उपसर्ग | UPPSC Mains | PYQs

2024

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्गों का निर्देश कीजिए।

दुष्प्राप्य, अध्यात्म, अभ्युदय, स्वागत, प्रत्यक्ष।

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
दुष्प्राप्यदुः + प्राप्यदुः
अध्यात्मअधि + आत्मअधि
अभ्युदयअभि + उदयअभि
स्वागतसु + आ + गतसु, आ
प्रत्यक्षप्रति + अक्षप्रति

2023

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्गों का निर्देश कीजिए।

पर्यटन, प्रतीक्षा, अन्वेषण, निरूपण, अध्यक्ष

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
पर्यटनपरि + अटनपरि
प्रतीक्षाप्रति + ईक्षाप्रति
अन्वेषणअनु + एषणअनु
निरूपणनि + रूपण  नि
अध्यक्षअधि + अक्षअधि

2022

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्गों का निर्देश कीजिए।

उद्ग्रीव, दुर्दशा, निमीलित, निश्चल, अत्यंत

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
उद्‌ग्रीवउत् + ग्रीवाउत्
दुर्दशादुः + दशादुः (दुर्)
निमीलितनि + मीलितनि
निश्चलनिः + चलनिः (निश्)
अत्यंतअति + अंतअति 

2021

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्गों का निर्देश कीजिए।

उपासना, दुस्साध्य, निमीलित, सुपुत्र, अपस्मार

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
उपासनाउप + आसनउप
दुस्साध्यदुः + साध्यदुः (दुस्)
निमीलितनि + मीलितनि
सुपुत्रसु + पुत्रसु
अपस्मारअप + स्मार (स्मृ)अप 

2020

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्गों का निर्देश कीजिए।

अपव्यय, निष्काम, उन्नयन, संशय, स्वच्छ

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
अपव्ययअप + व्ययअप
निष्कामनिः + कामनिः (निष्)
उन्नयनउत् + नयनउत्
संशयसम् + शयसम्
स्वच्छसु + अच्छसु 

2019

निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्गों का निर्देश कीजिए।

संगोष्ठी, प्रत्यक्ष, पराक्रम, निर्वसन, निस्संदेह।

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
संगोष्ठीसम् + गोष्ठीसम्
प्रत्यक्षप्रति + अक्षप्रति
पराक्रमपरा + क्रमपरा
निर्वसननिः + वसननिः (निर्)
निस्संदेहनिः + सम् + देहनिः (निस्), सम्

2018

निम्नलिखित उपसर्गों / प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :

अधि, परि, भर, अठ, नि, खुश, इक, आइन, आई, अक्कड़

उत्तर—

यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम उपसर्ग का संग्रह कर रहे हैं तो केवल उपसर्ग पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। प्रत्यय का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— अधि, परि, नि, खुश

प्रत्यय— अठ, इक, आइन, आई, अक्कड़

भर— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— भरपेट (भर + पेट), रातभर (रात + भर)।

उपसर्गनिर्मित शब्द
अधिअधिकर
परिपरिभ्रमण
भरभरपूर
निनिकर्षण
खुश खुशकिस्मत

2017

निम्नलिखित उपसर्गों / प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :

वि, उत्, दु, अप, निर्, इतर, आलु, नी, घ्न, प्र

उत्तर—

यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम उपसर्ग का संग्रह कर रहे हैं तो केवल उपसर्ग पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। प्रत्यय का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— वि, उत्, दु, अप, निर्

प्रत्यय— इतर, आलु, नी, घ्न

प्र— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— प्रक्रिया (प्र + क्रिया), विप्र (वि + प्र)।

उपसर्गनिर्मित शब्द
विविकिरण
उत्उत्सर्ग
दुदुकाल
अप अपकीर्ति
निर् निराहार

2017 (निरस्त पेपर)

निम्नलिखित उपसर्गों / प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :

अक, मान, इम, चित्, इया, परा, अपि, सम्, दुर्, अध

उत्तर—

यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम उपसर्ग का संग्रह कर रहे हैं तो केवल उपसर्ग पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। प्रत्यय का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— परा, सम्, दुर्, अध  

प्रत्यय— अक, मान, इम, चित्, इया

अपि— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— अपिगीर्ण (अपि + गीर्ण), अद्यापि (अद्य + अपि)।

उपसर्गनिर्मित शब्द
परापराकाष्ठा
सम्संकर्षण 
दुर्दुर्वचन
अधअधकचरा
अपिअपिधान

2016

निम्नलिखित उपसर्गों और प्रत्ययों से एक-एक शब्द की रचना कीजिए :

