

  • आरामकुर्सी — आराम के लिए कुर्सी
  • कन्याविद्यालय — कन्याओं के लिए विद्यालय
  • कृष्णार्पण — कृष्ण के लिए अर्पण
  • दानधन — दान के लिए धन
  • देवबलि — देवों के लिए बलि
  • देशभक्ति — देश के लिए भक्ति
  • पशुशाला — पशुओं के लिए शाला (गृह)
  • बलिपशु — बलि के लिए पशु
  • भंडारघर — भंडार के लिए घर
  • भूतबलि — भूतों के लिए बलि
  • महँगाईभत्ता — महँगाई के लिए भत्ता
  • मार्गव्यय — मार्ग के लिए भत्ता
  • रसोईघर — रसोई के लिए घर
  • राहखर्च — राह के लिए खर्च
  • विद्यालय — विद्या के लिए आलय
  • हथकड़ी — हाथ के लिए कड़ी
  • हवनकुंड — हवन के लिए कुंड

अपादान

अपादान तत्पुरुष समास में कारक चिह्न ‘से’ (अलगाव के अर्थ में) का लोप होता है; जैसे—

  • ऋणमुक्त — ऋण से मुक्त
  • कामचोर — काम से जी चुरानेवाला।
  • गुणहीन — गुण से हीन
  • जन्मांध — जन्म से अन्ध (अंधा)
  • जातिच्युत — जाति से च्युत
  • दूरागत — दूर से आगत
  • देशनिकाला — देश से निकाला
  • धनरहित  — धन से रहित
  • धर्मभ्रष्ट — धर्म से भ्रष्ट
  • धर्मविमुख — धर्म से विमुख
  • पदच्युत — पद से च्युत
  • बंधनमुक्त — बंधन से मुक्त
  • बहिरागत — बाहर से आगत
  • रणविमुख — रण से विमुख
  • विद्याहीन — विद्या से हीन

सम्बन्ध

सम्बन्ध तत्पुरुष में कारक चिह्न ‘का’, ‘के’, ‘की’ का लोप होता है; जैसे—

  • अनारदाना — अनार का दाना
  • ऋषिकन्या — ऋषि की कन्या
  • करुणासागर — करुणा के सागर
  • करोड़पति — करोड़ (रूपये) का पति (स्वामी)
  • गंगाजल — गंगा का जल
  • गृहस्वामी — गृह का स्वामी
  • ग्रंथकार — ग्रंथ का कार (करनेवाला)
  • ग्रामवासी — ग्राम का वासी
  • घुड़दौड़ — घोड़ों का दौड़
  • घुड़साल — घोड़ों की साल (शाला)
  • जलधारा — जल की धारा
  • दयानिधि — दया के निधि
  • दीनानाथ — दीनों के नाथ
  • नरेश — नरों का ईश  
  • पतितपावन — पतितों का पावन करनेवाला
  • पराधीन — पर के अधीन
  • भक्तवत्सल — भक्त का वत्सल
  • माधव — मा (लक्ष्मी) का धव (पति)
  • राजदरबार — राजा का दरबार
  • रामनाम — राम का नाम
  • राष्ट्रपति — राष्ट्र का पति
  • लखपति — लाख (रूपये) का पति (स्वामी)
  • विभाध्यक्ष — विभाग का अध्यक्ष
  • विद्याभ्यास — विद्या का अभ्यास
  • सिरदर्द — सिर का दर्द
  • सेनापति — सेना का पति

अधिकरण

अधिकरण तत्पुरुष समास में कारक चिह्न ‘में’, ‘पर’ का लोप का लोप होता है; जैसे—

  • आपबीती — आप (स्वयं/खुद) पर बीती
  • कानाफूसी — कान में फुस-फुस करना
  • कविपुंगव — कवियों में पुगंव (श्रेष्ठ)
  • गंगास्नान — गंगा में स्नान
  • गृहप्रवेश — गृह में प्रवेश
  • गृहागत — गृह में आगत
  • जलमग्न — जल में मग्न
  • प्रेममग्र — प्रेम में मग्न
  • मनमौजी — मन में मौजी
  • रणकुशल — रण में कुशल
  • वनवास — वन में वास
  • वीरश्रेष्ठ — वीरों में श्रेष्ठ
  • विद्याप्रवीण — विद्या में प्रवीण
  • शरणागत — शरण में आगत
  • शास्त्रनिपुण — शास्त्र में निपुण
  • सभापण्डित — सभा में पण्डित
  • सर्वोत्तम — सर्व में उत्तम
  • सिंहासनारूढ़ — सिंहासन पर आरूढ़
  • स्नेहमग्न — स्नेह में मग्न
  • हरफनमौला — हर फन में मौला (हर हुनर का जानकार)
  • हृदयस्थ — हृदय में स्थित (रहनेवाला)  

तत्पुरुष समास : पहचान की द्विविधा

नोट— तत्पुरुष समास के उदाहरणों में विभक्तियों के सम्बन्ध में मतभेद होने की सम्भावना है, पर वह विशेष महत्त्व का नहीं है। जब तक इस विषय में संदेह है कि ऊपर के सब उदाहरण तत्पुरुष के हैं, तब तक यह बात अप्रधान है कि कोई एक तत्पुरुष, इस कारक का है या उस कारक का। कोई एक तत्पुरुष समास किस कारक का है, इसका निर्णय उस समास के योग्य विग्रह पर अवलंबित है; उदाहरण—

समस्त पदविग्रहसमास प्रकार
वचनचातुरीवचन (वाणी) में चातुरी (चतुराई)अधिकरण तत्पुरुष
वचन की चातुरीसम्बन्ध तत्पुरुष
रसोईघररसोई के लिए घरसम्प्रदान तत्पुरुष
रसोई का घरसम्बन्ध तत्पुरुष
पनचक्कीपानी से चलनेवाली चक्कीकरण तत्पुरुष
पानी की चक्कीसम्बन्ध तत्पुरुष
कूपमंडूककूप में रहनेवाला मंडूक (मेंढक)अधिकरण तत्पुरुष
कूप का मंडूक (मेंढक)सम्बन्ध तत्पुरुष

