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द्वन्द्व समास

द्वंद्व का अर्थ है— ‘जोड़ा’ या ‘युग्म’। भाषा में कई युग्म शब्द होता है। उनका विग्रह करने पर ‘और’, ‘अथवा/या’ लगता है। “द्वन्द्व समास में दोनों या सभी पद प्रधान होते हैं।” “द्वौ द्वौ द्वन्द्वम्” द्वन्द्व समास के भेद द्वन्द्व समास के तीन भेद है— इतरेतर द्वन्द्व इतरेतर द्वंद्व अर्थात् परस्पर एक-साथ। “वह द्वन्द्व, जिसमें

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समास

समास क्या है? समास का अर्थ है, संक्षेप। कम-से-कम शब्दों में अधिक-से-अधिक अर्थ प्रकट करना ‘समास’ का मुख्य प्रयोजन है। “दो या अधिक शब्दों (पदों) का परस्पर सम्बन्ध बतानेवाले शब्दों अथवा प्रत्ययों का लोप होने पर उन दो या अधिक शब्दों से जो एक स्वतन्त्र शब्द बनता है, उस शब्द को सामासिक शब्द कहते हैं

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उर्दू के प्रत्यय

उर्दू के प्रत्यय मुख्यतः दो भाषाओं अर्थात् फारसी और अरबी भाषा के हैं, इसलिये इन्हें पहले फारसी और अरबी में और पुनः प्रत्येक को कृत और तद्धित में बाँटकर समझना समीचीन है। फारसी के प्रत्यय कृत प्रत्यय अ आ आन (आँ) इंदा इश ई ह तद्धित प्रत्यय आ आना आवर इंदा ई ईन ईना क

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हिन्दी के प्रत्यय

कृत प्रत्यय अ अक्कड़ अंत / अन्त अंतू अन आ आ शब्द मूल शब्द / धातु प्रत्यय अंगरखा अंग + रख (रखना) आ / –ा कठफोड़ा कठ (काठ) + फोड़ (फोड़ना) आ / –ा गँठकटा गाँठ + कट (काटना) आ / –ा घुड़चढ़ा घुड़ (घोड़ा) + चढ़ (चढ़ना) आ / –ा देवा दे (देना) +

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प्रत्यय

भूमिका ‘प्रत्यय’ दो शब्दों के मेल से बना है— प्रति + अय। ‘प्रति’ का अर्थ ‘साथ में पर बाद में’ और ‘अय’ का अर्थ ‘चलनेवाला’ होता है। इस प्रकार प्रत्यय का अर्थ हुआ— शब्दों के साथ पर बाद में चलनेवाला या लगनेवाला ‘शब्दांश’। अतः जो शब्द के अंत में जोड़े जाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते

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