परि, दुस्, आ, भर, सु, आइन, इक, एरा, वाँ, हरा

उत्तर—

यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है। यहाँ हम उपसर्ग का संग्रह कर रहे हैं तो केवल उपसर्ग पहचानकर उससे शब्द निर्मित करेंगे। प्रत्यय का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— परि, दुस्, आ, भर, सु

प्रत्यय— आइन, इक, एरा, वाँ, हरा

भर— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— भरपेट (भर + पेट), रातभर (रात + भर)।

उपसर्गनिर्मित शब्द
परिपरिणय
दुस् दुस्साहस
आजन्म
भरभरपेट
सुसुजान

2015

निम्नलिखित शब्दों से उपसर्गों और प्रत्ययों को अलग कीजिए :

अध्यादेश, विख्यात, अभ्यास, अत्युत्तम, सुजन, त्यागी, परीक्षक, सरलता, पत्रकार, शिष्य।

उत्तर—

यहाँ पर दिये गये शब्दों में से उपसर्ग और प्रत्यय निर्मित शब्दों को पृथक करना है। यहाँ हम उपसर्ग का संग्रह कर रहे हैं तो केवल उपसर्ग निर्मित शब्दों को पहचानकर उनका संग्रह करेंगे। प्रत्यय-निर्मित शब्दों का संग्रह अलग से करेंगे।

उपसर्ग— अध्यादेश, विख्यात, अभ्यास, अत्युत्तम, सुजन।

प्रत्यय— त्यागी, परीक्षक, सरलता, पत्रकार, शिष्य।

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
अध्यादेशअधि + आदेश (आ + देश)अधि, आ
विख्यातवि + ख्यातवि
अभ्यासअभि + आसअभि
अत्युत्तमअति + उत्तम (उत् + तम)अति, उत्  
सुजनसु + जनसु

2014

निम्नलिखित शब्दों से उपसर्गों को अलग कीजिए :

अनुकृति, उपद्रव, निरभिमान, अधखिला, कमजोर।

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
अनुकृतिअनु + कृतिअनु
उपद्रवउप + द्रवउप
निरभिमाननिः + अभिमान (अभि + मान)निर् (निः), अभि
अधखिलाअध + खिलाअध
कमजोरकम + जोरकम

2013

नीचे दिये शब्दों में उपसर्ग और मूल शब्द को अलग कीजिए :

अनोखा, उनींदा, औघड़, निकम्मा, कुढब

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
अनोखाअ + नोखा
उनींदाउ + नींद
औघड़औ + घड़
निकम्मानि + कामनि
कुढबकु + ढबकु

2012

निम्नलिखित शब्दों में ‘उपसर्ग’ और मूल शब्द को अलग-अलग छाँटिये :

अनुज, अधर्म, निमीलित, दुर्गम, उदण्ड

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
अनुजअनु + जअनु
अधर्मअ + धर्म
निमीलितनि + मीलितनि
दुर्गमदुः + गमदुः (दुर्)
उदण्डउत् + दण्डउत् (उद्)

2011

निम्नलिखित शब्दों के ‘उपसर्ग’ और मूल शब्द को पृथक-पृथक लिखिए :

कुसंगति, अनधिकार, दुर्जन, व्यर्थ, अत्युत्कट।

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
कुसंगतिकु + संगति (सम् + गति)कु
अनधिकारअन् + अधिकार (अधि + कार)अन्
दुर्जनदुः + जनदुः (दुर्)
व्यर्थवि + अर्थवि
अत्युत्कटअति + उत्कटअति

2010

निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग और मूल शब्द को अलग-अलग छाँटिये :

उनसठ, दुबला, निकम्मा, लाचार, नादान।

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
उनसठउन + साठउन
दुबलादु + बलदु
निकम्मानि + कामनि
लाचारला + चारला
नादानना + दानना

2009

निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग और मूल शब्द को पृथक्-पृथक् दर्शाइए :

समालोचना, सुसंगठित, अभिमुख, अभियान, अत्याचार।

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
समालोचनासम् + आलोचना (आ + लोचना)सम्
सुसंगठितसु + संगठित (सम् + गठित)सु
अभिमुखअभि + मुखअभि
अभियानअभि + यानअभि
अत्याचारअति + आचार (आ + चार)अति

2008

निम्नलिखित शब्दों में से पाँच उपसर्ग छाँटिए :

(i)प्रख्यात(ii)अत्यधिक
(iii)प्रत्युपकार(iv)विस्मरण
(v)अनुज(vi)अधिष्ठाता
(vii)कुपात्र(viii)बदकिस्मत

