प्रतिवेदन (Report)

👤 By Pinwas IAS📅 13 September 2023⏱ 1 min read
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भूमिका

“प्रतिवेदन एक विवरण है जो किसी प्रश्न के उत्तर या जाँच के फलस्वरूप प्रस्तुत किया जाता है।”

प्रतिवेदन का शाब्दिक अर्थ है— ‘जाँच-पड़ताल के बाद तैयार किया गया विवरण।’

यह किसी पारम्परिक रूप में उच्च अधिकारी या अधिकारियों को प्रस्तुत किया जाता है। इसमें किसी निर्दिष्ट विषय पर पूरी पूछताछ की ठोस और पूरी जानकारी रहती है। साथ ही मामले को सुलझाने या उसका सुधार करने या उसके बारे में कुछ निष्कर्ष निकालकर संस्तुति या सुझाव दिया जाता है।

रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये किसी विशेष व्यक्ति या किसी समिति को नियुक्त किया जाता है। साथ ही प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की एक अवधि निर्धारित रहती है।

इस तरह प्रतिवेदन के सम्बन्ध में निम्न तथ्य निकलकर सामने आते हैं :

  • कोई विशिष्ट कारण या प्रसंग होता है जिसकी जाँच-पड़ताल आवश्यक हो।
  • प्रतिवेदन तैयार किये जाने के सम्बन्ध में किसी नियोक्ता द्वारा एक अधिकृत समिति/आयोग का गठन किया जाता है। यह ध्यान रहे कि समिति या आयोग के कई सदस्य भी हो सकते हैं और एक-सदस्यीय भी। यदि बहु-सदस्यीय आयोग या समिति हो तो उसका एक अध्यक्ष होता है।
  • यह समिति या आयोग या व्यक्ति एक निश्चित समय-सीमा के भीतर प्रश्नगत प्रकरण की जाँच कर उसका प्रतिवेदन तैयार करता है।
  • अपने जाँच-पड़ताल, साक्ष्य, सुझाव आदि के साथ प्रतिवेदन (Report) को नियोक्ता के समक्ष प्रस्तुत करता है।

प्रतिवेदन के प्रकार

  • औपचारिक प्रतिवेदन
  • अनौपचारिक प्रतिवेदन

औपचारिक प्रतिवेदन

  • ये प्रतिवेदन सरकार या किसी संस्था या किसी विशिष्ट अधिकारी के आदेशानुसार किसी कार्य-विशेष के बारे में तैयार किया जाता है। इसमें निष्कर्षों के साथ-साथ सुझाव और संस्तुतियाँ भी दी जाती है।

  अनौपचारिक प्रतिवेदन ये प्रतिवेदन एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्तियों के पास भेजे जानेवाले पत्रों की भाँति तैयार किये जाते हैं। इसके लेखन में कोई निश्चित नियम नहीं होते है।

प्रतिवेदन के विषय-क्षेत्र

  1. किसी कार्यालय अथवा संस्था में अनेक विषयों से सम्बन्धित जो पूछताछ, जाँच, छानबीन की जाने का विवरण प्रतिवेदन है।
  2. विद्यालय या कॉलेज स्तर पर जो विभिन्न कार्यक्रम और समारोह आदि के पूर्ण हो जाने के बाद क्रमवार उसका विवरण प्रस्तुत किया जाता है वह प्रतिवेदन है।
  3. किसी क्षेत्र में हुए दंगे-फसाद या विवाद का विवरण या निष्कर्ष देना प्रतिवेदन है।
  4. किसी भी विभाग द्वारा प्रस्तुत जाँच सम्बन्धित विवरण भी प्रतिवेदन क्षेत्र के अंतर्गत आते है।

प्रतिवेदन की विशेषताएँ

  1. प्रतिवेदन प्रामाणिक एवं तथ्यात्मक होते हैं।
  2. प्रतिवेदन किसी एक विषय या घटना पर केन्द्रित होता है।
  3. प्रतिवेदन में निष्पक्ष और तटस्थ विवेचन होता है।
  4. प्रतिवेदन का मंतव्य या निष्कर्ष या संस्तुति होनी आवश्यक है।
  5. इसकी भाषा सरल, स्पष्ट और सहज होती है।
  6. यह पक्षपात रहित एवं तर्कपूर्ण होता है।
  7. प्रतिवेदन संक्षिप्त होता है साथ ही अनावश्यक बातों का प्रयोग नहीं होना चाहिए।

