2024
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को पृथक् कीजिए।
पावक, पाणिनीय, झाडू, शक्ति, बलिष्ठ।
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| पावक | पौ + अक | अक |
| पाणिनीय | पाणिनि + ईय | ईय |
| झाड़ू | झाड़ + ऊ | ऊ |
| शक्ति | शक् + ति | ति |
| बलिष्ठ | बल + इष्ठ | इष्ठ |
2023
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को पृथक् कीजिए।
वैष्णव, ग्रामीण, वाणिज्य, गड़रिया, कौन्तेय
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| वैष्णव | विष्णु + अ | अ |
| ग्रामीण | ग्राम + ईन | ईन |
| वाणिज्य | वाणिज + य | य |
| गड़रिया | गाड़र (गाडर) + इया | इया |
| कौन्तेय | कुन्ती + एय | एय |
2022
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को अलग कीजिए।
देव, पूज्य, कौन्तेय, पौराणिक, तन्द्रालु
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| देव | दिव् + अ | अ |
| पूज्य | पूज् + य | य |
| कौन्तेय | कुन्ती + एय | एय |
| पौराणिक | पुराण + इक | इक |
| तन्द्रालु | तन्द्रा + आलु | आलु |
2021
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को अलग कीजिए।
अपनापा, वैदिक, राधेय, गुरुता, ग्रामीण
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| अपनापा | अपना + आपा | आपा |
| वैदिक | वेद + इक | इक |
| राधेय | राधा + एय | एय |
| गुरुता | गुरु + ता | ता |
| ग्रामीण | ग्राम + ईन | ईन |
2020
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को अलग कीजिये।
क्रीड़ा, मिठाई, मरियल, भिक्षुक, धमकी
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| क्रीड़ा | क्रीड् + आ | आ |
| मिठाई | मीठा + ई | ई |
| मरियल | मर + इयल | इयल |
| भिक्षुक | भिक्षा (भिक्ष्) + उक (उक्) | उक (उक्) |
| धमकी | धमक + ई | ई |
2019
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को विलग कीजिए।
शैव, नीलिमा, दाक्षिणात्य, खुर्दबीन, वर्तमान।
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| शैव | शिव + अ | अ |
| नीलिमा | नील + इमा | इमा |
| दाक्षिणात्य | दक्षिण + त्य | त्य |
| खुर्दबीन | खुर्द + बीन | बीन |
| वर्तमान | वर्त (वृत्) + मान (शानच्) | मान |
2018
निम्नलिखित उपसर्गों / प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :
अधि, परि, भर, अठ, नि, खुश, इक, आइन, आई, अक्कड़
उत्तर—
नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। उपसर्ग का संग्रह अलग से करेंगे।
उपसर्ग— अधि, परि, नि, खुश
प्रत्यय— अठ, इक, आइन, आई, अक्कड़
भर— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— भरपेट (भर + पेट), रातभर (रात + भर), क्षणभर (क्षण + भर)।
| प्रत्यय | निर्मित शब्द |
| अठ | कर्मठ |
| इक | प्राकृतिक |
| आइन | ठकुराइन |
| आई | भलाई |
| अक्कड़ | बुझक्कड़ |
2017
निम्नलिखित उपसर्गों / प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :
वि, उत्, दु, अप, निर्, इतर, आलु, नी, घ्न, प्र
उत्तर—
नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। उपसर्ग का संग्रह अलग से करेंगे।
उपसर्ग— वि, उत्, दु, अप, निर्
प्रत्यय— इतर, आलु, नी, घ्न
प्र— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— प्रक्रिया (प्र + क्रिया), विप्र (वि + प्र)।
| प्रत्यय | निर्मित शब्द |
| इतर | आर्येतर |