अन्य भेद

अलुक् तत्पुरुष

जिस समास में पहले पद के बाद कारक चिह्न किसी-न-किसी रूप में विद्यमान रहता है अर्थात् इसमें विभक्ति चिह्न का लोप नहीं हुआ हो उसे अलुक् तत्पुरुष समास कहते हैं, जैसे—

  • युधिष्ठिर— युधि + स्थिर, विग्रह – युद्ध में स्थिर रहनेवाला, यहाँ ‘युधि’ (अर्थ – ‘युद्ध में’) में संस्कृत की सप्तमी विभक्ति लगी है, जो समास बनने के बाद भी नहीं हटी है, इसलिए अलुक् तत्पुरुष समास है।
  • खेचर— खे + चर, विग्रह – आकाश में विचरने वाला (पक्षी), यहाँ ‘खे’ (अर्थ – ‘आकाश में’) में संस्कृत की सप्तमी विभक्ति लगी है, जो समास बनने के बाद भी नहीं हटी है, इसलिए अलुक् तत्पुरुष समास है।
  • मनसिज— मनसि + ज, विग्रह – मन में जन्म लेने वाला (कामदेव), ‘मनसि’ (अर्थ – ‘मन में’) में संस्कृत की सप्तमी विभक्ति लगी है, जो समास बनने के बाद भी नहीं हटी है, इसलिए अलुक् तत्पुरुष समास है।
  • आत्मनेपद— आत्मने + पद, विग्रह – अपने लिए (पद), ‘आत्मने’ (अर्थ – ‘अपने लिए’) में संस्कृत की चतुर्थ विभक्ति लगी है, जो समास बनने के बाद भी नहीं हटी है, इसलिए अलुक् तत्पुरुष समास है।  
  • परस्मैपद— परस्मै + पद, विग्रह – दूसरे के लिए (पद), ‘परस्मै’ (अर्थ – ‘दूसरे के लिए’) में संस्कृत की चतुर्थ विभक्ति लगी है, जो समास बनने के बाद भी नहीं हटी है, इसलिए अलुक् तत्पुरुष समास है।  

अलुक् तत्पुरुष समास के उदाहरण— आत्मनेपद, आत्मनेभाषा, परस्मैपद, परस्मैभाषा, मृत्यंजय, युधिष्ठिर, गविष्ठिर, मनसिज, निशिचर, धनंजय, ऊटपटांग, बृहस्पति, देवानांप्रिय, मातृष्वसा, पितृष्वसा, दिविज, कालेज, शरदिज, प्रवृषिज आदि।

अलुक् तत्पुरुष
समासविग्रह
आत्मनेपदआत्मने पद
परस्मैपदपरस्मै पद
मृत्युंजय = मृत्युम् + जयमृत्यु को जीतनेवाला
युधिष्ठिर = युधि + स्थिरयुद्ध में स्थिर रहनेवाला
खेचरआकाश (ख) में घूमनेवाला (चर)
गविष्ठिरगवि में स्थिर
मनसिजमन में उत्पन्न या जन्म लेनेवाला (कामदेव)
निशिचररात्रि में विचरण करनेवाला
धनंजयधन को जीतनेवाला
ऊटपटांगऊट पर टाँग (बेतुका)
बृहस्पति = बृहत् + पतिबृहत् है जो पति (गुरु)
देवानांप्रिय = देवानाम् + प्रियदेवताओं का प्रिय
मातृष्वसा = मातृ + स्वसामातृ (माँ) की स्वसा (बहन), अर्थात् मौसी
पितृष्वसापितृ (पिता) की स्वसा (बहन), अर्थात् बुआ
दिविज = दिवि + जदिवि (स्वर्ग/आकाश) में होनेवाला
कालेजकाल (समय) पर होनेवाला
शरदिजशरद में होनेवाला
प्रवृषिजप्रवृषि (बरसात) में होनेवाला
वाचस्पतिवाणी का पति
विश्वंभरविश्व को भरनेवाला
सहसा-कृतएकदम (सहसा) से किया (कृत)

उपपद तत्पुरुष

उपपद तत्पुरुष समास में उत्तरखंड ऐसा ‘कृदंत’ है जो स्वयं में सार्थक तो हैं, पर स्वतंत्र रूप से भाषा में व्यवहृत नहीं होता है वरन् प्रत्यय की तरह प्रयुक्त होकर समस्त पद बनता है। अर्थात् उपपद तत्पुरुष समास में—

  • उत्तरखंड कृदंत होता है।
  • सार्थक शब्द होता है।
  • स्वतंत्र रूप से भाषा में व्यवहृत नहीं होता है।  

उपपद तत्पुरुष समास का उत्तरखंड निम्न में से हो सकता है— ‘-अक’, ‘-कर’ ‘-कार’, ‘-घ्न’,  ‘-ग’, ‘-चर’, ‘-ज’ ‘-ज्ञ’, ‘-द’, ‘-दायी’, ‘-प’ ‘-प्रद’, ‘-स्थ’ आदि।

