प्रश्न पत्र
हल
1 (क) :
समूची जनता को समान धरातल पर खड़ा करना तभी संभव है जब—
- साझा उद्देश्य स्पष्ट हो।
- विकास की विभिन्न अवस्थाओं में खड़ी जनता के लिए उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप विविध कार्यक्रम बनाए जाएँ।
- सभी को एक ही दिशा में ले जाने वाली मूल्य‑एकता और लक्ष्य‑एकता स्थापित की जाए।
अर्थात्, उद्देश्य की स्पष्टता और कार्यक्रमों की विविधता मिलकर जनता को समान धरातल पर ला सकती है।
1 (ख) : रेखांकित पंक्ति
“अटकलपच्चू सिद्धांत कायम कर लेना।” का आशय है—
बिना ठोस आधार, बिना गहन विचार और बिना वास्तविक परिस्थितियों को समझे केवल अनुमान और कल्पना के आधार पर कोई सिद्धांत बना लेना।
लेखक चेतावनी देता है कि ऐसे अनुमानित, अस्थिर और अपरिपक्व सिद्धांतों पर कार्यक्रम बनाना कभी भी स्थायी सफलता नहीं देता।
1 (ग) : रेखांकित पंक्ति
“पशु-सामान्य ……. आसन पर बैठाना।” का आशय है—
- मनुष्य में जो निम्न स्तर का स्वार्थ, संकीर्णता और केवल व्यक्तिगत लाभ की प्रवृत्ति होती है, वह पशु‑समान है।
- समाज का वास्तविक लक्ष्य यह होना चाहिए कि मनुष्य को इस स्वार्थी, निम्न धरातल से ऊपर उठाया जाए।
- उसे उच्च मानवीय मूल्यों, नैतिकता, सहानुभूति, उदारता और व्यापक मानवहित की भावना से युक्त किया जाए।
अर्थात्, मनुष्य को उसकी श्रेष्ठतम अवस्था मनुष्यता पर प्रतिष्ठित करना ही समाज का परम लक्ष्य है।
1 (घ) : हिंदू‑मुस्लिम एकता : साध्य नहीं साधन
लेखक के अनुसार—
- हिंदू‑मुस्लिम एकता स्वयं अंतिम लक्ष्य नहीं है।
- यह तो केवल एक उपाय (साधन) है उस बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने का, जो है— समस्त मानव को स्वार्थी, संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठाकर मनुष्यता के उच्च आसन पर बैठाना।
- यदि केवल एकता को ही लक्ष्य मान लिया जाए, तो उद्देश्य सीमित हो जाएगा।
- वास्तविक साध्य है मानव‑उन्नयन और एकता उस उन्नयन की दिशा में आवश्यक कदम है।
2 (क) : शीर्षक
‘श्रम का महत्त्व’ या ‘शारीरिक और मानसिक श्रम’
2 (ख) : श्रम का महत्त्व
गद्यांश के अनुसार—
- शारीरिक श्रम से शरीर स्वस्थ रहता है, माँसपेशियाँ सुदृढ़ होती हैं और भोजन ठीक से पचता है।
- श्रम करने वाले लोग दीर्घायु होते हैं, जबकि आलसी लोग अनेक रोगों से घिर जाते हैं।
- मानसिक श्रम से बौद्धिक विकास होता है; व्यक्ति गंभीर तथ्यों को सहज ग्रहण कर लेता है।
- मानसिक रूप से श्रमशील व्यक्ति विषम परिस्थितियों में भी घबराता नहीं, बल्कि साहसपूर्वक समाधान खोज लेता है।
- हमारे ऋषि‑मुनियों ने मानसिक श्रम को अत्यंत महत्त्व दिया; उपनिषद् साहित्य इसी का परिणाम है।
अर्थात्, श्रम मनुष्य को शारीरिक रूप से स्वस्थ और मानसिक रूप से समर्थ बनाता है।
2 (ग) : संक्षेपण
शारीरिक श्रम से मनुष्य स्वस्थ और दीर्घजीवी होता है। श्रमविहीन व्यक्ति आलस्ययुक्त और व्याधियुक्त होता है। मानसिक श्रम से बौद्धिक क्षमता बढ़ती है, समस्याओं का समाधान सरल हो जाता है और व्यक्ति साहसी बनता है। हमारे ऋषि‑मुनियों ने मानसिक श्रम को महत्त्व दिया, जिसके फलस्वरूप उपनिषद् जैसे महान ग्रंथों की रचना हुई।
उत्तर — 3 : अर्ध-सरकारी पत्र
“अर्ध-सरकारी पत्र किसी कार्यालय के अधिकारी द्वारा किसी अन्य अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से लेकिन सरकारी कार्य हेतु प्रेषित किया जाता है।”
ये पत्र प्राय: सम्बन्धित कार्याधिक्य अथवा किसी अन्य कारण से समय पर वांछित सूचना न मिलने और कार्यालय की ओर से अनुस्मारक भेजने पर भी उचित उत्तर प प्राप्त होने की दशा में भेंजे जाते हैं।
इसका उद्देश्य किसी कार्य सम्पादन की ओर विशेष ध्यान आकर्षित कर सम्बन्धित सूचना का सम्प्रेषण / प्राप्त करना होता है।
ये पत्र किसी बात की ओर विशेष ध्यान दिलाने, आपस में सलाह-मशविरा करने, विचारों या सूचनाओं का आदान-प्रदान करने, कोई सूचना देने या किसी प्रकार का स्पष्टीकरण देने या चाहने की स्थिति में लिखे जाते हैं।
उदाहरण—
अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ ……….
