परिभाषा
“सरकारी काम-काज के अंतर्गत किसी कार्यालय से आधिकारिक तौर पर किसी कर्मचारी, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी संगठनों तथा जन-साधारण को पत्र लिखना शासकीय या सरकारी पत्र कहलाता है।”
विशेषताएँ
- यह पत्र निश्चित ढाँचे में ढला होता है। इसकी सामग्री तथ्यपरक, संयत, स्पष्ट और शुद्ध होती है।
- यह पत्र नितान्त औपचारिक होता है। इसमें प्रेषक के निजी विचार का कोई स्थान नहीं होता है। उसे केवल विषय से सम्बद्ध बात कहनी है – वह भी तर्कसंगत और विधि-विधान सम्मत। पत्र की सामग्री यथार्थपरक, तथ्यों, नियमों और उपनियमों से आबद्ध होती है।
- ऐसे पत्र की भाषा और शैली संयत, स्पष्ट, सरल, शुद्ध, सिक्केबंद और टकशाली होती है। किसी भी शब्द का प्रसंगगत केवल एक अर्थ निकलता है, कोई दूसरा अर्थ नहीं।
- सरकारी-पत्र अन्य पुरुष शैली में लिखे जाते हैं।
- संक्षिप्तता सरकारी पत्रों की मूल विशेषता है। यदि पत्र लम्बा हो तो परिच्छेदों में बंटा होता है, जो आपस में युक्ति-युक्त क्रम में होते हैं। अनुच्छेद ( Paragraph ) एक की संख्या नहीं दी जाती, शेष पैरा को : 2- से प्रारम्भ करके आगे जितने पैरा है 3-, 4-, 5- इत्यादि संख्या दी जाती है।
- वक्ता
- मैं, हम
- श्रोता
- तू, तुम, आप
- जिसके सम्बन्ध में बात कही गयी हो
- यह, ये, वह, वे
सरकारी पत्र के भाग
- पत्र संख्या या क्रमांक
- प्रेषक का नाम, पदनाम और शासकीय पता
- प्राप्तकर्ता या प्रेषिती का पदनाम और शासकीय पता
- प्रेषक विभाग या अनुभाग का नाम, स्थान और दिनांक
- विषय
- अभिवादन
- पत्र का मुख्य भाग
- औपचारिक समाप्ति
- हस्ताक्षर
- पदनाम
- संलग्नक
आइये अब इसको एक-एक करके संक्षेप में समझते हैं—
पत्र संख्या या पत्रांक—
- सबसे ऊपर दाहिनी तरफ लिखा जाता है।
प्रेषक का नाम, पदनाम तथा शासकीय पता—
- पत्र संख्या लिखने के बाद उससे थोड़ा नीचे बायीं तरफ सबसे ऊपर प्रेषक का नाम, पदनाम और सरकारी पता लिखा जाता है।
- प्रेषक के नाम के आगे शासकीय स्तर (IAS, PCS) लिखे जा सकते हैं, परन्तु अब व्यवहार में अप्रचलित हो गया है।
- नाम के आगे शैक्षिक योग्यता ( M.A., LL.B. इत्यादि) नहीं लिखा जाता है।
- प्रथम (प्रेषक), द्वितीय (नाम), तृतीय (पदनाम) के बाद अर्ध-विराम (,) लगाया जाता है और अंतिम पंक्ति (शासकीय पता) के बाद पूर्ण विराम (।) लगाया जाता है।
प्राप्तकर्ता या प्रेषिती का पता—
- प्रेषक के नीचे बायीं तरफ प्रेषिती का पदनाम और शासकीय पता लिखा जाता है। प्रेषिती का नाम और उसके शासकीय स्तर को नहीं लिखा जाता है।
पार्श्व स्थान या खाड़ी रेखा
|
प्रेषक विभाग अथवा अनुभाग का नाम, स्थान एवं दिनांक—
- पार्श्व स्थान में प्रेषक-कार्यालय के विभाग अथवा अनुभाग का नाम लिखा जाता है। इसके ठीक सामने दाहिनी तरफ स्थान एवं दिनांक लिखा जाता है।
विषय—
- विषय का उल्लेख अत्यंत सूक्ष्म शब्दों में यथा सम्भव एकाकी वाक्य में किया जाना चाहिए। विषय लिखने के बाद उसके नीचे बीच में एक छोटी रेखा या बिन्दुओं की रेखा खींच देनी चाहिए।
- किसी शासकीय-पत्र में ‘विषय’ का लिखा जाना उसी प्रकार महत्त्वपूर्ण है, जैसे किसी शरीर में आत्मा।
- विषय के बाद पत्र का मुख्य भाग आरम्भ होता है जिसमें अभिवादन भी शामिल है।
अभिवादन—