  • -अक से— गायक, लेखक, धावक
  • -कर से— भास्कर, दिनकर, कलेशकर, कष्टकर, शंकर, हितकर, हिमकर
  • -कार से— कुंभकार, ग्रंथकार, चर्मकार, स्वर्णकार, कर्मकार
  • -ग से— उरग, विहग
  • -घ्न से— कृतघ्न, शत्रुघ्न
  • -चर से— अंतरिक्षचर, खेचर, गगनचर, गुप्तचर, जलचर, थलचर, दिनचर, दिवाचर, नभचर, निशाचर, निशिचर, परिचर, बालचर, भिक्षाचर, वनचर
  • -ज से— अंडज, अंत्यज, अंबुज, अंहुज, अग्रज, अनुज, अब्ज, उद्भिज, कुलज, क्षत्रियज, जलज, जारज, द्विज, धर्मज, पंकज, पिण्डज, पित्तज, पूर्वज, मलयज, वंशज, वारिज, स्वेदज।
  • -ज्ञ से— अभिज्ञ, कृतज्ञ, दुःखज्ञ, धर्मज्ञ, नीतिज्ञ, मर्मज्ञ, राजनीतिज्ञ, विज्ञ, विशेषज्ञ, वेदज्ञ, शास्त्रज्ञ, सर्वज्ञ, सुखज्ञ
  • -द से— जलद, दुःखद, सुखद, धनद
  • -प से— गोप, नृप
  • -प्रद से— कष्टप्रद, लाभप्रद, शांतिप्रद
  • -दायी से— सुखदायी, फलदायी
  • -स्थ से— अंकस्थ, तटस्थ, प्रकृतिस्थ
उपपद तत्पुरुष
समासविग्रह
अंडजअंडे से जन्म लेनेवाला
अंत्यजअंत्य (अंतिम वर्ग) में जन्म लेनेवाला
उरगपेट (उर) के बल चलनेवाला
जलचरजल में विचरण करनेवाला
नभचरनभ में विचरण करनेवाला
निशाचरनिशा में विचरण करनेवाला
भास्करभास (प्रकाश) करनेवाला
दिनकरदिन करनेवाला
क्लेशकरक्लेश करनेवाला
स्वर्णकारस्वर्ण का काम करनेवाला
जलदजल देनेवाला (बादल)
कष्टप्रदकष्ट प्रदान करनेवाला
लेखकलेखन कार्य करनेवाला
राजनीतिज्ञराजनीति जाननेवाला
मर्मज्ञमर्म (रहस्य/गूढ़) को ज्ञ (जाननेवाला)
कृतज्ञकृत (उपकार) को ज्ञ (जाननेवाला/माननेवाला)
कृतघ्नकृत (उपकार) को नष्ट करनेवाला
शत्रुघ्नशत्रु को नष्ट करनेवाला
सुखदायीसुख को देनेवाला
नृपमनुष्यों (नृ) की रक्षा करनेवाला
गोपगो (गाय) की रक्षा करनेवाला
विहगविह (आकाश) गमन (ग)

नोट— पं० कामता प्रसाद गुरु के अनुसार “जलधर, पापाहर, जलचर आदि उपपद समास नहीं हैं, क्योंकि इनमें धर, चर और हर कृदंत हैं और इनका प्रयोग अन्यत्र स्वतंत्रतापुर्वक होता है। ये केवल तत्पुरुष समास के उदाहरण हैं।”

हिंदी उपपद समास के उदाहरण— लकड़फोड़, तिलचट्टा, कनकटा (कान काटनेवाला), मुँहचीरा, बटमार, चिड़ीमार, पनडुब्बी, घरघुसा, घुड़चढ़ा।

उर्दू उपपद समास के उदाहरण— गरीबनिवाज (दीनपालक), कलमतराश (कलम काटनेवाला, चाकू), चोपदार (दंडधारी), सौदागर।

नोट— हिंदी में स्वतंत्र कर्म-तत्पुरुषों की संख्या अधिक न होने के कारण बहुधा उपपद समास को इन्हीं के अंतर्गत मानते हैं।

नञ् तत्पुरुष

इसमें पहला खंड नकारात्मक (‘न-’, ‘अ-’ या ‘अन्-’ उपसर्ग) अर्थात् अभाव या निषेध के अर्थ में होता है; जैसे—

  • संस्कृत— अज्ञात (न ज्ञात), अधर्म (न धर्म), अनन्त (न अन्त), अनर्थ (न अर्थ), अनाचार (न आचार), अनाथ, अन्याय (न न्याय), अनन्त, अनश्व (न अश्व), अनागत (न आगत), अनादि, अनाश्रित, अनिष्ट (न इष्ट), अनीश्वर (न ईश्वर), अनुदार, अनुपकार (न उपकार), अपूर्ण, अभाव, अमोघ (न मोघ/निष्फल या व्यर्थ), अयोग्य (न योग्य), अलौकिक, अवृथा (न वृथा), असभ्य, असम्भव, असुन्दर, असिद्ध (न सिद्ध), अस्वस्थ (न स्वस्थ), अहित, नक्षत्र (न क्षर) नास्तिक (न आस्तिक), नास्तिक, निर्बल, निर्दोष, आदि।
  • हिन्दी— अकाज, अछूता, अटूट, अनबन, अनचाहा, अधूरा, अनजाना, अनगढ़ा, अनपढ़, अनरीत, अलग, अनहोनी आदि।
  • उर्दू— नापसंद, नालायक, नाबालिग, गैरहाजिर, गैरवाजिब आदि।

निषेध (अ-) के अर्थ प्रयोग के अनुसार होते है—

  • भिन्नता के अर्थ में— अब्राह्मण अर्थात् ब्राह्मण से भिन्न कोई वर्ण; जैसे— क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र।
  • अभाव के अर्थ में— अज्ञान अर्थात् ज्ञान का अभाव।
  • अयोग्यता के अर्थ में— अकाल अर्थात् अनुचित काल।
  • विरोध के अर्थ में— अनीति अर्थात् नीति का उलटा।

प्रादि तत्पुरुष

जिस तत्पुरुष समास के पहले स्थान पर उपसर्ग आता है, उसे संस्कृत व्याकरण में प्रादि तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें अपि, प्रति, उप आदि पहले खंड में होते हैं; जैसे— अतिक्रम, अतिवृष्टि, आकाश, उपदेव, दुर्गुण, प्रगति, प्रतिध्वनि, प्रतिबिंब, प्रत्यागमन, प्रदेश, व्याकुल, सुश्रुत आदि।

