सामान्य हिंदी | UPPSC (Main) Examination 2024: Question Paper and Solution

प्रश्न पत्र

2024
सामान्य हिन्दी
GENERAL HINDI
निर्धारित समय : तीन घंटे अधिकतम अंक : 150
Time Allowed : Three Hours Maximum Marks : 150

विशेष अनुदेश / SPECIFIC INSTRUCTIONS
नोट :
(i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
(ii) प्रत्येक प्रश्न के अंत में निर्धारित अंक अंकित है।
(iii) पत्र, प्रार्थना-पत्र या किसी अन्य प्रश्न के उत्तर के साथ अपना अथवा अन्य किसी का नाम, पता (प्रश्नपत्र में दिये गये नाम, पदनाम आदि को छोड़कर) एवं अनुक्रमांक न लिखें। आवश्यक होने पर क, ख, ग का उल्लेख कर सकते हैं।
Note :
(i) All questions are compulsory.
(ii) Marks are given against each of the question.
(iii) Do not write your or another’s name, address (excluding those name, designation etc. given in the question paper) and roll no. with letter, application or any other question. You can mention क, ख, ग if necessary.
1. निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
सही प्रकार का समाजीकरण होने पर समाज के सदस्य सामाजिक नियमों के अनुरूप व्यवहार करते हैं। यदि गलत समाजीकरण हो जाता है तो विपथगामी व्यवहार में वृद्धि होती है। इसलिए समाजीकरण के दायित्व से संबंधित जो व्यक्ति होते हैं उन पर सामाजिक नियंत्रण का बहुत बड़ा दायित्व होता है। बॉटोमोर के अनुसार शिक्षा बच्चे के प्रारम्भिक समाजीकरण का सबसे दृढ़ आधार है। शैक्षिक व्यवस्था नैतिक विचारों को स्पष्ट करके और केतु का बौद्धिक विकास करके सामाजिक नियमन में योगदान देती है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को विभिन्न इकाइयों से परिचित करवाना है। शिक्षा केवल सैद्धान्तिक महत्त्व ही नहीं, अपितु उसकी व्यावहारिक उपयोगिता भी है। सामाजिक नियंत्रण के अन्य जहाँ व्यक्ति को दबावपूर्ण ढंग से सामाजिक नियमों मानने के लिए बाध्य करते हैं, वहाँ शिक्षा उसे स्वतः आत्म-विश्लेषण द्वारा अप्रभावात्मक ढंग से सामाजिक नियमों का पालन करने की प्रेरणा देती है। एक तो समाजीकरण हमें करणीय व्यवहार की जानकारी कराता है, दूसरे विपथगामी व्यवहार की निंदा की भी हमसे अपेक्षा रखता है। अतः करणीय व्यवहार के बीच संतुलन रखकर समाजीकरण, जो शिक्षा का एक भाग है, समाज में सबसे बडी नियंत्रक शक्ति के रूप में कार्य करता है। समाजीकरण हमें अव्यवस्था की अत्यन्त विषम स्थिति से बचाकर सामान्य रूप से सामाजिक क्रियाओं के संचालन में सहायक होता है। परिणामस्वरूप सामाजिक नियंत्रण बना रहता है।इसलिए हम देखते हैं कि एक अशिक्षित व्यक्ति आवेश में आकर कुछ भी अहित कर बैठता है, जबकि शिक्षित व्यक्ति कठिन-से-कठिन परिस्थिति में भी धैर्यपूर्वक निर्णय लेकर अपने विवेक का परिचय देता है। संक्षेप में, शिक्षा व्यक्ति को आत्म-नियंत्रण सिखाती है। चूँकि व्यक्ति समाज की इकाई है, अतः व्यक्ति के स्तर पर नियंत्रण रहने से सामाजिक नियंत्रण तो स्वतः हो जाता है।
(क) उपरिलिखित गद्यांश का आशय अपने शब्दों में लिखिए। 5
(ख) समाजीकरण के लिए सामाजिक नियंत्रण के अन्य साधन से शिक्षा क्यों भिन्न है? 5
(ग) गद्यांश की रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए। 20
