भूमिका
परिभाषा— “पत्र आलेखन का ऐसा रूप, जिसके द्वारा समान सूचना, निर्देश, अनुदेश इत्यादि सभी सम्बन्धित अथवा अधीनस्थ अधिकारियों को विभिन्न कार्यों के संदर्भ में प्रतिलिपियों के माध्यम से प्रेषित किया जाता है, परिपत्र कहलाता है।” या “जब प्रेषक एक हो, विषय एक हो लेकिन प्रेषिती (प्राप्तकर्ता) अनेक हों तब सरकारी पत्र ही परिपत्र बन जाता है।”
यह अनेक विभागों/कार्यालयों को एक साथ भेजा जाता है। यह किसी विभाग अथवा कार्यालय द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यालयों को भेजा जाता है।
इसका प्रारूप सरकारी पत्र के उसी प्रारूप का हो जायेगा जैसा सरकारी पत्र हो; यथा— यदि शासकीय पत्र का परिपत्र हो तो वह शासकीय पत्र के प्रारूप में होगा बस प्रेषिती (सेवा में) की जगह एक न होकर क्रम देकर सभी (समस्त) का उल्लेख कर दिया जायेगा। अर्थात् इसकी अपनी कोई निश्चित भाषा-शैली नहीं होती, बल्कि परिपत्र की भाषा-शैली और प्रारूप उसी पत्र के अनुरूप हो जाता है जिस रूप में परिपत्र भेजा जाता है।
विशेषताएँ
- उद्गम और संचालन – प्रेषक एक, प्रेषिती अनेक। यथानुरूप एकदिशीय या द्विद्विशीय संचलन।
- विषयवस्तु – यह जिस पत्र पर आधारित होता है उसी की विषयवस्तु ग्रहण कर लेता है।
- प्रारूप एवं भाषा-शैली – इसकी कोई निश्चित भाषा-शैली और प्रारूप नहीं होती है, बल्कि यह पत्र के उसी प्रारूप व भाषा-शैली का अनुकरण करता है जिस में भेजा जाता है; यथा– सरकारी पत्र का परिपत्र सरकारी पत्र का प्रारूप व भाषा शैली में भेजा जाता है।
- अन्य – परिपत्र का शाब्दिक अर्थ एक से अधिक पत्रों को किसी सामान्य विषय पर भेजे जाने से है।
महत्त्व
- परिपत्र के प्रयोग से कार्यालयी कार्य-व्यवहार में एकरूपता आती है।
- समय, श्रम व संसाधन में बचत होती है।
- कार्य निष्पादन गुणात्मक व तीव्र होता है।
प्रारूप
प्रारूप— 1
नाम ……,
पद …….,
शासकीय पता ………..।
समस्त पद ………..,
शासकीय पता ………..।
उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि ……. …… …….. …….. ……. ……… ……….. ………. ………. ……….. ………..।
2. ….. ……. …… …….. …….. ……. ……… ……….. ………. ………. ……….. ……….. ………. ……… ………. ……….. ………. ……….।
- 1.
- 2.
- 3.
प्रारूप— 2
परिपत्र का प्रारूप (अर्ध-सरकारी पत्र)
अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ …..
प्रेषक का नाम ……,
पदनाम …………….,
पता ………………..।
विभाग/कार्यालय ….
लखनऊ, दिनांक …..
विषय : …… …… …… …… …… …… …… …… …… ….. …. … …. …. ….।
प्रिय श्री महोदय,
उपर्युक्त विषयक आपके पत्र संख्या ……. दिनांक ………. पर स्थगित पत्र-व्यवहार के संदर्भ में मुझसे यह कहने की अपेक्षा की गयी है कि ……. ……….. …………. ……. …….. ………….. …….. ……… …….. …………..।
2. उक्त सम्बन्ध में आपसे निवेदन है कि ……. ……….. …………. ……. …….. ………….. …….. ……… …….. …………..।
सद्भावनाओं सहित,
भवदीय
ह॰ …………
(प्रेषक का नाम ….)
