उपसर्ग

सामान्य हिन्दी

परिचय

उपसर्ग = उप (समीप) + सर्ग (सृष्टि करना)। उपसर्ग का अर्थ है— किसी शब्द के समीप आकर नया शब्द बनाना।

“उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।” ये शब्दांश स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं। उदाहरणार्थ—

  • संस्कृत के ‘हृ’ (ले जाना) धातु से जो हार शब्द बनता है, उससे पूर्व प्र-, परि-, आ-, वि-, सम्- लगाने से उसमें कितना हेर-फेर हो गया— प्रहार (चोट), परिहार (त्याग, दूर करना), आहार (खाना), विहार (घूमना), संहार (नाश)।
  • ‘बल का अर्थ है— शक्ति’। बल में ‘निर्-’ लगाने से ‘निर्बल’ बना जिसका अर्थ है शक्तिहीन और ‘स-’ उपसर्ग लगाने से ‘सबल’ का अर्थ हो गया शक्तिमान, बलवान्।

उपसर्ग के बारे में सिद्धान्त कौमुदीकार का कथन है—

“उपसर्गेण धात्वर्थों बलादन्यत्र नीयते।

प्रहाराहारसंहारविहारपरिहारवत्॥”

अर्थात् उपसर्ग द्वारा धातु या धातु से बने विशेषण, संज्ञा आदि शब्दों के अर्थ में कुछ विशिष्टता ला दी जाती है। जैसे— प्रहार (प्र + हार), आहार (आ + हार), संहार (सम् + हार), विहार (वि + हार), परिहार (परि + हार)। यहाँ एक ही कृदंत् शब्द हार है, इसमें ‘प्र’, ‘आ’, ‘सम्’, ‘वि’, ‘परि’ आदि उपसर्ग लगाने से बने शब्दों में विशेषता आ गयी है।

उपसर्ग के कई नाम है— आदि प्रत्यय, व्युत्पत्तिमूलक प्रत्यय, रचनात्मक प्रत्यय।

उपसर्गों के सम्बन्ध में कुछ विशेष बात ध्यान देने योग्य यह है कि—

  • प्रथम— उपसर्ग लगने से कभी-कभी तो ऐसा अर्थ हो जाता है कि मूल या रूढ़ शब्द से उसके ताल-मेल बिठाना अत्यन्त कठिन हो जाता है।
  • द्वितीय— मूल में कोई शब्द संज्ञा है, तो उपसर्ग लगने से विशेषण हो जाता है और विशेषण है, तो संज्ञा या क्रिया-विशेषण हो जाता है।

उपसर्गों के प्रयोग से शब्दार्थ में नवीन विशेषता या परिवर्तन तो होता ही है और कभी-कभी शब्द की व्याकरणिक कोटि भी बदल जाती है—

  • शब्द के अर्थ में नई विशेषता आ जाती है; जैसे— कर्म में ‘सु’ उपसर्ग जुड़ने से सुकर्म शब्द बन गया और इससे कर्म की विशेषता प्रकट होती है। 
  • शब्द के अर्थ में प्रतिकूलता आ जाती है; जैसे— विरोध में ‘निर्’ उपसर्ग जुड़ने से निर्विरोध शब्द बना जो प्रतिकूल अर्थ प्रकट कर रहा है।
  • शब्द के मूल अर्थ में कोई विशेष अन्तर नहीं आता है, बल्कि तेजी आ जाती है; जैसे— भ्रमण शब्द में ‘परि’ उपसर्ग जुड़ने से परिभ्रमण शब्द बना, इससे अर्थ में अन्तर नहीं हुआ है, वरन् तेजी आयी है।
  • मूल शब्द के अर्थ को पूर्णतया परिवर्तित कर नये प्रकार के शब्द और अर्थ का सृजन करता है; जैसे— ‘प्र-’ उपसर्ग हार से जुड़कर नवीन अर्थ वाले ‘प्रहार’ शब्द का सृजन करता है।
  • शब्द की व्याकरणिक कोटि परिवर्तित हो जाती है, अर्थात् मूल में कोई शब्द संज्ञा है, तो उपसर्ग लगने से विशेषण हो जाता है और विशेषण है, तो संज्ञा या क्रिया-विशेषण हो जाता है; जैसे— ‘स्वार्थ’ संज्ञा है परन्तु ‘निः-’ उपसर्ग से जुड़कर ‘निःस्वार्थ’ शब्द बनाता है जो कि विशेषण है।
उपसर्गमूल शब्दनिर्मित शब्दटिप्पणी
सु-कर्मसुकर्मनई विशेषता
निः-विरोधनिर्विरोधप्रतिकूलता
परि-भ्रमणपरिभ्रमणअर्थ में प्रबलता
प्र-हारप्रहारनवीन शब्द और अर्थ
निः-स्वार्थ (संज्ञा)निःस्वार्थ (विशेषण)व्याकरणिक कोटि परिवर्तित

शब्द और उपसर्ग

क्र० सं०शब्दउपसर्ग
 १.शब्द अक्षरों का समूह है।उपसर्ग शब्दांश या अक्षरों का समूह होता है।
 २.शब्द अपने में स्वतंत्र होता है।उपसर्ग स्वतंत्र नहीं होता है।
 ३.शब्द का अपना स्वतंत्र अर्थ होता है।उपसर्ग का स्वतंत्र अर्थ नहीं होता है। जब तक यह किसी शब्द के पूर्व नहीं जुड़ता, यह अर्थवान नहीं होता है।
 ४.शब्द वाक्यों में स्वतंत्रतापूर्वक प्रयुक्त होता है।उपसर्ग का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता है।
 ५.जब शब्द वाक्यों में प्रयुक्त होता है, तब यह पद कहलाता है।उपसर्ग स्वतंत्ररूप से वाक्य में प्रयुक्त नहीं होता, बल्कि यह शब्द के साथ जुड़कर वाक्यों में व्यवहृत होता है।

उपसर्गों का वर्गीकरण और संख्या

“उपसर्ग संस्कृत भाषा की विशेष उपलब्धि है। हिन्दी ने उसमें कोई विशेष योगदान नहीं दिया न ही हमें उर्दू-फ़ारसी या अंग्रेजी से कुछ मिला है। हिन्दी के जो अपने उपसर्ग कहे जाते हैं, वे संस्कृत के ही प्रायः विकृत रूप हैं, और विदेशी भाषाओं के उपसर्ग शुद्ध उपसर्ग नहीं हैं, वे तो शब्द-मात्र हैं, शब्दांश नहीं।”— हिन्दी- शब्द-अर्थ-प्रयोग; डॉ० हरदेव बाहरी

हिन्दी में तीन प्रकार के उपसर्ग हैं—

  • संस्कृत उपसर्ग
  • हिन्दी उपसर्ग
  • उर्दू उपसर्ग

विशेष टिप्पणी—

  • डॉ० वासुदेवनन्दन प्रसाद कृत ‘आधुनिक हिंदी व्याकरण और रचना’ में संस्कृत उपसर्ग १९, हिंदी उपसर्ग १० और उर्दू उपसर्ग १२ लिखे हैं; अर्थात् कुल ४१ उपसर्ग हैं।
  • डॉ० राघव प्रकाश कृत ‘व्यावहारिक सामान्य हिंदी’ में संस्कृत उपसर्गों की संख्या २२ हिंदी उपसर्ग १६ और अरबी फारसी के उपसर्ग १९ तथा अंग्रेजी के उपसर्ग ४ लिखे हैं; अर्थात् कुल ५७ उपसर्ग हैं।
  • डॉ० हरदेव बाहरी कृत ‘हिन्दी- शब्द-अर्थ-प्रयोग’ में ६७ उपसर्गों का उल्लेख हैं।
  • अतः उपसर्गों की निश्चित संख्या के सम्बन्ध में विद्वान एकमत नहीं हैं।

डॉ० वासुदेवनन्दन प्रसाद कृत ‘आधुनिक हिंदी व्याकरण और रचना’ में कुल ४१ उपसर्गों का विवरण है—

  • संस्कृत उपसर्ग— अति-, अधि-, अनु-, अप-, अभि-, अव-, आ-, उत्- (उद्-), उप-, दुः- (दुर्-, दुश्-, दुष्-, दुस्-), नि-, निः- (निर्-, निश्-, निष्-, निस्-), परा-, परि-, प्र-, प्रति-, वि-, सम्-, सु- = कुल १९ उपसर्ग।
  • हिंदी उपसर्ग— अ-/अन-, अध-, उन-, औ-, दु-, नि-, बिन-, भर-, क-/कु-, स-/सु- = कुल १० उपसर्ग।
  • उर्दू उपसर्ग— अल-, कम-, ख़ुश-, गैर-, दर-, ना-, बद- बर-, बिल-, बे-, ला-, हम- = कुल १२ उपसर्ग।

भाषा के विकास के साथ-साथ अन्यान्य भाषाओं से सम्पर्क होते हैं। इस क्रम में मध्यकाल में अरबी-फारसी से सम्पर्क हुआ और उर्दू के उपसर्ग हिन्दी भाषा के अंग बने। आधुनिक काल में आँग्ल भाषा से सम्पर्क होने पर कुछ अँग्रेजी उपसर्ग भी हिन्दी के अंग हो चले हैं; यथा—

  • एक्स-, को-, वाइस-, सब-, डबल-, डिप्टी-, जनरल-, चीफ़-, हाफ-, हेड- आदि।

उपसर्ग के कार्य और लक्षण

उपसर्ग के कार्य

  • शब्द के अर्थ में कोई अंतर नहीं ला पाते, वरन् उसी अर्थ में गति या तीव्रता ला देते हैं।
  • शब्द के मूल अर्थ को उलटा (उल्टा) कर देते हैं।
  • शब्द के मूल अर्थ में एक नवीन विशेषता ला देते हैं।

उपसर्ग के लक्षण

  • उपसर्ग पूर्ण (स्वतंत्र) शब्द न होकर शब्दांश होता है।
  • उपसर्ग का प्रयोग शब्द के प्रारम्भ में होता है।
  • उपसर्ग शब्द के अर्थ में विशिष्टता ला देता है।
  • उपसर्ग का प्रयोग वाक्य में स्वतंत्र रूप से नहीं होता।
उपसर्ग

उपसर्ग संग्रह

संस्कृत के उपसर्ग

संस्कृत के उपसर्गों को दो भागों में बाँटा जा सकता है—

  • प्रमुख उपसर्ग— इस वर्ग में हम संस्कृत के प्रमुख उपसर्गों की रख सकते हैं। इनकी संख्या १९ है। अति-, अधि-, अनु-, अप-, अभि-, अव-, आ-, उत्- (उद्-, उन्, उल्-), उप-, दुः- (दुर्-, दुश्-, दुष्-, दुस्-), नि-, निः- (निर्-, निश्-, निष्-, निस्-), परा-, परि-, प्र-, प्रति-, वि-, सम्-, सु-।
  • गति शब्द— संस्कृत (तत्सम) में कुछ अव्यय शब्द ऐसे हैं जो शब्द के आरम्भ में जुड़कर अर्थ बदल देते हैं, ऐसे शब्दों को ‘गति शब्द’ कहते हैं। कुछ प्रमुख गति शब्द इस प्रकार हैं— अंतः- (अंतर्-, अंतश्-, अंतस्-), अ-, अग्र-, अधः-, अन्-, अपि-, अमा-, अलम्-, आत्म-, आविः- (आविर्-, आविष्-), इति-, का-, कु-, चिर- (चिरम्-), तत्- (तद्-, तन्-), तिरः- (तिरस्-), न-, पर-, पुनः- (पुनर्-, पुनश्-, पुनस्-), पुरस्- (पुरः-), पुरा-, पूर्व-, प्राक्-, प्रातः-, प्रादुर्- (प्रादुः-), बहिः- (बहिर्-, बहिश्-, बहिष्-), बहु-, स-, सत्-, सम, (सद्-, सन्-), सह-, साक्षात्-, स्व-, स्वयं।

संस्कृत के उपसर्गों का विवरण अधोलिखित है—

अंतः – (अंतर्-, अंतश्-, अंतस्-)