2. सहयोग से ही जीवन है, स्पर्धा तो अन्ततः विनाश और मृत्यु की ओर ले जाती है। हम अपने साथ अन्य को भी ले, यदि वह पिछड़ जाता है तो उसकी मदद करें। यदि हम सभी परस्पर यह भाव अपनाते हैं तो हम एक-दूसरे के संकट में साथी बनकर एक दूसरे को बचाएंगे और विकास के मार्ग पर एक-दूसरे को प्रोत्साहित करेंगे। सहयोग की इस प्रक्रिया में ही जीवन सुरक्षित है। यदि हम अपना ही स्वार्थ सामने रखकर अन्य की टाँग खींचते हुए स्वयं को ही आगे बढ़ाएँगे तो यह स्पर्धा होगी और यह स्पर्धा एक-दूसरे को खिलाफ करते हुए आपस में लड़ने-भिड़ने और अन्ततः एक-दूसरे का विनाश करने का कारण बनेगी। प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध अपने-अपने साम्राज्य, उपनिवेश तथा व्यापार को बढ़ाने के संघर्ष का परिणाम थे जिसमें व्यापक नरसंहार हुआ। वस्तुतः स्पर्धा मानव संस्कृति के लिए विनाश का मार्ग है। व्यक्तियों एवं राष्ट्रों के बीच आपसी सहयोग से ही मानव संस्कृति सुरक्षित है। वर्तमान में यह जो भूमण्डलीकरण और आर्थिक उदारीकरण का नारा है, वह विकसित देशों के आर्थिक साम्राज्य को बढ़ाने का नवीनतम अभियान है जिसमें विकसित देशों के आपसी हित भी टकरा रहे हैं तथा जिसमें नए विश्व संकट की आशंकाएँ उभर रही हैं।
उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(क) गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। 5
(ख) स्पर्धा और सहयोग में अन्तर स्पष्ट कीजिए। 5
(ग) गद्यांश का संक्षेपण (लगभग एक-तिहाई शब्दों में) कीजिए। 20
3.
(क) उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक की ओर से ‘क’ जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखिए जिसमें सम्बद्ध जिले में आपराधिक घटनाओं की रोकथाम के लिए कठोर कार्यवाही करने का अनुदेश हो। 10
(ख) उप सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से सभी राज्य सरकारों को परिपत्र लिखिए, जिसमें प्रसूति-पूर्व भ्रूण लिंग परीक्षण पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने का प्रावधान हो ताकि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान सफल हो सके। 10
4.निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखिए। 10
सारयुक्त, सकाम, पुरस्कृत, पूर्वकालीन, उत्थान, समीप, ईश्वर, कृत्रिम, रोगी, ऊर्ध्वगामी।
5.
(क) निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्गों का निर्देश कीजिए। 5
दुष्प्राप्य, अध्यात्म, अभ्युदय, स्वागत, प्रत्यक्ष।
(ख) निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्ययों को पृथक् कीजिए। 5
पावक, पाणिनीय, झाडू, शक्ति, बलिष्ठ।
6. निम्नलिखित वाक्यांशों या पदबंध के लिए एक-एक शब्द लिखिए।
10+20=30
(i) जो कहीं लौटकर आया हो।
(ii) जो अपनी जन्मभूमि छोड़कर विदेश में वास करता है।
(iii) जिसे करना बहुत कठिन हो।
(iv) जिस पर अभियोग लगाया गया हो।
(v) जो अपनी पत्नी के साथ हो।
7.
(क) निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए। 5
(i) हमें अपने माता-पिता की आज्ञानुसार चलना चाहिए।
(ii) वह डरती-डरती घर में घुसी।
(iii) आज मैं हरी-हरी मटर लाया हूँ।
(iv) उसने सारा दोष अपने सिर पर ले लिया।
(v) मनुष्य इसलिए परिश्रम करता है ताकि उसे अपना पेट पालना है।
(ख) निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए। 5
एकत्रित, उत्तरदाई, निरपराधी, दुरावस्था, ग्रिहप्रवेश।
8. निम्नलिखित मुहावरों / लोकोक्तियों का अर्थ लिखिए और उनका वाक्यों में इस प्रकार प्रयोग कीजिए कि अर्थ स्पष्ट हो जाए।
10+20=30
(i) कोल्हू का बैल
(ii) गूलर का फूल
(iii) गंगा नहाना
(iv) घड़ों पानी पड़ना
(v) हाथ पीले कर देना
(vi) ओखली में सिर दिया तो मूसल का क्या डर
(vii) काठ की हाँडी एक ही बार चढ़ती है
(viii) नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुने
(ix) रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई
(x) हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा हो