प्रारूप— 3
परिपत्र का प्रारूप (अधिसूचना)
…….. सरकार
विभाग का नाम ……….
अनुभाग का नाम ……….
संख्या………
स्थान ……., दिनांक ………..
अधिसूचना (शीर्षक)
एतद्द्वारा सर्व-साधारण को सूचित किया जाता है कि …… …… ….. …….. …….. ………….. ……….. ………….. …………. ……….. ………… … ……. ………… …………. ……….. …………. ………… ………. ।
2. ……… …………. …………….. …………….. ………….. ………….. …………. …………….. ……. …………… ……………………. ……….. ………… …….. ……………. …………………. ……………….. ……………….. ………………. …….।
आज्ञा से
ह॰ ……………
(नाम …..)
पदनाम……।
पृष्ठांकन सं॰ ………., तद्दिनांक (उपर्युक्त) …….
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित—
- समस्त …………….
- अधीक्षक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री के आगामी हिन्दी/अँग्रेजी संस्करण में प्रकाशन हेतु।
आज्ञा से
ह॰ ……………
(नाम …..)
पदनाम……।
PYQs
UPPSC (Mains) – 2011
प्रश्न— परिपत्र एवं अधिसूचना में अन्तर बताते हुए परिपत्र का एक प्रारूप प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर—
परिपत्र एवं अधिसूचना में अन्तर
| आधार | परिपत्र | अधिसूचना |
|---|---|---|
| उद्गम | परिपत्र का उद्गम सदैव एक पद या पदाधिकारी के स्तर से होता है। | जबकि अधिसूचना का उद्गम शासन या प्रशासन के सर्वोच्च प्राधिकारी के स्तर से होता है। |
| संचालन | परिपत्र का संचालन एक-आयामी अथवा द्विआयामी होता है। | जबकि अधिसूचना का संचालन ऊपर से नीचे सदैव एक आयामी होता है। |
| प्रारूप | परिपत्र का अपना कोई निश्चित प्रारूप नहीं होता है बल्कि यह शासकीय पत्रों के विभिन्न प्रारूपों पर भेजा जाता है। | जबकि अधिसूचना का प्रारूप निश्चित होता है जिसका प्रकाशन गजट में अनिवार्य रूप से कर दिया जाता है। |
| भाषा-शैली | परिपत्र की अपनी कोई भाषा शैली नहीं होती है बल्कि इस पत्र को जिस प्रारूप पर प्रेषित किया जाता है उसी की भाषा शैली को ग्रहण कर लेता है। | जबकि अधिसूचना की भाषा-शैली तटस्थ भाव से अन्य पुरुष व अप्रत्यक्ष अनुकथन की होती है। |
| प्रभाव | परिपत्र का प्रभाव शासकीय विभागों/कार्यालयों/व्यक्तियों तक होता है। | जबकि अधिसूचना का प्रभाव जन-साधारण तक होता है। |
| विषय वस्तु | परिपत्र का प्रारूप जिस पर आधारित होता है उसके ही विषय वस्तु को ग्रहण कर लेता है जहाँ शासकीय परिपत्र पदीय दायित्वों के निर्वहन के लिए भेजा जाता है वहीं अर्ध-शासकीय परिपत्र यथानुरूप विभिन्न मामलों से संदर्भित होता है। | अधिसूचना की विषय-वस्तु किसी शासकीय कार्य व्यवहार से जुड़ी किसी सूचना की होती है जिसमें रिक्तियाँ/पदोन्नति/पदावनति/वेतन वृद्धि/नीति-विषयक/शासकीय निर्णय का उद्देश्य समाहित होता है। |
कखग,
सचिव,
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,
उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ।
समस्त मुख्य चिकित्साधिकारी (C.M.O.),
उत्तर प्रदेश सरकार।
उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि प्रदेश के जनपदों में योजना की प्रगति की समीक्षा कर रिपोर्ट शासन को भेजे। जिससे सरकार योजना से होने वाले लाभ का मूल्यांकन कर सके तथा ऐसे जनपदों में विशेष उपाय किये जायेंगे जहाँ बाल कुपोषण, बाल मृत्युदर, मातृत्व लाभ आदि में कमी देखी जायेगी। ऐसे जिलों में जहाँ अभी भी स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है इस योजना को नये सिरे से लागू किया जाय।
UPPSC (Mains) – 2012
प्रश्न— उत्तर प्रदेश शासन की ओर से प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र लिखकर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन सम्बन्धी प्रगति के विवरण की जानकारी माँगिए। यह पत्र किस प्रकार का होगा ?