  • अर्थ— भीतर या बीच का
  • शब्द— अंतःकरण, अंतःकालीन, अंतःकोण, अंतःपुर, अंतःप्रवाह, अंतःप्रांतीय, अंतःप्रेरण,  अंतःशुद्धि, अंतःश्वसन, अंतःसलिला (अंतस्सलिला), अंतरंग, अंतरात्मा, अंतर्कथा (शुद्ध अंतःकथा या अंतस्कथा), अंतर्गत, अंतर्घात, अंतर्जातीय, अंतर्ज्ञान, अंतर्दशा, अंतर्दृष्टि, अंतर्देशीय, अंतर्द्वन्द्व, अंतर्धान, अंतर्धारा, अंतर्नाद, अंतर्निहित (अंतः + नि + हित), अंतर्पट, अंतर्बोध, अंतर्भाव, अंतर्मुक्त, अंतर्भूत, अंतर्भौम, अंतर्मुखी, अंतर्यामी, अंतर्राष्ट्रीय, अंतर्वर्ग, अंतर्वर्ती, अंतर्वस्तु, अंतर्विरोध, अंतस्तत्त्व, अंतश्चित्त (अंतः + चित्त), अंतश्चेतना (अंतः + चेतना), अंतस्थ, अंतस्थल आदि।

अ-

  • अर्थ— अभाव, निषेध (नहीं)
  • शब्द— अकथ, अकथनीय, अकरणीय, अकराल, अकरुण, अकर्ता, अकर्तित, अकर्त्तव्य, अकर्म, अकर्मक, अकर्मण्य, अकलंक, अकलंकित, अकल्पित, अकल्मष, अकल्याण, अकाज, अकाट्य, अकाम, अकारण, अकारथ, अकार्य, अकाल, अकालिक, अकिंचन, अक्षम्य, अगद, अगम, अगम्य, अगाध, अगोचर, अघटनीय, अचल, अचित्, अचिर, अजन्मा, अजर (अ + जर), अज्ञान, अतल, अथाह, अतुलनीय, अतृप्त, अदम्य, अदीन, अदृष्ट, अद्वैत, अधर्म, अनाथ, अनादि, अनित्य, अनिद्र, अनिद्रा, अनिर्वाच्य, अनैतिक, अनौचित्य, अपवित्र, अपरिचित (अ + परि + चित), अपाठ्य, अपूर्ण, अबल, अबोध, अभय, अभिन्न, अमर, अमर्त्य, अयुक्ति, अयोग्य, अलभ्य, अलौकिक, अवैतनिक, अव्यय (अ + वि + अय), अशुभ, असंगति, असमय, अस्थिर, अस्वाभाविक, अस्वामिक आदि।
  • टिप्पणी—
    • ‘अ-’ और ‘अन्-’ दोनों का अर्थ अभाव, निषेध होता है। ‘अ-’ उपसर्ग उन शब्दों में जुड़ता है जो व्यंजन से प्रारम्भ होता है, परंतु ‘अन्-’ उपसर्ग उन शब्दों में जुड़ता है जो स्वर स् प्रारम्भ होता है; जैसे— अ + भाव = अभाव, अन् + आदि = अनादि।
    • यह उपसर्ग तत्सम संज्ञाओं और विशेषणों (अर्थात् संस्कृत के ऐसे शब्दों) के आदि में जुड़कर प्रायः उनका अर्थ या तो उलट देता है या बहुत कुछ बदल देता है।

अति-

  • अर्थ— अधिक, उस पार, ऊपर, बहुत, परे। यह उपसर्ग ‘नियमित या सामान्य से अधिक’, ‘साधारण के अतिरिक्त या सिवाय’, ‘आवश्यकता या औचित्य से अधिक’ आदि अर्थ देता है।
  • शब्द—अतिकथन, अतिकाय, अतिकाल, अतिक्रमण, अतिक्षिप्र, अतिगंध, अतिगत, अतिचार, अतिच्छादन (अति + छादन), अतिजीवन, अतिदंतुर, अतिदर्शी, अतिदिष्ट, अतिदेश, अतिनिर्वात, अतिपात, अतिपातक, अतिपावन, अतिप्रजन, अतिप्रभंजन, अतिबल, अतिभार, अतिभोग, अतिभोजन, अतिमर्त्य, अतिमात्र, अतिमानव, अतिमित, अतिमूत्र, अतियोग, अतिरंजन, अतिरंजना, अतिरंजित, अतिराष्ट्रीयता, अतिरिक्त, अतिरूप, अतिरेक, अतिलंबन, अतिवात, अतिवाद, अतिवादी, अतिविष, अतिवृष्टि, अतिव्याप्ति (अति + वि + आप्ति), अतिशम, अतिशय, अतिशयोक्ति, अतिशीतन, अतिशेष, अतिसंधान, अतिसर्पण, अतिसामान्य, अतिसार, अतिस्थूल, अतीन्द्रिय, अतीत (अति + इत), अतीव (अति + इव), अत्यधिक, अत्यन्त, अत्यम्ल, अत्यल्प, अत्यर्थ, अत्याकार, अत्याग्नि, अत्याचार (अति + आ + चार), अत्याछादन (अति + आ + छादन), अत्याधुनिक (अति + आधुनिक), अत्यानंद, अत्युक्ति (अति + उक्ति), अत्युग्र, अत्युत्कट, अत्युत्तम, अत्युत्पादन इत्यादि।

अधः –

  • अर्थ— नीचे, तले
  • शब्द—अधःपतन, अधःशयन, अधश्चर, अधस्तल, अधस्त्तव, अधस्थ, अधोगति (अधः + गति), अधोगमन, अधोगामी, अधोभाग (अधः + भाग), अधोभूमि, अधोमंडल, अधोमार्ग, अधोमुख, अधोरेखा, अधोलिखित, अधोलोक, अधोवस्त्र, अधोवायु, अधोहस्ताक्षरकर्त्ता (अधः + हस्त + अक्षर + कर्त्ता), अधोहस्ताक्षरी इत्यादि।

अधि-

  • अर्थ— (क) ऊपर, ऊँचा; (ख) प्रधान, मुख्य; (ग) अधिकार; (घ) स्वार्थे; (ङ) अधिक
  • शब्द—अधिकर, अधिकरण, अधिकर्मी, अधिकार, अधिकारी, अधिकृत, अधिकोष, अधिक्रय, अधिक्षिप्त, अधिक्षेत्र, अधिगत, अधिगम, अधिग्रहण, अधिचरण, अधित्यका (अधि + त्यका), अधिदेय, अधिदेव, अधिनायक, अधिनियम, अधिनिर्णय, अधिपति, अधिपुरुष, अधिप्रज, अधिभार, अधिभाग, अधिभोजन, अधिमान, अधिमास, अधिमूल्य, अधिरक्षी, अधिराज, अधिराज्य, अधिरूप, अधिरूपण, अधिरोहण, अधिलाभ, अधिलाभांश, अधिवक्ता, अधिवचन, अधिवासी,  अधिवृद्धि, अधिशासी, अधिशिक्षक, अधिशुल्क, अधिष्ठाता (अधि + स्थाता), अधिष्ठान (अधि + स्थान), अधिसंख्य, अधिसूचना, अधिस्वर, अधिहरण, अधीन (अधि + इन), अधीक्षक (अधि + ईक्षक), अधीक्षण (अधि + ईक्षण), अध्यक्ष (अधि + अक्ष), अध्ययन (अधि + अयन), अध्यर्थना (अधि + अर्थना), अध्यात्म (अधि + आत्म), अध्यादेश (अधि + आ + देश), अध्यापक (अधि + आ + पक), अध्याय (अधि + आय), अध्यारोप, अध्यारोपण इत्यादि।

अन्-

  • अर्थ— अभाव, निषेध
  • शब्द— अनंग (अन् + अंग), अनंत (अन् + अंत), अनंतर (अन् + अंतर), अनद्यतन (अन् + अद्यतन), अनधिकार (अन् + अधि + कार), अनधिगत (अन् + अधिगत), अनध्याय (अन् + अध्याय), अननिवार्य (अन् + अ + निवार्य), अनन्य (अन् + अन्य), अनपत्य (अन् + अपत्य), अनपेक्षित (अन् + अप + ईक्षित), अनभिज्ञ (अन् + अभिज्ञ), अनभ्यस्त (अन् + अभि + अस्त), अनर्थ (अन् + अर्थ), अनलंकृत (अन् + अलंकृत), अनल्प (अन् + अल्प), अनवधान (अन् + अवधान), अनस्तित्व (अन् + अस्तित्व), अनादर (अन् + आदर), अनादि (अन् + आदि), अनाप्त (अन् + आप्त), अनापत्ति (अन् + आ + पत्ति), अनावश्यक (अन् + आ + वश्यक), अनिच्छुक (अन् + इच्छुक), अनेक (अन् + एक), इत्यादि।
  • टिप्पणी—
    • ‘अ-’ निषेधात्मक उपसर्ग का वह रूप जो संस्कृत में स्वर से आरंभ होने वाले शब्दों में लगता है।
    • ‘अ-’ और ‘अन्-’ दोनों का अर्थ अभाव, निषेध होता है। ‘अ-’ उपसर्ग उन शब्दों में जुड़ता है जो व्यंजन से प्रारम्भ होता है, परंतु ‘अन्-’ उपसर्ग उन शब्दों में जुड़ता है जो स्वर स् प्रारम्भ होता है; जैसे— अ + भाव = अभाव, अन् + आदि = अनादि।

अनु-

  • अर्थ— (अ) पीछे; (ब) संग-साथ; (स) प्रत्येक; (द) बार-बार; (र) स्वार्थे (वहीं अपना अर्थ); (फ) अनुकूल और (ग) समान
  • शब्द— अनुकंपा, अनुकथन, अनुकरण, अनुकलन, अनुकल्प, अनुकांक्षा, अनुकूल, अनुकृत, अनुकृति, अनुक्रम, अनुक्रमणिका, अनुक्षण, अनुगणन, अनुगमन, अनुगामी, अनुगायन, अनुगृहीत, अनुचर, अनुचिंतन, अनुच्छेद (अनु + छेद), अनुज (अनु + ज), अनुजात, अनुजीवी, अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा, अनुज्ञप्त, अनुताप, अनुताप, अनुतोष, अनुदान, अनुदिन, अनुदेश, अनुधावन, अनुनाद, अनुनायक, अनुनायिका, अनुनासिक, अनुनिर्माण, अनुपथ, अनुपदी, अनुपात, अनुपान, अनुपालन, अनुपूरक, अनुप्रयोग, अनुप्राणित, अनुप्रास, अनुबंध, अनुबल, अनुभव, अनुभाग, अनुभाव, अनुभाषण, अनुभूति, अनुमति, अनुमान, अनुमृता, अनुयाचक, अनुयान, अनुयायी, अनुयुग, अनुरक्षक, अनुरक्षण, अनुरस, अनुराग, अनुरूप, अनुलग्नक, अनुलाप, अनुलिखित, अनुलिपि, अनुलेपन, अनुवक्ता, अनुवचन, अनुवाचन, अनुवर्तन, अनुवाद, अनुवेश, अनुव्रजन, अनुशंसा, अनुशासन, अनुशीलन, अनुशोधन, अनुश्रुत, अनुसंधान, अनुसरण, अनुसूची, अनुस्वार, अनूदित (अनु + उद् + इत), अन्वेषक (अनु + एषक), अन्वेषण (अनु + एषण) इत्यादि।

अप-

  • अर्थ— निषेध, अपकर्ष, विकार, बुराई, अलग, दूर, परे, अपवाद
  • शब्द— अपंग, अपकर्त्ता, अपकर्म, अपकर्ष, अपकर्षण, अपकार, अपकीर्ति, अपकृति, अपकृष्ट, अपकेंद्र, अपक्रम, अपक्षेपण, अपगति, अपगुण, अपघन, अपघर्षण, अपघात, अपचय, अपचार, अपचाल, अपचेता, अपथात, अपध्यान, अपध्वंस, अपनयन, अपनाम, अपनीत, अपनोद, अप्रयोग, अपभाषण, अपभ्रंश, अपभ्रष्ट, अपमान, अपमार्ग, अपमिश्रण, अपयश, अपयोग, अपयोजन, अपराग, अपराध, अपरूप, अपताप, अपलोक, अपवर्तन, अपवर्तित, अपवाद, अपव्यय, अपशकुन, अपशब्द, अपाश्रय, अपसंचय, अपसारण, अपसण्य, अपसृत, अपस्मार, अपहरण, अपहास, अपाकरण, अपादान, अपेक्षा (अप + इच्छा) इत्यादि।