| आलु | कृपालु |
| नी | शेरनी |
| घ्न | कृतघ्न |
| प्र | विप्र |
2017 (निरस्त पेपर)
निम्नलिखित उपसर्गों / प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :
अक, मान, इम, चित्, इया, परा, अपि, सम्, दुर्, अध
उत्तर—
नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। उपसर्ग का संग्रह अलग से करेंगे।
उपसर्ग— परा, सम्, दुर्, अध
प्रत्यय— अक, मान, इम, चित्, इया
अपि— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— अपिगीर्ण (अपि + गीर्ण), अद्यापि (अद्य + अपि)।
| प्रत्यय | निर्मित शब्द |
| अक | अधीक्षक |
| मान | श्रीमान |
| इम | स्वर्णिम |
| चित् | कदाचित् |
| इया | रसोइया |
2016
निम्नलिखित उपसर्गों और प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :
परि, दुस्, आ, भर, सु, आइन, इक, एरा, वाँ, हरा
उत्तर—
नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। उपसर्ग का संग्रह अलग से करेंगे।
उपसर्ग— परि, दुस्, आ, भर, सु
प्रत्यय— आइन, इक, एरा, वाँ, हरा
भर— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— भरपेट (भर + पेट), रातभर (रात + भर)।
| प्रत्यय | निर्मित शब्द |
| आइन | चौधराइन |
| इक | ऐतिहासिक |
| एरा | लुटेरा |
| वाँ | दसवाँ |
| हरा | इकहरा |
2015
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्गों और प्रत्ययों को अलग कीजिए :
अध्यादेश, विख्यात, अभ्यास, अत्युत्तम, सुजन, त्यागी, परीक्षक, सरलता, पत्रकार, शिष्या।
उत्तर—
नोट— यहाँ पर दिये गये शब्दों में से उपसर्ग और प्रत्यय निर्मित शब्दों को पृथक करना है। यहाँ हम प्रत्यय का संग्रह कर रहे हैं तो केवल प्रत्यय निर्मित शब्दों को पहचानकर उनका संग्रह करेंगे। उपसर्ग-निर्मित शब्दों का संग्रह अलग से करेंगे।
उपसर्ग— अध्यादेश, विख्यात, अभ्यास, अत्युत्तम, सुजन।
प्रत्यय— त्यागी, परीक्षक, सरलता, पत्रकार, शिष्या।
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| त्यागी | त्याग + ई | ई |
| परीक्षक | परीक्षा (परीक्ष्) + अक | अक |
| सरलता | सरल + ता | ता |
| पत्रकार | पत्र + कार | कार |
| शिष्य | शिष्य + आ | आ |
2014
निम्नलिखित शब्दों से प्रत्ययों को अलग कीजिए :
चितेरा, अच्छाई, नैतिक, मझला, उड़ान।
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| चितेरा | चित + एरा | एरा |
| अच्छाई | अच्छा + ई | ई |
| नैतिक | नीति + इक | इक |
| मझला | मझ (मध्य) + ला | ला |
| उड़ान | उड़ (उड्) + आन | आन |
2013
निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्ययों को अलग कीजिए :
बतंगड़, घुमंतू, भनक, झंझट, बेलन
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| बतंगड़ | बात + अंगड़ | बतंगड़ |
| घुमंतू | घूमना (घूम्) + तू | तू |
| भनक | भन + क | क |
| झंझट | झंझ + ट | ट |
| बेलन | बेल (बल्) + अन | अन |
2012
निम्नलिखित पदों में शब्द एवं प्रत्यय विभाजित करते हुए उनमें प्रयुक्त ‘कृदन्त’ एवं ‘तद्धित’ प्रत्ययों का नामोल्लेख भी कीजिए :
हँसोड़, बोली, देवरानी, ठकुराइन, रायता
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| हँसोड़ | हँसना (क्रिया) + ओड़ | ओड़ (कृत प्रत्यय) |
| बोली | बोलना (क्रिया) + ई | ई (कृत प्रत्यय) |
| देवरानी | देवर (संज्ञा, पुल्लिंग) + आनी | आनी (तद्धित प्रत्यय /स्त्री-प्रत्यय) |
| ठकुराइन | ठाकुर (संज्ञा, पुल्लिंग) + आइन | आइन (तद्धित प्रत्यय /स्त्री-प्रत्यय) |