उत्तर—
पत्र का प्रकार— प्रश्न में उत्तर प्रदेश शासन की ओर समस्त मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र लिखकर सरकारी कार्य राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की जानकारी माँगने के लिए पत्र का प्रारूप बनाना है। अर्थात् प्रेषक एक है, प्राप्तकर्ता अनेक हैं और सरकारी कार्य है। यह स्पष्ट रूप से सरकारी पत्र का ‘परिपत्र’ रूप है।
परिभाषा— “जब प्रेषक एक हो, विषय एक हो लेकिन प्रेषिती (प्राप्तकर्ता) अनेक हों तब सरकारी पत्र ही परिपत्र बन जाता है।”
कखग,
सचिव,
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,
उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ।
समस्त मुख्य चिकित्साधिकारी (C.M.O.),
उत्तर प्रदेश सरकार।
उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि प्रदेश के जनपदों में योजना की प्रगति की समीक्षा कर रिपोर्ट शासन को भेजे। जिससे सरकार योजना से होने वाले लाभ का मूल्यांकन कर सके तथा ऐसे जनपदों में विशेष उपाय किये जायेंगे जहाँ बाल कुपोषण, बाल मृत्युदर, मातृत्व लाभ आदि में कमी देखी जायेगी। ऐसे जिलों में जहाँ अभी भी स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है इस योजना को नये सिरे से लागू किया जाय।
UPPSC (Mains) – 2014
प्रश्न— परिपत्र का स्वरूप स्पष्ट करते हुए इसका एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर—
परिपत्र – स्वरूप और उदाहरण
परिभाषा— “पत्र आलेखन का ऐसा रूप, जिसके द्वारा समान सूचना, निर्देश, अनुदेश इत्यादि सभी सम्बन्धित अथवा अधीनस्थ अधिकारियों को विभिन्न कार्यों के संदर्भ में प्रतिलिपियों के माध्यम से प्रेषित किया जाता है, परिपत्र कहलाता है।” या “जब प्रेषक एक हो, विषय एक हो लेकिन प्रेषिती (प्राप्तकर्ता) अनेक हों तब सरकारी पत्र ही परिपत्र बन जाता है।”
विशेषताएँ—
- यह अनेक विभागों/कार्यालयों को एक साथ भेजा जाता है। यह किसी विभाग अथवा कार्यालय द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यालयों को भेजा जाता है।
- इसका प्रारूप सरकारी पत्र के उसी प्रारूप का हो जायेगा जैसा सरकारी पत्र हो; यथा- यदि शासकीय पत्र का परिपत्र हो तो वह शासकीय पत्र के प्रारूप में होगा बस प्रेषिती (सेवा में) की जगह एक न होकर क्रम देकर सभी का उल्लेख कर दिया जायेगा।
अर्थात् इसकी अपनी कोई निश्चित भाषा-शैली नहीं होती, बल्कि परिपत्र की भाषा-शैली और प्रारूप उसी पत्र के अनुरूप हो जाता है जिस रूप में परिपत्र भेजा जाता है।
संख्या : 1084/सत्रह-स्वास्थ्य-2/2026
प्रेषक,
कखग,
(अपर) प्रमुख सचिव,
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,
उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ।
सेवा में,
1. समस्त मण्डलायुक्त, पूर्वी उत्तर प्रदेश (गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन मण्डल)।
2. समस्त जिलाधिकारी, पूर्वी उत्तर प्रदेश।
3. समस्त मुख्य चिकित्साधिकारी (C.M.O.), पूर्वी उत्तर प्रदेश।
विषय: पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में बाल-वर्ग को मस्तिष्क-ज्वर से बचाव एवं समुचित चिकित्सीय प्रबन्धों के सम्बन्ध में।
महोदय,
उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि मानसून सत्र के दौरान प्रदेश के पूर्वी जनपदों (विशेषकर गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर आदि) में बच्चों के मध्य मस्तिष्क-ज्वर (Acute Encephalitis Syndrome – AES / Japanese Encephalitis – JE) के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।
2. बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा एवं इस बीमारी से शत-प्रतिशत बचाव हेतु शासन द्वारा निम्नलिखित निर्देशों का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए—