प्रतिवेदन और रिपोर्ट

  1. समाचार पत्रों, दूरदर्शन या आकाशवाणी के रिपोर्टर द्वारा भेजी जाने वाली घटना रिपोर्ट कहलाती है न कि प्रतिवेदन।
  2. रिपोर्ट सूचनात्मक होती हैं और रिपोर्ट में किसी विशेष योग्यता की अपेक्षा नहीं होती है।
  3. प्रतिवेदन में मामले की जाँच पर आधारित विवरण, सुझाव और निष्कर्ष आदि तथ्य सम्मिलित होते है। साथ ही प्रतिवेदक को उस विषय से सम्बन्धित जाँच करने में सक्षम होना चाहिए।

प्रतिवेदन के मुख्य तत्त्व

  1. निश्चित अवधि : प्रतिवेदन को निश्चित अवधि के भीतर प्रस्तुत करना होता है क्योंकि इसमें विषय का सामयिक महत्त्व होता है।
  2. प्रमाण और तथ्य : प्रतिवेदन की प्रामाणिकता दिए गए साक्ष्यों तथा तथ्यों पर ही निर्भर है।
  3. घटना या विशेष स्थिति : यह प्रतिवेदन का प्रमुख तत्त्व है। जब किसी विवादित प्रश्न, दुर्घटना, समस्या, स्थिति आदि की जानकारी पर कार्रवाई करनी होती है तो प्रतिवेदन लिखा जाता है।
  4. सूक्ष्म निरीक्षण और पूर्ण जाँच-पड़ताल : प्रतिवेदन के माध्यम से ही समस्या के मूल रूप से जाना जा सकता है क्योंकि समस्याओं के महत्त्वपूर्ण पक्ष को इसके बिना उजागर करना कठिन हो जाता है।
  5. मनोनीत प्रतिवेदक : किसी भी घटना या स्थिति की जानकारी करने के लिए किसी व्यक्ति को मनोनीत किया जाता है ताकि प्रतिवेदन का सही प्रारूप प्राप्त किया जा सके।
  6. सुझाव और सिफारिशें : सुझाव एवं सिफारिशों के माध्यम से ही प्रतिवेदक अपने विचारों को अभिव्यक्त करता/करती है।

प्रतिवेदन लेखन प्रक्रिया

  1. प्रतिवेदन प्रक्रिया के प्रथम चरण में संबद्ध विषय का गहन अध्ययन करते हुए उसके उद्देश्य को ध्यान में रखना चाहिए।
  2. उद्देश्यों के अनुरूप कार्य की रूपरेखा बनानी चाहिए।
  3. प्रतिवेदन सम्बन्धी विषय में सम्बद्ध तथ्य, चित्र, सूचना, आँकड़ों आदि के प्रमाण एकत्रित करना। निष्कर्ष और सिफारिशों सुझावों या अनुशंसाओं की रूपरेखा तैयार करते हुए एक कच्चा प्रारूप तैयार करना चाहिए।
  4. अंत में सभी सम्बद्ध कागजातों को शामिल करते हुए प्रतिवेदन का टंकण कराके, व्यक्ति या समिति के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।

महत्त्व

  • प्रतिवेदन औपचारिक अथवा अनौपचारिक दोनों प्रकार का हो सकता है।
  • औपचारिक प्रतिवेदन प्रायः किसी संस्था अथवा उच्चाधिकारी के आदेशानुसार किसी प्रकरण विशेष से जुड़े होते हैं, जिसमें निष्कर्ष, सुझाव तथा संस्तुतियाँ इत्यादि शामिल होती हैं। कभी-कभी किसी दुर्घटना इत्यादि के सन्दर्भ में इसी जाँच रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही की जाती है अतः उनकी निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं।
  • अनौपचारिक प्रतिवेदन प्रायः नागरिक जीवन अथवा किसी विद्यालय इत्यादि में आयोजित होने वाले किसी कार्यक्रम इत्यादि से संदर्भित होते हैं जिसमें सुझाव अथवा संस्तुतियों की अपेक्षा नहीं होती बल्कि उसमें कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु एक रूपरेखा प्रस्तुत की जाती है।

प्रतिवेदन के अंग

  1. पूर्व कथन— समिति की आवश्यकता, समिति के सदस्य, समिति का कार्यकाल, कितनी बैठक हुई आदि।
  2. जाँच की पद्धति— किन व्यक्तियों ने किन-किन जगहों पर जाकर तथ्य और आँकड़े एकत्र किये गये।
  3. निष्कर्ष— क्या और किनका दोष। जिम्मेदारी या उत्तरदायित्व का निश्चयन
  4. वर्तमान या भविष्य के लिये सुझाव