नोट— ‘ई’ के योग से बने हुए संस्कृत समास भी एक प्रकार से तत्पुरुष समास हैं; जैसे— वशीकरण, फलीभूत, स्पष्टीकरण, शुचीभाव आदि।

तत्पुरुष समास के इन सभी प्रकारों की सामान्य विशेषताएँ अधोलिखित हैं—

  • यह समास दो पदों के बीच होता है।
  • इसके समस्त पद का लिंग उत्तरपद के अनुसार है।
  • इस समास में उत्तरपद का ही अर्थ प्रधान होता है।

तत्पुरुष समास का संग्रह

तत्पुरुष (कर्मतत्पुरुष)
समासविग्रह
अर्थपिपासुअर्थ (धन) को पाने की इच्छा रखनेवाला
आत्मविस्मृत आत्म (स्वयं) को विस्मृत
आदर्शोन्मुखआदर्श को उन्मुख
आशातीतआशा को अतीत (लाँधकर गया हुआ)
कठखोदवाकाठ को खोदनेवाला
कठफोड़वाकाठ को फोड़नेवाला
कमरतोड़कमर को तोड़नेवाला
कष्टश्रितकष्ट को प्राप्त
कष्टापन्नकष्ट को आपन्न (प्राप्त)
कार्यकर्त्ताकार्य को करनेवाला
कुसुमागमकुसुमों का आगम
कृष्णश्रितकृष्ण को प्राप्त
गँठकटागाँठ को काटनेवाला
गगनचुम्बीगगन को चूमनेवाला
गिरहकटगिरह को काटनेवाला
गृहागतगृह को आगत
ग्रन्थकर्त्ताग्रन्थ को करनेवाला
घरफूँकघर को फूँकना
चिड़ीमारचिड़ियों को मारनेवाला
चितचोरचित को चुरानेवाला
चूहेमारचूहे को मारनेवाला
जलदागमजलद का आगम / बादलों का आगमन
जलपिपासुजल को पीने की इच्छा रखनेवाला
जीवनप्राप्तजीवन को प्राप्त
जेबकतराजेब को कतरनेवाला
तेलचट्टातेल को चाटनेवाला
तिलकुटतिल को कूटकर बनाया हुआ
दुःखददुःख को देनेवाला
दुःखातीतदुःख को पार कर गया हुआ
देशगतदेश को गया हुआ
देशागतदेश को आगत
धनागमधन का आगम / धन की प्राप्ति
धनापन्नधन को आपन्न (प्राप्त)
नरभक्षीमनुष्यों (नरों) को खानेवाला (भक्षी) 
परलोकगमनपरलोक को जाना
पाकिटमारपाकिट को मारनेवाला
पुष्पागमपुष्पों का आगम
भक्तवत्सलभक्त का वत्सल
माखनचोरमाखन को चुरानेवाला
मनोहरमन को हरनेवाला
मरणासन्नमरण को आसन्न (निकट)
मुँहतोड़मुँह को तोड़नेवाला
मेघागममेघों का आगम / बादलों का आगमन
मेधागममेधा का आगम / बुद्धि या प्रज्ञा की प्राप्ति
मोक्षप्राप्तमोक्ष को प्राप्त
योगागमयोग का आगम / योग की प्राप्ति
रक्तपिपासुरक्त को पीने की इच्छा रखनेवाला
रामनामराम का नाम
रोजगारोन्मुखरोजगार को उन्मुख  
वर्णागमवर्ण (रंग) का आगम (प्रकट होना)
वर्षागमवर्षा का आगम (आगमन)
वित्तागमवित्त (धन) का आगम
विदेशगमन विदेश को गमन
विद्यागमविद्या का आगम / विद्या की प्राप्ति
विरोधजनकविरोध को जन्म देनेवाला
व्यक्तिगतव्यक्ति को गत (प्राप्त) हुआ
शक्तिदायकशक्ति को देनेवाला
सद्गतिसत् (उत्तम लोक) को प्राप्त
सुखप्रदसुख को देने वाला
सुखप्राप्तसुख को प्राप्त
सुखापन्नसुख को आपन्न (प्राप्त)
स्वर्गगतस्वर्ग को गत (गया हुआ)
स्वर्गप्राप्तस्वर्ग को प्राप्त
हिमागमहिम का आगम / शीत-ऋतु का आगमन
तत्पुरुष (करणतत्पुरुष)
अकालपीड़ितअकाल से पीड़ित
अधिकारोन्मत्तअधिकार से उन्मत्त
अभावग्रस्तअभाव से ग्रस्त
अश्रुपूर्णअश्रु से पूर्ण
आँखोदेखाआँखों से देखा
आचारकुशलआचार से कुशल
ईश्वरदत्त  ईश्वर द्वारा दिया हुआ
कपड़छनकपड़ा से छना
कपड़छना  कपड़ा से छना हुआ
करुणापूर्णकरुणा से पूर्ण
आश्चर्यचकितआश्चर्य से चकित
कष्टसाध्यकष्ट (कठिनाई) से साध्य (किया हुआ)
कामचोरकाम से चोर
कृषिजीवीकृषि से जीनेवाला
क्षुधापीड़ित क्षुधा से पीड़ित
गुणभरागुण से भरा
गुणयुक्तगुणों से युक्त
जलजीवीजल से जीनेवाला
जलपूर्णजल से पूर्ण
जलावृतजल से आवृत
जलासिक्तजल से सिक्त
तारोंभरीतारों से भरी
तुलसीकृततुलसी द्वारा कृत
दईमारादई (भाग्य) से मारा
दण्डपीड़ित दण्ड से पीड़ित
दयार्द्रदया से आर्द्र
दस्तकारी  दस्त (हाथ) से कार्य
दानार्थदान से प्रयोजन (अर्थ)
दुःखसन्तप्तदुःख से सन्तप्त