- अस्पतालों में समर्पित पीडियाट्रिक बेड्स का आरक्षण : पूर्वी जिलों के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में मस्तिष्क-ज्वर से पीड़ित बच्चों के लिए समर्पित पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) तथा आवश्यक बेड्स आरक्षित रखे जाएँ।
- जीवनरक्षक दवाओं एवं ऑक्सीजन की उपलब्धता: समस्त चिकित्सालयों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, सिरिंज पंप तथा आवश्यक जीवनरक्षक औषधियों का पर्याप्त स्टॉक (Buffer Stock) अनिवार्य रूप से बनाए रखा जाए।
- सघन टीकाकरण एवं डोर-टू-डोर सर्विलांस : आशा तथा आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर सर्वेक्षण कराया जाए। जापानी एन्सेफलाइटिस (JE) के टीके से वंचित (Left-out) बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
- स्वच्छता, एंटी-लार्वा छिड़काव एवं शुद्ध पेयजल : नगर निकायों तथा ग्राम पंचायतों के समन्वय से जलजमाव को समाप्त कराया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग तथा एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जाए तथा पेयजल स्रोतों का क्लोरीनीकरण कराया जाए।
- त्वरित एम्बुलेंस सेवा एवं 24×7 कंट्रोल रूम : ‘108’ एम्बुलेंस सेवा को हाई अलर्ट पर रखा जाए ताकि सूचना मिलते ही मरीज बच्चे को बिना विलंब के अस्पताल पहुँचाया जा सके। प्रत्येक जिले में 24×7 कार्यरत कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए।
- व्यापक जन-जागरूकता अभियान : ग्रामीणों को शुद्ध एवं उबला पानी पीने, बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाने, स्वच्छता बनाए रखने तथा बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल पहुँचने हेतु जागरूक किया जाए।
3. उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर पाई गई लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी।
भवदीय,
ह॰ ………
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
पृष्ठांकन संख्या …. व तद्दिनांक।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :
- प्रमुख सचिव, मा० मुख्यमंत्री जी, उत्तर प्रदेश शासन।
- महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ, उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
- निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उत्तर प्रदेश।
- समस्त संबंधित जनपदों के सूचना अधिकारी को व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु।
- गार्ड फाइल।
भवदीय,
ह॰ ………
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
UPPSC (Mains) – 2015
प्रश्न— परिपत्र की परिभाषा देते हुए उसकी विशेषताएँ लिखिए और उसका एक उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर—
परिभाषा— “पत्र आलेखन का ऐसा रूप, जिसके द्वारा समान सूचना, निर्देश, अनुदेश इत्यादि सभी सम्बन्धित अथवा अधीनस्थ अधिकारियों को विभिन्न कार्यों के संदर्भ में प्रतिलिपियों के माध्यम से प्रेषित किया जाता है, परिपत्र कहलाता है।” या “जब प्रेषक एक हो, विषय एक हो लेकिन प्रेषिती (प्राप्तकर्ता) अनेक हों तब सरकारी पत्र ही परिपत्र बन जाता है।”
विशेषताएँ—
- यह अनेक विभागों/कार्यालयों को एक साथ भेजा जाता है। यह किसी विभाग अथवा कार्यालय द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यालयों को भेजा जाता है।
- इसका प्रारूप सरकारी पत्र के उसी प्रारूप का हो जायेगा जैसा सरकारी पत्र हो; यथा- यदि शासकीय पत्र का परिपत्र हो तो वह शासकीय पत्र के प्रारूप में होगा बस प्रेषिती (सेवा में) की जगह एक न होकर क्रम देकर सभी का उल्लेख कर दिया जायेगा।
अर्थात् इसकी अपनी कोई निश्चित भाषा-शैली नहीं होती, बल्कि परिपत्र की भाषा-शैली और प्रारूप उसी पत्र के अनुरूप हो जाता है जिस रूप में परिपत्र भेजा जाता है।
संख्या : 1084/सत्रह-स्वास्थ्य-2/2026