अपि-

  • अर्थ— निश्चय, किंतु, भी
  • शब्द— अपिगीर्ण, अपितु, अपिधान (ढक्कन), अपिधि, अपिव्रत, अपिहित (ढका हुआ)

अभि-

  • अर्थ— ओर, सामने, पास, कुशल, अच्छी तरह, अधिकता और अनुचित
  • शब्द— अभिकथन, अभिकर्ता, अभिकांक्षा, अभिकरण, अभिक्रमण, अभिक्रांति, अभिगमन, अभिग्रहण, अभिघात, अभिघाती, अभिचार, अभिजात, अभिज्ञ (अभि + ज्ञ), अभिज्ञान, अभिज्ञापन, अभिताप, अभिदर्शन, अभिदान, अभिद्रोह, अभिधर्म, अभिधा (अभि + धा), अभिनंदन, अभिनय, अभिनव, अभिनिर्णय, अभिनेता, अभिन्यस्त (अभि + नि + अस्त), अभिन्यास (अभि + नि + आस), अभिपीड़न, अभिपुष्ट, अभिपोषण, अभिप्राय, अभिभावक, अभिभाषण, अभिमंडन, अभिमत, अभिमर्दन, अभिमान, अभिमुख, अभियंता, अभियाचना, अभियान, अभियुक्त, अभियोग, अभिरक्षक, अभिरमण, अभिरूप, अभिलंब, अभिलाप, अभिलाषा, अभिलीन, अभिलेख, अभिवंदनीय, अभिवचन, अभिवर्धन, अभिवादन, अभिवृद्धि, अभिव्यक्त, अभिशंसा, अभिशाप, अभिशप्त, अभिशाप, अभिषंग, अभिषिक्त, अभिषेक, अभिसरण, अभिसार, अभीप्सित (अभि + ईप्सित), अभीष्ट (अभि + इष्ट), अभ्यास, अभ्यर्थी (अभि + अर्थी), अभ्याक्रमण, अभ्यागत (अभि + आ + गत), अभ्युत्थान (अभि + उत् + स्थान), अभ्युदय (अभि + उत् + अय), इत्यादि।

अमा-

  • अर्थ— निकट, पास, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं रात (अमावस्या)
  • शब्द— अमात्य, अमान्त (अमा + अन्त), अमापर्व (अमा + पर्व), अमावस्या (अमा + वस्या)।

अलम्-

  • अर्थ— यथेष्ट, पर्याप्त।
  • शब्द— अलंकरण, अलंकार (अलम् + कार), अलंकृत।

अव-

  • अर्थ— निश्चय, अनादर, अभाव, निषेध, कमी, बुराई, उतार, व्याप्ति, अनुचित, नीचा, नीचे, हीन आदि
  • शब्द— अवकरण, अवकाश, अवकीर्ण, अवकृपा, अवकृष्ट, अवकेश, अवक्रम, अवक्रमण, अवक्रांत, अवक्रोश, अवक्षय, अवक्षेपण, अवगत, अवगमन, अवगाहन, अवगीत, अवगुंठन, अवगुंफन, अवगुण, अवग्रह, अवग्रहण, अवघोषक, अवचेतन, अवच्छिन्न, अवच्छेदन, अवज्ञा (अव + ज्ञा), अवज्ञाता, अवतरण, अवतल, अवतार, अवतीर्ण, अवदशा, अवदान, अवदीर्ण, अवधान, अवधारणा, अवधि, अवनत, अवनति, अवपात, अवनमन, अवपात, अवमंता, अवमर्दन, अवमान, अवमानना, अवमानव, अवमूल्यन, अवयान, अवरोध, अवरोचक, अवरोह, अवरोहण, अवलिप्त, अवलीला, अवलेह, अवलोकन, अववदन, अवशेष, अवशोषण, अवसन्न, अवसाद, अवसान, अवसिंचन, अवस्था, अवहास, अवांतर (अव + अंतर), अवाप्ति (अव + आप्ति) इत्यादि।
  • टिप्पणी—
    • ‘अव-’ उपसर्ग से निर्मित और भी उदाहरण हैं जिनमें स्वार्थे प्रयोग मिलता है।
    • तद्भव शब्दों के साथ ‘अव-’ उपसर्ग का रूप ‘औ-’ हो जाता है; जैसे— औगुण, औघट, औढर।

आ-

  • अर्थ— अपनी ओर, उलटा, बलपूर्वक, तर्क, तक, इधर, से, समेत आदि
  • शब्द— आकंठ, आकंप, आकंपन, आकर्षण, आकलन, आकांक्षा, आकाश (आ + काश), आकुंचन, आक्रंदन, आक्रमण, आक्रांत, आक्रोश, आक्षेप, आख्यात, आगंतुक, आगणन, आगत, आगमन, आगार, आघात, आघूर्णन, आचमन, आचरण, आच्छादन (आ + छादन), आजन्म, आजानु (आ + जानु), आजीव, आजीवन, आजीविका, आज्ञप्ति, आज्ञा, आतंक, आतप, आतृप्त, आदर्श, आदर्शन, आदाता, आदान, आदेश, आधार, आनंद, आपत्ति, आपात, आपूर्ति, आबाल, आभार, आभूषण, आभूषित, आभोग, आमंत्रण, आमरण, आमीलन, आमुख, आमोद, आयात, आयोग, आयोजन, आरक्त, आरक्षण, आरम्भ, आराधना, आरूढ़, आरक्त, आराधना, आरोपण, आरोहण, आलंबन, आलोड़न, आवर्त्तन, आवेग, आशंका, आश्रम, आसक्त, आसन्न (आ + सन्न), आस्वादन, आहत, आहार इत्यादि।

आत्म-

  • अर्थ— अपना
  • शब्द— आत्मकथा, आत्मगत, आत्मगौरव, आत्मघात, आत्मचरित्र, आत्मज, आत्मज्ञान, आत्मत्याग, आत्मनियंत्रण, आत्मनिर्भर, आत्मनिवेदन, आत्मप्रदर्शन, आत्मप्रशंसा, आत्मबलि, आत्मरक्षा, आत्मविस्मृति, आत्मश्लाघा, आत्मसंयम, आत्मसंतोष, आत्मसमर्पण, आत्मसात्, आत्महत्या, आत्माभिमान, आत्मावलंबी, आत्मीकरण, आमोत्सर्ग, आत्मोद्धार, आत्मोन्नति इत्यादि।

आविः – (आविर्-, आविष्-)

  • अर्थ— प्रकट्, बाहिर।
  • शब्द— आविर्भाव (आविः + भाव), आविर्भूत, आविष्करण, आविष्कार (आविः + कार), आविष्कृत (आविः + कृत)।

इति-

  • अर्थ— ऐसा, यह, समाप्त।
  • शब्द— इति-कर्त्तव्य, इति-कृतं, इतिवृत्त, इतिश्री (अंत), इति-सिद्धं, इतिहास, इतिहासाश्रित (इति + हास + आ + श्रित), इत्यादि (इति + आदि)।

उत्- (उद्-, उन्-, उल्-)

  • अर्थ— अधिक, ऊपर, ऊँचा, प्रबल, श्रेष्ठ
  • शब्द— उच्चारण, उच्छलन, उच्छृंखल, उच्छ्वास, उज्जयिनी, उज्जीवन, उज्ज्वल, उत्कंठ, उत्कंठा, उत्कर्ष, उत्कलित, उत्कीर्ण, उत्कृष्ट, उत्क्रम, उत्क्रमण, उत्क्रांत, उत्क्षेपण, उत्खनन, उत्तुंग, उत्तोलक, उत्थान, उत्पतन, उत्पन्न, उत्तप्त, उत्तम, उत्तर, उत्तराधिकार, उत्तरीय, उत्तरोत्तर, उत्तल, उत्ताप, उत्तीर्ण, उत्तुंग, उत्तेजना, उत्तेजित, उत्तोलन, उत्थान, उत्थापन, उत्पत्ति, उत्पन्न, उत्पल, उत्पात, उत्पाद, उत्पादन, उत्पीड़न, उत्प्रेक्षण, उत्फुल्ल, उत्सर्ग, उत्सर्पी, उत्सव, उत्सादन, उत्साह, उत्साहन, उत्सुक, उत्सेक, उदय, उद्गम, उद्गार, उद्ग्रीव, उद्घाटन, उद्घोषणा, उद्दंड, उद्दीपन, उद्दीप्त, उद्देश्य, उद्धत, उद्धरण, उद्धार, उद्धृत, उद्बोधन, उद्भट, उद्भव, उद्भास, उद्भासन, उद्भेदन, उद्भ्रम, उद्यम, उन्नति, उन्नयन, उन्नायक, उन्माद, उन्मेष, उल्लंघन, उल्लास इत्यादि।

उप-

  • अर्थ— आरंभ, निकट, पास, समीपता, सहायक, विस्तार या अधिकता, गौणता, छोटाई और व्याप्ति
  • शब्द— उपकथा, उपकरण, उपकार, उपकुल, उपकूल, उपक्रम, उपक्रमण, उपकीर्ण, उपखंड, उपगमन, उपग्रह, उपचरण, उपचर्या, उपचार, उपजीविका, उपजीवी, उपत्यका, उपदेश, उपद्रव, उपद्वीप, उपधातु, उपधारा, उपनगर, उपनदी, उपनयन, उपनाम, उपनायक, उपनिबंधक, उपनिवेश (उप + नि + वेश), उपनिषद् (उप + नि + सद्), उपन्यास (उप + नि + आस), उपपन्न, उपबंध, उपभाषा, उपभेद, उपभोक्ता, उपभोग, उपमंडल, उपमंत्री, उपमा (उप + मा), उपमान, उपयुक्त, उपयोग, उपरत, उपराग, उपरूप, उपरूपक, उपरोध, उपलक्षण, उपलक्ष्य, उपलब्ध, उपवन, उपवर्णन, उपवसन, उपवाक्य, उपविभाग, उपविष्ट, उपशाखा, उपशिक्षक, उपशिक्षक, उपशीर्षक, उपसंपादक, उपसंस्कार, उपसंहार, उपसमिति, उपसरण, उपसर्ग, उपस्तरण, उपस्थित, उपस्थिति, उपहरण, उपहार, उपांग (उप + अंग), उपांत, उपाख्यान, उपागत, उपाधि (उप + आधि), उपाध्यक्ष (उप + अधि + अक्ष), उपायुक्त (उप + आ + युक्त), उपाश्रय, उपासना, उपास्य, उपाहार इत्यादि। 

का-

  • अर्थ— नीच, बुरा
  • शब्द— काजल, कातर, कापथ, कापुरुष इत्यादि।

कु-

  • अर्थ— कुत्सित, बुरा, नीच, कठिन
  • शब्द— कुकर्म, कुकर्मी, कुख्यात, कुगति, कुग्रह, कुचक्र, कुचर्या, कुचेष्टा, कुजन्म, कुतंत्री, कुतनु, कुतर्क, कुदिन, कुदेश, कुदेह, कुदृष्टि, कुपंथ, कुपथ, कुपथ्य, कुपात्र, कुपुत्र, कुपोषण, कुप्रथा, कुप्रबंध, कुफल, कुबुद्धि, कुभाव, कुभाषा, कुमंत्रणा, कुमति, कुमार्ग, कुयश, कुयोग, कुरीति, कुरूप, कुलक्षण, कुवाक्य, कुवृत्ति, कुवैद्य, कु-शासन, कुसंग, कुसंगति, कुसमय आदि।

चिर- (चिरम्-)

  • अर्थ— बहुत समय, बहुत समय तक
  • शब्द— चिरंतन (चिरम् + तन), चिरंजीव (चिरम् + जीव), चिरकाल, चिरकुमार, चिरजीवी, चिरजीवन, चिरनिद्रा, चिरनूतन, चिरपरिचित (चिर + परि + चित), चिरप्रतीक्षित (चिर + प्रति + ईक्षित), चिरयुवा, चिरयौवन, चिररोगी, चिरविस्मृत, चिरस्थायी, चिरायु (चिर + आयु) आदि। 

तत्- (तद्-, तन्-)

  • अर्थ— वह, वही, उसी
  • शब्द— तत्काल, तत्कालीन, तत्क्षण, तत्त्व, तत्पर, तत्पश्चात, तत्पुरुष, तत्सम्बन्धी, तत्सम, तत्सामयिक, तदनंतर, तदनुसार, तदाकार, तदुपरांत, तद्गत, तद्भव, तद्रूप, तद्वत्, तन्मय आदि।

तिरः – (तिरस्-)