प्रारूप

प्रतिवेदन का प्रारूप

विषय : ……. …….. …….. ……… ………. ……….. ………… ……… ……… ……… ………. …… …… ……. …… …….. …….. ……… ……… के सम्बन्ध में जाँच का प्रतिवेदन।

जाँच का विवरण : समिति द्वारा ……. …….. …….. ……… ………. ……….. ………… ……… ……… ……… ………. …… …… ……. …… …….. …….. ……… ……. ……… …….. ………।

2. ……. …….. …….. ……… ………. ……….. ………… ……… ……… ……… ………. …… …… ……. …… …….. …….. ……… ……. ……… …….. ……… ………।

3. ……. …….. …….. ……… ………. ……….. ………… ……… ……… ……… ………. …… …… ……. …… …….. …….. ……… ……. ……… …….. ……… ………।

अभिमत : समिति का अभिमत है कि ……. …….. …….. ……… ………. ……….. ………… ……… ……… ……… ………. …… …… ……. …… …….. …….. ……… ……. ……… …….. ……… ………।

निष्कर्ष : समिति इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि ……. …….. …….. ……… ………. ……….. ………… ……… ……… ……… ………. …… …… ……. …….. ……… ………।

सुझाव : समिति द्वारा …… के सम्बन्ध में आवश्यक सुझाव यह है कि ……. …….. …….. ……… ………. ……….. ………… ……… ……… ……. ……… …….. ……… ………।

1. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

2. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

अध्यक्ष

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

उदाहरण

उदाहरण – 1

नमूना

लखनऊ की गंदी बस्तियों के सर्वेक्षण से सम्बन्धित प्रतिवेदन

दिनांक ……. को लखनऊ में मुख्यमंत्री द्वारा लखनऊ की गंदी बस्तियों के सर्वेक्षण हेतु गठित पाँच सदस्यों की समिति बस्तियों के सर्वेक्षण पश्चात् निम्नलिखित निष्कर्ष पर पहुँची है—

  1. 1. लखनऊ में इस समय कुल सं॰ …. बस्तियाँ गंदी हैं।
  2. 2. इन सं॰ …. बस्तियों में से सं ॰ …. बस्तियाँ अनधिकृत हैं, जबकि झुग्गी-झोंपड़ी बस्ती के रूप में हैं।
  3. 3. इन बस्तियों के अविकसित व गंदे रहने के मुख्य कारण अधोलिखित हैं—
  1. क. भूगत जल मल-प्रवाह की व्यवस्था न होना।
  2. ख. नगर निगम की ओर से सफाई के लिए कर्मचारी कम हैं।
  3. ग. पानी निकालने की व्यवस्था दूषित है।
  4. घ. सार्वजनिक शौचालय और कूड़ा-निपटान का अभाव है।
  5. ङ. व्यवस्थित सड़कें और नालियों की व्यवस्था नहीं है।

सुझाव :

  1. 1. इन बस्तियों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखने का दायित्व नगर निगम का है।
  2. 2. वहाँ पर सार्वजनिक शौचालय, कूड़ाघर, पानी निकासी और पक्की सड़कों का निर्माण यथाशीघ्र कराया जाए।

1. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

4. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

2. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

5. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

3. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

संयोजक

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

संलग्नक : (3)

  1. 1. साक्षियों के पत्र
  2. 2. बस्तियों की फोटो
  3. 3. सं॰ …. बस्तियों की विवरण पुस्तिका

उदाहरण – 2

नमूना

वित्त विभाग, लखनऊ नगर निगम के लेखा अधिकारी की जाँच पर आधारित।

दिनांक ……. को लेखा अधिकारी श्री कखग के विरुद्ध कथित भ्रष्टाचार के आरोप की जाँच के लिए नियुक्त त्रि-सदस्यीय समिति मामले की पूर्णतः छानबीन के पश्चात इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि श्री कखग लेखा अधिकारी सर्वथा निर्दोष हैं। श्री कखग पर लगाए गये आरोपों की सूची एवं निष्कर्ष अधोलिखित हैं—

  1. 1. पहला आरोप – अशोक मार्ग मरम्मत में खर्च रुपये का सही-सही विवरण न उपलब्ध कराया जाना।

निष्कर्ष – लेखा अधिकारी द्वारा जमा किये गये वित्तीय लेन-देन का विवरण सही और लेखा विभाग द्वारा प्रमाणित है।

  1. 2. दूसरा आरोप – चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी की नियुक्ति बिना साक्षात्कार एवं अयोग्यता के आधार पर करना।

निष्कर्ष – लेखा अधिकारी द्वारा जमा किये गये साक्षात्कार समिति की रिपोर्ट और नामित व्यक्ति की शैक्षिक अर्हता प्रमाण शत-प्रतिशत सत्य है।

अंतिम निष्कर्ष – श्री कखग पर लगाये गये सभी आरोप निराधार हैं।

अभिमत – आरोपकर्ता को चेतावनी देना आवश्यक है। जिससे वैयक्तिक चरित्र हनन की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन न मिले।

1. सदस्य

ह॰ …….