प्रेषक,
कखग,
(अपर) प्रमुख सचिव,
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,
उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ।
सेवा में,
1. समस्त मण्डलायुक्त, पूर्वी उत्तर प्रदेश (गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन मण्डल)।
2. समस्त जिलाधिकारी, पूर्वी उत्तर प्रदेश।
3. समस्त मुख्य चिकित्साधिकारी (C.M.O.), पूर्वी उत्तर प्रदेश।
विषय: पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में बाल-वर्ग को मस्तिष्क-ज्वर से बचाव एवं समुचित चिकित्सीय प्रबन्धों के सम्बन्ध में।
महोदय,
उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि मानसून सत्र के दौरान प्रदेश के पूर्वी जनपदों (विशेषकर गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर आदि) में बच्चों के मध्य मस्तिष्क-ज्वर (Acute Encephalitis Syndrome – AES / Japanese Encephalitis – JE) के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।
2. बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा एवं इस बीमारी से शत-प्रतिशत बचाव हेतु शासन द्वारा निम्नलिखित निर्देशों का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए—
- अस्पतालों में समर्पित पीडियाट्रिक बेड्स का आरक्षण : पूर्वी जिलों के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में मस्तिष्क-ज्वर से पीड़ित बच्चों के लिए समर्पित पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) तथा आवश्यक बेड्स आरक्षित रखे जाएँ।
- जीवनरक्षक दवाओं एवं ऑक्सीजन की उपलब्धता: समस्त चिकित्सालयों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, सिरिंज पंप तथा आवश्यक जीवनरक्षक औषधियों का पर्याप्त स्टॉक (Buffer Stock) अनिवार्य रूप से बनाए रखा जाए।
- सघन टीकाकरण एवं डोर-टू-डोर सर्विलांस : आशा तथा आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर सर्वेक्षण कराया जाए। जापानी एन्सेफलाइटिस (JE) के टीके से वंचित (Left-out) बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
- स्वच्छता, एंटी-लार्वा छिड़काव एवं शुद्ध पेयजल : नगर निकायों तथा ग्राम पंचायतों के समन्वय से जलजमाव को समाप्त कराया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग तथा एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जाए तथा पेयजल स्रोतों का क्लोरीनीकरण कराया जाए।
- त्वरित एम्बुलेंस सेवा एवं 24×7 कंट्रोल रूम : ‘108’ एम्बुलेंस सेवा को हाई अलर्ट पर रखा जाए ताकि सूचना मिलते ही मरीज बच्चे को बिना विलंब के अस्पताल पहुँचाया जा सके। प्रत्येक जिले में 24×7 कार्यरत कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए।
- व्यापक जन-जागरूकता अभियान : ग्रामीणों को शुद्ध एवं उबला पानी पीने, बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाने, स्वच्छता बनाए रखने तथा बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल पहुँचने हेतु जागरूक किया जाए।
3. उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर पाई गई लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी।
भवदीय,
ह॰ ………
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
पृष्ठांकन संख्या …. व तद्दिनांक।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :
- प्रमुख सचिव, मा० मुख्यमंत्री जी, उत्तर प्रदेश शासन।
- महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ, उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
- निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उत्तर प्रदेश।
- समस्त संबंधित जनपदों के सूचना अधिकारी को व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु।
- गार्ड फाइल।
भवदीय,
ह॰ ………
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