  • अर्थ— हीन, तुच्छ।
  • शब्द— तिरस्कार, तिरोधान (अंतर्धान), तिरोभाव (अंतर्धान), तिरोहित (छिपा हुआ)।

दुः – (दुर्-, दुश्, दुष-, दुस्-)

  • अर्थ— दूषण (बुराई) अथवा निषेध और कठिनता
  • शब्द— दुःख, दुःशासन (दुश्शासन), दुःशील (दुश्शील), दुःशोधनीय, दुःसह (दुस्सह), दुःसाध्य (दुस्साध्य), दुःसाहस (दुस्साहस), दुःस्वप्न, दुःस्वभाव, दुरंत (दुः + अंत), दुरभिसंधि (दुः + अभि + सम् + धि), दुरवस्था, दुराग्रह, दुराचार, दुराचारी, दुरात्मा, दुराराध्य, दुराशा (दुः + आशा), दुरुत्साहित, दुरुपयोग, दुरूह (दुः + ऊह), दुर्गंध, दुर्गति, दुर्गम, दुर्गाह्य, दुर्गुण, दुर्ग्रह, दुर्घटना, दुर्जन, दुर्जेय, दुर्दमनीय, दुर्दम्य, दुर्दशा, दुर्दांत (दुः + दांत), दुर्दिन, दुर्दैव, दुर्घर्ष (दुः + धर्ष), दुर्निग्रह, दुर्निवार, दुर्निवार्य, दुर्नीति, दुर्बल, दुर्बुद्धि, दुर्बोध, दुर्भक्ष, दुर्भक्ष्य, दुर्भर, दुर्भाग्य, दुर्भाव, दुर्भावना, दुर्भिक्ष, दुर्भेद्य, दुर्मति, दुर्मिल, दुर्योग, दुर्योध (दुः + योध), दुर्योधन (दुः + योधन), दुर्लंघ्य (दुः + लंघ्य), दुर्लक्ष्य, दुर्लभ, दुर्वचन, दुर्वह, दुर्वाद, दुर्वासना, दुर्वासा (दुः + वासा), दुर्विनीत, दुर्विपाक, दुर्व्यवस्था, दुर्व्यवहार (दुः + वि + अव + हार), दुर्व्यसन, दुश्चक्र, दुश्चरित्र (दुः चरित्र), दुश्चलन, दुश्चिंतन, दुश्चिंता, दुश्चिंत्य, दुश्चिकित्स्य, दुश्चेष्टा, दुष्कर (दुः + कर), दुष्कर्म (दुः + कर्म), दुष्कीर्ति, दुष्कृति, दुष्कृत्य (दुः + कृत्य), दुष्परिणाम (दुः + परि + नाम), दुष्प्रभाव, दुष्प्रयोग (दुः + प्र + योग), दुष्प्रहार (दुः + प्र + हार), दुष्प्राप्य (दुः + प्र + अप्य), दुस्तर (दुः + तर), दुस्संग, दुस्सह, दुस्साध्य (दुः + साध्य), दुस्साहस, दूराज (दुः + राज) आदि। 

न-

  • अर्थ— अभाव
  • शब्द— नपुंसक, नास्तिक (न + आस्तिक), नग (न + ग), नेति (न + इति)।

निः – (निर्-, निश्-, निष्-, निस्-)

  • बिना— बिना, निषेध, अत्यंत, बाहर, निश्चय
  • शब्द— निःक्षत्र, निःक्षत्रिय, निःक्षेप, निःप्रभ (निष्प्रभ), निःशंक (निश्शंक), निःशब्द (निश्शब्द), निःशस्त्र (निश्शस्त्र), निःशस्त्रीकरण (निश्शस्त्रीकरण), निःशुल्क, निःशेष, निःशोध्य, निःश्रेयस, निःश्वास (निश्वास), निःसंकोच (निस्संकोच), निःसंग (निस्संग), निःसंज्ञ, निःसंतान (निस्संतान), निःसंदेह (निस्संदेह), निःसंशय, निःसंसार, निःसत्त्व, निःसार (निस्सार), निःसीम (निस्सीम), निःस्नेह, निःस्पंद (निस्स्पंद), निःस्पृह, निःस्व, निःस्वन, निःस्वादु, निःस्वार्थ (निस्स्वार्थ), निरंकुश, निरंजन (निः + अंजन), निरंतर, निरक्षर, निरख, निरतिशय (निः + अति + शय), निरनुनासिक (निः + अनु + नासिक), निरनुरोध, निरन्न, निरपराध, निरपेक्ष, निरभिमान (निः + अभि + मान), निरभिलाष (निः + अभि + लाष), निरभ्र, निरर्थक, निरल, निरलस, निरवद्य, निरवधि, निरवलंब (निः + अव + लंब), निरस्त, निरस्त्र, निराकरण (निः + आ + करण), निरादर (निः + आ + दर), निरापद (निः + आ + पद), निरामय, निरामिष (निः + आ + मिष), निरालंब, निरावरण, निराशा, निराश्रय (निः + आ + श्रय), निराहार, निरीक्षण (निः + ईक्षण), निरीक्षक (निः + ईक्षक), निरीह (निः + ईह), निरुक्त, निरुत्तर, निरुत्साह (निः + उत् + साह), निरुदेश्य, निरुद्यम, निरुपम (निः + उप + म), निरुपाधि, निरुपाय, निर्गंध, निर्गत, निर्गम, निर्गुण, निर्जन, निर्जल, निर्जीव, निर्णय, निर्दय, निर्दलीय, निर्दिष्ट, निर्देश, निर्दोष, निर्धन, निर्धारण, निर्निमेष (निः + नि + मेष), निर्बल, निर्बाध, निर्बुद्धि, निर्बोध, निर्भय, निर्भर, निर्भीक, निर्भ्रम, निर्मम, निर्मल, निर्माण (निः + मान), निर्माल्य, निर्मुक्ति, निर्मूल, निर्मोक, निर्मोही, निर्यात, निर्यास, निर्लज्ज, निर्लिप्त, निर्लेप, निर्वंश, निर्वचन, निर्वसन (निः + वसन), निर्वस्त्र (निः + वस्त्र), निर्वाक् (निः + वाक्), निर्वहन, निर्वाचन, निर्वाण, निर्वास, निर्वासन, निर्वाह, निर्विकल्प, निर्विकार, निर्विघ्न, निर्विरोध (निः + वि + रोध), निर्विवाद, निर्वेद, निर्व्याज, निश्चय, निश्चल, निश्चेतन, निश्चिंत, निश्चित (निः + चित), निश्चेतन, निश्चेष्ट, निश्छल, निश्शेष, निष्कंटक (निः + कंटक), निष्कंप, निष्कपट, निष्कर्म, निष्करुण, निष्कर्ष, निष्कलंक, निष्कषाय, निष्काम (निः + काम), निष्कारण, निष्कासन (निः + कासन), निष्क्रमण, निष्क्रिय, निष्पंद, निष्पक्ष, निष्पत्ति (निः + पत्ति), निष्पाप, निष्प्रपंच, निष्प्रभ (निः + प्र + भ), निष्प्रयोजन, निष्प्राण, निष्फल (निः + फल), निस्तल, निस्तार, निस्तारण, निस्तेज (निः + तेज), निस्संकोच (निः + सम् + कोच), निस्संतान, निस्संदेह (निः + सम् + देह), निस्संधि, निस्सरण, निस्सार, निस्सारण, निस्सीम (निः + सीम), निस्स्वार्थ (निः + स्व + अर्थ), नीरज, नीरव, नीरोग, नीरस आदि।

नि-

  • अर्थ— झुंड या समूह, अधोभाव, अत्यन्त, आदेश, भीतर, अच्छी तरह, अधिक, नीचे, अतिरिक्त, बाहर, बड़ा विशेष,
  • शब्द— निकट, निकर, निकर्षण, निकष, निकाम, निकाय, निकार, निकुंज, निकृति, निकृष्ट, निकेत, निकेतन, निक्षिप्त, निक्षेप, निखिल, निखार, निखिल, निगम, निगूढ़, निग्रह, निचय, निझरना, निढाल, नितंब, नितल, निदर्शन, निदाघ, निदान, निदेश, निर्देश, निधि (नि + धि), निनाद, निपात, निपान, निपुण, निबंध (निबन्ध), निबद्ध, निभृत, निमंत्रण (निमन्त्रण), निमग्न, निम्न, निमीलन, निमीलित, नियंत्रण, नियम (नि + यम), नियुक्त, नियुक्ति, नियोग, नियोजन, निरत, निरूपण, निरोध, निवारण, निवास, निविष्ट, निवेदन, निवेश, निषेचन, निषेध (नि + सेध), निष्ठा (नि + स्था), निसर्ग, निहित, न्यस्त (नि + अस्त), न्याय (नि + आय), न्यास (नि + आस) आदि। 

पर-

  • अर्थ— पराया, दूसरा, गैर, पीछे का। हिन्दी में पर (दूसरे के अर्थ में) स्वतंत्ररूप से प्रयुक्त न होकर उपसर्ग के रूप में ही होता है।
  • शब्द— परकीय, परछिद्रान्वेषण (पर + छिद्र + अनु + एषण), परजन्म, परजात, परजीवी, परतंत्र, परदारा, पर-दुःख, परदेश, परपीड़क, परपुरुष, परभुक्त, परभृत, परमार्थ, परार्थ (पर + अर्थ), परराष्ट्र, परलोक, परवंचक, परवश, परसुख, परस्त्री, परहित, पराधीन (पर + अधि + इन), परायण ( पर + अयन), पराश्रय (पर + आश्रय), पराश्रित (पर + आश्रित), परोपकार (पर + उप + कार), परोपजीवी आदि।  

परा-

  • अर्थ— परे, पीछे, दूर तक, उलटा, विपरीतता
  • शब्द— पराकरण, पराकाष्ठा, पराक्रम, पराक्रमण, पराक्रमी, पराङ्‌मुख, पराजय (परा + जय), परानुकरण, परान्न, पराभव, पराभूत, परामर्श, परार्थ, परार्द्ध, परावर्तन, परावलंबी, पराविद्या, पराशक्ति, परास्त ( परा + अस्त), पराह्न, आदि।

परि-

  • अर्थ— चारों ओर, अच्छी तरह, अतिशय, पूर्ण, बुरा, त्याग
  • शब्द— परिकथा, परिकर, परिकलन, परिकल्पना, परिक्रमा, परिक्षेत्र, परिगणित, परिगणन, परिगत, परिगृहीत, परिग्रह, परिचय, परिचर, परिचारिका, परिचालन, परिच्छद, परिजन, परिजीवी, परिज्ञान, परिणत, परिणय (परि + नय), परिणाम, परितृप्त, परितुष्ट, परितृप्त, परितोष, परित्याग, परित्राण, परिदर्शन, परिधान, परिधि, परिपक्व, परिपथ, परिपालन, परिपूर्ण, परिभाषा, परिभ्रमण, परिमंडल, परिमाण (परि + मान), परिमाप, परिमार्जन, परियोजना, परिरक्षण, परिवर्जन, परिवर्तन, परिवर्धन, परिवहन, परिवार, परिवेश, परिशिष्ट, परिशीलन, परिश्रम, परिषद्, परिष्कार (परि + कार), परिष्कृत (परि + कृत), पर्यटन (परि + अटन), पर्याप्त (परि + आप्त), पर्यावरण, परिसर, परिस्थिति, परीक्षा (परि + इच्छा), पर्यवेक्षक, पर्यवेक्षण (परि + अव + ईक्षण), पर्याप्त, पर्यावरण (परि + आ + वरण), पर्यवसान (परि + अव + सान), पर्युषण (परि + उषण) आदि।
  • नोट— परि- अनेक शब्दों में जुड़कर अनेक अर्थ बढ़ाता है। सबसे बड़ा उपसर्ग यही है।

पुनः – (पुनर्-, पुनश्-, पुनस्- आदि)