हल

उत्तर— 1

1 (क) : गद्यांश का आशय

समाजीकरण आजीवन चलने वाली वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने समाज के नियमों, मूल्यों और व्यवहारों को सीखते हुए उनके अनुसार आचरण करने लगता है। इन नियमों को न मानने पर व्यक्ति समाज या समूह के सामान्य या स्वीकृत मानदंडों से हट जाता है। सही प्रकार का समाजीकरण सामाजिक सामंजस्य और स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।

शिक्षा, समाजीकरण में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रसिद्ध समाजशास्त्री बॉटोमोर का मानना है कि शिक्षा व्यक्ति की नैतिक सोच को विकसित करने के साथ ही उसे आत्मनियंत्रण और अनुशासन भी सिखाती है। शिक्षा व्यक्ति के बौद्धिक, भावनात्मक और नैतिक विकास में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा के माध्यम से, व्यक्ति न केवल ज्ञान और कौशल प्राप्त करता है, बल्कि सामाजिक रूप से स्वीकार्य और संतुलित तरीके से व्यवहार करना भी सीखता है।

शिक्षा व्यक्ति की तार्किक सोच और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करने में मदद करती है, जिसके माध्यम से व्यक्ति उचित और अनुचित के मध्य अंतर करना सीखता है। इस प्रकार शिक्षा व्यक्ति को आत्म नियंत्रित बनाती है और समाज को सुचारू रूप से संचालित करने में सहायक होती है।

1 (ख) : शिक्षा और सामाजिक नियंत्रण — अंतर

शिक्षा समाजीकरण के लिए सामाजिक नियंत्रण का एक विशेष और महत्त्वपूर्ण साधन है क्योंकि यह व्यवस्थित, औपचारिक और जानबूझकर किया जाता है, जबकि अन्य सामाजिक नियंत्रण के साधन अनौपचारिक और सामान्य हो सकते हैं।

शिक्षा और सामाजिक नियंत्रण के अन्य साधनों के बीच भिन्नताएँ :

(क) शिक्षा विविध शैक्षिक संस्थानों के माध्यम से औपचारिक रूप में प्रदान की जाती है। सामाजिक नियंत्रण के अन्य साधन, जैसे कि परिवार, समुदाय, और मीडिया, अनौपचारिक और सहज होते हैं।

(ख) शिक्षा जानबूझकर समाजीकरण के उद्देश्य से प्रदान की जाती है, जबकि सामाजिक नियंत्रण के अन्य साधन अनजाने में या पारंपरिक रूप में काम करते हैं।

(ग) शिक्षा का प्रमुख लक्ष्य ज्ञान और कौशल प्रदान करना है, लेकिन इसका एक महत्त्वपूर्ण पहलू समाजीकरण भी है, जिसके अंतर्गत सामाजिक मानदंडों, मूल्यों और व्यवहारों को सिखाना शामिल है। सामाजिक नियंत्रण के अन्य साधनों का मुख्य लक्ष्य सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना और विचलन को रोकना है।

(घ) शिक्षा एक योजनानुसार व्यवस्थित की गयी प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत एक पाठ्यक्रम, शिक्षक और मूल्यांकन प्रणाली होती है। सामाजिक नियंत्रण के अन्य साधनों में कोई औपचारिक संरचना नहीं होती है।

(ङ) शिक्षा का दायित्व आमतौर पर शिक्षकों और संस्थानों पर होता है, जबकि सामाजिक नियंत्रण के अन्य साधनों का दायित्व पूरे समाज पर होता है।

1 (ग) : रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या

इसलिए हम देखते हैं कि ……………………. स्वतः हो जाता है।

व्याख्या— शिक्षा व्यक्ति को अपने आवेगों और भावनाओं पर नियंत्रण रखने में मदद करती है, जिससे वह भली-भाँति सोच-समझकर निर्णय लेता है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता प्राप्त करता है, जिसकी सहायता से वह अपने जीवन में स्थिरता और संतुलन बनाए रख सकता है। शिक्षा व्यक्ति को विवेक की महत्ता सिखाती है, जिससे वह सही और गलत के बीच का अंतर समझ पाता है। इससे व्यक्ति अपने निर्णय लेते समय नैतिकता और मूल्यों को ध्यान में रखता है और समाज में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभा पाता है। अब चूँकि व्यक्ति समाज की इकाई है और वह व्यक्ति शिक्षित होकर स्वयं पर नियंत्रण रखता है तो सामाजिक नियंत्रण भी स्वतः ही हो जाता है।