| रायता | राय (संज्ञा) + ता | ता (तद्धित प्रत्यय) |
2011
कृत् और तद्धित प्रत्यय में क्या अन्तर है? दोनों के दो-दो उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—
| कृत् प्रत्यय | तद्धित प्रत्यय | ||||
| कृत् प्रत्यय क्रिया या धातु के अंत में प्रयुक्त होते हैं। | संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के पीछे लगनेवाले प्रत्यय को ‘तद्धित प्रत्यय’ कहा जाता है। | ||||
| कृत् प्रत्यय के योग से बने शब्द ‘कृदन्त’ कहलाते है। | तद्धित प्रत्यय के योग से बने शब्द को ‘तद्धितांत’ कहलाते हैं। | ||||
| उदाहरण— अर्चना, क्रोध | उदाहरण— मानव, अच्छा | ||||
| क्रिया/धातु | कृत प्रत्यय | कृदन्त | शब्द | तद्धित प्रत्यय | तद्धितांत |
| अर्च् | अना | अर्चना | मानव | ता | मानवता |
| क्रुध् | अ | क्रोध | अच्छा | ई | अच्छाई |
2010
निम्नलिखित शब्दों के मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए :
मिठाई, लुटेरा, खंडहर, पथरीला, इकहरा।
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| मिठाई | मीठ (मीठा) + आई | आई |
| लुटेरा | लूट (लूटना) + एरा | लुटेरा |
| खंडहर | खंड + हर | हर |
| पथरीला | पथर (पत्थर) + ईला | ईला |
| इकहरा | इक (एक) + हरा | हरा |
2009
मूल शब्द और प्रत्यय पृथक् करके दर्शाइए :
मानवता, दार्शनिक, समझदार, ममेरा, पीड़ित।
उत्तर—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| मानवता | मानव + ता | ता |
| दार्शनिक | दर्शन + इक | इक |
| समझदार | समझ + दार | दार |
| ममेरा | मामा + एरा | एरा |
| पीड़ित | पीड़ा + इत | इत |
2008 (विशेष चयन)
निम्नलिखित शब्दों में से पाँच कृदन्त एवं तद्धित प्रत्यय छाँटिए :
(i) लेखक, (ii) मिठास, (iii) चमकीला, (iv) चिकनाहट, (v) भिक्षुक, (vi) पूजनीय, (vii) व्यक्तित्व, (viii) आध्यात्मिक
उत्तर—
| क्र॰ स॰ | शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| (i) | लेखक | लिखना (लिख्) + अक | अक (कृत) |
| (ii) | मिठास | मीठा + आस | आस (तद्धित) |
| (iii) | चमकीला | चमक + ईला | ईला (तद्धित) |
| (iv) | चिकनाहट | चिकना + आहट | आहट (तद्धित) |
| (v) | भिक्षुक | भिक्षा (भिक्ष्) + उक (उक्) | उक (उक्) (तद्धित) |
| (vi) | पूजनीय | पूज (पूज्) + अनीय | अनीय (कृत) |
| (vii) | व्यक्तित्व | व्यक्ति + त्व | त्व (तद्धित) |
| (viii) | आध्यात्मिक | अध्यात्म + इक | इक (तद्धित) |
2008
‘कृदन्त’ और ‘तद्धित’ प्रत्यय में क्या अन्तर है? उपयुक्त उदाहरण देते हुए अपना कथन स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—
| कृत् प्रत्यय | तद्धित प्रत्यय | ||||
| कृत् प्रत्यय क्रिया या धातु के अंत में प्रयुक्त होते हैं। | संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण के पीछे लगनेवाले प्रत्यय को ‘तद्धित प्रत्यय’ कहा जाता है। | ||||
| कृत् प्रत्यय के योग से बने शब्द ‘कृदन्त’ कहलाते है। | तद्धित प्रत्यय के योग से बने शब्द को ‘तद्धितांत’ कहलाते हैं। | ||||
| उदाहरण— अर्चना, क्रोध | उदाहरण— मानव, अच्छा | ||||
| क्रिया/धातु | कृत प्रत्यय | कृदन्त | शब्द | तद्धित प्रत्यय | तद्धितांत |
| स्थाप् | अना | स्थापना | विज्ञान | इक | वैज्ञानिक |
| कम् | अ | काम | संख्या | इकी | सांख्यिकी |
2005
