अर्ध-सरकारी पत्र

👤 By Pinwas IAS📅 8 September 2023⏱ 1 min read
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भूमिका

“अर्ध-सरकारी पत्र किसी कार्यालय के अधिकारी द्वारा किसी अन्य अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से लेकिन सरकारी कार्य हेतु प्रेषित किया जाता है।”

ये पत्र प्राय: सम्बन्धित कार्याधिक्य अथवा किसी अन्य कारण से समय पर वांछित सूचना न मिलने और कार्यालय की ओर से अनुस्मारक भेजने पर भी उचित उत्तर प प्राप्त होने की दशा में भेंजे जाते हैं।

इसका उद्देश्य किसी कार्य सम्पादन की ओर विशेष ध्यान आकर्षित कर सम्बन्धित सूचना का सम्प्रेषण / प्राप्त करना होता है।

ये पत्र किसी बात की ओर विशेष ध्यान दिलाने, आपस में सलाह-मशविरा करने, विचारों या सूचनाओं का आदान-प्रदान करने, कोई सूचना देने या किसी प्रकार का स्पष्टीकरण देने या चाहने की स्थिति में लिखे जाते हैं।

विशेषताएँ

१. अर्ध-सरकारी पत्र एक अधिकारी द्वारा दूसरे अधिकारी को लिखा जाता है न कि एक दूसरे विभाग / कार्यालय को।

२. यह पत्र तब लिखा जाता है जब मामला गोपनीय हो या शीघ्र कार्यवाही करना हो या किसी विशेष मामले पर प्रेष्य का ध्यान आकर्षित करना हो।

३. अर्ध-सरकारी पत्र प्राय: समान स्तर के अधिकारियों के मध्य लिखे जाते हैं।

४. यह पत्र किसी अधिकारी विशेष के नाम से प्रेषित होता है। अत: यह पत्र वह अधिकारी स्वयं खोलता हैं जिसके नाम से भेजा गया है न कि कोई अन्य।

५. कभी-कभी यह पत्र गोपनीय भी होता है।

६. यह पत्र व्यक्तिगत शैली में लिखा जाता है; अर्थात् उत्तम पुरुष और द्वितीय पुरुष में — ‘मैं’ और ‘आप’। अन्य पुरुष शैली का प्रयोग नहींकिया जाता है।

७. आमतौर पर इसमें औपचारिकता नहीं बरती जाती है।

८. ये नितांत आत्मीय ढंग से लिखे गये सरकारी-पत्र होते हैं। इसमें अभिवादन के लिए ‘प्रिय श्री’; ‘प्रिय महोदय’ जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।

९. अर्ध-सरकारी पत्र गैर-सरकारी व्यक्तियों को भी लिखे जाते हैं, परन्तु उनका विषय सरकारी होना चाहिए।

१०. पत्र संख्या सामान्यतः विभाग के ऊपर लिखा जाता है।

११. स्थान और तिथि, सरकारी-पत्र की ही तरह लिखा जाता है।

१२. पत्रांत व्यावहारिकता के लिए ‘भवदीय’; ‘भवानिष्ठ’ या ‘आपका सद्भावी’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। 

अर्ध-सरकारी पत्र का प्रारूप

पत्र-लेखन : अर्ध-सरकारी पत्र का प्रारूप - १
पत्र-लेखन : अर्ध-सरकारी पत्र का प्रारूप

विषय को लेकर भ्रम

‘विषय’ लिखा जाय या नहीं ?

जहाँ तक अर्धशासकीय पत्र में (‘विषय’) के लिखे जाने का सम्बन्ध है, इस सम्बन्ध में कोई निश्चित निर्देश दिया जाना सम्भव नहीं है।

  • जब अर्ध-शासकीय पत्र छोटा हो तो वह सम्बन्धित अधिकारी के विवेकानुसार मुख्य आलेख्य आरम्भ करने के पूर्व बिना ‘विषय’ के लिखे भी भेजा जा सकता है।
  • परन्तु यदि अर्ध-सरकारी पत्र लम्बा हो और उसमें बृहत विवरण आदि दिये गये हों तो आलेख्य शुरू करने के पूर्व ही सबसे ऊपर बीच में विषय उल्लेख किया जाना उचित होगा। इससे अर्धशासकीय पत्र को आसानी से समझे जाने योग्य बनाया जा सकता है।

सरकारी व अर्ध-सरकारी पत्र : समानता और अन्तर

समानता

१. दोनों पत्रों की विषयवस्तु सदैव शासकीय प्रयोजनार्थ होती है।

२. दोनों के माध्यम से निर्णय लेने और क्रियान्वित करने की प्रक्रिया सरल, सुगम और तीव्र होती है।

३. दोनों पत्र अभिलेखीय महत्त्व के होते हैं।

४. दोनो पत्रों में व्यक्तिगत तथ्य या सूचनाओं का सदैव अभाव होता है।

५. दोनों पत्रों से शासन की कार्यकुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

अन्तर

आधारसरकारी-पत्रअर्ध-सरकारी पत्र
उद्गमपद से होता है।अधिकारी / व्यक्ति के स्तर से होता है।
संचलन सदैव पद से पद को प्रेषित होता है। ऐसे में तीन स्थितियाँ हो सकती हैं — क.   समान पदों के बीच ख.   वरिष्ठ से कनिष्ठ पद के बीच ग.    कनिष्ठ से वरिष्ठ पद के बीचप्रायः समान स्तर के अधिकारियों के बीच अथवा किसी अशासकीय व्यक्ति को भी सरकारी कार्य हेतु प्रेषित।
विषय-वस्तुशासकीय प्रयोजन और पदीय दायित्वों की पूर्ति से सम्बन्धितशासकीय प्रयोजन हेतु ध्यानाकर्षण, विचार-विमर्श और गोपनीय मामलों में वार्ता से सम्बन्धित
भाषा-शैलीऔपचारिक भाषा में, रूढ़ व अन्य पुरुष शैली में तटस्थ भाव से लिखा जाता है। वैयक्तिक भावों का कोई स्थान नहीं।अनौपचारिक भाषा में व्यक्तिगत और मैत्री व आत्मीय भाव से उत्तम व मध्यम पुरुष शैली में लिखा जाता है।
प्रेषिती पत्र को प्रेषिती कार्यालय का नियत प्राधिकारी खोलता है।व्यक्तिगत होने के कारण पत्र को सदैव प्रेषिती ही खोलता है।
सम्बोधन व समापनइसमें मात्र औपचारिक शब्दावली ‘महोदय’ सम्बोधन और समापन के लिये कोई औपचारिक शब्द नहीं होता है।इसमें अनौपचारिक शब्द शब्द ‘प्रिय श्री …’ ; ‘प्रिय महोदय’ से सम्बोधन और समापन के लिये आदरसूचक ‘सादर / ससम्मान /सद्भावनाओं सहित’ जैसे शब्द का प्रयोग किया जाता है।
उद्देश्यअधिकारी अपने पदीय दायित्व का निर्वहन तटस्थ भाव से करते हैं।अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेते हुए शासकीय समस्याओं का निर्वहन करते हैं।

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पत्र लेखन

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