दुःखार्तदुःख से आर्त
देहचोरदेह से चोर
दोषपूर्णदोष से पूर्ण
धनजीवीधन से जीनेवाला
धर्मरक्षितधर्म से रक्षित
धान्यार्थधान्य (अन्न) से अर्थ (प्रयोजन/मतलब)
नीतियुक्तनीति से युक्त
पंतप्रणीतपंत द्वारा प्रणीत (रचित)
पददलितपद से दलित
पदयात्रापद से यात्रा
परजीवीपर (दूसरे) से जीनेवाला
प्रकाशयुक्तप्रकाश से युक्त
प्रेतभीतप्रेत से भीत (डर)
प्यादामातप्यादा से मात
प्रेमासिक्तप्रेम से सिक्त
बन्धनयुक्तबन्धन से युक्त
बाणवेधबाण से वेधा हुआ
बाणाहतबाण से आहत
बिहारीरचितबिहारी द्वारा रचित
बुद्धिजीवीबुद्धि से जीनेवाला / बुद्धि से जीविका चलानेवाला
भक्तिवशभक्ति द्वारा वश
भयभीत भय से भीत (डरा हुआ)
भयाकुल भय से आकुल
भावपूर्णभाव से पूर्ण
भावाभिभूतभाव से अभिभूत
भुखमराभूख से मरनेवाला
मदान्धमद से अन्ध
मदमातामद से माता
मनगढ़ंतमन से गढ़ा हुआ
मनचाहामन से चाहा
मनमानामन से माना
मसिजीवीमसि (स्याही) से जीनेवाला / कलम से जीनेवाला
महिमामंडित महिमा से मंडित
मुँहचोरमुँह से चोर
मासपूर्वमास से पूर्व
मुँहमाँगामुँह से माँगा
मेघाच्छन्नमेघ से आच्छन्न
युद्धपीड़ितयुद्ध से पीड़ित
रत्नजड़ितरत्न से जड़ा हुआ
रसभरारस से भरा
रससिक्तरस से सिक्त
रेखांकितरेखा से अंकित
रोगपीड़ितरोग से पीड़ित
रोगग्रस्तरोग से ग्रस्त
लताच्छादितलता से आच्छादित
वचनबद्धवचन से बद्ध (बँधा हुआ)
वज्राहतवज्र से आहत
वाग्युद्धवाक् से युद्ध
व्याधिग्रस्त व्याधि से ग्रस्त
व्यासकृतव्यास द्वारा कृत
शंकुलाखंडशंकुल (सरौते) से खंड किया
शराहतशर से आहत
शरविद्धशर (बाण) से विद्ध
शास्त्रसंगतशास्त्र से संगत
शिरोधार्यशिर (सम्मान) से धारण करना
शोकग्रस्तशोक से ग्रस्त
शोकाकुलशोक से आकुल
शोकार्तशोक से आर्त
श्रमजीवीश्रम से जीनेवाला
सुराजीवीसुरा से जीनेवाला
सूरकृतसूरदास द्वारा कृत
स्वार्थांधस्वार्थ में अंधा
हस्तदानहाथ से दान
हस्तादानहाथ से ग्रहण (आदान)
हस्तलिखितहस्त से लिखित
हैदराबादहैदर (सिंह) से आबाद
तत्पुरुष (सम्प्रदानतत्पुरुष)
आरामकुर्सीआराम के लिए कुर्सी
आवेदन-पत्रआवेदन के लिए पत्र
कमरबन्दकमर के लिए बन्द
काकबलिकाक के लिए बलि
कारवाँसरायकारवाँ के लिए सराय
क्रीड़ाक्षेत्रक्रीड़ा के लिए क्षेत्र
कुष्ठाश्रमकुष्ठों (कुष्ठ रोगियों) के लिए आश्रम
कृषि-भवनकृषि (संबंधित मामलों) के लिए भवन
कृष्णार्पणकृष्ण के लिए अर्पण
गुरुदक्षिणा गुरु के लिए दक्षिणा
गृहस्थाश्रमगृहस्थ के लिए आश्रम
गोशालागो के लिए शाला
घरखर्चघर के लिए खर्च
घुड़सालघोड़ों के लिए साल
ठकुरसुहातीठाकुर (स्वामी) के लिए सुहाती (रुचिकर)
डाकगाड़ीडाक के लिए गाड़ी
डाकमहसूलडाक के लिए महसूल
देवालयदेव के लिए आलय
देशभक्तिदेश के लिए भक्ति
देशहितदेश के लिए हित
नववर्षोपहारनववर्ष के लिए उपहार
न्यायालयन्याय के लिए आलय
परीक्षा-केन्द्रपरीक्षा के लिए केन्द्र
पुत्रशोकपुत्र के लिए शोक
प्रौढ़-शिक्षाप्रौढ़ के लिए शिक्षा
बलिपशुबलि के लिए पशु
बालामृतबालकों के लिए अमृत
बालविद्यालयबालकों के लिए विद्यालय
ब्राह्मणदक्षिणाब्राह्मण के लिए दक्षिणा
ब्राह्मणदेयब्राह्मण के लिए देय
भूतबलिभूत (जीवों) के लिए बलि (भोजन)
मच्छरदानीमच्छर रोकने के लिए दानी
महँगाईभत्तामहँगाई के लिए भत्ता
मार्गव्ययमार्ग के लिए व्यय
मालगाड़ीमाल के लिए गाड़ी
मालगोदाममाल के लिए गोदाम
मेजपोशमेज के लिए पोश (ढकनेवाला) 
यज्ञशालायज्ञ के लिए शाला
युद्ध-तत्परयुद्ध के लिए तत्पर
युद्धभूमि युद्ध के लिए भूमि
रंगमंचरंग (कला प्रदर्शन) के लिए मंच
रणनिमंत्रणरण के लिए निमंत्रण
रणभूमिरण के लिए भूमि
रसोईघररसोई के लिए घर
राष्ट्र-भक्तिराष्ट्र के लिए भक्ति