“प्रत्यय” को परिभाषित करते हुए किन्हीं दस प्रत्ययों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर—
परिभाषा— “प्रत्यय उस शब्दांश/अक्षर/अक्षर-समूह को कहते हैं जो किसी शब्द या धातु के पीछे लगकर कोई नया शब्द बनाता है।”
दस प्रत्यय और उससे निर्मित शब्द—
| क्र॰ स॰ | प्रत्यय | शब्द |
| 1. | अ (कृत) | (बुध से) बोध |
| 2. | अन (कृत) | (गम् से) गमन |
| 3. | अना (कृत) | (अर्च् से) अर्चना |
| 4. | आ (कृत) | (ईर्ष्य् से) ईर्ष्या |
| 5. | ति (कृत) | (कृति से) कृति |
| 6. | अ (तद्धित) | (मनु से) मानव |
| 7. | अंतर (तद्धित) | (अर्थ से) अर्थांतर |
| 8. | इक (तद्धित) | (अलंकार से) आलंकारिक |
| 9. | ता (तद्धित) | (नवीन से) नवीनता |
| 10. | त्व (तद्धित) | (अमर से) अमरत्व |
2004 (विशेष चयन)
उपसर्ग और प्रत्यय का अन्तर स्पष्ट कीजिये और दोनों के चार-चार उदाहरण देकर उनसे शब्द बनाइये।
उत्तर—
उपसर्ग और प्रत्यय : अन्तर
| उपसर्ग | प्रत्यय | ||
| उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं। | प्रत्यय कुछ ऐसे शब्दांश है जो किसी मूल शब्द या धातु के बाद लगकर नये शब्दों का निर्माण करते हैं। | ||
| उपसर्ग स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं। | प्रत्यय स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु शब्द के बाद जुड़कर नये शब्दों का निर्माण करते हैं। | ||
| अविकारी शब्दांश होते हैं। | अविकारी शब्दांश है। | ||
| उपसर्ग शब्दों के पूर्व में जुड़कर शब्द में नई विशेषता या अर्थ प्रकट करता है और कभी-कभी शब्द के व्याकरणिक कोटि में भी परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— प्र + हार = प्रहार (नई विशेषता); निः + स्वार्थ (संज्ञा) = निःस्वार्थ (विशेषण)। | प्रत्यय शब्दों के बाद में जुड़कर शब्द के व्याकरणिक रूप और अर्थ में परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— कृ (क्रिया) + तव्य = कर्त्तव्य (संज्ञा)। | ||
| शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। | शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। | ||
| ये भाषा के आधार के पर तीन प्रकार के हैं— संस्कृत, हिन्दी और उर्दू के उपसर्ग। | ये शब्द रचना की प्रकृति के आधार पर दो प्रकार के हैं— कृत और तद्धित प्रत्यय। | ||
| उदाहरण— | उदाहरण— | ||
| उपसर्ग | शब्द | प्रत्यय | शब्द |
| अति | अत्युक्ति | वाला (कृत) | गानेवाला (गाना + वाला) |
| अधः | अधोगमन | अन (कृत) | नयन (नी + अन) |
| अनु | अन्वेषण | ता (तद्धित) | मानवता |
| अव | अवमूल्यन | पन (तद्धित) | अपनापन |
2002
उपसर्ग और प्रत्यय का अन्तर स्पष्ट करके अधोलिखित शब्दों में जुड़े प्रत्यय पृथक् कीजिए :
जड़िया, बोली, खेलाड़ी, कतरनी, गुणवान्, गमनीय, लघुतर, पुत्रवत्।
उत्तर—
उपसर्ग और प्रत्यय में अन्तर—
| उपसर्ग | प्रत्यय |
| उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं। | प्रत्यय कुछ ऐसे शब्दांश है जो किसी मूल शब्द या धातु के बाद लगकर नये शब्दों का निर्माण करते हैं। |
| उपसर्ग स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं। | प्रत्यय स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु शब्द के बाद जुड़कर नये शब्दों का निर्माण करते हैं। |
| अविकारी शब्दांश होते हैं। | अविकारी शब्दांश है। |