उत्तर—

क्र॰ स॰शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
(i)प्रख्यातप्र + ख्यातप्र
(ii)अत्यधिकअति + अधिकअति
(iii)प्रत्युपकारप्रति + उप + कारप्रति, उप
(iv)विस्मरणवि + स्मरणवि
(v)अनुजअनु + जअनु
(vi)अधिष्ठाताअधि + स्थाताअधि
(vii)कुपात्रकु + पात्रकु
(viii)बदकिस्मतबद + किस्मतबद

2007

उपसर्ग की परिभाषा देते हुए पाँच भिन्न-भिन्न उपसर्गों का प्रयोग करते हुए पाँच शब्द बनाइए :

उत्तर—

परिभाषा : “उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।” ये शब्दांश स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं।

पाँच उदाहरण : संस्कृत के ‘हृ’ (ले जाना) धातु से हार शब्द बनता है। हार से पूर्व प्र-, परि-, आ-, वि- और सम्- जोड़कर अधोलिखित पाँच शब्द निर्मित होते हैं।

क्र॰ स॰उपसर्ग + शब्दनिर्मित शब्द
1.प्र + हारप्रहार
2.परि + हारपरिहार
3.आ + हारआहार
4.वि + हारविहार
5.सम् + हारसंहार

2006

उपसर्ग को परिभाषित करते हुए दस उपसर्गों से बने किन्हीं दस सार्थक शब्दों का उल्लेख कीजिये।

उत्तर—

परिभाषा : “उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।” ये शब्दांश स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं।

दस उदाहरण :

क्र॰ स॰उपसर्ग + शब्दनिर्मित शब्द
1.आ + जानुआजानु
2.परि + भ्रमणपरिभ्रमण
3.प्र + नयनप्रणयन
4.प्रति + आशाप्रत्याशा
5.प्राक् + वैदिकप्राग्वैदिक
6.बहिः + ज्ञानबहिर्ज्ञान
7.वि + तृष्णावितृष्णा
8.सम् + ख्यासंख्या
9.सह + धर्मिणीसहधर्मिणी
10.सु + अस्तिस्वस्ति

2005

टिप्पणी— प्रत्यय सम्बन्धित प्रश्न आया था।

2004 (विशेष चयन)

उपसर्ग और प्रत्यय का अन्तर स्पष्ट कीजिये और दोनों के चार-चार उदाहरण देकर उनसे शब्द बनाइये।

उत्तर—

उपसर्ग और प्रत्यय : अन्तर

उपसर्गप्रत्यय
उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।प्रत्यय कुछ ऐसे शब्दांश है जो किसी मूल शब्द या धातु के बाद लगकर नये शब्दों का निर्माण करते हैं।
उपसर्ग स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं।प्रत्यय स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु शब्द के बाद जुड़कर नये शब्दों का निर्माण करते हैं।
अविकारी शब्दांश होते हैं।अविकारी शब्दांश है।
उपसर्ग शब्दों के पूर्व में जुड़कर शब्द में नई विशेषता या अर्थ प्रकट करता है और कभी-कभी शब्द के व्याकरणिक कोटि में भी परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— प्र + हार = प्रहार (नई विशेषता); निः + स्वार्थ (संज्ञा) = निःस्वार्थ (विशेषण)।प्रत्यय शब्दों के बाद में जुड़कर शब्द के व्याकरणिक रूप और अर्थ में परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— कृ (क्रिया) + तव्य = कर्त्तव्य (संज्ञा)। 
शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।
ये भाषा के आधार के पर तीन प्रकार के हैं— संस्कृत, हिन्दी और उर्दू के उपसर्ग।ये शब्द रचना की प्रकृति के आधार पर दो प्रकार के हैं— कृत और तद्धित प्रत्यय।
उदाहरण—उदाहरण—
उपसर्गशब्दप्रत्ययशब्द
अतिअत्युक्तिवाला (कृत)गानेवाला (गाना + वाला)
अधःअधोगमनअन (कृत)नयन (नी + अन)
अनुअन्वेषणता (तद्धित)मानवता
अवअवमूल्यनपन (तद्धित)अपनापन

2004

शब्द-निर्माण में उपसर्ग का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।

निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग अलग कीजिए :

स्थूल, आर्द्र, अल्पज्ञ, विशेष, ज्येष्ठ, अतिवृष्टि, वक्र, सापेक्ष, ह्रास, अनघ, उन्नति, दुराचारी, कृतघ्न, निश्चित।