च॰ छ॰ ज॰,
स्वास्थ्य सचिव,
स्वास्थ्य मंत्रालय,
उ॰ प्र॰ सरकार, लखनऊ।
उत्तर प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय, अनुभाग- …
लखनऊ, दिनांक ……..
विषय : उत्तर प्रदेश में कुपोषण से जूझते बच्चों के इलाज के संदर्भ में।
प्रिय श्री क॰ ख॰ ग॰ जी,
मुझसे, आपसे यह कहने की अपेक्षा की गयी है कि पूर्व प्रेषित पत्र सं॰ – …….. के संदर्भ में यथाशीघ्र निर्णय लेने का कष्ट करें जिससे उत्तर प्रदेश में 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों में कुपोषण की व्याप्त समस्या का निराकरण शीघ्र हो सके। इस सम्बन्ध में पूर्ण विवरण को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाये। प्रदेश में लगभग ….. लाख बच्चे अति कुपोषण तथा कुछ अल्प पोषण की समस्या से ग्रस्त है।
2. इन बच्चों के इलाज के संदर्भ में प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं हो पा रहे हैं।
3. ऐसे में केन्द्र सरकार से सहायता अपेक्षित है।
4. अतः आपसे अनुरोध करना है कि तत्काल सहायता स्वीकृत करने की कृपा करें।
सद्भावनाओं सहित,
भवदीय
ह॰ …………
(च॰ छ॰ ज॰)
3 (ख) : लोकसभा चुनाव हेतु अधिसूचना का प्रारूप
भारत सरकार शासन
निर्वाचन आयोग
निर्वाचन सदन, अशोक रोड
नई दिल्ली, 110001
संख्या………
नई दिल्ली, दिनांक…………
अधिसूचना
वर्ष …. में लोक सभा का चुनाव करना निश्चित किया जा चुका है अतः आगामी लोक सभा चुनाव को देखते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि समस्त राज्य सरकार, केन्द्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी आगामी छः महीने तक चुनाव आयोग, भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्य करेंगे।
2. सभी राजनीतिक दलों से अपेक्षा की जाती है कि ये चुनाव से संबंधित नियमों का पालन करेंगे। चुनाव आचार संहिता आज से ही लागू की जाती है। इसका पालन न करने पर संबंधित राजनीतिक पार्टी के खिलाफ यथोचित कानूनी कार्यवाही की जायेगी।
3. चुनाव के दौरान किसी अधिकारी-कर्मचारी का स्थानान्तरण राज्य सरकारें चुनाव आयोग से परामर्श करने के बाद ही करेंगी।
आज्ञा से
ह॰ ……………….
(अ॰ ब॰ स॰)
मुख्य निर्वाचन आयुक्त
पृ॰ क्र॰ एफ ………., तद्दिनांक
प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित—
- समस्त राज्य एवं केन्द्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव।
- समस्त राज्य एवं केन्द्र-शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक।
- समस्त राजनीतिक दल।
- वित्त एवं गृह सचिव, भारत सरकार।
- अधीक्षक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री के आगामी हिन्दी/अँग्रेजी संस्करण में प्रकाशन हेतु।
आज्ञा से
ह॰ ……………….