- अभिवादन लिखने के बाद अल्पविराम (,) लगाया जाता है। अभिवादन के लिए ‘महोदय’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।
- यह अभिवादन ‘पद’ को सम्बोधित होता है, ‘पद’ शब्द पुल्लिंग है अत: ‘महोदय’ शब्द का प्रयोग किया जाता है न कि महोदया।
पत्र का मुख्य भाग—
- अभिवादन के बाद पत्र का मुख्य भाग लिखा जाता है। प्रथम परिच्छेद (पैरा) की संख्या नहीं लिखी जाती है जबकि आगे २-, ३-, ४-, ५- इत्यादि पैरा संख्या लिखी जाती है।
- ऐसे पत्र शासकीय पत्र जो सचिवालय (केन्द्रीय/राज्यस्तरीय) से जारी हों—
- केन्द्र/राज्य शासन द्वारा अपने किसी कनिष्ठ अधिकारी को प्रेषित शासकीय पत्र का प्रथम औपचारिक वाक्यांश, “मुझे यह कहने का निदेश हुआ है, कि ….” से ही आरम्भ किया जाना चाहिए। इस वाक्यांश का प्रयोग यथासम्भव, केवल एक बार ही किया जाना चाहिए। यदि आवश्यकता पड़े तो, “मुझे यह कहना है कि ….‘, ‘मुझे यह स्पष्ट करना है कि ….‘, ‘मुझे यह अनुरोध करना है कि….’ आदि वाक्यांश प्रयुक्त करने चाहिए।
- इस निर्धारित पद्धति का तात्पर्य यह है कि संघीय या राज्य स्तरीय सचिवालय से जो भी शासकीय पत्र निम्नतर अधिकारियों को प्रेषित किये जाते हैं वे व्यक्तिगत स्तर पर नहीं लिखे जाते बल्कि राष्ट्रपति या राज्यपाल (जैसी स्थिति हो) को ओर से लिखे जाते हैं।
- ऐसे शासकीय पत्र जो किसी अधीनस्थ कार्यालयों से शासन को जारी किये जाने हो, चाहे वे केन्द्रीय शासन हो या प्रदेशीय शासन या किसी अन्य कार्यालय को भेजे जाते हों—
- ऐसे पत्रों को प्रथम औपचारिक वाक्यांश, “मुझे यह निवेदन करना है, कि ….” होता है। यदि आवश्यकता पड़े तो अन्य प्रस्तरों में “मुझे यह कहना है, कि …” “मुझे यह अनुरोध करना है, कि ….” इत्यादि वाक्यांश का प्रयोग किया जाता है।
- परीक्षा में—
- यदि केन्द्रीय/राज्य मंत्रालय का नाम, पत्र संख्या विषय दिया गया हो परन्तु प्रेषक अधिकारी का नाम न दिया गया हो :— तो शुरुआत इस तरह — “उपर्युक्त विषयक, श्री ‘क’ के पत्र संख्या… दिनांक … के संदर्भ में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है, कि …….।”
- किन्तु यदि प्रेषक अधिकारी का नाम दिया गया हो तो उसका नाम अवश्य लिखा जाना चाहिए।
औपचारिक समाप्ति—
- औपचारिक समाप्ति के प्रतीक के रूप में “भवदीय” लिखा जाता है।
हस्ताक्षर—
- पत्र की औपचारिक समाप्ति के बाद उस अधिकारी के हस्ताक्षर के लिए स्थान इंगित किया जाता है, जिसकी तरफ से शासकीय पत्र भेजा जा रहा है। ऐसा करते समय कोष्ठक में उसका नाम स्पष्ट रूप से लिखा जाता है।
- हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी के केवल पदनाम को लिखा जाना चाहिए न कि आदर सूचक शब्द अर्थात् श्री/श्रीमती/सुश्री आदि का प्रयोग नहीं किया जाता है।
- यथा-स्थान न तो सरकारी पद-स्तर (IAS, PCS) ही लिखा जाना चाहिए और न ही शैक्षिक योग्यता (M.A., LL.B.)।
पदनाम—
- पदनाम लिखते समय केवल सूक्ष्म शब्दों में प्रयुक्त पदनाम लिखा जाता है, न कि पूर्ण नाम।
| अशुद्ध | शुद्ध |
|---|---|
|
(कमलेश ठाकुर) जिलाधीश, प्रयागराज। |
(कमलेश ठाकुर) जिलाधीश। |
|
(रामलखन) कृषि निदेशक, उत्तर प्रदेश। |
(रामलखन) कृषि निदेशक। |
संलग्नक—
