प्रश्न पत्र
| No. of Printed Pages : 2 | Sr. No. ……………… |
2015
सामान्य हिन्दी
GENERAL HINDI
| निर्धारित समय : तीन घंटे] | [अधिकतम अंक : 150 |
| Time Allowed : Three Hours] | [Maximum Marks : 150 |
| नोट : | (i) | सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। |
| (ii) | निर्धारित अंक प्रत्येक प्रश्न के साथ लिखे हैं। | |
| (iii) | निर्धारित स्थान को छोड़कर अन्यत्र कहीं भी अनुक्रमांक न लिखें। नाम, पता, टेलिफोन नम्बर आदि भी न लिखें। |
| 1. | उद्देश्य-प्राप्ति में यह परम आवश्यक है कि आप अपने शारीरिक एवं मानसिक बल को अधिकतम प्रयोग में लाएँ। पराश्रित बैठने वाले कभी भी सफल नहीं होते हैं। आजकल के नवयुवक सदा दूसरों का मुँह निहारा करते हैं या समय और भाग्य को कोसा करते हैं। उचित अवसर की खोज व्यक्ति को स्वयं करनी पड़ती है, फिर अपने विवेक, संयम और परिश्रम से दृढ़ संकल्प हो आगे बढ़ें, तो उद्देश्य स्वयं ही आपकी ओर बढ़ेगा। कतिपय लोग तो सदा ही समाज और समय से रुष्ट रहते हैं। वे परिस्थितियों के प्रतिकूल होने की आड़ में अपने प्रमाद को ओढ़े रहते हैं। छात्रावस्था में व्यावहारिकता का अभाव प्रायः देखा जाता है। ऐसे में अनुभवी व्यक्तियों के अनुभवों का लाभ उठाकर आगे बढ़ने में ही सफलता प्राप्त होती है। | ||
| (क) | उपर्युक्त गद्यांश का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए। | 5 | |
| (ख) | उद्देश्य-प्राप्ति के लिए क्या करना अपेक्षित है? उपर्युक्त उद्धरण के आधार पर स्पष्ट कीजिए। | 5 | |
| (ग) | उपर्युक्त गद्यांश की रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए। | 20 | |
| 2. | प्रबुद्ध मानव और अन्य प्राणियों में सबसे बड़ा अंतर है—मानव की वह क्षमता, जिससे उसने भाषा का विकास किया है। भाषा की आवश्यकता इस बात से स्पष्ट होती है कि बिना उसके मानव का कोई भी काम सरलता से संभव नहीं है। इस भाषा को वह अनेक तरह से आवश्यकतानुसार प्रयोग में लाता है। इसीलिए जब हम बातचीत के लिए भाषा का प्रयोग करते हैं, तो वह भाषा ‘सामान्य भाषा’ कहलाती है। जब हम उसका प्रयोग कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास आदि लिखने के लिए करते हैं, तो उसे ‘साहित्यिक भाषा’ कहते हैं। जब हम वैज्ञानिक या तकनीकी विषयों के बारे में जानने के लिए भाषा को माध्यम बनाते हैं, तब उस भाषा को ‘वैज्ञानिक या तकनीकी भाषा’ कहते हैं। | ||
| (क) | उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। | 5 | |
| (ख) | ‘सामान्य-भाषा और वैज्ञानिक तकनीकी भाषा’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए। | 5 | |
| (ग) | उपर्युक्त गद्यांश का संक्षेपण कीजिए। | 20 | |
| 3. | (क) | परिपत्र की परिभाषा देते हुए उसकी विशेषताएँ लिखिए और उसका एक उदाहरण भी दीजिए। | 10 |
| (ख) | अधिसूचना का स्वरूप स्पष्ट कीजिए और उसका एक उदाहरण भी प्रस्तुत कीजिए। | 10 |
| 4. |
निम्नलिखित शब्दों से उपसर्गों एवं प्रत्ययों को अलग कीजिए : अध्यादेश, विख्यात, अभ्यास, अत्युत्तम, सुजन, त्यागी, परीक्षक, सरलता, पत्रकार, शिष्य। | 10 | |
| 5. |
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए : अनंत, आविर्भाव, कीर्ति, नूतन, तरुण, ह्रस्व, पुरस्कार, सम्पन्न, शुष्क, उपेक्षा। | 10 | |
| 6. | निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए : | 10 | |
| (i) | अच्छे कार्य में अनेकों संकट आते हैं। | ||
| (ii) | समाज के भिखारियों से कृपा करनी चाहिए। | ||
| (iii) | आपवाली किताब छत में पड़ी है। | ||
| (iv) | ‘यामा’ महादेवी के काव्यों का संकलन है। | ||