उत्तर—

शब्द-निर्माण में उपसर्ग का महत्त्व

  • मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ भाषा का भी विकास होता है। नये-नये आयामों को अभिव्यक्त करने के लिए भाषा में नये-नये शब्दों के निर्माण की आवश्यकता होती है। इन शब्दों के निर्माण के लिए ही उपसर्ग, प्रत्यय और समास का प्रयोग होता है।
  • जिस भाषा में नवीन शब्दों के निर्माण की जितनी क्षमता होगी वह भाषा उतनी ही समृद्ध होगी।
  • शब्द-निर्माण में उपसर्ग महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। नवीन शब्दों के निर्माण के लिए हिन्दी भाषा संस्कृत उपसर्गों का प्रयोग तो करती ही है, साथ ही उसके कुछ अपने उपसर्ग भी हैं जो तद्भव रूप हैं। हिन्दी भाषा ने अपने को समृद्ध बनाने के लिए उर्दू भाषा के उपसर्ग ग्रहण किये गये हैं और यहाँ तक आँग्ल भाषा के भी उपसर्ग भी समाहित किये गये हैं।
  • इस तरह उपसर्ग भाषा की अभिव्यक्ति को नये-नये शब्द-निर्माण में सहायता करके उसे समृद्धि बनाता है। 
क्र० सं०शब्दउपसर्ग
 1.स्थूल
 2.आर्द्र
 3.अल्पज्ञ
 4.विशेषवि
 5.ज्येष्ठ
 6.अतिवृष्टिअति
 7.वक्र
 8.सापेक्ष
 9.ह्रास
 10.अनघअन्
 11.उन्नतिउत्
 12.दुराचारीदुः
 13.कृतघ्न
 14.निश्चितनिः

उपर्युक्त शब्दों में स्थूल, आर्द्र, अल्पज्ञ, ज्येष्ठ, वक्र, ह्रास और कृतज्ञ उपसर्ग नहीं अपितु प्रत्यय से निर्मित हैं। इसका विवरण अधोलिखित है—

  • स्थूल = स्थूल् + अच् / अ (प्रत्यय)
  • आर्द्र = आर्द् + रक् / र (प्रत्यय)
  • अल्पज्ञ = अल् + प (प्रत्यय) + ज्ञ (प्रत्यय की तरह व्यवहृत)
  • ज्येष्ठ = वृद्ध + इष्ठन् / इष्ठ
  • वक्र = वंक् / वङ्क् + रन् / र (प्रत्यय)
  • ह्रास = ह्रास् + घञ् / अ (प्रत्यय)
  • कृतघ्न = कृत + घ्न (प्रत्यय)

2003

उपसर्ग के अर्थ को स्पष्ट करते हुए अधोलिखित शब्दों में जुड़े उपसर्ग पृथक् कीजिए :

अत्यधिक, अध्यक्ष, अभ्यास, उल्लास, दुर्जन, दुश्चरित्र, निर्भय, निश्चय, संतोष, संहार।

उत्तर—

शब्दउपसर्ग + शब्दप्रयुक्त उपसर्ग
अत्यधिकअति + अधिकअति
अध्यक्षअधि + अक्षअधि
अभ्यासअभि + आसअभि
उल्लासउत् + लासउत्
दुर्जनदुः + जनदुः (दुर्)
दुश्चरित्रदुः + चरित्रदुः (दुश्)
निर्भयनिः + भयनिः (निर्)
निश्चयनिः + चयनिः (निश्)
संतोषसम् + तोषसम्
संहारसम् + हारसम्

2002

उपसर्ग और प्रत्यय का अन्तर स्पष्ट करके अधोलिखित शब्दों में जुड़े प्रत्यय पृथक् कीजिए :

जड़िया, बोली, खेलाड़ी, कतरनी, गुणवान, गमनीय, लघुतर, पुत्रवत्।

उत्तर—

यहाँ हम उपसर्ग की बात कर रहे हैं, इसलिए उपसर्ग और प्रत्यय में अन्तर को स्पष्ट कर लेते हैं, जबकि प्रत्यय-युक्त शब्द के पृथक्करण को प्रत्यय वाले लेख में करेंगे।