- अंतिम चरण में, किसी शासकीय पत्र के साथ यदि कोई सम्बद्ध पत्राजात भेजे जाते हैं तो उनका भी उल्लेख शासकीय पत्र के अन्त में बायें हाथ पार्श्व रेखा के समीप किया जाता है।
- इन संलग्नकों का संक्षिप्त नाम और क्रम संख्या दी जाती है।
संख्या एवं दिनांक उपर्युक्तानुसार या संख्या एवं तद्दिनांक—
- यह लिखकर छोड़ दिया जाता है, क्योंकि इसको पहले ही इंगित किया जा चुका होता है।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित—
- कई बार शासकीय पत्रों को सूचना और कार्यवाही के लिए विभिन्न अधिकारियों व कार्यालयों को प्रेषित किया जाता है। ऐसी स्थिति में उपर्युक्त वाक्यांश लिखकर क्रमशः प्राप्तकर्ता लोगों के शासकीय पता लिखा जाता है। इसको भेजने के लिये उपर्युक्त अधिकारी से कनिष्ठ अधिकारी पृष्ठांकन करता है।
आज्ञा से—
- यदि पृष्ठांकन की आवश्यकता होती है तब कनिष्ठ अधिकारी अपने हस्ताक्षर करता है, उसके नीचे उसका नाम लिखा जाता; तत्पश्चात् पदनाम लिखकर पूर्ण विराम लगा दिया जाता है।
प्रारूप
| पत्रांक …….. | ||
|
प्रेषक,
कखग, पदनाम ……, शासकीय पता ……। | ||
|
सेवा में,
पदनाम ……., शासकीय पता ……। | ||
| अनुभाग … | स्थान ….., दिनांक …… | |
| विषय : ……………………………………………………………। | ||
|
महोदय, उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि ….. …… ……. ……. …….. ….. ….. ….. …. …. ….. …… ….. …… ….. …… …… …. … ….। 2. ….. …… ……. ……. …….. ….. ….. ….. …. …. ….. …… ….. …… ….. …… …… …. …… …… … ….। 3. ….. …… ……. ……. …….. ….. ….. ….. …. …. ….. …… ….. …… ….. …… …… …. … ….। | ||
|
संलग्नक : (संख्या)। 1. 2. |
भवदीय ह॰ ………. (कखग) पदनाम …..। | |
| पत्रांक ….. एवं तद्दिनांक …. | ||
|
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :
1. 2. 3. | ||
|
आज्ञा से ह॰ ………. (चछज) पदनाम …..। | ||
नोट— वर्तमान में जितने भी सरकारी-पत्र निर्गत हो रहे हैं, उनमें हमें ‘पार्श्व रेखा‘ देखने को नहीं मिलती है। साथ ही ‘अनुभाग ….’ को हम पार्श्व रेखा न होने के कारण पार्श्व स्थान में लिखा हुआ नहीं पाते हैं। नीचे लगे PDF को देखिए, उसमें ‘पार्श्व रेखा‘ नहीं है और ‘अनुभाग ….’ पर ध्यान दीजिए।
सरकारी व अर्ध-सरकारी पत्र
समानता
- दोनों पत्रों की विषयवस्तु सदैव शासकीय प्रयोजनार्थ होती है।
- दोनों के माध्यम से निर्णय लेने और क्रियान्वित करने की प्रक्रिया सरल, सुगम और तीव्र होती है।
- दोनों पत्र अभिलेखीय महत्त्व के होते हैं।
- दोनो पत्रों में व्यक्तिगत तथ्य या सूचनाओं का सदैव अभाव होता है।
- दोनों पत्रों से शासन की कार्यकुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
अन्तर
| आधार | सरकारी-पत्र | अर्ध-सरकारी पत्र |
|---|---|---|
| उद्गम | पद से होता है। | अधिकारी / व्यक्ति के स्तर से होता है। |
| संचालन |
सदैव पद से पद को प्रेषित होता है। ऐसे में तीन स्थितियाँ हो सकती हैं—
| प्रायः समान स्तर के अधिकारियों के बीच अथवा किसी अशासकीय व्यक्ति को भी सरकारी कार्य हेतु प्रेषित। |
| विषय-वस्तु | शासकीय प्रयोजन और पदीय दायित्वों की पूर्ति से सम्बन्धित। | शासकीय प्रयोजन हेतु ध्यानाकर्षण, विचार-विमर्श और गोपनीय मामलों में वार्ता से सम्बन्धित। |
