तार लेखन ( Telegram Writing )

👤 By Pinwas IAS📅 8 September 2023⏱ 1 min read
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भूमिका

तार ( Telegram ) एक शीघ्रगामी व्यवस्था थी। इसे किसी आवश्यक विषय या प्रकरण पर भेजा जाता था। इसका उपयोग किसी कार्य की अनिवार्यता और सामान्य पत्र के लिये समय न होने की स्थिति में किया जाता था। इसके माध्यम से संक्षिप्त किन्तु स्पष्ट संदेश भेजा जाता था।

  • तार सेवा का प्रारम्भ 5 नवंबर, 1850 (कलकत्ता – डायमंड हार्बर)
  • टेलीग्राम सर्विस की समाप्ति 14 जुलाई, 2013

तार-सेवा का समापन

  • साल 2013 में 14 जुलाई को टेलीग्राम सर्विस यानी भारतीय-तार-सेवा की पारी समाप्त हो गयी।
  • साल 1850 में कोलकाता और डायमंड हार्बर के बीच टेलीग्राम सेवा शुरू हुई, जिसे ईस्ट इंडिया कंपनी प्रयोग करती थी। 1854 में यह जन-सामान्य के लिये शुरू हुई।
  • एक वक्त लाखों करोड़ों लोगों के लिये ये संदेसा पहुचाने का सबसे तीव्रगामी माध्यम होता था।
  • सस्ती फोन कॉल और ईमेल के दौर में टेलीग्राम सेवा ने अपनी अहमियत खो दी।
  • टेलीग्राम सर्विस के आखिरी दिन 2,000 मैसेज बुक किये गये।
  • अंतिम टेलीग्राम अश्विनी मिश्र ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भेजा था।
  • 75 लाख रुपये की सालाना कमायी करने वाली ये सेवा चलाने पर 100 करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे।

तार भेजते समय आवश्यक ध्यातव्य बातें

  1. भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए।
  2. समाचार या संदेश संक्षिप्त होना चाहिए।
  3. टेलीग्राम-फार्म पर पहले यह संकेत दिया जाता है कि यह तार वरीयता की दृष्टि से निम्न है – साधारण, द्रुतगामी।
  4. इसकी प्रतिलिपि सुरक्षित रख ली जाती थी।
  5. यह आवश्यक एवं अनिवार्य स्थिति में ही भेजा जाता था क्योंकि इसका अर्थ संदेश अतिशीघ्र पहुँचाना होता था।
  6. टेलीग्राम-फार्म के नीचे एक लाइन अंकित रहती है। उसके नीचे भेजने वाले का पूरा पता लिखा जाता है।  प्रेषक को इसकी अदायगी नहीं करनी पड़ती थी।
  7. टेलीग्राम की प्रतिलिपि सामान्य डाक द्वारा टेलीग्राम की पुष्टि के निमित्त भेजी जाती थी।
  8. राजकीय तार पर सर्विस स्टाम्प लगता है।

ध्यातव्य तथ्य

  • यह सदैव ही ध्यान रखने योग्य बात है कि टेलीग्राम को शासकीय पत्र-व्यवहार में तब तक अधिकृत संदेश नहीं माना जाता है, जब तक कि टेलीग्राम द्वारा भेजे गये सन्देश की पुष्टि प्रेषक कार्यालय से डाक द्वारा प्राप्त लिखित सूचना के आधार पर न हो जाय
  • ऐसा इस कारण है कि कोई भी व्यक्ति अनिश्चित रूप से किसी भी अधिकारी अथवा कार्यालय को टेलीग्राम द्वारा अनधिकृत सन्देश भेज सकता है।
  • अतः परम्परा यह है कि जब कभी भी कोई राजकीय तार सरकारी प्रयोजनों से भेजा जाय तो उसकी एक प्रति अधिकृत रूप से प्रेषक अधिकारी के हस्ताक्षर सहित इसकी पुष्टि में डाक द्वारा भी भेजी जाय।
  • यद्यपि टेलीग्राम प्राप्त होते ही अपेक्षित कार्यवाही आरम्भ की जा सकती है, परन्तु इसमें उल्लिखित सन्देश को केवल उसी समय अधिकृत माना जा सकता है जब इसके संदेश की पुष्टि डाक द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर बाद में हो गयी हो।
  • यदि किसी इसकी पुष्टि में सूचना डाक द्वारा नहीं प्राप्त होती है तो प्राप्तकर्त्ता अधिकारी अथवा कार्यालय द्वारा प्रेषक अधिकारी अथवा कार्यालय के टेलीग्राम की पुष्टि किये जाने का तुरन्त अनुरोध किया जाना चाहिये। विशेष अवसरों पर किसी प्रकार के तार की पुष्टि टेलीफोन, ट्रंक-काल अथवा रेडियोग्राम द्वारा की जा सकती है ।

महत्त्व

  1. टेलीग्राम एक शीघ्र गति से सूचना सम्प्रेषण की तीव्रतम-प्रणाली थी।
  2. इसकी विश्वसनीयता और मान्यता वैधानिक होती थी।
  3. इसमें विषयगत गंभीरता के अनुरूप प्राप्तकर्ता द्वारा आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाती थी।

विशेषताएँ

  1. गोपनीय विषयों के संदर्भ में इसमें कूट भाषा का प्रयोग होता था।
  2. शासकीय एवं राजकीय तार पर सर्विस स्टाम्प लगाया जाता था।
  3. टेलीग्राम-फार्म में नीचे एक लाइन खींची गयी होती है और उस लाइन के बाद नीचे लिखे विस्तृत पता की गिनती नहीं की जाती है न ही उसका भुगतान किया जाता था।
  4. शीघ्रता और अनिवार्यता में इसको प्राथमिकता दी जाती थी।

तार के प्रकार एवं वरीयताएँ 

प्रकार :-

  1. अंतर्देशीय तार
  2. समुद्री तार
  3. स्पष्टभाषी तार
  4. कूटभाषा या बीजांक तार
  5. राजकीय तार
  6. द्रुत तार

प्राथमिकताएँ या वरीयता कोटि :-

  1. संकट आदेश (O.S) जीवन रक्षा के लिए
  2. अति या अविलंब तात्कालिक (most urgent)
  3. तात्कालिक या अविलम्ब (immediate)
  4. आवश्यक (important)
  5. तुरन्त (express)
  6. सैन्य तात्कालिक

प्रारूप और उदाहरण 

प्रारूप —

तार का प्रारूप

 

उदाहरण  – १

तार का उदाहरण

 

उदाहरण – २

तार का उदाहरण - २

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