(अ॰ ब॰ स॰)
मुख्य निर्वाचन आयुक्त
उत्तर— 4 : उपसर्ग और प्रत्यय
यहाँ पर दिये गये शब्दांशों में से उपसर्ग और प्रत्यय की पहचान करके उनसे एक-एक शब्द की रचना करनी है।
- उपसर्ग— परा, सम्, दुर्, अध
- प्रत्यय— अक, मान, इम, चित्, इया
- अपि— का प्रयोग उपसर्ग और प्रत्यय दोनो तरह से हो सकता है; जैसे— अपिगीर्ण (अपि + गीर्ण), अद्यापि (अद्य + अपि)।
उपसर्ग—
| उपसर्ग | निर्मित शब्द |
| परा | पराकाष्ठा |
| सम् | संकर्षण |
| दुर् | दुर्वचन |
| अध | अधकचरा |
| अपि | अपिधान |
प्रत्यय—
| प्रत्यय | निर्मित शब्द |
| अक | अधीक्षक |
| मान | श्रीमान |
| इम | स्वर्णिम |
| चित् | कदाचित् |
| इया | रसोइया |
उत्तर— 5 : शब्द-विलोम
| क्र॰ स॰ | शब्द | विलोम |
| 1. | अभिज्ञ | अनभिज्ञ, अज्ञ |
| 2. | अपसरण | अभिसरण |
| 3. | बाह्य | आभ्यंतर |
| 4. | ज्येष्ठ | कनिष्ठ |
| 5. | स्थावर | जंगम |
| 6. | धृष्ट | विनम्र, विनीत, नम्र |
| 7. | निषिद्ध | विहित |
| 8. | गौरव | लाघव |
| 9. | परोक्ष | अपरोक्ष, प्रत्यक्ष |
| 10. | ह्रास | वृद्धि, विकास |
उत्तर— 6 : वाक्य शुद्धि
- अशुद्ध : रमा पढ़ती-पढ़ती सो गयी
- शुद्ध : रमा पढ़ते-पढ़ते सो गयी।
- अशुद्ध : सिवाय आपको छोड़कर सभी आये थे।
- शुद्ध : आपके सिवाय सभी आये थे।
- अशुद्ध : शिवा और उमा आज मेरे घर आएगा।
- शुद्ध : शिवा और उमा आज मेरे घर आएँगी।
- अशुद्ध : मुझे केवल सौ रुपये मात्र मिले।
- शुद्ध : मुझे केवल सौ रुपये मिले।
- अशुद्ध : गुप्तकालीन समय में सभी लोग सुखी थे।
- शुद्ध : गुप्तकाल में सभी लोग सुखी थे।
उत्तर— 7 : वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द
| क्र॰ सं॰ | वाक्यांश या पदबंध | एक शब्द |
| (i) | क्षणभर में नष्ट हो जाने वाला | क्षणभंगुर |
| (ii) | जो शब्दों द्वारा व्यक्त न किया जा सके | अनिर्वचनीय, अकथनीय |
| (iii) | पैरों से लेकर सिर तक | आपादमस्तक |
| (iv) | किसी पर विजय पाने की इच्छा रखने वाला | जिगीषु |
| (v) | मध्यरात्रि का समय | निशीथ |
उत्तर — 8 : मुहावरे / लोकोक्तियाँ – अर्थ व वाक्य प्रयोग
(i) गोटी बैठाना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— युक्ति सफल होना
प्रयोग— विराट कोहली ने श्रीलंका के विरुद्ध खेले गए मैच में ऐसी गोटी बैठायी कि एक दिवसीय शृंखला भारत ने 3-0 से जीत ली।
(ii) घाट-घाट का पानी पीना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— घूम फिर कर अनुभव प्राप्त करना
प्रयोग— साम्प्रदायिक पंचाट के सन्दर्भ में अंग्रेजों की चाल असफल रही, उन्हें पता चल गया महात्मा गाँधी घाट-घाट का पानी पिये हैं।
(iii) छठी का दूध याद आना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— बहुत कष्ट होना
प्रयोग— कुकृत्यों के कारण मिली सजा इतनी कठोर होती है कि छठी का दूध याद आ जाता है।
(iv) छाती पर साँप लोटना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— ईर्ष्या होना
प्रयोग— भारत की उन्नति देखकर पाकिस्तान की छाती पर साँप लोटता है।
(v) तिल का ताड़ बनाना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— छोटी-सी बात को बढ़ा देना
प्रयोग— छोटी सी घटना को मीडिया वाले अपने फायदे के लिए तिल का ताड़ बना कर पेश करते हैं।
(vi) पगड़ी उछालना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— बेइज्जत करना
प्रयोग— चुनाव के दौरान प्रत्येक राजनीतिक दल, प्रतिद्वन्द्वी दल की पगड़ी उछालने में लगे रहते हैं।
(vii) साँप सूँघ जाना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— गुप-चुप हो जाना
प्रयोग— भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी को घूस लेते हुए सतर्कता टीम ने रंगे हाथ पकड़ा। इस पर कर्मचारी को साँप सूँघ गया।
(viii) मेंढकी को जुकाम होना
वर्ग— मुहावरा
अर्थ— अयोग्य होने पर योग्य होने का नखरा
प्रयोग— बहुत से ऐसे प्रतियोगी होते हैं, जो उस विषय के जानकार नहीं होते, फिर भी वे मेंढकी को जुकाम होने का अहसास कराते हैं।
(ix) आधा तीतर, आधा बटेर
वर्ग— लोकोक्ति
अर्थ— बेमेल मिश्रण
प्रयोग— लंदन से लौटे रघु को लुंगी और कोट पहना देखकर उसके पिता बोले यह क्या आधा तीतर, आधा बटेर बने हो।
(x) नक्कारखाने में तूती की आवाज
वर्ग— लोकोक्ति
अर्थ— बड़ों के रहते छोटों की बात नहीं मानी जाती या महत्त्वहीन होती है
प्रयोग— अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेपाल की बात इस प्रकार अनसुनी कर दी गयी जैसे नक्कारखाने में तूती की आवाज।
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