| भाषा-शैली | औपचारिक भाषा में, रूढ़ व अन्य पुरुष शैली में तटस्थ भाव से लिखा जाता है। वैयक्तिक भावों का कोई स्थान नहीं। | अनौपचारिक भाषा में व्यक्तिगत, मैत्री व आत्मीय भाव से उत्तम व मध्यम पुरुष शैली में लिखा जाता है। |
| प्रेषिती | पत्र को प्रेषिती कार्यालय का नियत प्राधिकारी खोलता है। | व्यक्तिगत होने के कारण पत्र को सदैव प्रेषिती ही खोलता है। |
| सम्बोधन | इसमें मात्र औपचारिक शब्दावली ‘महोदय’ का प्रयोग सम्बोधन के लिए होता है। | इसमें अनौपचारिक शब्द ‘प्रिय श्री …’ अथवा ‘प्रिय महोदय’ से सम्बोधन किया जाता है। |
| समापन | समापन के लिए मात्र औपचारिक शब्द ‘भवदीय’ का प्रयोग होता है। | समापन के लिए आदरसूचक ‘सादर’, ‘ससम्मान’ अथवा ‘सद्भावनाओं सहित’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। |
| उद्देश्य | अधिकारी अपने पदीय दायित्व का निर्वहन तटस्थ भाव से करते हैं। | अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेते हुए शासकीय समस्याओं का निर्वहन करते हैं। |
PYQs
UPPSC (Mains) – 2016
प्रश्न— सचिव, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस आशय के एक सरकारी-पत्र का प्रारूप तैयार कीजिए, जिसमें उन्हें अपने विश्वविद्यालय में समस्त रिक्तियों को यथाशीघ्र भरने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा जाए।
उत्तर (प्रारूप)—
पत्रांक ………
प्रेषक,
क॰ ख॰ ग॰,
सचिव,
मानव संसाधन विकास मंत्रालय,
भारत सरकार।
सेवा में,
कुलपति,
समस्त केन्द्रीय विश्वविद्यालय।
विषय: रिक्त पदों पर नियुक्ति के संदर्भ में।
महोदय,
मुझे आपसे यह कहने का निदेश हुआ है कि केन्द्रीय विश्वविद्यालय में जो पद रिक्त हैं, उनके भरने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारम्भ करें।
2. पदों की नियुक्ति से सम्बन्धित सूचनाएँ सम्बन्धित मंत्रालय को भेजें।
भवदीय,
ह॰ ………
(क॰ ख॰ ग॰)
सचिव।
संख्या ……., तद्दिनांक।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित—
- मुख्य सचिव, सम्बन्धित राज्य सरकार
- सचिव, वित्त मंत्रालय
- सचिव, कार्मिक विभाग
आज्ञा से,
ह॰ ………
(क॰ ख॰ ग॰)
सचिव।
टिप्पणी— प्रश्न में स्पष्ट रूप से ‘सरकारी पत्र’ का प्रारूप तैयार करने को कहा गया है, लेकिन पाने वाले जब अनेक हों तो वह ‘परिपत्र’ हो जाता है। प्रश्न में ‘कुलपतियों’ का उल्लेख है, अर्थात् एक ऐसा सरकारी पत्र जिसे अनेक कुलपतियों को भेजा जाना है। परिभाषा के अनुसार— “जब प्रेषक एक हो, विषय एक हो लेकिन प्रेषिती (प्राप्तकर्ता) अनेक हों तब सरकारी पत्र ही परिपत्र बन जाता है।” परन्तु प्रश्न में स्पष्ट रूप से ‘सरकारी पत्र’ का प्रारूप तैयार करने का निर्देश होने के कारण सरकारी पत्र का प्रारूप किया गया है।
UPPSC (Mains) – 2017 (Re-exam)
प्रश्न— संयुक्त सचिव, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को भेजने हेतु एक सरकारी-पत्र का प्रारूप तैयार कीजिए, जिसमें उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन केंद्रीय राजमार्गों की अद्यतन जानकारी प्रेषित करने को कहा गया हो।
उत्तर (प्रारूप)—
पत्रांक ………
प्रेषक,
क॰ ख॰ ग॰,
संयुक्त सचिव,
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय,
भारत सरकार।
सेवा में,
मुख्य सचिव,
उत्तर प्रदेश शासन,
लखनऊ।