(नाम …..)

दि॰ ……

2. सदस्य

ह॰ …….

(नाम …..)

दि॰ ……

3. सदस्य

ह॰ …….

(नाम …..)

दि॰ ……

अध्यक्ष

ह॰ …….

(नाम …..)

दि॰ ……

संलग्नक : (3)

  1. 1. आरोप की प्रति 1 और 2
  2. 2. निविदा-विवरणिका की प्रतिलिपि
  3. 3. चतुर्थ कर्मचारी के शैक्षिक प्रमाण-पत्र
  4. 4. लेखा विभाग रिपोर्ट

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PYQs

UP RO/ARO (Mains) – 2010 (SPL.)

प्रश्न— प्रतिवेदन की परिभाषा देते हुए उसे सोदाहरण समझाइए।

उत्तर—

परिभाषा— “प्रतिवेदन एक विवरण है जो किसी प्रश्न के उत्तर या जाँच के फलस्वरूप प्रस्तुत किया जाता है।”

प्रतिवेदन का शाब्दिक अर्थ है— ‘जाँच-पड़ताल के बाद तैयार किया गया विवरण।’

प्रतिवेदन का उदाहरण

विषय : एक्सप्रेस सं॰ …… के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के सम्बन्ध में जाँच का प्रतिवेदन।

जाँच का विवरण : समिति के द्वारा दुर्घटनास्थल का दौरा किया गया, वहाँ ट्रेन की यथास्थिति की जाँच की गयी, आस-पास के गाँव के उन लोगों से, जो दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शी से उनसे बयान लिये गये। अंत में समिति का अभिमत यह रहा कि—

1. ट्रेन की गति, सामान्य मानक गति से काफी अधिक थी, जिसके कारण उक्त घटना घटी।

2. दुर्घटना का मुख्य कारण, रेलवे पुलिया का कमजोर होना था, जो कि रेल की तीव्र गति के दबाव को सहन नहीं कर सकी।

3. प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से स्पष्ट था कि दुर्घटना के काफी समय बाद तक भी रेलवे, पुलिस व प्रशासन का कोई उच्च अधिकारी घटनास्थल पर नहीं था, ना ही घायलों के उपचार की कोई उचित व्यवस्था थी।

निष्कर्ष : समिति इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि दुर्घटना का मुख्य कारण, पुरानी पुलिया के रख-रखाव में उचित देख रेख का अभाव होना है। इसमें किसी आतंकी साजिश या दुर्भाग्वना होना नहीं पाया गया है।

सुझाव : समिति द्वारा …… के सम्बन्ध में आवश्यक सुझाव यह है कि—

1. ट्रेन के लोको पाइलट को स्पष्ट निर्देश हो की वे निर्धारित गति से ही ट्रेन चलाएँ, इसका अनुपालन न करने पर दण्ड का विधान किया जाए।

2. रेलवे के अवसंरचना को यथाशीघ्र उन्नत बनाया जाया, इसके लिए निर्धारित समय सीमा का पालन किया जाए। ऐसा न होने पर लेट-लतीफी के लिए जिम्मेदारी तय की जाए और दण्ड का भी विधान किया जाए।

3. रेलवे पुलिस, पुलिस, स्वास्थ्य-कार्मिकों और प्रशासन को ऐसी आपात स्थिति के लिए विशेष ट्रेनिंग देकर तैयार किया जाए।

1. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

2. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

अध्यक्ष

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

UP RO/ARO (Mains) – 2010

प्रश्न— प्रतिवेदन की परिभाषा देते हुए उसे सोदाहरण समझाइए।

उत्तर—

परिभाषा— “प्रतिवेदन एक विवरण है जो किसी प्रश्न के उत्तर या जाँच के फलस्वरूप प्रस्तुत किया जाता है।”

प्रतिवेदन का शाब्दिक अर्थ है— ‘जाँच-पड़ताल के बाद तैयार किया गया विवरण।’

प्रतिवेदन का उदाहरण

विषय : एक्सप्रेस सं॰ …… के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के सम्बन्ध में जाँच का प्रतिवेदन।