| (v) | आप दस आदमी के रुकने का प्रबंध करो। | ||
| 7. | निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए : | 10 | |
| (i) | गुरु के समीप रहने वाला विद्यार्थी | ||
| (ii) | जिस पर आक्रमण हुआ हो | ||
| (iii) | जिसमें युद्ध करने की इच्छा हो | ||
| (iv) | उत्तराधिकार में प्राप्त सम्पत्ति | ||
| (v) | जिसकी माप-तोल हो सके | ||
| 8. | निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों के अर्थ स्पष्ट कीजिए और अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए : | 30 | |
| (i) | आग उगलना | ||
| (ii) | उलटी माला फेरना | ||
| (iii) | नाक रगड़ना | ||
| (iv) | हवा लगना | ||
| (v) | एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा | ||
| (vi) | मुँह लगाना | ||
| (vii) | जैसा देश वैसा भेष | ||
| (viii) | हजामत बनाना | ||
| (ix) | जैसे नागनाथ वैसे सांपनाथ | ||
| (x) | यह मुँह और मसूर की दाल | ||
हल
1 (क) : गद्यांश का भावार्थ
जीवन में सफलता या लक्ष्य प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को पूरी तरह आत्मनिर्भर होना चाहिए और अपनी शारीरिक व मानसिक क्षमताओं का पूरा उपयोग करना चाहिए। दूसरों पर आश्रित रहने, परिस्थितियों या भाग्य को दोष देने और आलस्य में घिरे रहने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होता। सफलता पाने के लिए स्वयं अवसर ढूँढना, संयम व विवेक से काम लेना और परिश्रम करना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थी जीवन में व्यावहारिक ज्ञान की कमी को पूरा करने के लिए अनुभवी लोगों के मार्गदर्शन का लाभ उठाना ही सफलता की राह दिखाता है।
1 (ख) : उद्देश्य-प्राप्ति के लिए अपेक्षित कार्य
उद्देश्य की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित कार्य करना अपेक्षित है:
- संपूर्ण बल का प्रयोग – अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का पूर्ण उपयोग करना।
- आत्मनिर्भरता – दूसरों का मुँह ताकने या पराश्रित रहने के बजाय स्वयं आगे बढ़कर उचित अवसर की खोज करना।
- संयम, विवेक और परिश्रम – बुद्धि, धैर्य और कठिन परिश्रम के साथ दृढ़ संकल्प होकर आगे बढ़ना।
- दोषारोपण और आलस्य का त्याग – भाग्य, समय या परिस्थितियों को दोष देने की प्रवृत्ति और आलस्य (प्रमाद) को छोड़ना।
अनुभव का लाभ लेना – व्यावहारिक ज्ञान की कमी को दूर करने के लिए अनुभवी व्यक्तियों के अनुभवों और मार्गदर्शन को अपनाना।
1 (ग) : रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या
“उद्देश्य-प्राप्ति …………………. प्रयोग में लाएँ।”
व्याख्या : किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए केवल इच्छा व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए व्यक्ति को अपनी शारीरिक शक्ति और मानसिक क्षमता—दोनों का पूरी निष्ठा और ऊर्जा के साथ अधिकतम इस्तेमाल करना अनिवार्य होता है।
“आजकल …………………………. कोसा करते हैं।”
व्याख्या : लेखक आज की युवा पीढ़ी की निष्क्रियता पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि वर्तमान समय के युवा स्वयं प्रयास करने के बजाय सहायता के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं। यदि वे असफल होते हैं, तो अपनी कमियों को सुधारने के बजाय समय और किस्मत को दोष देने लगते हैं।
“कतिपय लोग ……………………… ओढ़े रहते हैं।”
व्याख्या : कुछ लोगों का स्वभाव हमेशा समाज, व्यवस्था और समय से शिकायत करने का होता है। लेखक कहते हैं कि ऐसे लोग वास्तव में आलसी और कामचोर होते हैं, जो अपनी इस अकर्मण्यता और आलस्य को छिपाने के लिए ‘विपरीत परिस्थितियों’ का बहाना बनाते हैं।