UPPSC (Mains) – 2016
प्रश्न— परिपत्र क्या है? परिपत्र का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर—
परिभाषा— “पत्र आलेखन का ऐसा रूप, जिसके द्वारा समान सूचना, निर्देश, अनुदेश इत्यादि सभी सम्बन्धित अथवा अधीनस्थ अधिकारियों को विभिन्न कार्यों के संदर्भ में प्रतिलिपियों के माध्यम से प्रेषित किया जाता है, परिपत्र कहलाता है।” या “जब प्रेषक एक हो, विषय एक हो लेकिन प्रेषिती (प्राप्तकर्ता) अनेक हों तब सरकारी पत्र ही परिपत्र बन जाता है।”
विशेषताएँ—
- यह अनेक विभागों/कार्यालयों को एक साथ भेजा जाता है। यह किसी विभाग अथवा कार्यालय द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यालयों को भेजा जाता है।
- इसका प्रारूप सरकारी पत्र के उसी प्रारूप का हो जायेगा जैसा सरकारी पत्र हो; यथा- यदि शासकीय पत्र का परिपत्र हो तो वह शासकीय पत्र के प्रारूप में होगा बस प्रेषिती (सेवा में) की जगह एक न होकर क्रम देकर सभी का उल्लेख कर दिया जायेगा।
अर्थात् इसकी अपनी कोई निश्चित भाषा-शैली नहीं होती, बल्कि परिपत्र की भाषा-शैली और प्रारूप उसी पत्र के अनुरूप हो जाता है जिस रूप में परिपत्र भेजा जाता है।
संख्या : 1084/सत्रह-स्वास्थ्य-2/2026
प्रेषक,
कखग,
(अपर) प्रमुख सचिव,
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,
उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ।
सेवा में,
1. समस्त मण्डलायुक्त, पूर्वी उत्तर प्रदेश (गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन मण्डल)।
2. समस्त जिलाधिकारी, पूर्वी उत्तर प्रदेश।
3. समस्त मुख्य चिकित्साधिकारी (C.M.O.), पूर्वी उत्तर प्रदेश।
विषय: पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में बाल-वर्ग को मस्तिष्क-ज्वर से बचाव एवं समुचित चिकित्सीय प्रबन्धों के सम्बन्ध में।
महोदय,
उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि मानसून सत्र के दौरान प्रदेश के पूर्वी जनपदों (विशेषकर गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर आदि) में बच्चों के मध्य मस्तिष्क-ज्वर (Acute Encephalitis Syndrome – AES / Japanese Encephalitis – JE) के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।
2. बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा एवं इस बीमारी से शत-प्रतिशत बचाव हेतु शासन द्वारा निम्नलिखित निर्देशों का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए—
- अस्पतालों में समर्पित पीडियाट्रिक बेड्स का आरक्षण : पूर्वी जिलों के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में मस्तिष्क-ज्वर से पीड़ित बच्चों के लिए समर्पित पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) तथा आवश्यक बेड्स आरक्षित रखे जाएँ।
- जीवनरक्षक दवाओं एवं ऑक्सीजन की उपलब्धता: समस्त चिकित्सालयों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, सिरिंज पंप तथा आवश्यक जीवनरक्षक औषधियों का पर्याप्त स्टॉक (Buffer Stock) अनिवार्य रूप से बनाए रखा जाए।
- सघन टीकाकरण एवं डोर-टू-डोर सर्विलांस : आशा तथा आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर सर्वेक्षण कराया जाए। जापानी एन्सेफलाइटिस (JE) के टीके से वंचित (Left-out) बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
- स्वच्छता, एंटी-लार्वा छिड़काव एवं शुद्ध पेयजल : नगर निकायों तथा ग्राम पंचायतों के समन्वय से जलजमाव को समाप्त कराया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग तथा एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जाए तथा पेयजल स्रोतों का क्लोरीनीकरण कराया जाए।
- त्वरित एम्बुलेंस सेवा एवं 24×7 कंट्रोल रूम : ‘108’ एम्बुलेंस सेवा को हाई अलर्ट पर रखा जाए ताकि सूचना मिलते ही मरीज बच्चे को बिना विलंब के अस्पताल पहुँचाया जा सके। प्रत्येक जिले में 24×7 कार्यरत कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए।