  • अर्थ— फिर, फिर से, दोबारा
  • शब्द— पुनःएकीकरण, पुनःकरण, पुनःकल्पन, पुनःप्राप्ति, पुनःसंस्कार, पुनरपि (पुनः + अपि), पुनरागमन (पुनः + आ + गमन), पुनरारंभ, पुनरवलोकन, पुनरावर्तन, पुनरावृत्ति (पुनः + आ + वृत्ति), पुनरासीन, पुनरीक्षण, पुनरुक्त, पुनरुज्जीवित (पुनः + उत् + जीवित), पुनरुत्थान (पुनः + उत् + स्थान), पुनरुद्धार (पुनः + उत् + हार), पुनर्ग्रहण, पुनर्जन्म (पुनः + जन्म), पुनर्जागरण, पुनर्जीवन, पुनर्निर्माण (पुनः + निः + मान), पुनर्निर्यात, पुनर्निर्वाचन, पुनर्परीक्षण, पुनर्प्रकाशन, पुनर्प्रेषण (पुनः + प्र + ईषण), पुनर्भाव (पुनः + भाव), पुनर्भू, पुनर्मिलन, पुनर्मुद्रण, पुनर्मूल्यांकन (पुनः + मूल्य + अंकन), पुनर्रचना, पुनर्वास, पुनर्वासन, पुनर्विचार, पुनर्वितरण, पुनर्विलोकन, पुनर्विवाह, पुनर्विहित, पुनश्च, पुनश्शस्त्रीकरण, पुनस्संघटन, पुनस्संथापन आदि।

पुरस्- (पुरः -)

  • अर्थ— मामने, आगे।
  • शब्द— पुरस्कार, पुरश्चरण (पहले प्रबन्ध करना), पुरोहित, पुरोगामी।

पुरा-

  • अर्थ— पूर्व, पहले।
  • शब्द— पुराकथा, पुराकल्प, पुराकाल, पुराण, (पुरा + न), पुरातत्त्व, पुरातन, पुरालिपि, पुरावतंश (पुरा + अव + तंश), पुरावशेष (पुरा + अव + शेष), पुराविद्, पुरावृत्त।

पूर्व-

  • अर्थ— पहला, पहले का
  • शब्द— पूर्वकथन, पूर्वकर्म, पूर्वकालिक, पूर्वकालीन, पूर्वज, पूर्वजा, पूर्वजन्म, पूर्वजन्मा, पूर्वतिथि, पूर्वनिरूपित, पूर्वनिश्चित, पूर्वपक्ष, पूर्वपद, पूर्वाग्रह, पूर्वार्द्ध (पूर्व + अर्द्ध), पुर्वानुमति, पूर्वानुमान, पूर्वानुराग, पूर्वाभास, पूर्वाभ्यास, पूर्वावस्था, पूर्वाह्न, पूर्वोक्त, पूर्वोत्तर, पूर्वोदाहरण (पूर्व + उत् + आ + ह + रन), पूर्वोपाय आदि।

प्र-

  • अर्थ— आगे, बहुत, विशेष, मुख्य, बड़ा, अंतर, अधिक
  • शब्द— प्रकंप, प्रकंपन, प्रकथन, प्रकरण, प्रकर्ष, प्रकर्षण, प्रकल्पित, प्रकांड, प्रकार, प्रकाश, प्रकीर्ण, प्रकुपित, प्रकृति, प्रकोप, प्रकोष्ठ, प्रक्रम, प्रक्रिया, प्रक्षिप्त, प्रखंड, प्रखर (प्र + खर), प्रख्यात, प्रगति, प्रगाढ़, प्रचंड, प्रचलन, प्रचार, प्रच्छन्न, प्रच्छाया, प्रजनन, प्रजा, प्रज्ञा, प्रज्वलित, प्रणय, प्रणयन (प्र + नयन), प्रणाम, प्रणिधान, प्रणिधि, प्रणति (प्र + नति), प्रणीत (प्र + नीत), प्रताप, प्रतारणा, प्रथा, प्रदक्षिणा, प्रदर्शन, प्रदाता, प्रदान, प्रदिशा, प्रदीप्त, प्रदूषण, प्रदेश, प्रपंच, प्रपत्र, प्रपात, प्रपितामह, प्रपौत्र, प्रफुल्ल, प्रबंध, प्रबल, प्रबुद्ध, प्रबोध, प्रभा, प्रभाव, प्रभु (प्र + भु), प्रभेद, प्रमत्त, प्रमाण, प्रमाद, प्रमुख, प्रमुदित, प्रमोद, प्रयत्न, प्रयास (प्र + यास), प्रयोग, प्रयोजन, प्रलय, प्रलाप, प्रलोभन, प्रवंचन, प्रवक्ता, प्रवचन, प्रवर, प्रवर्तक, प्रवर्तन, प्रवाद, प्रवास, प्रवाद, प्रवीण (प्र + वीन), प्रवेश, प्रशंसा, प्रशमन, प्रसव (प्र + सव), प्रशांत, प्रशाखा, प्रशासन, प्रशिक्षण, प्रश्रय, प्रसंग, प्रसन्न, प्रसव, प्रसाद, प्रसाधन, प्रसार, प्रसिद्ध, प्रसिद्धि, प्रस्तावना (प्र + स्तावना), प्रस्तुत (प्र + स्तुत), प्रस्थान, प्रहसन (प्र + हसन), प्राचार्य (प्र + आ + चार्य), प्राप्त (प्र + आप्त), प्राध्यापक (प्र + अधि + आ + पक), प्रारब्ध (प्र + आ + रब्ध), प्रार्थी, प्रेक्षण, प्रेरणा, प्रेषक (प्र + ईषक), प्रेषण (प्र + ईषण), प्रोज्ज्वल (प्र + उत् + ज्वल), प्रोत्साहन, प्रोन्नति, प्रौढ़ आदि।

प्रति-

  • अर्थ— विपरीत (उलटा), सामने, बदले में, हर एक, समान, मुकाबले में, अधीनस्थ
  • शब्द— प्रतिकाय, प्रतिकर, प्रतिकार, प्रतिकूल, प्रतिकृति, प्रतिक्रम, प्रतिक्रिया, प्रतिक्षण, प्रतिगमन, प्रतिगामी, प्रतिग्रह, प्रतिघात, प्रतिच्छाया, प्रतिज्ञा, प्रतिदान, प्रतिदिन, प्रतिद्वंद्वी, प्रतिध्वनि, प्रतिनिधि, प्रतिनियुक्त (प्रति + नि + युक्त), प्रतिनियुक्ति, प्रतिपक्ष, प्रतिपत्र, प्रतिपर्ण, प्रतिपालन, प्रतिपुरुष, प्रतिपूर्ति, प्रतिप्राप्ति, प्रतिफल, प्रतिबंध, प्रतिबिंब, प्रतिभा (प्रति + भा), प्रतिभास, प्रतिभूति, प्रतिमा (प्रति + मा), प्रतिमान, प्रतिमाह, प्रतिमुख, प्रतिमुद्रण, प्रतिमूर्ति, प्रतियोगिता, प्रतिरक्षा, प्रतिरूप, प्रतिरोध, प्रतिरोपण, प्रतिलिपि, प्रतिलोम, प्रतिवर्तन, प्रतिवर्ष, प्रतिवाद, प्रतिवादी, प्रतिविष, प्रतिवेश, प्रतिव्यक्ति, प्रतिशत, प्रतिश्रुति, प्रतिषेध, प्रतिष्ठा (प्रति + स्था), प्रतिष्ठित (प्रति + स्थित), प्रतिसप्ताह, प्रतिसमाहर्ता, प्रतिस्पर्धा, प्रतिहस्ताक्षर, प्रतिहिंसा, प्रतीक्षा (प्रति + ईक्षा), प्रत्यक्ष (प्रति + अक्ष), प्रत्यपकार (प्रति + अप + कार), प्रत्यर्पण (प्रति + अर्पण), प्रत्याक्रमण, प्रत्याख्यान, प्रत्यागत, प्रत्याघात (प्रति + आ + घात), प्रत्यालोचना, प्रत्यावर्तन (प्रति + आ + वर्तन), प्रत्याशा (प्रति + आशा), प्रत्याशी, प्रत्याहार, प्रत्युत्तर (प्रति + उत् + तर), प्रत्युत्पन्न (प्रति + उत् + पन्न), प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार), प्रत्येक (प्रति + एक) आदि।

प्राक्-

  • अर्थ— पहले का।
  • शब्द— प्राक्कथन, प्राक्कर्म, प्राक्तन, प्राक्कलन, प्रागैतिहासिक, प्राग्वैदिक। 

प्रादुर्- (प्रादुः -)

  • अर्थ— प्रकट, बाहिर।
  • शब्द— प्रादुर्भाव, प्रादुर्भूत।

बहिः – (बहिर्-, बहिश्- बहिष्-)

  • अर्थ— बाहर।
  • शब्द— बहिर्ज्ञान (बहिः + ज्ञान), बहिर्धार, बहिर्नाद (बहिः + नाद), बहिर्मुखी ( बहिः + मुखी), बहिरंग (बहिः + अंग), बहिर्जगत्, बहिर्द्वन्द्व (बहिः + द्वन्द्व), बहिर्मुख, बहिश्चर (बहिः + चर), बहिष्कार, बहिष्कृत।

बहु-

  • अर्थ— बहुत (मात्रा में), अनेक (संख्या में)
  • शब्द— बहु-उत्पादन (बहूत्पादन), बहु-उद्देश्यीय (बहूद्देश्यीय), बहुगुण, बहुज्ञ, बहुदर्शी, बहुधंधी, बहुधा, बहुपतित्व, बहुपत्नीत्व, बहुप्रज, बहुभाषज्ञ, बहु-भाषा-भाषी, बहुभाषाविद्, बहुभाषी, बहुभुज, बहुमत, बहुमुखी, बहुमूत्र, बहुमूल्य, बहुरंगा, बहुरूपिया, बहुवचन, बहुवर्षीय, बहुविद, बहुविवाह, बहुव्रीहि, बहुशः, बहुश्रुत, बहुसंख्यक आदि।

वि-

  • अर्थ— विशेष, अनेकरूप, विपरीत, अभाव, दूसरा (भिन्न), अलगाव
  • शब्द— विकंपन, विकच, विकर्ण, विकर्म, विकर्षण, विकल, विकलन, विकार, विकास, विकिरण, विकीर्ण (वि + कीर्ण), विकृत, विकेन्द्रीकरण, विक्रम, विक्रय, विक्षत, विक्षिप्त, विक्षुब्ध, विक्षोभ, विख्यात, विगत, विग्रह, विघटन, विघूर्णन, विचरण, विचलन, विचलित, विचार, विचित्र, विच्छिन्न, विजय, विजातीय, विज्ञप्ति, विज्ञान, विज्ञापन, वितथ, वितर्क, वितान, वितृष्णा (वि + तृष्णा), विदग्ध (वि + दग्ध), विदलन, विदारण, विदीर्ण, विदूषण, विदेश, विद्रोह, विद्वेष, विधर्मी, विधवा, विधान, विध्वंस, विनम्र, विनय, विनष्ट, विनाश, विनियंत्रण, विनियोग, विनिर्दिष्ट, विनीत, विनीति, विन्यास (वि + नि + आस), विपक्ष, विपत्ति, विपथ, विपरीत, विपर्यय (वि + परि + अय), विप्रयोग, विप्रलंभ, विप्लव, विफल, विभाग, विभाजन, विभिन्न, विभूति, विभूषित, विभेद, विभ्रम, विमत, विमल, विमार्ग, विमुख, विमूढ़, विमोचन, वियोग, विरक्त, विरत, विराग, विराम, विरुद, विरुद्ध (वि + रुद्ध), विरूप, विरेचन, विरोध, विलग, विलय, विलाप, विलास, विलुप्त, विलोम, विवर्ण, विवर्धन, विवश, विवाद, विवाह, विविध, विवेक, विशुद्ध, विशेष, विश्राम, विश्रुत (वि + श्रुत), विश्लेषण, विसंगति, विस्मरण, विस्मृति, विहित, वीक्षा (वि + ईक्षा), व्यंजन (वि + अंजन), व्यक्ति (वि + अक्ति), व्यग्र, व्यतिरेक (वि + अति + रेक), व्यय (वि + अय), व्यर्थ, व्यवसाय (वि + अव + साय), व्यसन (वि + असन), व्यस्त (वि + अस्त), व्याकरण (वि + आ + करण), व्याख्यान, व्याकुल (वि + आ + कुल), व्युत्पन्न आदि।