“ऐसे में अनुभवी …………………….. प्राप्त होती है।”
व्याख्या : विशेषकर विद्यार्थी अवस्था में व्यावहारिक समझ और अनुभव की कमी होती है। लेखक का सुझाव है कि ऐसी स्थिति में यदि व्यक्ति अपने से बड़े और योग्य अनुभवी लोगों की सीख व मार्गदर्शन का सहारा लेकर आगे बढ़े, तो उसे सफलता अवश्य मिलती है।
2 (क) : शीर्षक
‘भाषा का महत्त्व’
2 (ख) : ‘सामान्य-भाषा और वैज्ञानिक तकनीकी भाषा’ का अर्थ
- सामान्य भाषा : जब हम अपने दैनिक जीवन में एक-दूसरे से बातचीत, संवाद या पत्राचार के लिए भाषा का साधारण प्रयोग करते हैं, तो उसे ‘सामान्य भाषा’ कहते हैं।
- वैज्ञानिक तकनीकी भाषा : जब भाषा का उपयोग विज्ञान, प्रौद्योगिकी या किसी विशेष तकनीकी विषय के ज्ञान को समझने और व्यक्त करने के लिए माध्यम के रूप में किया जाता है, तो उसे ‘वैज्ञानिक या तकनीकी भाषा’ कहते हैं।
2 (ग) : संक्षेपण
मानव और अन्य प्राणियों में मुख्य अंतर मानव द्वारा भाषा का विकास करना है। भाषा जीवन की आवश्यकता और कार्य को सरल बनाती है। भाषा के विविध रूप हैं— बातचीत के लिए सामान्य भाषा, साहित्य सृजन के लिए साहित्यिक भाषा और वैज्ञानिक व तकनीकी विषयों के अध्ययन के लिए वैज्ञानिक या तकनीकी भाषा का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर — 3 : परिपत्र
परिभाषा— “पत्र आलेखन का ऐसा रूप, जिसके द्वारा समान सूचना, निर्देश, अनुदेश इत्यादि सभी सम्बन्धित अथवा अधीनस्थ अधिकारियों को विभिन्न कार्यों के संदर्भ में प्रतिलिपियों के माध्यम से प्रेषित किया जाता है, परिपत्र कहलाता है।” या “जब प्रेषक एक हो, विषय एक हो लेकिन प्रेषिती (प्राप्तकर्ता) अनेक हों तब सरकारी पत्र ही परिपत्र बन जाता है।”
विशेषताएँ—
- यह अनेक विभागों/कार्यालयों को एक साथ भेजा जाता है। यह किसी विभाग अथवा कार्यालय द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यालयों को भेजा जाता है।
- इसका प्रारूप सरकारी पत्र के उसी प्रारूप का हो जायेगा जैसा सरकारी पत्र हो; यथा- यदि शासकीय पत्र का परिपत्र हो तो वह शासकीय पत्र के प्रारूप में होगा बस प्रेषिती (सेवा में) की जगह एक न होकर क्रम देकर सभी का उल्लेख कर दिया जायेगा।
- अर्थात् इसकी अपनी कोई निश्चित भाषा-शैली नहीं होती, बल्कि परिपत्र की भाषा-शैली और प्रारूप उसी पत्र के अनुरूप हो जाता है जिस रूप में परिपत्र भेजा जाता है।
उदाहरण—
उत्तर प्रदेश शासन
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग
परिपत्र (CIRCULAR)
संख्या : 1084/सत्रह-स्वास्थ्य-2/2026
प्रेषक,
श्री कखग,
(अपर) प्रमुख सचिव,
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,
उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ।
सेवा में,
- समस्त मण्डलायुक्त, पूर्वी उत्तर प्रदेश (गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन मण्डल)।
- समस्त जिलाधिकारी, पूर्वी उत्तर प्रदेश।
- समस्त मुख्य चिकित्साधिकारी (C.M.O.), पूर्वी उत्तर प्रदेश।
विषय : पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में बाल-वर्ग को मस्तिष्क-ज्वर से बचाव एवं समुचित चिकित्सीय प्रबन्धों के सम्बन्ध में।
महोदय / महोदया,
उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि मानसून सत्र के दौरान प्रदेश के पूर्वी जनपदों (विशेषकर गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर आदि) में बच्चों के मध्य मस्तिष्क-ज्वर (Acute Encephalitis Syndrome – AES / Japanese Encephalitis – JE) के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।
2. बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा एवं इस बीमारी से शत-प्रतिशत बचाव हेतु शासन द्वारा निम्नलिखित निर्देशों का तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए—
- क. अस्पतालों में समर्पित पीडियाट्रिक बेड्स का आरक्षण : पूर्वी जिलों के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में मस्तिष्क-ज्वर से पीड़ित बच्चों के लिए समर्पित पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) तथा आवश्यक बेड्स आरक्षित रखे जाएँ।
- ख. जीवनरक्षक दवाओं एवं ऑक्सीजन की उपलब्धता : समस्त चिकित्सालयों में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, सिरिंज पंप तथा आवश्यक जीवनरक्षक औषधियों का पर्याप्त स्टॉक (Buffer Stock) अनिवार्य रूप से बनाए रखा जाए।
- ग. सघन टीकाकरण एवं डोर-टू-डोर सर्विलांस : आशा तथा आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर सर्वेक्षण कराया जाए। जापानी एन्सेफलाइटिस (JE) के टीके से वंचित (Left-out) बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए।
- घ. स्वच्छता, एंटी-लार्वा छिड़काव एवं शुद्ध पेयजल : नगर निकायों तथा ग्राम पंचायतों के समन्वय से जलजमाव को समाप्त कराया जाए। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग तथा एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जाए तथा पेयजल स्रोतों का क्लोरीनीकरण कराया जाए।
- ङ. त्वरित एम्बुलेंस सेवा एवं 24×7 कंट्रोल रूम : ‘108’ एम्बुलेंस सेवा को हाई अलर्ट पर रखा जाए ताकि सूचना मिलते ही मरीज बच्चे को बिना विलंब के अस्पताल पहुँचाया जा सके। प्रत्येक जिले में 24×7 कार्यरत कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए।
- च. व्यापक जन-जागरूकता अभियान : ग्रामीणों को शुद्ध एवं उबला पानी पीने, बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाने, स्वच्छता बनाए रखने तथा बुखार के लक्षण दिखते ही तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल पहुँचने हेतु जागरूक किया जाए।
उक्त निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर पाई गई लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा तथा दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी।
भवदीय
ह॰ ……….
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
पृष्ठांकन संख्या व तद्दिनांक-
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :
- प्रमुख सचिव, मा० मुख्यमंत्री जी, उत्तर प्रदेश शासन।
- महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ, उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
- निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उत्तर प्रदेश।
- समस्त संबंधित जनपदों के सूचना अधिकारी को व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु।
- गार्ड फाइल।
भवदीय
ह॰ ……….
(कखग)
(अपर) प्रमुख सचिव।
3 (ख) : अधिसूचना – स्वरूप और उदाहरण
परिभाषा— “अधिसूचना पत्राचार का ऐसा रूप है जिसका प्रकाशन राजकीय गजट में सर्वसाधारण के सूचनार्थ किया जाता है।” या “लोक-विषयक मामलों, शासकीय निर्णयों, सूचनाओं और अन्य सांविधिक आदेशों को सर्वसाधारण के सूचनार्थ राजकीय गजट में प्रकाशित पत्र को अधिसूचना या विज्ञप्ति कहते हैं।”
विशेषताएँ—
- सभी प्रकार की अधिसूचना (विज्ञप्तियाँ) सर्वसाधारण के सूचनार्थ होती हैं।
- इसको तृतीय पुरुष (अन्य पुरुष) की भाषा में अप्रत्यक्ष अनुकथन के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है।
- इसमें किसी व्यक्ति अथवा प्राधिकारी को किसी भी दशा में सम्बोधित नहीं किया जाता है।