विषय: उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन केंद्रीय राजमार्गों के संदर्भ में।
महोदय,
मुझे आपसे यह कहने का निदेश हुआ है कि उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन केंद्रीय राजमार्गों की अद्यतन विस्तृत जानकारी प्रेषित करें।
2. इन जानकारियों में—
- केन्द्रीय राजमार्ग के निर्माण में वित्त आवंटन की स्थिति क्या है।
- ठेके प्रणाली के आधार पर कितना कार्य लिया गया है या लिया जाना है।
- मार्ग की गुणवत्ता निर्धारण के लिए किन-किन उपायों को अपनाया गया है।
3. उपर्युक्त विषयक माँगी गयी जानकारी शीघ्रातिशीघ्र प्रेषित करें, जिससे राजमार्ग निर्माण की स्थिति से शासन को अवगत कराकर वित्त का अतिरिक्त आवंटन किया जा सके।
भवदीय
ह॰ ………
(क॰ ख॰ ग॰)
संयुक्त सचिव।
संख्या ……., तद्दिनांक।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित—
- सचिव, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग एवं सड़क राजमार्ग मंत्रालय
- समस्त मुख्य विकास अधिकारी, उ॰ प्र॰
- समस्त राजमार्ग महा-अभियन्ता, उ॰ प्र॰ शासन
आज्ञा से
ह॰ ………
(क॰ ख॰ ग॰)
संयुक्त सचिव।
UPPSC (Mains) – 2020
प्रश्न— मुखिया की ओर से पंचायत में कोविड-19 से हो रही मृत्यु संबंधी एक सरकारी पत्र जिलाधिकारी को लिखिए।
उत्तर (प्रारूप)—
| सरकारी पत्र का प्रारूप | ||
| पत्रांक ……….. | ||
|
प्रेषक, क॰ ख॰ ग॰, ग्राम प्रधान, घ, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश। | ||
|
सेवा में, जिलाधिकारी, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश। | ||
| घ, दिनांक ….. | ||
| विषय : कोविड-19 से हो रही मृत्यु के संदर्भ में। | ||
महोदय, आपको सूचित किया जा रहा है कि मेरी ग्राम सभा ‘घ’ में विगत कुछ दिनों में कोविड-19 के संक्रमण का तीव्र गति से प्रसार हुआ है। इससे मृत्यु दर में निरन्तर वृद्धि हो रही है। इस सन्दर्भ में सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश एवं रोकथाम का उपाय न हो पाने के कारण लोग काल कवलित हो रहे हैं और उचित उपचार के अभाव में मृत्यु दर तीव्र गति से बढ़ रही है। 2. अतः आप से अनुरोध है कि इस सन्दर्भ को संज्ञान में लेते हुए तत्काल उचित कार्यवाही करने का कष्ट करें, जिससे मृत्यु दर को रोका जा सके। | ||
|
भवदीय ह॰ ……… (क॰ ख॰ ग॰) ग्राम प्रधान। | ||
UPPSC (Mains) – 2021
प्रश्न— अर्ध सरकारी पत्र किसे कहते है? यह सरकारी पत्र से किस प्रकार भिन्न होता है? दोनों का अलग-अलग प्रारूप तैयार कीजिये।
उत्तर—
यहाँ पर हम अर्ध सरकारी पत्र और सरकारी पत्र का अंतर और सरकारी पत्र का प्रारूप ही लिखेगे। पूरे प्रश्न के हल के लिए देखिए— सामान्य हिंदी | UPPSC (Main) Examination 2021: Question Paper and Solution
| आधार | अर्ध-सरकारी पत्र | सरकारी-पत्र |
|---|---|---|
| उद्गम | अधिकारी / व्यक्ति के स्तर से होता है। | पद से होता है। |
| संचालन | प्रायः समान स्तर के अधिकारियों के बीच अथवा किसी अशासकीय व्यक्ति को भी सरकारी कार्य हेतु प्रेषित। |
सदैव पद से पद को प्रेषित होता है। ऐसे में तीन स्थितियाँ हो सकती हैं—
|
| विषय-वस्तु | शासकीय प्रयोजन हेतु ध्यानाकर्षण, विचार-विमर्श और गोपनीय मामलों में वार्ता से सम्बन्धित। | शासकीय प्रयोजन और पदीय दायित्वों की पूर्ति से सम्बन्धित। |