स-

  • अर्थ— साथ, के सहित या के साथ, एक ही में का
  • शब्द— सकर्मक, सकल, सकाम, सकुल, सकुशल, सक्रिय, सक्षम, सखेद, सगुण, सगोत्र, सघन, सचेत, सचेष्ट, सजग, सजल, सजातीय, सजिल्द, सजीव, सज्ञान, सटीक, सतर्क, सतह, सदेह, सदोष, सधर्म, सनाथ, सपंक, सपक्ष, सपत्नी, सपत्नीक, सपरिवार, सपाद, सपूत, सप्रमाण, सफल, सबल, समूल, सरस, सरूप सरोष, सलाभ, सविकल्प, सशक्त, सशस्त्र, सश्रम, सस्वर, सहित, सहृदय, साकार (स + आ + कार), सादर (स + आ + दर), सानंद, सावधान (स + अव + धान), साष्टांग (स + अष्ट + अंग), सोत्साह (स + उत् + साह), सोदाहरण (स + उत् + आ + ह + रन), सोल्लास (स + उत् + लास) आदि।

सत्- (सद्-, सन्-)

  • अर्थ— अच्छा, श्रेष्ठ
  • शब्द— सच्चरित्र (सत् + चरित्र), सच्छास्त्र (सत् + शास्त्र), सज्जन (सत् + कर्म), सत्कर्म, सत्कार, सत्कार्य, सत्कीर्ति, सत्कुल, सत्त्व, सत्पथ, सत्परामर्श, सत्पात्र, सत्प्रवृत्ति, सत्संग, सत्साहित्य, सदर्थ (सत् + अर्थ), सदसत् (सत् + असत्), सदसद्विवेक (सत् + असत् + विवेक), सदाचरण (सत् + आचरण), सदाचार (सत् + आ + चार), सदाचारी (सत् + आचारी), सदात्मा (सत् + आत्मा), सदानंद, सदाशय (सत् + आशय), सदिच्छा (सत् + इच्छा), सदुपदेश (सत् + उपदेश), सदुपयोग (सत् + उपयोग), सद्गति (सत् + गति), सद्गुण (सत् + गुण), सद्गुरु (सत् + गुरु), सद्धर्म (सत् + धर्म), सद्भाव, सद्भावना (सत् + भावना), सद्रूप (सत् + रूप), सद्वृत्त (सत् + वृत्त), सन्मार्ग (सत् + मार्ग), सन्मित्र (सत् + मित्र) आदि।

सम्- 

  • अर्थ— अच्छी तरह, भली प्रकार, उत्कृष्ट, साथ, इकट्ठा, पूर्ण, (अधिकतर स्वार्थे प्रयोग)
  • शब्द— संकर, संकर्षण (सम् + कर्षण), संकलन (सम् + कलन), संकल्प (सम् + कलन), संकीर्ण (सम् + कीर्ण), संकुचित, संकोच, संक्रमण, संक्रांति, संक्रामक, संक्षालन, संक्षिप्त, संक्षेप, संक्षेपण (सम् + क्षेपण), संख्या (सम् + ख्या), संगठित, संगति, संगम, संगायन, संगीत, संगोपन, संग्रह, संग्राम, संगोष्ठी, संग्राहक, संघर्ष, संघर्षण, संचय, संचार (सम् + चार), संचालन, संज्ञा (सम् + ज्ञा), संज्ञापन, संतति (सम् + तति), संताप (सम् + ताप), संतुलन, संतुलित, संतोष (सम् + तोष), संत्रस्त, संदेश, संदेह (सम् + देह), संधान, संन्यास (सम् + नि + आस), संपत्ति, संपर्क, संपादक, संपूर्ण, संपृक्त, संप्रदाय, संबंध, संबल (सम् + बल), संभव, संभाग (सम् + भाग), संभ्रांत, संयंत्र (सम् + यंत्र), संयम, संयुक्त, संयोग, संरक्षक, संरक्षण, संरचना, संवाद, संविधान (सम् + विधान), संवृद्धि, संवेदना, संशय, संशोधन, संश्लेषण, संसद, संसर्ग, संस्कार (सम् + कार), संस्कृत, संस्कृति (सम् + कृति), संस्तुति, संस्था, संस्थान, संदग्ध ( सम् + दग्ध), संहार, संहिता, समग्र (सम् + अग्र), समधिक, समर्थ, समर्पण (सम् + अर्पण), समाख्या (सम् + आ + ख्या), समागम, समाचार, समादर (सम् + आ + दर), समाधान (सम् + आ + धान), समायोजन, समारंभ (सम् + आ + रंभ), समारोह, समालिंगन, समालोचना, समाविष्ट (सम् + आ + विष्ट), समास, समीक्षा (सम् + ईक्षा), समुचित, समुच्चय, समुत्थान, समृद्ध, सम्प्रेषण (सम् + प्र + ईषण), सम्बोधन, सम्मान, सम्मुख, सम्मेलन, सम्मोहन, आदि।

सम-

  • अर्थ— साथ, बराबर, पास
  • शब्द— समकक्ष, समकालीन, समकोण, समक्ष, समग्र, समचतुर्भुज, समतल, समतापमंडल, समतोलन, समत्रिभुज, समदर्शन, समदर्शी, समदृष्टि, समद्विभुज, समधरातल, समधर्मा, समनाम, समबल (सम + बल), समबाहु, समभाग (सम + भाग), समभाव, समभिन्न, समभुज, समभूमि, समरस, समरूप, समलैंगिक, समवृत्त, समवयस्क, समवर्ती, समवाय, सम-शीतोष्ण (सम + शीत + उष्ण), समशील, समसमुन्नत, समसामयिक, समीकरण आदि।

सह-

  • अर्थ— साथ, संलग्न
  • शब्द— सह-अपराधी, सह-अस्तित्व, सहकर्मी, सहकार, सहकारी, सहगान, सहचर, सहचिंतन, सहज (सह + ज), सहजात, सहधर्मिणी, सहधर्मी, सहपरीक्षक, सहपाठी, सहबद्ध, सहभागी, सहभोज, सहमति, सहयात्री, सहयोग, सहलेखक, सहवास, सहवर्ती, सहवास, सहशिक्षा, सहांश, सहानुभूति (सह + अनु + भूति), सहायक (सह + आयक), सहेतुक, सहोक्ति, सहोदर (सह + उदर), साहचर्य आदि।

साक्षात्-

  • अर्थ— सामने
  • शब्द— साक्षात्कार, साक्षाद्धर्म।

सु-

  • अर्थ— अच्छा, सुन्दर, पूर्णतया, सहज
  • शब्द— सुअंग, सुकर, सुकर्म, सुकवि, सुकाल, सुकुमार, सुकुल, सुकृत, सुशासन, सुकेश, सुख्याति, सुगठित, सुगति, सुगन्ध (सुगंध), सुगम, सुग्राह्य, सुग्रीव, सुघड़, सुचरित्र, सुचारु, सुचालक, सुचिर, सुचेत, सुजन, सुजान, सुडौल, सुतनु, सुतीक्ष्ण, सुदर्शन, सुदारुण, सुदीर्घ, सुदूर, सुनयन, सुनयना, सुनीत, सुनीति, सुपथ, सुपर्ण, सुपात्र, सुपुत्र, सुप्रभात, सुप्रिया, सुफल, सुबोध, सुभग, सुभगा, सुभाष, सुभाषित, सुमति, सुमन, सुमार्ग, सुमित्रा, सुमुखी, सुयश, सुयोग, सुयोग्य, सुरक्षा, सुरति, सुरम्य, सुरस, सुलभ, सुवर्ण, सुवास, सुविचार, सुविधा, सुशिक्षित, सुशील, सुषमा, सुषुप्त (सु + सुप्त), सुषुप्ति सुसंगति, सुसंस्कृत, सुसाध्य, सुस्मित, सुस्वर, सूक्ति (सु + उक्ति), स्वंग (सु + अंग), स्वच्छ (सु + अच्छ), स्वन्त (सु + अन्त), स्वयं (सु + अयम्), स्वल्प (सु + अल्प), स्वस्ति (सु + अस्ति), स्वस्तिक (सु + अस्तिक), स्वागत (सु + आ + गत), सुहृद् आदि।

स्व-

  • अर्थ— निजी, अपना, आप, स्वयं
  • शब्द— स्वकर्म, स्वकीय, स्वगत, स्वचालित, स्वच्छन्द, स्वजन, स्वजातीय, स्वतंत्र, स्वत्व, स्वदत्त, स्वदेश, स्वधर्म, स्वभाव, स्वयं, स्वरक्षित, स्वराज्य, स्वरूप, स्वशासन, स्वशासित, स्वस्थ (स्व + स्थ), स्वाक्षर, स्वाति, स्वाधिकार, स्वाधीन (स्व + अधि + इन), स्वाभिमान, स्वायत्त, स्वार्थ, स्वावलंबन, स्वाश्रित, स्वीकार, स्वेच्छा, स्वेच्छया आदि।

स्वयं-

  • अर्थ— खुद, अपने आप
  • शब्द— स्वयंपाकी, स्वयंभू, स्वयंवर, स्वयंवरा, स्वयंसिद्ध, स्वयंसेवक, स्वयमेव आदि।

हिन्दी के उपसर्ग

डॉ० वासुदेवनन्दन प्रसाद कृत ‘आधुनिक हिंदी व्याकरण और रचना’ में कुल ४१ उपसर्गों का विवरण है, जिसमें १० हिन्दी के उपसर्गों का विवरण है—

  • हिंदी उपसर्ग— अ-/अन-, अध-, उन-, औ-, दु-, नि-, बिन-, भर-, क-/कु-, स-/सु- = कुल १० उपसर्ग।
  • हिन्दी के गौण और फुटकर उपसर्ग— उन्- (उन-), औ-, दु- (दो), पर- आदि।

हिन्दी के उपसर्गों का विवरण अधोलिखित है—

अ-

  • अर्थ— अभाव, निषेध (नहीं)
  • शब्द— अकाज, अगाध, अचूक, अछूत, अजान (देखिए अन- के अंतर्गत भी तद्भव शब्द अनजान), अटल, अडिग, अडोल, अथक, अथाह, अदेखा (देखिए अन- के अंतर्गत भी तद्भव शब्द अनदेखा), अनोखा, अपढ़ (देखिए अन- के अंतर्गत भी तद्भव शब्द अनपढ़), अबेर, अमिट, अमोल (देखिए अन- के अंतर्गत भी तद्भव शब्द अनमोल), अलग, अलोना
  • टिप्पणी—
    • निषेध, मनाही या नकार द्योतक उपसर्ग अ-, अन्- और अन- के अतिरिक्त और भी है। देखिए अव-, ना-, निः-, निर-, निसः-, वि-।
    • अनेक तद्भव शब्दों में भी ‘अ-’ उपसर्ग लगता है। ‘अन्-’ उपसर्ग उन शब्दों में लगता जिनके आदि में व्यंजन होता है। उदाहरण—

अध-

  • अर्थ— आधा
  • शब्द— अधकचरा, अधकपारी, अधखिला, अधखुला, अधगला, अधजल, अधजला, अधखुला, अधनंगा, अधबीच, अधपई, अधपका, अधमरा, अधसीजा, अधसेरा इत्यादि।

अन-

  • अर्थ— निषेध, अभाव या विपरीत, नहीं
  • शब्द— अनकहा, अनखाया, अनखिला, अनखुला, अनगढ़, अनगिनत, अनचाहा, अनजान, अनजाना, अनदेखा, अनन्य, अनपच, अनपढ़, अनमोल, अनविधा, अनबन, अनबूझ, अनबोला, अनमना, अनमंत्र, अनमोल, अनर्गल, अनर्थ, अनपढ़, अनलेखा, अनसुना, अनसुनी, अनहोनी, अनार्य, अनावश्यक, अनुपम इत्यादि।
  • टिप्पणी— तद्भव शब्दों में भी इसी अर्थ में अन उपसर्ग (बिना हल चिह्न) बहुत से शब्दों में जुड़ता है।

उ-

  • अर्थ— ऊँचा (उद् का तद्भव रूप)
  • शब्द— उखाड़ना, उचक्का, उछलना, उजड़ना, उतारना, उतावला, उनींदा उलाँघना।

उन्- (उन-)

  • अर्थ— (एक) ऊन कम।
  • शब्द— उनचास, उनतालीस, उनतीस, उनसठ, उनहत्तर, उनासी (उन्नासी), उन्नीस आदि।

औ-

  • अर्थ— (संस्कृत अव) हीन, निषेध, नीचे।
  • शब्द— औगुन (अवगुण), औघट, औघड़, औढर, औतार (अवतार), औदर, औसर (अवसर)।

कु- (क-)

