हिन्दी

स्वर सन्धि

सामान्य हिन्दी एक स्वर के बाद दूसरे स्वर के आने के कारण जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर सन्धि कहते हैं। अर्थात् दो स्वर वर्णों के योग से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे स्वर सन्धि कहते हैं। स्पष्टीकरण : स्वर + स्वर = स्वर सन्धि; जैसे— स्वर सन्धि के भेद इस सन्धि के पाँच

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सन्धि

सामान्य हिन्दी परिभाषा “जब दो शब्द आपस में मिलते हैं तो प्रथम पद की अंतिम ध्वनि और द्वितीय शब्द की पहली ध्वनि के मेल से वर्णों की ध्वनियों में जो परिवर्तन होता है उसे सन्धि कहते हैं।” अर्थात् “दो वर्णों के मेल से होनेवाले विकार को ‘सन्धि’ कहते हैं।” संस्कृत भाषा में इसी को इस

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पाद टिप्पणी चिह्न / तारक चिह्न — (*)

तारक चिह्न पाद-टिप्पणी (footnotes) देने में लगाये जाते हैं और उन्हें रखकर ऊपर के शब्द अथवा वाक्यांश अथवा वाक्य से सम्बन्ध रखने वाले अंश को पृष्ठ के नीचे लिखते हैं। पाद टिप्पणी चिह्न (footnotes) का प्रयोग ऊपरी लेख (Super script) के रूप में किया जाता है। यदि एक ही संदर्भ हो तो तारक चिह्न (*)

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लाघव विराम / संक्षेप सूचक चिह्न— (०)

लाघव विराम को ‘संक्षेप सूचक’ भी कहते हैं। संक्षिप्त शब्दों के बाद ‘लाघव-विराम’ के चिह्न का प्रयोग होता है। किसी व्यक्ति का अथवा संस्था का संक्षिप्त नाम लिखते समय इस चिह्न का प्रयोग किया जाता है; जैसे— संबन्धित लेख—

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