जाँच का विवरण : समिति के द्वारा दुर्घटनास्थल का दौरा किया गया, वहाँ ट्रेन की यथास्थिति की जाँच की गयी, आस-पास के गाँव के उन लोगों से, जो दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शी से उनसे बयान लिये गये। अंत में समिति का अभिमत यह रहा कि—

1. ट्रेन की गति, सामान्य मानक गति से काफी अधिक थी, जिसके कारण उक्त घटना घटी।

2. दुर्घटना का मुख्य कारण, रेलवे पुलिया का कमजोर होना था, जो कि रेल की तीव्र गति के दबाव को सहन नहीं कर सकी।

3. प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से स्पष्ट था कि दुर्घटना के काफी समय बाद तक भी रेलवे, पुलिस व प्रशासन का कोई उच्च अधिकारी घटनास्थल पर नहीं था, ना ही घायलों के उपचार की कोई उचित व्यवस्था थी।

निष्कर्ष : समिति इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि दुर्घटना का मुख्य कारण, पुरानी पुलिया के रख-रखाव में उचित देख रेख का अभाव होना है। इसमें किसी आतंकी साजिश या दुर्भाग्वना होना नहीं पाया गया है।

सुझाव : समिति द्वारा …… के सम्बन्ध में आवश्यक सुझाव यह है कि—

1. ट्रेन के लोको पाइलट को स्पष्ट निर्देश हो की वे निर्धारित गति से ही ट्रेन चलाएँ, इसका अनुपालन न करने पर दण्ड का विधान किया जाए।

2. रेलवे के अवसंरचना को यथाशीघ्र उन्नत बनाया जाया, इसके लिए निर्धारित समय सीमा का पालन किया जाए। ऐसा न होने पर लेट-लतीफी के लिए जिम्मेदारी तय की जाए और दण्ड का भी विधान किया जाए।

3. रेलवे पुलिस, पुलिस, स्वास्थ्य-कार्मिकों और प्रशासन को ऐसी आपात स्थिति के लिए विशेष ट्रेनिंग देकर तैयार किया जाए।

1. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

2. सदस्य

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

अध्यक्ष

ह॰ ………

(नाम ….)

दि॰ …..

UP RO/ARO (Mains) – 2013

प्रश्न— विज्ञप्ति और प्रतिवेदन में पार्थक्य रेखांकित कीजिए।

उत्तर—
क्र॰ सं॰सरकारी-पत्रअर्ध-सरकारी पत्र
1.लोक-विषयक मामलों, शासकीय निर्णयों, सूचनाओं और अन्य सांविधिक आदेशों को सर्वसाधारण के सूचनार्थ राजकीय गजट में प्रकाशित पत्र को अधिसूचना या विज्ञप्ति कहते हैं।प्रतिवेदन एक विवरण है जो किसी प्रश्न के उत्तर या जाँच के फलस्वरूप प्रस्तुत किया जाता है।
2. इसका प्रयोग नियुक्ति, अवकाश, स्थानान्तरण, साक्षात्कार, अधिकारी की प्रतिनियुक्ति, भूमि प्राप्ति इत्यादि को राजपत्रित करने तथा विधि, विधायन, अधिनियम और आदेश को प्रवर्तित करने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार की घटनाओं यथा दंगा, भाषा सम्बन्धित विवाद, अल्पसंख्यक, सामाजिक वर्गों से सम्बन्धित स्थितियों के अध्ययन तथा मंत्री एवं लोक सेवकों अथवा किसी अन्य व्यक्ति पर लगे आरोप से सम्बन्धित अध्ययन रिपोर्ट के रूप में किया जाता है।
3.सभी प्रकार की विज्ञप्तियाँ सर्वसाधारण के सूचनार्थ होती हैं।किसी घटना के परिप्रेक्ष्य में विभिन्न प्रकार की सम्बन्धित जानकारी के आधार पर विशिष्ट उद्देश्य के लिए तैयार किया जाता है।
4. इसमें प्रेषक, सम्बोधन और अधोलेख/स्वनिर्देश (भवदीय) का प्रयोग नहीं होता है। इसे तृतीय पुरुष की भाषा में अप्रत्यक्ष अनुकथन के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। इसमें सम्बन्धित घटना के सम्बन्ध में तर्क-संगत साक्ष्य और उनसे जुड़े विश्लेषण मुख्य रूप से शामिल होते हैं। इसमें पक्ष और विपक्ष में उल्लिखित साक्ष्यों वक्तव्यों और अभिमतों को आवश्यक रूप से शामिल किया जाता है।

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