  • अर्थ— कुत्सित, बुरा, नीच, कठिन
  • शब्द— कपूत, कुकाठ, कुखेत, कुटेव, कुढंग, कुघड़ी, कुघात, कुचाल, कुजात, कुजाति, कुटेव, कुठाँव, कुढंग, कुढंगा, कुदिन, कुनाम, कुराह, कुलच्छन, कुलच्छनी, कुसाइत, कूबड़ आदि।

चौ- (हिन्दी)

  • अर्थ— चार। (चार संख्यावाचक विशेषण से बना हुआ उपसर्ग है। चौ स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त नहीं होता तथा उपसर्ग के रूप में ही काम में लिया जाता है।)
  • शब्द— चौआ, चौका, चौकोर, चौखट, चौगिर्द, चौगुना, चौजुगी (चतुर्युगी), चौतरफा, चौथ, चौथा, चौदह, चौपड़, चौपथ, चौपाई, चौपाया, चौबीस, चौमार्ग, चौमासा, चौमुख, चौमुखा, चौरंगी, चौरस्ता, चौरासी, चौराहा, चौवन, चौवा, चवालीस, चौसठ, चौहत्तर आदि।

ति-

  • अर्थ— तीन
  • शब्द— तिकोना, तिगुना, तिपाई, तिमाही, तिरंगा, तिराहा आदि।

दु-

  • अर्थ— कम, खराब, बुरा, हीन। यह संस्कृत के दुः (दुर्/दुस्) का तद्भव रूप है। तद्भव शब्दों के साथ इसी का रूप दु- हो जाता है।
  • शब्द— दुकाल, दुबला, दुलारा, दुकान इत्यादि।

दु- (हिन्दी)

  • अर्थ— दो
  • शब्द— दुगुना, दुधारू, दुनाली, दुभाँत, दुभाषिया, दुमट, दुमुँहा, दुरंगा, दुलत्ती आदि।

नि- (हिन्दी)

  • अर्थ— बिना, निषेध। संस्कृत के निः का तद्भव रूप।
  • शब्द— निकम्मा, निकृष्ट, निखट्टू, निखरा, निगोड़ा, निग्रह, निछत्र, निछोही, निजूठा, निठल्ला, निडर, निधड़क, निपट, निपूता, निहत्था आदि।

बिन-

  • अर्थ— बिना निषेध/अभाव
  • शब्द— बिनकाम, बिनखाया, बिनचखा, बिनजाना, बिनजाया, बिनपढ़ा, बिनजाने, बिनमाने, बिनबुलाया, बिनबोया, बिनब्याहा, बिनदेखा, बिनसोचा।

पर-

  • अर्थ— पराया, दूसरा, गैर, पीछे का। हिन्दी में पर (दूसरे के अर्थ में) स्वतंत्ररूप से प्रयुक्त न होकर उपसर्ग के रूप में ही होता है।
  • शब्द— परकाजी (परोपकारी), परकारज, परछाईं, परछाहीं, परदादा, परदादी, परपोता, परसाल आदि।

भर-

  • अर्थ—ठीक, पूरा या भरा हुआ
  • शब्द— भरकम, भरदिन, भरपाई, भरपूर, भरपेट, भरमार, भरसक।

सु- (स)

  • अर्थ— अच्छा, श्रेष्ठ, सहित, साथ
  • शब्द— सकारे, सकाले, सकुच, सकोह, सगड़ी, सचेत, सजग, सपूत, सवेरा (सबेरा), सहित, सहेली, सुघड़, सुजान, सुडौल।

उर्दू के उपसर्ग

डॉ० वासुदेवनन्दन प्रसाद कृत ‘आधुनिक हिंदी व्याकरण और रचना’ में कुल ४१ उपसर्गों का विवरण है, जिनमें से १२ उपसर्ग उर्दू के हैं—

  • उर्दू उपसर्ग— अल-, कम-, ख़ुश-, गैर-, दर-, ना-, बद- बर-, बिल-, बे-, ला-, हम- = कुल १२ उपसर्ग।
  • उर्दू के गौण या फुटकर उपसर्ग— ऐन-, फ़ी- (फी-), ब-, बा-, बिला-, सर-, हर- आदि।

अल- (अरबी)

  • अर्थ— निश्चित
  • शब्द— अलगरज, अलबत्ता, अलबेला, अलविदा, अलमस्त, अलहदा।

ऐन- (अरबी)

  • अर्थ— ठीक, पूरा
  • शब्द— ऐन-आदमी, ऐन-इनायत, ऐन-वक्त, ऐन-हिकमत।

कम- (फ़ारसी)

  • अर्थ— थोड़ा, बुरा या हीन, न्यूनता बोधक 
  • शब्द— कम-अक्ल, कम-असल, कम-उम्र, कम-कीमत, कम-खयाल, कमखर्च, कमज़ोर, कमनसीब, कमबख्त, कमसमझ, कमसिन, कमहिम्मत इत्यादि।

खुश- (फ़ारसी)

  • अच्छा— शुभ, अच्छा, प्रसन्न
  • शब्द— खुश-आवाज, खुशकलम, खुशकिस्मत, खुशखत, खुशखबरी, खुशगवार, खुशदिल, खुशनवीस, खुशनसीब, खुशनुमा, खुशफ़हमी, खुशबू, खुशमिजाज, खुशहाल, खुशामद आदि।

गैर- (फ़ारसी) 

  • अर्थ— दूसरा, भिन्न, पराया, विरुद्ध, न, विपरीत, नहीं
  • शब्द— गैर-आबाद, गैर-इंसाफ़ी, गैर-इलाही, गैर-ईमानदारी, गैर-कांग्रेसी, गैर-कानूनी, गैर-जरूरी, गैर-जवाबी, गैर-जिम्मेदार, गैर-जिम्मेवार, गैर-तजुर्बेकार, गैर-मनकूला, गैर-मर्द, गैर-मशहूर, गैर-मामूली, गैर-मुनासिब, गैर-मुमकिन, गैर-मुल्की, गैर-वाजिब, गैर-सरकारी, गैर-हाजिर, गैर-हिन्दी-भाषी, गैर-हुनरमंद आदि।

दर-

  • अर्थ— में, अंदर
  • शब्द— दर-असल, दरकार, दरकारी, दरकिनार, दरकूच, दरख्वास्त, दरपरदा, दरपेश, दरबार, दरमाहा, दरमियान, दरवेश, दरहकीकत।

ना- (फारसी)

  • अर्थ— नहीं, निषेध, बिना
  • शब्द— ना-इत्तिफ़ाकी, ना-इनसाफ़, ना-उम्मीद, ना-उम्मेदी (ना-उम्मीदी), नाकदर, नाक़बूल, नाकाबिल, नाकाफ़ी, नाकाम, नाकामयाब, नाकारा, नाखुश, नागवार, नाचीज, नाजायज़, नाजिम्मेदार, ना-तमाम, नातवाँ (ना-तवान), नाताकत, नादान, नादार, नादिहंदी, नापसंद, नापाक, नापायदार, नापास, नापैद, नाफ़रमानी, नाबालिग, नाबूद, नामंजूर, नामर्द, नामाकूल, नामालूम, नामुनासिब, नामुमकिन, नामुराद, नामुलायम, नामुवाफिक (नामुआफिक), नामेहरबान, ना-मौजूदगी, नायाब, नाराज, नालायक, नावक्त, नावाकिफ़, नावाजिब, नाशाद, नाशुक्र, नासमझ, नासाज़, नाहक इत्यादि।  

फी- / फ़ी- (अरबी)

  • अर्थ— प्रत्येक
  • शब्द— फ़ी-आदमी, फ़ी-कस, फ़ी-जमाना, फ़ी-दिन (प्रतिदिन), फ़ी-फैशन, फ़ी-मन, फ़ी-मैदान, फ़ी-रुपया, फ़ी-सदी, फ़ी-सैकड़ा आदि।

ब- (फारसी)

अर्थ— से, के साथ, के अनुसार

ब-आसानी, बकौल, बख़ुद, ब-खुशी, बखूबी, बखैर, बगैर, ब-जरिआ, ब-तारीख, बदस्त, बदस्तूर, ब-दिक्कत, ब-दिल, ब-दौलत, बनाम, बनिस्बत, बमुकाबला, बमुश्किल, ब-वक्त, बशर्ते, ब-सबब, ब-सूरत, ब-हुक्म, बहैसियत आदि।

बद- (फ़ारसी)

  • अर्थ— खराब, बुरा
  • शब्द— बद-अंदेश, बद-अमनी, बद-अमली, बद-असल, बद-इंतज़ामी, बद-उसूल, बदकार, बदकिस्मत, बदखत, बदख्वाह, बदगुमान, बदचलन, बदज़बान, बदज़ात, बदज़ायका, बदतमीज़, बदतर, बदतहज़ीब, बददयानत, बददिमाग, बददुआ (बद्दुआ), बदनज़र, बदनसल, बदनसीब, बदनाम, बदनीयत, बदपरहेज, बदफैली, बदबख्त, बदबू, बदमजगी, बदमज़ा, बदमस्त, बदमाश, बदमिज़ाज, बदरंग, बदराह, बदलगाम, बदलिहाज़, बदशकल (बदशक्ल), बदशऊर, बदशगुन (बदशगून), बदसलूकी, बदसूरत, बदहज़मी, बदहवास, बदहाल आदि। 

बर-

  • अर्थ— ऊपर, पर, बाहर
  • शब्द— बरकरार, बरखास्त, बरखिलाफ, बरज़बान, बरतर, बरतरफ, बरदाश्त, बरबाद, बरवक्त, बरामद, बरामदा।

बा- (फारसी)

  • अर्थ— से, के साथ, के अनुसार
  • शब्द— बा-अदब, बा-असर, बा-आराम, बा-इज्जत, बा-ईमान, बा-कायदा, बा-खबर, बा-ज़ाब्ता, बा-दिक्कत, बा-मजा, बा-मुराद, बा-मुहावरा, बा-वजूद, बावफा, बा-शऊर, बा-शौक आदि।

बिल- (फ़ारसी)

  • अर्थ— के साथ
  • शब्द— बिल-आखिर, बिल-इरादा, बिल-ऐलान, बिलकुल, बिल-जब्र, बिल-फ़र्ज, बिल-मुक्ता, बिलयकीन, बिलवास्ता आदि।

बिला- (फारसी)

  • अर्थ— बिना, बगैर (‘बिल-’ का उलटा)
  • शब्द— बिला-इरादा, बिला-कुसूर, बिला-कानून, बिला-जमानत, बिला-तकल्लुफ, बिला-दिक्कत, बिला-नागा, बिला-परदा, बिला-वजह, बिला-शक, बिला-शर्त, बिला-सबब आदि।  

बे- (फारसी)

  • अर्थ— बिना, रहित, बगैर
  • शब्द— बे-अकल (बे-अक्ल), बे-अदब, बे-असर, बे-आबरू, बे-इंतिहा (बे-इंतहा), बे-इंसाफ़, बे-इख़्तियार, बे-इज़्ज़त, बे-इज़्ज़ती, बे-इत्तफ़ाक़ी, बे-इल्म, बे-ईमान, बे-उसूल, बे-एतबार, बे-औलाद, बे-कदर (बे-कद्र), बे-करार, बे-कल, बे-कस, बे-कसूर (बे-कुसूर), बे-काज, बे-कानूनी, बे-काबू, बे-काम, बे-कायदा, बे-कार, बे-कीमत, बे-कुसूर, बे-खटके, बे-खबर, बे-खुदी, बे-खौफ, बे-गम, बे-गरज़, बेगाना, बेगार, बेगुनाह, बे-गैरत, बेघर, बेचारा, बेचैन, बेज़बान, बे-जमीन, बे-जला, बेज़ा, बेज़ान, बेज़ाता, बेजार, बे-जुर्म, बे-जून, बेजोड़, बेडौल, बेढंगा, बेढब, बे-तकल्लुफ़, बे-तमीज़, बे-तरतीब, बे-तरह, बेतहाशा, बेताज, बेताब, बेतार, बेतुका, बेदखल, बेदम, बे-दर्द, बेदाग, बे-धड़क, बेधर्म, बेनकाब, बेनजीर, बेनाम, बेपनाह, बेपरदगी, बेपरदा, बेपरवा, बेफायदा, बेफ़िक्र, बेबस, बे-बुनियाद, बेमन, बे-मिसाल, बे-मुरव्वत, बेमेल, बेमौके, बेमौत, बेमौसम, बेरहम, बेरुखी, बे-रोक-टोक, बे-रोजगार, बेरोजगारी, बेलगाम, बेलज्जत, बेलाग, बे-लाग-लपेट, बे-लिहाज़, बेलौस, बेवकूफ़, बेवक्त, बेवजह, बेवफ़ा, बेशऊर, बेशक, बेशरम, बेशुमार, बे-सबब, बे-सब्र, बेसब्री, बेसमझ, बेसहारा, बे-सिर-पैर, बेसुध, बे-सुरा, बे-स्वाद, बेहद, बेहया, बेहाल, बेहिसाब, बेहूदा, बेहोश आदि।

