द्विगु समास

👤 By Pinwas IAS📅 2 September 2026⏱ 1 min read
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जिस कर्मधारय समास में पूर्व पद संख्यावाचक विशेषण हो और जिसके समस्तपद में समूह का बोध हो, उसे द्विगु समास कहते हैं। अर्थात् जिस कर्मधारय का पूर्वपद संख्याबोधक हो, वह द्विगुकर्मधारय समास कहलाता है।

द्विगु का अर्थ है— द्वि (दो) गु (गायों का समूह) अर्थात् दो गायों का समूह। यह शब्द स्वयं में इस समास का एक अच्छा उदाहरण है, और इसी आधार पर इसका नाम द्विगु समास पड़ा है।

द्विगु समास

द्विगुकर्मधारय समास के भेद

द्विगुकर्मधारय समास के दो भेद हैं—

  1. समाहारद्विगु
  2. उत्तरपदप्रधानद्विगु

समाहारद्विगु

समाहार का अर्थ है— ‘समुदाय’, ‘इकट्ठा होना’, ‘समेटना’। जैसे—

  • तीनों लोकों का समाहार = त्रिलोक
  • पाँच वटों का समाहार = पंचवटी
  • पाँच सेरों का समाहार = पसेरी
  • अष्ट (आठ) अध्यायों का समाहार = अष्टाध्यायी
  • तीनो भुवनों का समाहार = त्रिभुवन
  • सात सौ का समाहार = सतसई
  • चार राहों का समाहार = चौराहा
  • तीन दोषों का समाहार = त्रिदोष
  • छह दर्शनों का समाहार = षड्दर्शन
  • छह कोणों का समाहार = षट्कोण
  • चार विशेष मासों का समाहार = चौमासा

उत्तरपदप्रधान द्विगु

उत्तरपदप्रधान द्विगु के दो प्रकार हैं—

  1. बेटा या उत्पन्न के अर्थ में; जैसे— दो माँ का द्वैमातुर या दुमाता; दो सूतों के मेल का दुसूती।
  2. जहाँ सचमुच ही उत्तरपद पर जोर हो; जैसे— पाँच प्रमाण (नाप) = पंचप्रमाण; पाँच हत्थड़ (हैण्डिल) = पँचहत्थड़, दुपहर/दोपहर (दूसरा पहर, उत्तरपदप्रधान)

उदाहरण—

  • अष्टभुज, अठवारा/अठवाड़ा, इकतारा (एक तार का), इकहरा (एक परत का), चौपाया, चतुष्पदी, चारपाई, तिकोना, त्रिगुण, दुगुना (दो गुना), दुधारी (दो धारोंवाली), दुपट्टा, सप्तसिंधु, सप्तपदी।

नोट— तत्पुरुष और उसके उपभेदों (कर्मधारय व द्विगु) में समस्तपद का लिंग-निर्णय उत्तर खंड के अनुसार होता है; जैसे— स्त्रीरत्न पुल्लिंग हैं।

द्रष्टव्य— अनेक बहुव्रीहि समासों में भी पूर्वपद संख्यावाचक होता है। ऐसी हालत में विग्रह से ही जाना जा सकता है कि समास बहुव्रीहि है या द्विगु। यदि ‘पाँच हत्थड़ हैं जिसमें वह = पँचहत्थड़’ विग्रह करें, तो यह बहुव्रीहि है और ‘पाँच हत्थड़’ विग्रह करें, तो द्विगु समास होगा।

इस उदाहरण को सारणी में समझते हैं—

समासविग्रह
द्विगुबहुव्रीहि
पँचहत्थड़पाँच हत्थड़पाँच हत्थड़ हैं जिसमें वह

द्विगु समास का संग्रह

समाहारद्विगु (द्विगुकर्मधारय)
अठकोनाआठ (कोनों) कोणों का समूह
अठन्नीआठ आनों का समाहार
अठवारा (अठवाड़ा)आठ वार (दिन) का समूह
अष्टाध्यायीअष्ट अध्यायों का समाहार
चतुर्दिकचार दिशाओं का समाहार
चतुर्भुजचार भुजाओं का समाहार
चतुर्युगचार युगों का समाहार
चतुर्वेदचार वेदों का समाहार
चतुष्पदीचार पदों का समाहार
चवन्नीचार आनों का समाहार
चहारदीवारी (चारदीवारी)चार (चहार) दीवारों का समाहार
चौघड़ाचार घड़ों का समाहार (ऐसा पात्र जिसमें चार घर या खाने हों)
चौमासाचार मासों का समूह
चौराहा चार राहों का समाहार
चौहद्दीचार हदों (सीमाओं) का समाहार
छदाम छ दामों का समाहार (एक पैसा = चार दाम)
तिमाहीतीन माहों का समूह
तिरंगातीन रंगो का समूह
तिराहातीन राहों का समूह
त्रिकामतीन कामों (पुरुषार्थों) का समाहार
त्रिकालतीन कालों का समाहार
त्रिकोणतीन कोण का समाहार
त्रिगुणतीन गुणों का समूह
त्रिपादतीन पादों का समाहार
त्रिफलातीन फलों का समाहार
त्रिभुजतीन भुजाओं का समाहार
त्रिभुवनतीन भुवनों का समाहार
त्रिमूर्तितीन मूर्तियों का समाहार
त्रियुगतीन युगों का समाहार
त्रिरत्नतीन रत्नों का समाहार
त्रिलोक, त्रिलोकीतीन लोकों का समाहार
त्रिवेणीतीन वेणियों (नदियों) का समाहार 
दुअन्नीदो आनों का समाहार
दुपट्टादो पट्ट (कपड़े) का समाहार
नवग्रहनौ ग्रहों का समाहार
नवरत्ननव रत्नों का समाहार
पंचपात्रपाँच पात्रों का समाहार
पंचरात्रपाँच रात्रियों का समाहार
पंचवटीपाँच वटों का समाहार
पंचशीलपाँच शीलों (आचरणों) का समाहार
पंचामृतपाँच अमृतों का समाहार
पसेरीपाँच सेरों का समाहार
शताब्दीशत (सौ) अब्दों (वर्षों) का समूह
शशमाही छह (शश) माहों का समाहार
षट्-रसषट् (छह) रसों का समाहार
सतनजासात अनाजों का समाहार
सतसईसात सौ का समाहार
सप्तर्षिसात ऋषियों का समूह
सप्ताहसात दिनों का समाहार
उत्तरपदप्रधानद्विगु
दुधारीदो धारोंवाली (तलवार)
दुपहर (दोपहर)दूसरा पहर
दुसूतीदो सूतोंवाला
पंचप्रमाणपाँच प्रमाण
पँचहत्थड़पाँच हत्थड़ (हैण्डिल)
शतांशशत (सौवाँ) अंश

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