उत्तर — 2

2 (क) : शीर्षक

“स्पर्धा और सहयोग” या “सहयोग का महत्त्व”

2 (ख) : स्पर्धा और सहयोग में अंतर

स्पर्धा और सहयोग दो अलग-अलग मानवीय दृष्टिकोण हैं—

  • स्पर्धा में, व्यक्ति या समूह एक ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जबकि सहयोग में वे एक साझा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करते हैं।
  • स्पर्धा में प्रायः एक दूसरे को हराने की भावना होती है, जबकि सहयोग में एक दूसरे की मदद करने और समर्थन करने की भावना होती है।
  • जहाँ स्पर्धा विभाजन और विनाश की ओर लेकर जाती है वहीं सहयोग सामाजिक और सांस्कृतिक स्थायित्व का आधार बनता है।
  • सहयोग व्यक्तियों में परस्पर विश्वास और एकता को बढ़ाकर समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

2 (ग) : संक्षेपण

सहयोग से जीवन है, जबकि स्पर्धा में विनाश और मृत्यु। पारस्परिक सहयोग में जीवन की सुरक्षा है और विकास की संभावना भी है। नकारात्मक स्पर्धा विनाश का कारण बनती है। इसी मानसिकता से विश्व युद्धों में व्यापक जन-धन-हानि हुई। इसलिए सहयोग में ही मानव संस्कृति का भविष्य सुरक्षित है। वैश्वीकरण और उदारीकरण जैसे नारे भी विकसित देशों के स्वार्थ-पूर्ति के साधन हैं जिससे नवीन विश्व संकट की आशंकाएँ उत्पन्न हो रही हैं।

उत्तर — 3

3 (क) : सरकारी पत्र

सरकारी पत्र - 2024

3 (ख) : परिपत्र

परिपत्र - 2024

उत्तर— 4 : शब्द-विलोम

  • शब्द — विलोम
  • सारयुक्त — सारहीन / निस्सार
  • सकाम — निष्काम
  • पुरस्कृत — दण्डित, तिरस्कृत
  • पूर्वकालीन — उत्तरकालीन
  • उत्थान — पतन
  • समीप — दूर
  • ईश्वर — जीव, अनीश्वर
  • कृत्रिम — प्राकृतिक, अकृत्रिम
  • रोगी — नीरोग, तंदुरुस्त, स्वस्थ
  • ऊर्ध्वगामी — अधोगामी

उत्तर— 5

5 (क) : उपसर्ग

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
दुष्प्राप्यदुः + प्राप्यदुः (दुष्)
अध्यात्मअधि + आत्मअधि
अभ्युदयअभि + उदयअभि
स्वागतसु + आ + गतसु, आ
प्रत्यक्षप्रति + अक्षप्रति

5 (ख) : प्रत्यय

शब्दशब्द + प्रत्ययप्रयुक्त प्रत्यय
पावकपौ + अकअक
पाणिनीयपाणिनि + ईयईय
झाड़ूझाड़ + ऊ
शक्तिशक् + तिति
बलिष्ठबल + इष्ठइष्ठ

उत्तर— 6 : पदबंध के लिए एक-एक शब्द

क्र॰ सं॰वाक्यांश या पदबंधएक शब्द
 (i)जो कहीं लौटकर आया हो।प्रत्यागत
 (ii)जो अपनी जन्मभूमि छोड़कर विदेश में वास करता है।प्रवासी
 (iii)जिसे करना बहुत कठिन हो।दुष्कर
 (iv)जिस पर अभियोग लगाया गया हो।अभियुक्त
 (v)जो अपनी पत्नी के साथ हो।सपत्नीक