| भाषा-शैली | अनौपचारिक भाषा में व्यक्तिगत, मैत्री व आत्मीय भाव से उत्तम व मध्यम पुरुष शैली में लिखा जाता है। | औपचारिक भाषा में, रूढ़ व अन्य पुरुष शैली में तटस्थ भाव से लिखा जाता है। वैयक्तिक भावों का कोई स्थान नहीं। |
| प्रेषिती | व्यक्तिगत होने के कारण पत्र को सदैव प्रेषिती ही खोलता है। | पत्र को प्रेषिती कार्यालय का नियत प्राधिकारी खोलता है। |
| सम्बोधन | इसमें अनौपचारिक शब्द ‘प्रिय श्री …’ अथवा ‘प्रिय महोदय’ से सम्बोधन किया जाता है। | इसमें मात्र औपचारिक शब्दावली ‘महोदय’ का प्रयोग सम्बोधन के लिए होता है। |
| समापन | समापन के लिए आदरसूचक ‘सादर’, ‘ससम्मान’ अथवा ‘सद्भावनाओं सहित’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। | समापन के लिए मात्र औपचारिक शब्द ‘भवदीय’ का प्रयोग होता है। |
| उद्देश्य | अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेते हुए शासकीय समस्याओं का निर्वहन करते हैं। | अधिकारी अपने पदीय दायित्व का निर्वहन तटस्थ भाव से करते हैं। |
| पत्रांक …….. | ||
|
प्रेषक,
कखग, पदनाम ……, शासकीय पता ……। | ||
|
सेवा में,
पदनाम ……., शासकीय पता ……। | ||
| अनुभाग … | स्थान ….., दिनांक …… | |
| विषय : ……………………………………………………………। | ||
|
महोदय, उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि ….. …… ……. ……. …….. ….. ….. ….. …. …. ….. …… ….. …… ….. …… …… …. … ….। 2. ….. …… ……. ……. …….. ….. ….. ….. …. …. ….. …… ….. …… ….. …… …… …. …… …… … ….। | ||
|
संलग्नक : (संख्या)। 1. 2. |
भवदीय ह॰ ………. (नाम – कखग) पदनाम …..। | |
| पत्रांक ….. एवं तद्दिनांक …. | ||
|
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित—
1. 2. 3. | ||
|
आज्ञा से ह॰ ………. (नाम – अबस) पदनाम …..। | ||
UPPSC (Mains) – 2023
प्रश्न— जिला कलेक्टर की ओर से मंडल आयुक्त को एक पत्र लिखिए। इस पत्र में राज्य सरकार द्वारा घोषित ‘स्वच्छता-सप्ताह’ के दौरान जिले में किये गये विविध कार्यों का विवरण हो।
उत्तर—
ऐसा पत्र जो सरकार के किसी एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय को भेजा जाए और उसमें सरकार के किसी निर्णय, समस्यानिदान या नीति-निर्धारण को विषय में हो ‘सरकारी पत्र’ कहलाता है। यह पत्र एक निश्चित ढाँचे में ढला होता है, इसकी सामग्री बिल्कुल तथ्यपरक, संयत, स्पष्ट और सर्वथा शुद्ध होती है। पत्र में लेखक की अपनी कोई बात न होकर तर्कसंगत एवं विधिसंगत कथन मात्र होता है। पत्र की सारी सामग्री यथार्थपरक तथ्यों, नियमों और उपनियमों के बंधन में बँधी होती है।
अ॰ ब॰ स॰,
जिला कलेक्टर,
प्रयागराज, उत्तरप्रदेश।
मंडल आयुक्त,
लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
आपके सूचनार्थ राज्य सरकार द्वारा घोषित ‘स्वच्छता सप्ताह’ के दौरान जिले में किये गये विविध कार्यों का विवरण भेजने का निदेश प्राप्त हुआ है। इससे संबंधित विवरण निम्नवत हैं—
- जिले के प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर गाँव में विशेष ग्राम सभा का आयोजन वहाँ के स्कूल परिसर में किया गया, जहाँ स्थानीय निवासियों और विद्यार्थियों ने मिलकर अपने गाँव को स्वच्छ रखने की शपथ ली।