ला-      

  • अर्थ— अभाव, नहीं, बिना।  
  • शब्द— ला-इलाज, लाचार, ला-जवाब, लाजिम, लापता, लापरवाह, ला-मकान, लावल्द, लावारिस।

सर- (फ़ारसी)

  • अर्थ— श्रेष्ठ, मुख्य
  • शब्द— सर-अंजाम (सरंजाम), सरकश, सरकार, सरख़त, सरगना, सरगिरोह, सरगर्म, सरगर्मी, सरगोशी, सरज़मीन, सरज़ोर, सरताज, सरदर्द (सिरदर्द), सरदार, सरनामा, सरपंच, सरपरस्त, सरफ़राज़, सरफ़रोश, सरफिरा, सरबसर, सरबराह, सरबुलंद, सरसब्ज, सरहद, सरहदबंदी आदि।

हम- (फ़ारसी)

  • अर्थ— साथ रहने वाला, एक-सा, बराबर
  • शब्द— हम-उम्र, हम-कदम, हम-कलाम, हम-कौम, हम-खयाल (हम-ख्याल), हम-खानदान, हम-चश्म, हम-जबान, हम-जमात, हम-जात, हम-जाद, हमजोली, हमदम, हम-दर्द, हम-दर्दी, हम-नसल, हम-नाम, हम-निवाला, हम-पेशा, हम-बिस्तर, हम-मकतब, हम-मज़हब, हम-मानी, हम-रकाब, हमराज, हम-राह, हम-वज़न, हम-वतन, हम-शक्ल (हम-शकल), हम-शहरी, हम-सफ़र, हम-साया आदि।

हर- (फ़ारसी)

  • अर्थ— प्रत्येक, एक-एक
  • शब्द— हर-आदमी, हर-एक, हर-काम, हर-कोई, हर-घड़ी, हर-तरफ, हर-तरह, हर-दिन, हर-फ़न-मौला, हर-बार, हर-माह, हर-रोज़, हर-दम, हर-समय, हर-हालत-में आदि।

अँग्रेजी के उपसर्ग

भाषा के विकास के साथ-साथ अन्यान्य भाषाओं से सम्पर्क होते हैं। इस क्रम में मध्यकाल में अरबी-फारसी से सम्पर्क हुआ और उर्दू के उपसर्ग हिन्दी भाषा के अंग बने। आधुनिक काल में आँग्ल भाषा से सम्पर्क होने पर कुछ अँग्रेजी उपसर्ग भी हिन्दी के अंग हो चले हैं।

अँग्रेजी के उपसर्ग
क्र० सं०उपसर्गअर्थशब्द
 १.एक्स-पूर्वएक्स-चेयरमैन, एक्स-प्राइम मिनिस्टर, एक्स-सर्विसमैन।
 २.को-सहको-ऑपरेटिव, को-ऑपरेशन
 ३.वाइस-सहायकवायसराय, वाइस-चांसलर, वाइस-चेयरमैन, वाइस-प्रेसीडेंट।
 ४.सब-उप, अधीनसब-कमेटी, सब-जज, सब-इंस्पेक्टर, सब-डिवीजन, सब-रजिस्ट्रार।
 ५.डबल-दोगुना, दोहराडबल-खुराक, डबल-रोटी
 ६.डिप्टी-सहायकडिप्टी-मिनिस्टर, डिप्टी-कमिश्नर, डिप्टी-एस०पी०, डिप्टी-कलेक्टर, डिप्टी-रजिस्ट्रार।
 ७.जनरल-प्रधानजनरल-सेक्रेटरी, जनरल-मैनेजर।
 ८.चीफ़-प्रमुखचीफ-मिनिस्टर, चीफ-सेक्रेटरी, चीफ-इंजीनियर।
 ९.हाफ-आधाहाफ-कमीज, हाफ-पैंट, हाफ-शर्ट
 १०.हेड-मुखहेडमास्टर, हेडक्लर्क।

संस्कृत के संयुक्त उपसर्ग

संस्कृत में बहुत से शब्द हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं, जिनमें एक से अधिक उपसर्ग जुड़े होते हैं और अर्थ में बल, वैशिष्ट्य या परिवर्तन आ जाता है। उदाहरण—

  • अंतर्निहित (अंतः + नि + हित)
  • अपरिचित (अ + परि + चित)
  • अव्यय (अ + वि + अय)
  • असंगति (अ + सम् + गति)
  • अतिव्याप्ति (अति + वि + आप्ति)
  • अत्याचार (अति + आ + चार)
  • अत्याछादन (अति + आ + छादन)
  • अध्यादेश (अधि + आ + देश)
  • अध्यापक (अधि + आ + पक)
  • अध्यारोपण (अधि + आ + रोपण)
  • अनधिकार (अन् + अधि + कार)
  • अनधिगत (अन् + अधि + गत)
  • अनध्याय (अन् + अधि + आय)
  • अननिवार्य (अन् + अ + निवार्य)
  • अनपत्य (अन् + अ + पत्य)
  • अनपेक्षित (अन् + अप + ईक्षित)
  • अनभिज्ञ (अन् + अभि + ज्ञ)
  • अनभ्यस्त (अन् + अभि + अस्त)
  • अनलंकृत (अन् + अलम् + कृत)
  • अनवधान (अन् + अव + धान)
  • अनाचरण (अन् + आ + चरण)
  • अनादर (अन् + आ + दर)
  • अनापत्ति (अन् + आ + पत्ति)
  • अनावरण (अन् + आ + वरण)
  • अनावश्यक (अन् + आ + वश्यक)
  • अनुपस्थित (अनु + उप + स्थित)
  • अनूदित (अनु + उद् + इत)
  • अपाकरण (अप + आ + करण)
  • अपादान (अप + आ + दान)
  • अप्रकाशित (अ + प्र + काश + इत)
  • अप्रत्यक्ष (अ + प्रति + अक्ष)
  • अप्रौढ़ (अ + प्र + ऊढ़)
  • अभ्यागत (अभि + आ + गत)
  • अभ्युत्थान (अभि + उत् + स्थान)
  • अभ्युदय (अभि + उत् + अय)
  • इतिहासाश्रित (इति + हास + आ + श्रित)
  • उत्प्रवास (उत् + प्र + वास)
  • उपनिर्वाचन (उप + निः + वाचन)
  • उपनिवेश (उप + नि + वेश)
  • उपनिषद् (उप + नि + सद्)
  • उपन्यास (उप + नि + आस)
  • उपादान (उप + आ + दान)
  • उपाध्यक्ष (उप + अधि + अक्ष)
  • उपायुक्त (उप + आ + युक्त)
  • चिरपरिचित (चिर + परि + चित)
  • चिरप्रतीक्षित (चिर + प्रति + ईक्षित)
  • तदनुसार (तत् + अनु + सार)
  • तदाकार (तत् + आ + कार)
  • दुरभिसंधि (दुः + अभि + सम् + धि)
  • दुराग्रह (दुः + आ + ग्रह)
  • दुरुत्साहन (दुः + उत् + साहन)
  • दुरुपयोग (दुः + उप + योग)
  • दुर्व्यवहार (दुः + वि + अव + हार)
  • दुष्परिणाम (दुः + परि + नाम)
  • दुष्प्रभाव (दुः + प्र + भाव)
  • दुष्प्रयोग (दुः + प्र + योग)
  • दुष्प्रहार (दुः + प्र + हार)
  • दुष्प्राप्य (दुः + प्र + अप्य)
  • निरतिशय (निः + अति + शय)
  • निरनुनासिक (निः + अनु + नासिक)
  • निरनुरोध (निः + अनु + रोध)
  • निरभिमान (निः + अभि + मान)
  • निरभिलाष (निः + अभि + लाष)
  • निरवलंब (निः + अव + लंब)
  • निराकरण (निः + आ + करण)
  • निरादर (निः + आ + दर)
  • निरापद (निः + आ + पद)
  • निरामिष (निः + आ + मिष)
  • निरालंब (निः + आ + लंब)
  • निरावरण (निः + आ + वरण)
  • निराश्रय (निः + आ + श्रय)
  • निरुत्साह (निः + उत् + साह)
  • निर्निमेष (निः + नि + मेष)
  • निर्विरोध (निः + वि + रोध)
  • निष्प्रभ (निः + प्र + भ)
  • निस्संकोच (निः + सम् + कोच)
  • निस्संदेह (निः + सम् + देह)
  • निस्स्वार्थ (निः + स्व + अर्थ)
  • परिसंवाद (परि + सम् + वाद)
  • परिसमाप्ति (परि + सम् + आप्ति)
  • पर्यवसान (परि + अव + सान)
  • पर्यवेक्षण (परि + अव + ईक्षण)
  • पर्यावरण (परि + आ + वरण)
  • पुनरागमन (पुनः + आ + गमन)
  • पुनरावृत्ति (पुनः + आ + वृत्ति)
  • पुनरुज्जीवित (पुनः + उत् + जीवित)
  • पुनरुत्थान (पुनः + उत् + स्थान)
  • पुनरुद्धार (पुनः + उत् + हार)
  • पुनर्निर्माण (पुनः + निः + मान)
  • पुनर्प्रेषण (पुनः + प्र + ईषण)
  • पुरावतंश (पुरा + अव + तंश)
  • पुरावशेष (पुरा + अव + शेष)
  • पूर्वोदाहरण (पूर्व + उत् + आ + ह + रन)
  • प्रत्याक्रमण (प्रति + आ + क्रमण)
  • प्रत्यागमन (प्रति + आ + गमन)
  • प्रत्यालोचना (प्रति + आ + लोचना)
  • प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार)
  • प्राचार्य (प्र + आ + चार्य)
  • प्राध्यापक (प्र + अधि + आ + पक)
  • प्रारब्ध (प्र + आ + रब्ध)
  • प्रोज्ज्वल (प्र + उत् + ज्वल)
  • प्रतिनियुक्त (प्रति + नि + युक्त)
  • प्रत्यपकार (प्रति + अप + कार)
  • प्रत्याघात (प्रति + आ + घात)
  • प्रत्यावर्तन (प्रति + आ + वर्तन)
  • प्रत्युत्तर (प्रति + उत् + तर)
  • प्रत्युत्पन्न (प्रति + उत् + पन्न)
  • प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार)
  • विनियंत्रण (वि + नि + यंत्रण)
  • विनिर्दिष्ट (वि + निः + दिष्ट)
  • विप्रयोग (वि + प्रयोग)
  • विप्रलंभ (वि + प्र + लंभ)
  • व्यतिरेक (वि + अति + रेक)
  • व्यभिचार (वि + अभि + चार)
  • व्यवसाय (वि + अव + साय)
  • व्याकरण (वि + आ + करण)
  • व्याकुल (वि + आ + कुल)
  • साकार (स + आ + कार)
  • सादर (स + आ + दर)
  • सावधान (स + अव + धान)
  • साष्टांग (स + अष्ट + अंग)
  • सोत्साह (स + उत् + साह)
  • सोदाहरण (स + उत् + आ + ह + रन)
  • सोल्लास (स + उत् + लास)
  • समाख्या (सम् + आ + ख्या)
  • समादर (सम् + आ + दर)
  • समाधान (सम् + आ + धान)
  • समारंभ (सम् + आ + रंभ)
  • समालोचना (सम् + आ + लोचना)
  • समाविष्ट (सम् + आ + विष्ट)
  • समाहरण (सम् + आ + हरण)
  • सम्प्रदान (सम् + प्र + दान)
  • समुज्ज्वल (सम् + उत्  + ज्वल)
  • सम्प्रेषण (सम् + प्र + ईषण)
  • सहानुभूति (सह + अनु + भूति)
  • सुव्यवस्थित (सु + वि + अव + स्थित)
  • स्वागत (सु + आ + गत)
  • स्वाधीन (स्व + अधि + इन)

सन्धि

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