उत्तर— 7

7 (क) : वाक्य शुद्धि

(i) अशुद्ध वाक्य — हमें अपने माता-पिता की आज्ञानुसार चलना चाहिए।

  • शुद्ध वाक्य — हमें अपने माता-पिता के आज्ञानुसार चलना चाहिए।

(ii) अशुद्ध वाक्य — वह डरती-डरती घर में घुसी।

  • शुद्ध वाक्य — वह डरते-डरते घर में घुसी।

(iii) अशुद्ध वाक्य — आज मैं हरी-हरी मटर लाया हूँ।

  • शुद्ध वाक्य — आज मैं हरी मटर लाया हूँ।

(iv) अशुद्ध वाक्य — उसने सारा दोष अपने सिर पर ले लिया।

  • शुद्ध वाक्य — उसने सारा दोष अपने सिर ले लिया।

(v) अशुद्ध वाक्य — मनुष्य इसलिए परिश्रम करता है ताकि उसे अपना पेट पालना है।

  • शुद्ध वाक्य — मनुष्य इसलिए परिश्रम करता है ताकि वह अपना पेट पाल सके।

7 (ख) : वर्तनी-शुद्ध

क्र॰ सं॰अशुद्ध वर्तनी शुद्ध वर्तनी
 (i)एकत्रितएकत्र
 (ii)उत्तरदाई उत्तरदायी
 (iii)निरपराधीनिरपराध
 (iv)दुरावस्थादुरवस्था
 (v)ग्रिहप्रवेश गृहप्रवेश

उत्तर — 8 : मुहावरों / लोकोक्तियों के अर्थ एवं उनके वाक्य प्रयोग

(i) कोल्हू का बैल

  • वर्ग— मुहावरा
  • अर्थ— कठिन परिश्रम करनेवाला
  • प्रयोग— वह कोल्हू के बैल की तरह हमेशा काम में लगा रहता है।

(ii) गूलर का फूल

  • वर्ग— मुहावरा
  • अर्थ— दुर्लभ वस्तु
  • प्रयोग— खाद्य पदार्थों में शुद्धता अब गूलर का फूल होती जा रही है।

(iii) गंगा नहाना

  • वर्ग— मुहावरा
  • अर्थ— कठिन कार्य पूरा होना
  • प्रयोग— बेटी की शादी हो गई, गंगा नहाये।

(iv) घड़ों पानी पड़ना

  • वर्ग— मुहावरा
  • अर्थ— बहुत शर्मिंदा होना
  • प्रयोग— कार्यालय में घूस लेते हुए पकड़े जाने के बाद राहुल पर घड़ों पानी पड़ गया।

(v) हाथ पीले कर देना

  • वर्ग— मुहावरा
  • अर्थ— विवाह कर देना
  • प्रयोग— इस वर्ष मैंने अपनी छोटी कन्या के भी हाथ पीले कर दिये।

(vi) ओखली में सिर दिया तो मूसल का क्या डर

  • वर्ग— लोकोक्ति
  • अर्थ— कठिन कार्य हाथ में लेने पर कठिनाइयों से नहीं डरना चाहिए
  • प्रयोग— जब शिखा ने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया, तो उसे पता था कि यह आसान नहीं होगा, लेकिन उसने सोचा, ‘ओखली में सिर दिया तो मूसल का क्या डर’।

(vii) काठ की हाँडी एक ही बार चढ़ती है

  • वर्ग— लोकोक्ति
  • अर्थ— धोखेबाजी बार-बार नहीं चल सकती
  • प्रयोग— एक बार तो उसने झूठ बोलकर मुझसे पैसे ले लिए, लेकिन अब वह जानता है कि ‘काठ की हाँडी एक ही बार चढ़ती है’।

(viii) नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुने

  • वर्ग— लोकोक्ति
  • अर्थ— शक्तिशाली या प्रभावशाली लोगों के बीच किसी कमजोर या महत्त्वहीन व्यक्ति की बात को कोई नहीं सुनता
  • प्रयोग— दिनेश ने अपनी बात मुख्यमंत्री जी के सामने रखने की कोशिश की, लेकिन नक्कारखाने में तूती की आवाज की तरह, उसकी बात किसी ने नहीं सुनी।

(ix) रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई

  • वर्ग— लोकोक्ति
  • अर्थ— सर्वनाश हो जाने पर भी घमंड नहीं गया
  • प्रयोग— वह अपना सब कुछ जुए में हार गया, फिर भी अकड़कर चलता है, उसके ऊपर ‘रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई’ कहावत पूरी तरह लागू होती है।

(x) हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा हो

  • वर्ग— लोकोक्ति
  • अर्थ— बिना किसी विशेष प्रयास या खर्च के अच्छा परिणाम प्राप्त करना
  • प्रयोग— परीक्षा में बिना ज्यादा पढ़े, अच्छे नंबर आ गये, ‘मानो हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा हो’ गया।

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