- व्यापक जन-जागरूकता अभियान : ग्रामीणों को शुद्ध एवं उबला पानी पीने, बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाने, स्वच्छता बनाए रखने तथा बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल पहुँचने हेतु जागरूक किया जाए।
3. उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर पाई गई लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी।
भवदीय,
ह॰ ………
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
पृष्ठांकन संख्या …. व तद्दिनांक।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :
- प्रमुख सचिव, मा० मुख्यमंत्री जी, उत्तर प्रदेश शासन।
- महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ, उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
- निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उत्तर प्रदेश।
- समस्त संबंधित जनपदों के सूचना अधिकारी को व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु।
- गार्ड फाइल।
भवदीय,
ह॰ ………
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
UPPSC (Mains) – 2019
प्रश्न— परिपत्र किसे कहते हैं? स्वास्थ्य विभाग, उ॰ प्र॰ के प्रमुख सचिव की ओर से प्रदेश के पूर्वी जिलों के बच्चों को मस्तिष्क-ज्वर से बचने के लिए उचित व्यवस्था हेतु परिपत्र तैयार कीजिए।
उत्तर—
परिभाषा— “पत्र आलेखन का ऐसा रूप, जिसके द्वारा समान सूचना, निर्देश, अनुदेश इत्यादि सभी सम्बन्धित अथवा अधीनस्थ अधिकारियों को विभिन्न कार्यों के संदर्भ में प्रतिलिपियों के माध्यम से प्रेषित किया जाता है, परिपत्र कहलाता है।” या “जब प्रेषक एक हो, विषय एक हो लेकिन प्रेषिती (प्राप्तकर्ता) अनेक हों तब सरकारी पत्र ही परिपत्र बन जाता है।”
विशेषताएँ—
- यह अनेक विभागों/कार्यालयों को एक साथ भेजा जाता है। यह किसी विभाग अथवा कार्यालय द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यालयों को भेजा जाता है।
- इसका प्रारूप सरकारी पत्र के उसी प्रारूप का हो जायेगा जैसा सरकारी पत्र हो; यथा- यदि शासकीय पत्र का परिपत्र हो तो वह शासकीय पत्र के प्रारूप में होगा बस प्रेषिती (सेवा में) की जगह एक न होकर क्रम देकर सभी का उल्लेख कर दिया जायेगा।
अर्थात् इसकी अपनी कोई निश्चित भाषा-शैली नहीं होती, बल्कि परिपत्र की भाषा-शैली और प्रारूप उसी पत्र के अनुरूप हो जाता है जिस रूप में परिपत्र भेजा जाता है।
संख्या : 1084/सत्रह-स्वास्थ्य-2/2026
प्रेषक,
कखग,
(अपर) प्रमुख सचिव,
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,
उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ।
सेवा में,
1. समस्त मण्डलायुक्त, पूर्वी उत्तर प्रदेश (गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन मण्डल)।
2. समस्त जिलाधिकारी, पूर्वी उत्तर प्रदेश।
3. समस्त मुख्य चिकित्साधिकारी (C.M.O.), पूर्वी उत्तर प्रदेश।
विषय: पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में बाल-वर्ग को मस्तिष्क-ज्वर से बचाव एवं समुचित चिकित्सीय प्रबन्धों के सम्बन्ध में।
महोदय,
उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि मानसून सत्र के दौरान प्रदेश के पूर्वी जनपदों (विशेषकर गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर आदि) में बच्चों के मध्य मस्तिष्क-ज्वर (Acute Encephalitis Syndrome – AES / Japanese Encephalitis – JE) के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।
2. बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा एवं इस बीमारी से शत-प्रतिशत बचाव हेतु शासन द्वारा निम्नलिखित निर्देशों का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए—