उपसर्ग और प्रत्यय में अन्तर—

उपसर्गप्रत्यय
उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।प्रत्यय कुछ ऐसे शब्दांश है जो किसी मूल शब्द या धातु के बाद लगकर नये शब्दों का निर्माण करते हैं।
उपसर्ग स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं।प्रत्यय स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु शब्द के बाद जुड़कर नये शब्दों का निर्माण करते हैं।
अविकारी शब्दांश होते हैं।अविकारी शब्दांश है।
उपसर्ग शब्दों के पूर्व में जुड़कर शब्द में नई विशेषता या अर्थ प्रकट करता है और कभी-कभी शब्द के व्याकरणिक कोटि में भी परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— प्र + हार = प्रहार (नई विशेषता); निः + स्वार्थ (संज्ञा) = निःस्वार्थ (विशेषण)।प्रत्यय शब्दों के बाद में जुड़कर शब्द के व्याकरणिक रूप और अर्थ में परिवर्तन ला देता है। उदाहरण— कृ (क्रिया) + तव्य = कर्त्तव्य (संज्ञा)। 
शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।शब्द रचना में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।
ये भाषा के आधार के पर तीन प्रकार के हैं— संस्कृत, हिन्दी और उर्दू के उपसर्ग।ये शब्द रचना की प्रकृति के आधार पर दो प्रकार के हैं— कृत और तद्धित प्रत्यय।

2001

उपसर्ग को परिभाषित कीजिए एवं निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग को अलग कीजिए :

उत्तर—

अनुशासन, प्रख्यात, संरक्षण, अधखिला, दुकाल।

परिभाषा— “उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।” ये शब्दांश स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं।

क्र० सं०शब्दउपसर्ग
 1.अनुशासन (अनु + शासन)अनु
 2.प्रख्यात (प्र + ख्यात)प्र
 3.संरक्षण (सम् + रक्षण)सम्
 4.अधखिला (आधा + खिला)अध
 5.दुकाल  (दु + काल)दु

2000

टिप्पणी— प्रत्यय से सम्बन्धित प्रश्न पूछा गया था।

1999

उपसर्ग को परिभाषित करते हुए निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग अलग कीजिए—

अत्युक्ति, निबंध, परिजन, प्रत्युपकार, उनतीस।

उत्तर—

परिभाषा : “उपसर्ग कुछ ऐसे शब्दांश या अव्यय हैं जो किसी पूर्ण शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन ला देते हैं अथवा शब्द का विशेष अर्थ प्रकट करते हैं।” ये शब्दांश स्वयं में सार्थक नहीं होते या स्वतंत्र प्रयुक्त नहीं होते, परन्तु जिस शब्द के पहले जुड़ते हैं उसमें एक विशेषता ला देते हैं।

क्र० सं०शब्दउपसर्ग
 1.अत्युक्ति (अति + उक्ति)अति
 2.निबन्ध (नि + बन्ध)नि
 3.परिजन (परि + जन)परि
 4.प्रत्युपकार (प्रति + उप + कार)प्रति, उप
 5.उनतीस (उन + तीस)उन

1998

शब्द निर्माण में उपसर्ग और प्रत्यय का क्या महत्त्व है? निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग अलग कीजिए :

सदाचार, दुराचार, अध्यक्ष, पराजय, समादर।

उत्तर—

शब्द-निर्माण में उपसर्ग और प्रत्यय का महत्त्व

  • मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ भाषा का भी विकास होता है। नये-नये आयामों को अभिव्यक्त करने के लिए भाषा में नये-नये शब्दों के निर्माण की आवश्यकता होती है। इन शब्दों के निर्माण के लिए ही उपसर्ग, प्रत्यय और समास का प्रयोग होता है।
  • जिस भाषा में नवीन शब्दों के निर्माण की जितनी क्षमता होगी वह भाषा उतनी ही समृद्ध होगी।
  • शब्दों के निर्माण की दो विधियाँ है—
    • एक, शब्दांशों से— इसमें उपसर्ग और प्रत्यय आते हैं।
    • दो, शब्दों से— इसमें समास आता है।
  • उपसर्ग और प्रत्यय दोनों अविकारी शब्दांश है।
  • उपसर्ग मूल शब्दों के पूर्व लगकर नये-नये शब्दों का निर्माण करता है।
  • प्रत्यय धातु या शब्दों के बाद जुड़कर नये-नये शब्दों का निर्माण करता है।
  • इस तरह उपसर्ग और प्रत्यय दोनों भाषा की अभिव्यक्ति को नये-नये शब्द-निर्माण में सहायता करके उसे समृद्धि बनाते हैं। 
क्र० सं०शब्दउपसर्ग
 1.सदाचार (सत् + आ + चार)सत्, आ
 2.दुराचार (दुः + आ + चार)दुः (दुर्), आ
 3.अध्यक्ष (अधि + अक्ष)अधि
 4.पराजय (परा + जय)परा
 5.समादर (सम् + आ + दर)सम्, आ

टिप्पणी

1997, 1996, 1995, 1994, 1993, 1992, 1991 और 1990 के प्रश्न-पत्रों में उपसर्ग-प्रत्यय सम्बन्धित प्रश्न नहीं पूछे गये थे।


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