- आमतौर पर अधिसूचना (विज्ञप्ति) राजकीय गजट में प्रकाशित की जाती है, (समाचार पत्रों में नहीं।)
- ये सूचनाएँ वास्तव में राष्ट्रपति या राज्यपालों की ओर जारी की गयी मानी जाती हैं।
- इसमें प्रेषक, सम्बोधन और अधोलेख /स्वनिर्देश (भवदीय) का प्रयोग नहीं होता है
- सूचना पाने वाले अधिकारी या कर्मचारी को पृष्ठांकन से एक प्रति भेज दी जाती है।
- लेखा विभाग अथवा अन्य सम्बद्ध विभाग को भी सूचित किया जाता है।
- अधिसूचना की एक प्रति अनिवार्य रूप से निदेशक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री को गजट में छापने के लिए भेजा जाता है।
- अधिसूचना ही एकमात्र ऐसा पत्र है जिसे पत्र के रूप भेजा जाता है तथा साथ ही गजट में प्रकाशित कर सुरक्षित रखा जाता है।
- गजट हिन्दी और अंग्रेजी में छापा जाता है साथ ही राज्य की स्थिति में इन दो भाषाओं के अलावा राज्य को भाषा में भी प्रकाशित किया जाता है, जैसे- उ०प्र० में से हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू भाषा में।
भारत सरकार शासन
निर्वाचन आयोग
निर्वाचन सदन, अशोक रोड
नई दिल्ली, 110001
संख्या………
नई दिल्ली, दिनांक…………
अधिसूचना
वर्ष …. में लोक सभा का चुनाव करना निश्चित किया जा चुका है अतः आगामी लोक सभा चुनाव को देखते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि समस्त राज्य सरकार, केन्द्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी आगामी छः महीने तक चुनाव आयोग, भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्य करेंगे।
2. सभी राजनीतिक दलों से अपेक्षा की जाती है कि ये चुनाव से संबंधित नियमों का पालन करेंगे। चुनाव आचार संहिता आज से ही लागू की जाती है। इसका पालन न करने पर संबंधित राजनीतिक पार्टी के खिलाफ यथोचित कानूनी कार्यवाही की जायेगी।
3. चुनाव के दौरान किसी अधिकारी-कर्मचारी का स्थानान्तरण राज्य सरकारें चुनाव आयोग से परामर्श करने के बाद ही करेंगी।
आज्ञा से
ह॰ ……………….
(अ॰ ब॰ स॰)
मुख्य निर्वाचन आयुक्त
पृ॰ क्र॰ एफ ………., तद्दिनांक
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित—
- समस्त राज्य एवं केन्द्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव।
- समस्त राज्य एवं केन्द्र-शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक।
- समस्त राजनीतिक दल।
- वित्त एवं गृह सचिव, भारत सरकार।
- अधीक्षक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री के आगामी हिन्दी/अँग्रेजी संस्करण में प्रकाशन हेतु।
आज्ञा से
ह॰ ……………….
(अ॰ ब॰ स॰)
मुख्य निर्वाचन आयुक्त
उत्तर— 4 : उपसर्ग और प्रत्यय
यहाँ पर दिये गये शब्दों में से उपसर्ग और प्रत्यय निर्मित शब्दों को पृथक करना है।
- उपसर्ग— अध्यादेश, विख्यात, अभ्यास, अत्युत्तम, सुजन।
- प्रत्यय— त्यागी, परीक्षक, सरलता, पत्रकार, शिष्य।
उपसर्ग—
| शब्द | उपसर्ग + शब्द | प्रयुक्त उपसर्ग |
| अध्यादेश | अधि + आदेश (आ + देश) | अधि, आ |
| विख्यात | वि + ख्यात | वि |
| अभ्यास | अभि + आस | अभि |
| अत्युत्तम | अति + उत्तम (उत् + तम) | अति, उत् |
| सुजन | सु + जन | सु |
प्रत्यय—
| शब्द | शब्द + प्रत्यय | प्रयुक्त प्रत्यय |
| त्यागी | त्याग + ई | ई |
| परीक्षक | परीक्षा (परीक्ष्) + अक | अक |
| सरलता | सरल + ता | ता |
| पत्रकार | पत्र + कार | कार |
| शिष्या | शिष्य + आ | आ |
उत्तर— 5 : शब्द-विलोम
| क्र॰ स॰ | शब्द | विलोम |
| 1. | अनंत | अंत, सांत, ससीम |
| 2. | आविर्भाव | तिरोभाव, अवसान |
| 3. | कीर्ति | अपकीर्ति |
| 4. | नूतन | पुरातन |