| उपसर्ग शब्दों के पूर्व में जुड़कर शब्द में नई विशेषता या अर्थ प्रकट करता है और कभी-कभी शब्द के व्याकरणिक कोटि में भी परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— प्र + हार = प्रहार (नई विशेषता); निः + स्वार्थ (संज्ञा) = निःस्वार्थ (विशेषण)। | प्रत्यय शब्दों के बाद में जुड़कर शब्द के व्याकरणिक रूप और अर्थ में परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— कृ (क्रिया) + तव्य = कर्त्तव्य (संज्ञा)। |
| शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। | शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। |
| ये भाषा के आधार के पर तीन प्रकार के हैं— संस्कृत, हिन्दी और उर्दू के उपसर्ग। | ये शब्द रचना की प्रकृति के आधार पर दो प्रकार के हैं— कृत और तद्धित प्रत्यय। |
शब्द से प्रत्यय का अलगाव—
| शब्द (कृदन्त) | शब्द + प्रत्यय | प्रत्यय |
| जड़िया | जड़ना + इया | इया |
| बोली | बोलना + ई | ई |
| खेलाड़ी | खेलना + आड़ी | आड़ी |
| कतरनी | कतर + नी | नी |
| गुणवान् | गुण + वान् | वान् |
| गमनीय | गम (गम्) + अनीय | अनीय |
| लघुतर | लघु + तर | तर |
| पुत्रवत् | पुत्र + वत् | वत् |
2000
प्रत्यय को परिभाषित करते हुए निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय अलग कीजिए :
बुराई, लड़कपन, गानेवाला, बंधुत्व, सुन्दरता।
उत्तर—
परिभाषा— “प्रत्यय उस शब्दांश/अक्षर/अक्षर-समूह को कहते हैं जो किसी शब्द या धातु के पीछे लगकर कोई नया शब्द बनाता है।”
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रत्यय |
| बुराई | बुरा + आई | आई |
| लड़कपन | लड़का + पन | पन |
| गानेवाला | गाना + वाला | वाला |
| बंधुत्व | बंधु + त्व | त्व |
| सुन्दरता | सुन्दर + ता | ता |
1998
शब्द निर्माण में उपसर्ग और प्रत्यय का क्या महत्त्व है? निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग अलग कीजिए :
सदाचार, दुराचार, अध्यक्ष, पराजय, समादर।
उत्तर—
शब्द-निर्माण में उपसर्ग और प्रत्यय का महत्त्व
- मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ भाषा का भी विकास होता है। नये-नये आयामों को अभिव्यक्त करने के लिए भाषा में नये-नये शब्दों के निर्माण की आवश्यकता होती है। इन शब्दों के निर्माण के लिए ही उपसर्ग, प्रत्यय और समास का प्रयोग होता है।
- जिस भाषा में नवीन शब्दों के निर्माण की जितनी क्षमता होगी वह भाषा उतनी ही समृद्ध होगी।
- शब्दों के निर्माण की दो विधियाँ है—
- एक, शब्दांशों से— इसमें उपसर्ग और प्रत्यय आते हैं।
- दो, शब्दों से— इसमें समास आता है।
- उपसर्ग और प्रत्यय दोनों अविकारी शब्दांश है।
- उपसर्ग मूल शब्दों के पूर्व लगकर नये-नये शब्दों का निर्माण करता है।
- प्रत्यय धातु या शब्दों के बाद जुड़कर नये-नये शब्दों का निर्माण करता है।
इस तरह उपसर्ग और प्रत्यय दोनों भाषा की अभिव्यक्ति को नये-नये शब्द-निर्माण में सहायता करके उसे समृद्धि बनाते हैं।
नोट— यहाँ हम केवल प्रत्यय की बात कर रहे हैं तो शब्दों से उपसर्ग को अलग करने का संग्रह उपसर्ग वाले लेख में किया गया है।
टिप्पणी
2007, 2006, 2004, 2003, 2001, 1999 के प्रश्न-पत्रों में प्रत्यय सम्बन्धित प्रश्न नहीं आये थे। 1997, 1996, 1995, 1994, 1993, 1992, 1991 और 1990 के प्रश्न-पत्रों में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों से सम्बन्धित प्रश्न नहीं पूछे गये थे।
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