- अस्पतालों में समर्पित पीडियाट्रिक बेड्स का आरक्षण : पूर्वी जिलों के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में मस्तिष्क-ज्वर से पीड़ित बच्चों के लिए समर्पित पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) तथा आवश्यक बेड्स आरक्षित रखे जाएँ।
- जीवनरक्षक दवाओं एवं ऑक्सीजन की उपलब्धता: समस्त चिकित्सालयों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, सिरिंज पंप तथा आवश्यक जीवनरक्षक औषधियों का पर्याप्त स्टॉक (Buffer Stock) अनिवार्य रूप से बनाए रखा जाए।
- सघन टीकाकरण एवं डोर-टू-डोर सर्विलांस : आशा तथा आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर सर्वेक्षण कराया जाए। जापानी एन्सेफलाइटिस (JE) के टीके से वंचित (Left-out) बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
- स्वच्छता, एंटी-लार्वा छिड़काव एवं शुद्ध पेयजल : नगर निकायों तथा ग्राम पंचायतों के समन्वय से जलजमाव को समाप्त कराया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग तथा एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जाए तथा पेयजल स्रोतों का क्लोरीनीकरण कराया जाए।
- त्वरित एम्बुलेंस सेवा एवं 24×7 कंट्रोल रूम : ‘108’ एम्बुलेंस सेवा को हाई अलर्ट पर रखा जाए ताकि सूचना मिलते ही मरीज बच्चे को बिना विलंब के अस्पताल पहुँचाया जा सके। प्रत्येक जिले में 24×7 कार्यरत कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए।
- व्यापक जन-जागरूकता अभियान : ग्रामीणों को शुद्ध एवं उबला पानी पीने, बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाने, स्वच्छता बनाए रखने तथा बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल पहुँचने हेतु जागरूक किया जाए।
3. उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर पाई गई लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी।
भवदीय,
ह॰ ………
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
पृष्ठांकन संख्या …. व तद्दिनांक।
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :
- प्रमुख सचिव, मा० मुख्यमंत्री जी, उत्तर प्रदेश शासन।
- महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ, उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
- निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उत्तर प्रदेश।
- समस्त संबंधित जनपदों के सूचना अधिकारी को व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु।
- गार्ड फाइल।
भवदीय,
ह॰ ………
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
UPPSC (Mains) – 2022
प्रश्न— परिपत्र किसे कहते हैं? जिला अधिकारी की ओर से जिले के सभी ग्राम प्रधानों के लिए सफाई व्यवस्था पर ध्यान रखने के लिए एक परिपत्र का प्रारूप तैयार कीजिए।
उत्तर—
परिपत्र (Circular) : “पत्र आलेखन का ऐसा रूप, जिसके द्वारा समान सूचना, निर्देश, अनुदेश इत्यादि सभी सम्बन्धित अथवा अधीनस्थ अधिकारियों को विभिन्न कार्यों के संदर्भ में प्रतिलिपियों के माध्यम से प्रेषित किया जाता है, परिपत्र कहलाता है।” या “जब प्रेषक एक हो, विषय एक हो लेकिन प्रेषिती (प्राप्तकर्ता) अनेक हों तब सरकारी पत्र ही परिपत्र बन जाता है।”
क॰ ख॰ ग॰,
जिलाधिकारी,
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
समस्त ग्राम प्रधान,
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
उपर्युक्त विषय के सम्बन्ध में मुझे यह सूचना देने का निर्देश हुआ है कि जिले के सभी ग्राम प्रधान अपने-अपने गाँव की साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था करें। इस सम्बन्ध में आप जो भी कार्यवाही करें, उसका विवरण, फोटो एवं प्रगति साप्ताहिक रूप से जिलाधिकारी कार्यालय में नियमित रूप से भेजें।
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