राहखर्चराह के लिए खर्च
रोकड़-बहीरोकड़ के लिए बही
लोकहितकारीलोक के लिए हितकारी
विद्यागृहविद्या के लिए गृह
विधानपरिषद्विधान के लिए परिषद्
विधानसभाविधान के लिए सभा
शहरपनाहशहर के लिए पनाह (चहारदीवारी)
शिक्षालयशिक्षा के लिए आलय
शिवार्पणशिव के लिए अर्पण
शौचालयशौच के लिए आलय
सत्याग्रहसत्य के लिए आग्रह
सभाभवनसभा के लिए भवन
सभामंडपसभा के लिए मंडप
समाचार-पत्रसमाचार के लिए पत्र
साधुदक्षिणासाधु के लिए दक्षिणा
स्नानघरस्नान के लिए घर
स्वदेशप्रेमस्वदेश के लिए प्रेम
हथकड़ीहाथ के लिए कड़ी
हवन-कुण्डहवन के लिए कुण्ड
हवन-सामग्रीहवन के लिए सामग्री
तत्पुरुष (अपादानतत्पुरुष)
आकाशपतितआकाश से पतित
आचारभ्रष्ट आचार से भ्रष्ट
इन्द्रियातीतइन्द्रियों से अतीत (परे)
ईश्वरविमुखईश्वर से विमुख
ऋणमुक्तऋण से मुक्त
कर्जमुक्तकर्ज से मुक्त
कर्त्तव्यच्युतकर्त्तव्य से च्युत
कर्म-भिन्नकर्म से भिन्न
कर्मविमुखकर्म से विमुख
कर्महीनकर्म से हीन
कल्पनाशून्यकल्पना से शून्य
कामचोरकाम से जी चुरानेवाला
कालातीतकाल से अतीत (परे)
गर्व-शून्यगर्व से शून्य
गुणहीनगुण से हीन
गृहहीनगृह से हीन
गृहनिर्गतगृह से निकला हुआ
चिंतामुक्त चिंता से मुक्त
जन्मांधजन्म से अंध
जलरिक्तजल से रिक्त
जातिच्युतजाति से च्युत (बाहर)
जातिभ्रष्टजाति से भ्रष्ट
दूरागतदूर से आगत
देशनिकालादेश से निकाला
देशनिर्वासितदेश से निर्वासित
दोषमुक्तदोष से मुक्त
धनहीनधन से हीन
धनरहितधन से रहित
धर्मच्युतधर्म से च्युत
धर्मभ्रष्टधर्म से भ्रष्ट
धर्मविमुखधर्म से विमुख
ध्यानातीतध्यान से अतीत (परे)
नेत्रहीननेत्र से हीन
पथभ्रष्टपथ से भ्रष्ट
पदच्युतपद से च्युत
पदभ्रष्टपद से भ्रष्ट
पदमुक्तपद से मुक्त
पापमुक्तपाप से मुक्त
प्रेमरिक्तप्रेम से रिक्त
बंधनमुक्तबंधन से मुक्त
बलहीनबल से हीन
भवतारणभव (संसार) से तारण (मुक्ति)
मरणोत्तरमरण से उत्तर
मायारिक्तमाया से रिक्त
रणविमुखरणविमुख — रण से विमुख
लक्ष्यभ्रष्टलक्ष्य से भ्रष्ट
लोकोत्तरलोक से उत्तर (परे)
विद्याहीनविद्या से हीन
वृक्षपतित वृक्ष से पतित
व्ययमुक्तव्यय से मुक्त
शक्तिहीनशक्ति से हीन
स्थानच्युतस्थान से च्युत
स्थानभ्रष्टस्थान से भ्रष्ट
स्वर्गपतितस्वर्ग से पतित
हतश्रीश्री (वैभव) से हत (रहित)
हृदयहीनहृदय से हीन
तत्पुरुष (सम्बन्धतत्पुरुष)
अंगघातअंग का घात
अछूतोद्धारअछूतों का उद्धार
अनारदानाअनार का दाना
अन्नदाताअन्न का दाता
अन्नदानअन्न का दान
अभिलेखागारअभिलेखों का आगार (भंडार)
अमचूरआम का चूर्ण
अमरसआम का रस
आत्मघातआत्मा का घात / स्वयं की हत्या
आत्मज्ञानआत्म (स्वयं) का ज्ञान
आनन्दाश्रमआनन्द का आश्रम
आशाघातआशा का घात (नाश)
ईश्वराधीन ईश्वर के अधीन
ईश्वरोपासना ईश्वर की उपासना
औषधालयऔषध (औषधि) का आलय
ऋषिकन्याऋषि की कन्या
कठपुतलीकाठ की पुतली
कन्यादानकन्या का दान
कपोतराजकपोतों का राजा
करुणासागरकरुणा के सागर
करोड़पतिकरोड़ (रूपये) का पति
कर्मयोगकर्म का योग
कारागारकारा/कार का आगार
कालिदासकाली का दास
कुलाचारकुल का आचार
कोषागारकोष का आगार
खरारिखर का अरि
गंगाजलगंगा का जल
गंगातटगंगा का तट
गंगोदकगंगा का उदक (जल)
गजराजगजों का राजा
गुरुसेवागुरु की सेवा
गृहस्वामीगृह का स्वामी  
गोघातगो का घात / गाय की हत्या
गोदानगो का दान
ग्रंथाकारग्रंथ का आगार
ग्रंथालयग्रंथ का आलय
ग्रामवासीग्राम का वासी
ग्रामाचारग्राम का व्यवहार
ग्रामोद्धार ग्राम का उद्धार
घुड़दौड़घोड़े या घोड़ों की दौड़
चन्द्रोदयचन्द्र का उदय
चरित्रचित्रण चरित्र का चित्रण
चायबगानचाय का बागान
चिकित्सालयचिकित्सा का आलय