| 5. | तरुण | वृद्ध |
| 6. | ह्रस्व | दीर्घ |
| 7. | पुरस्कार | दंड, तिरस्कार |
| 8. | सम्पन्न | विपन्न |
| 9. | शुष्क | आर्द्र, सरस, सिक्त, नम, गीला |
| 10. | उपेक्षा | अपेक्षा, अनपेक्षा |
उत्तर— 6 : वाक्य शुद्धि
- अशुद्ध : अच्छे कार्य में अनेकों संकट आते हैं।
- शुद्ध : अच्छे कार्य में अनेक संकट आते हैं।
- अशुद्ध : समाज के भिखारियों से कृपा करनी चाहिए।
- शुद्ध : समाज के भिखारियों पर कृपा करनी चाहिए।
- अशुद्ध : आपवाली किताब छत में पड़ी है।
- शुद्ध : आपकी किताब छत पर पड़ी है।
- अशुद्ध : ‘यामा’ महादेवी के काव्यों का संकलन है।
- शुद्ध : ‘यामा’ महादेवी वर्मा का काव्य-संकलन है।
- अशुद्ध : आप दस आदमी के रुकने का प्रबंध करो।
- शुद्ध : आप दस आदमियों के रुकने का प्रबंध करें।
उत्तर— 7 : वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द
| क्र॰ सं॰ | वाक्यांश या पदबंध | एक शब्द |
| (i) | गुरु के समीप रहने वाला विद्यार्थी | अंतेवासी |
| (ii) | जिस पर आक्रमण हुआ हो | आक्रांत |
| (iii) | जिसमें युद्ध करने की इच्छा हो | युयुत्सु |
| (iv) | उत्तराधिकार में प्राप्त सम्पत्ति | रिक्थ |
| (v) | जिसकी माप-तोल हो सके | परिमेय |
उत्तर — 8 : मुहावरे / लोकोक्तियाँ – अर्थ व वाक्य प्रयोग
(i) आग उगलना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— क्रोध में कठोर वचन बोलना
प्रयोग— आप जब देखो आग उगलते रहते हो, कभी तो शान्ति से बात किया करो।
(ii) उल्टी माला फेरना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— अनिष्ट की कामना करना
प्रयोग— अपने पड़ोसी की उन्नति देखकर अक्सर लोग उसके लिए उल्टी माला फेरते हैं।
(iii) नाक रगड़ना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— खुशामद करना
प्रयोग— तुम चाहे लाख नाक रगड़ लो, वह अधिकारी टस से मस नहीं होगा।
(iv) हवा लगना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— प्रभाव पड़ना
प्रयोग— अधिकतर भारतीयों को पश्चिमी सभ्यता की हवा लग गयी है।
(v) एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा
वर्ग— लोकोक्ति
अर्थ— एक के साथ दूसरा दोष
प्रयोग— एक तो पाकिस्तान में भुखमरी है, दूसरे वह केवल हथियार संग्रह के लिए अधिक धन खर्च करता है, इसे कहते हैं, ‘एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा’।
(vi) मुँह लगाना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— विशेष सम्पर्क में रखना
प्रयोग— ओछे लोगों को मुँह नहीं लगाना चाहिए।
(vii) जैसा देश वैसा भेष
वर्ग— लोकोक्ति
अर्थ— परिस्थिति के अनुसार ढल जाना
प्रयोग— रमेश शहर में रहकर भी गाँव के रीति-रिवाज नहीं भूला, गाँव जाने पर आज भी वह वहाँ की संस्कृति अपनाता है। इसलिए गाँव वाले कहते हैं, यह तो ‘जैसा देश वैसा भेष’ की तरह रहता है।
(viii) हजामत बनाना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— खूब पीटना
प्रयोग— भरे बाजार में लोगों ने चोर को पकड़कर उसकी हजामत बना दी।
(ix) जैसे नागनाथ वैसे साँपनाथ
वर्ग— लोकोक्ति
अर्थ— दो अवगुणी व्यक्तियों का एक समान होना
प्रयोग— सीमा विवाद पर चीन, भारत से बार-बार बात करता है, किन्तु स्वयं समझौते का उल्लंघन करता है, उसी प्रकार जम्मू-कश्मीर के मामले में पाकिस्तान वही कार्य करता है। इसलिए ‘जैसे नागनाथ वैसे साँपनाथ’।
(x) यह मुँह और मसूर की दाल
वर्ग— लोकोक्ति
अर्थ— अपनी औकात से बढ़कर बात करना
प्रयोग— क्षीणकाय राजेश अक्सर पहलवानों से लड़ने की बात करता है, सत्य कहा गया है कि ‘यह मुँह और मसूर की दाल’।
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