- जिले के हर शहर और गाँव में विद्यार्थियों के द्वारा प्रभातफेरी निकाली गयी।
- स्वच्छता अभियान के अंतर्गत ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र के सभी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, आँगनबाड़ी भवनों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंड सहित सभी सार्वजनिक स्थलों, सड़कों, तालाबों, पार्कों आदि की साफ-सफाई विशेष रूप से की गई।
- जन-जागरूकता लाने के लिए नुक्कड़ नाटक सहित निबंध, चित्रकला, वाद-विवाद, भाषण प्रतियोगिताओं के आयोजन के साथ ही जिले में आयोजित होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेलकूद प्रतियोगिताओं और अन्य उत्सवों में ‘स्वच्छता सप्ताह’ की थीम को प्रदर्शित किया गया।
UPPSC (Mains) – 2024
प्रश्न— उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक की ओर से ‘क’ जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखिए जिसमें सम्बद्ध जिले में आपराधिक घटनाओं की रोकथाम के लिए कठोर कार्यवाही करने का अनुदेश हो।
उत्तर—
क॰ ख॰ ग॰,
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
जिला पुलिस अधीक्षक,
‘क’ जनपद, उत्तर प्रदेश।
जैसा कि आप जानते हैं कि अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे जिले में अपराधों की संख्या कम हो। आपके जनपद में हाल ही में आपराधिक घटनाओं में हुई वृद्धि अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। प्रदेश स्तर पर इन घटनाओं की प्रतिकूल छवि उभर रही है, जिससे न केवल आम जनमानस में भय एवं असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है, साथ ही शासन के कानून व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है। अतः आपको निर्देश दिया जाता है कि आप अपने जिले में तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित बिंदुओं पर कठोर एवं प्रभावशाली कार्यवाही सुनिश्चित करें—
- गश्त और निगरानी बढ़ाएँ : संवेदनशील क्षेत्रों में अपराधों की सघन निगरानी हेतु गश्ती दलों की संख्या और समयावधि में वृद्धि की जाए।
- अपराधियों पर कार्रवाई करें : आपराधिक गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
- पुलिस बल की क्षमता बढ़ाएँ : पुलिस दल क्षमता में वृद्धि के प्रयास किये जाएँ। थानों में लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए तथा जनता की शिकायतों को प्राथमिकता दी जाए।
- खुफिया तंत्र को सक्रिय करते हुए संभावित आपराधिक गतिविधियों की पूर्व सूचना एकत्र कर समय रहते निरोधात्मक कदम उठाए जाएँ।
- स्थानीय समुदाय के साथ समन्वय स्थापित कर आम जनता की अपराध नियंत्रण में भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
2. आपको यह निर्देश भी दिया जाता है कि आप अपने जिले में अपराध नियंत्रण की स्थिति की नियमित समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार कार्रवाई करें तथा एक सप्ताह के भीतर की गई प्रगति से इस कार्यालय को अवगत कराएँ।
3. आशा है कि आप जनपद में कानून व्यवस्था की स्थिति को सुदृढ़ करने में अपनी सक्रिय एवं प्रभावशाली भूमिका का निर्वहन करेंगे।
ह॰ …………
(क॰ ख॰ ग॰)
पुलिस महानिदेशक।
सम्बन्धित लेख—