छात्रालयछात्रों का आलय (निवास)
जगज्जननीजगत् की जननी
जगदम्बा          जगत् की अम्बा (माता)
जन्माता जगत् की माता
जन-भाषाजन की भाषा
जमींदारजमीन का दार (स्वामी)
जलधाराजल की धारा
जलपानजल का पान
जलप्रवाहजल का प्रवाह
जलराशिजल की राशि
ज्ञानसागरज्ञान का सागर
त्रिपुरारित्रिपुर का अरि
दयानिधिदया के निधि (सागर)
दीनानाथदीनों के नाथ
दुःख-सागरदुःख का सागर
देवभाषा देवताओं का भाषा
देवमूर्तिदेव (देवता) की मूर्ति
देवालय  देव (देवता) का आलय
देशगतदेश से सम्बन्धित
देशसुधार देश का सुधार
देशसेवादेश की सेवा
देशाचारदेश का आचार
द्विजराजद्विजों का राजा
धनार्थीधन का अर्थी (इच्छुक)
धर्मसभाधर्म की सभा
नगरसेठ नगर का सेठ
नदीतटनदी का तट
नरेन्द्रनरों का इन्द्र (राजा)
नरेशनरों का ईश  
नूरजहाँजहाँ का नूर (प्रकाश)
पतितपावनपतितों का पावन करनेवाला
पक्षघातपक्ष (शरीर का अंग/पंख) का घात
पतितोद्धार पतित का उद्धार
पदान्वयपद का अन्वय
पत्राचारपत्र का आचार (व्यवहार)
पत्रोत्तर पत्र का उत्तर
परस्त्रीपर (दूसरे) की स्त्री
पराधीनपर के अधीन
पशुघातपशु का घात / पशु की हत्या
पशुपतिपशुओं के पति (स्वामी)
पनचक्कीपानी की चक्की
पाठशालापाठ का शाला (घर)
पापाचारपाप का आचार (व्यवहार/कार्य)
पुस्तकागारपुस्तक का आगार
पुस्तकालयपुस्तक का आलय
पितृगृहपिता (पितृ) का घर (गृह)
पितृघातपिता का घात / पिता की हत्या
प्रतीक्षालयप्रतीक्षा का आलय
प्रजापतिप्रजा का पति (स्वामी)
प्राणघातप्राण (जीवन) का घात
प्राणदानप्राण का दान
प्रेक्षागारप्रेक्षण (देखने) का आगार
प्रेमोपहारप्रेम का उपहार
प्रेमोपासकप्रेम का उपासक
बंदरगाहबंदर (साहिली मंडी) का गाह (स्थल)
बनमानुषवन का मनुष्य
बैलगाड़ीबैल की गाड़ी
ब्राह्मणपुत्र ब्राह्मण का पुत्र
भंडारागारभंडार का आगार
भिक्षाचारभिक्षा का आचार (व्यवहार/कार्य)
भूकम्पभू (भूमि) का कम्प (कम्पन)
भोजनालयभोजन का आलय
मंगलाचारमंगल का आचार (कार्य)
मंत्रालयमंत्रणा का आलय (शासन-कार्यों का स्थान)
मधुमक्खीमधु की मक्खी
मनःस्थितिमन की स्थिति
मातृघातमाता का घात / माता की हत्या
माधवमा (लक्ष्मी) का धव (पति)
मानार्थीमान का अर्थी (इच्छुक)
मित्रघातमित्र का घात
मिथ्याचारमिथ्या का आचार (आचरण)
मुद्रणालयमुद्रण का आलय
मूषकराजमूषकों (चूहों) का राजा
मृगछाला  मृग की छाला (चर्म)
मृगछौनामृग का छौना (शावक)
यज्ञगार/यज्ञागारयज्ञ का आगार / यज्ञ का स्थल
यशार्थीयश का अर्थी (इच्छुक)
युववाणीयुवाओं की वाणी
योगाभ्यासयोग का अभ्यास
राजकुमारराजा का पुत्र (कुमार)
राजकुमारीराजा की पुत्री
राजगृहराजा का गृह
राजदरबारराजा का दरबार
राजपुत्रराजा का पुत्र
राजपुरुषराजा का पुरुष
राजपूतराजा का पुत्र
राजभवनराजा का भवन
राजमाताराजा की माता
राज्याध्यक्षराज्य का अध्यक्ष
रामकहानीराम की कहानी
रामराज्यराम का राज्य
रामानुज राम के अनुज
रामायणराम का अयन
रामोपासकराम का उपासक
राष्ट्रपतिराष्ट्र का पति (स्वामी)
राष्ट्रभक्तराष्ट्र का भक्त
रेतघड़ीरेत की घड़ी
लक्ष्मीपतिलक्ष्मी का पति
लखपतिलाख (रूपये) का पति
लाभार्थीलाभ का अर्थी (इच्छुक)
लोकनायक लोक का नायक
लोक-भाषालोक की भाषा
लोकाचारलोक का आचार
वनवासीवन का वासी
वस्त्रागारवस्त्रों का आगार
वस्त्रालयवस्त्रों का आलय
वाचनालयवाचन (पढ़ने) का आलय
वातावरणवात (वायु) का आवरण
वामाचारवाम (तंत्र) का आचार
विद्याभण्डार विद्या का भण्डार
विद्यार्थीविद्या का अर्थी (इच्छुक)
वाक्-चातुर्यवाणी की चतुरता
विद्याभ्यासविद्या का अभ्यास
विद्यालय विद्या का आलय
विद्यासागरविद्या का सागर
विद्वत्सभाविद्वानों की सभा
विप्रपुत्रविप्र (ब्राह्मण) का पुत्र
विश्वामित्रविश्व का मित्र
विश्वासघातविश्वास का घात (भंग)
वीरकन्यावीर की कन्या
वीरपुत्रवीर का पुत्र
शकरपाराशक्कर का पारा (टुकड़ा)
शत्रुघातशत्रु का घात
शब्दानुशासनशब्द का अनुशासन
शयनागारशयन का आगार
शिक्षार्थीशिक्षा का अर्थी (इच्छुक)
शिशुघातशिशु का घात / शिशु की हत्या
शौचालयशौच का आलय
शीतागारशीत का आगार
श्रमदानश्रम का दान
संसद-सदस्यसंसद का सदस्य
सभापतिसभा का पति
समाजद्रोहीसमाज का द्रोही
समाजोद्धारसमाज का उद्धार
सम्मानार्थीसम्मान का अर्थी (इच्छुक)
सिद्धांताचारसिद्धांत का आचार (आचरण)
सिंहद्वारसिंह की मूर्तिवाला द्वार
सिरदर्दसिर का दर्द
सुखसागर सुख का सागर
सुखार्थीसुख का अर्थी (इच्छुक)
सूचनालयसूचना का आलय
सेनानायकसेना का नायक
सेनापतिसेना का पति
सूतिकागारसूतिका (प्रसूता स्त्री) का आगार
सूर्योदयसूर्य का उदय
स्नानगृहस्नान का गृह
स्नानागारस्नान का आगार
स्वेच्छाचारस्वेच्छा का आचार
हिमपातहिम का पात
हिमालयहिम का आलय
हुक्मनामाहुक्म (आज्ञा) का नामा (पत्र)
तत्पुरुष (अधिकरणतत्पुरुष)
अक्षशौण्डअक्ष (जुए) में शौण्ड (कुशल/दक्ष/निपुण)
आतपशुष्कआतप (धूप) में शुष्क (सूखा) हुआ
आत्मनिर्भरआत्म में निर्भर या अपने पर निर्भर
आत्मविश्वासआत्म (अपने) पर विश्वास
आनन्दमग्न आनन्द में मग्न
आपबीतीआप (अपने) पर बीती
कर्मकुशलकर्म में कुशल
कविराजकवियों में राजा (श्रेष्ठ)
कविश्रेष्ठ कवियों में श्रेष्ठ
कलाकुशलकला में कुशल
कलाप्रवीणकला में प्रवीण
कानाफूसीकान में फुस-फुस करना
कार्यकुशलकार्य में कुशल
कार्यदक्षकार्य में दक्ष
काव्यकुशलकाव्य में कुशल
कुलश्रेष्ठकुल में श्रेष्ठ
कूपमंडूक कूप में रहनेवाला मंडूक (मेंढक)
क्षत्रियाधमक्षत्रियों में अधम
खगख (आकाश) में ग (पक्षी)
गंगास्नानगंगा में स्नान
गृहप्रवेशगृह में प्रवेश
गृहस्थगृह में स्थित
ग्रामवासग्राम में वास
घुड़सवारघोड़े पर सवार
घृतपक्वघी में पका हुआ
चक्रबन्धचक्र में बँधा हुआ
जगबीतीजग पर बीती
जलजजल में उत्पन्न (ज)
जलमग्नजल में मग्न
डिब्बाबन्दडिब्बे में बन्द
दहीबड़ादही में डूबा हुआ बड़ा
दानवीरदान में वीर
देशाटनदेश में अटन (घूमना-फिरना)
ध्यानमग्नध्यान में मग्न
नगरप्रवेशनगर में प्रवेश
नगरवासनगर में वास
नराधमनरों में अधम
नरोत्तमनरों में उत्तम
नीतिनिपुणनीति में निपुण
पदारूढ़पद पर आरूढ़
पुरुषसिंह पुरुषों में सिंह
पुरुषोत्तमपुरुषों में उत्तम
प्रेमधूर्तप्रेम में धूर्त
प्रेममग्र / प्रेममगनप्रेम में मग्न / प्रेम में मगन
बलबीरबल में बीर
मनमौजीमन में मौजी
मन्त्रसिद्धमन्त्र में सिद्ध
मरणातुरमरण को आतुर
मुनिश्रेष्ठमुनियों में श्रेष्ठ
मृत्युंजयमृत्यु पर जय
युद्धनिपुणयुद्ध में निपुण
रणकुशलरण में कुशल
रणपण्डितरण में पण्डित
रणवीररण में वीर
रणशूररण में शूर
रोजगारोन्मुखरोजगार को उन्मुख
वचनचातुरीवचन (वाणी) में चातुरी (चतुराई)
वनजीवीवन में जीनेवाला
वनवासवन में वास
वाक्-वीर (वाग्वीर)वाक् (बोलने) में वीर (कुशल)
विद्याधरविद्या को धारण करनेवाला
विद्याप्रवीणविद्या में प्रवीण
विश्वविख्यातविश्व में विख्यात
व्याकरणपटु व्याकरण में पटु (निपुण)
व्यवहारकुशलव्यवहार में कुशल
व्यवहारचपलव्यवहार में चपल (उतावला)
शरणागतशरण में आगत
शास्त्रप्रवीण शास्त्रों में प्रवीण
शोकमग्न शोक में मग्न
सभापण्डितसभा में पण्डित
सर्वव्याप्तसर्व में व्याप्त
सर्वोत्तमसर्व में उत्तम
सिंहासनारूढ़सिंहासन पर आरूढ़
स्वकेन्द्रितस्वयं पर केन्द्रित
स्वर्गवास  स्वर्ग में वास
हरफनमौलाहर फन में मौला (कुशल/जानकार)

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