अर्ध-सरकारी पत्र

👤 By Pinwas IAS📅 8 September 2023⏱ 1 min read
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भूमिका

अर्ध-सरकारी पत्र प्राय: सम्बन्धित कार्याधिक्य अथवा किसी अन्य कारण से समय पर वांछित सूचना न मिलने और कार्यालय की ओर से अनुस्मारक भेजने पर भी उचित उत्तर न प्राप्त होने की स्थिति में भेंजे जाते हैं।

परिभाषा— “अर्ध-सरकारी पत्र किसी कार्यालय के अधिकारी द्वारा किसी अन्य अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से लेकिन सरकारी कार्य हेतु प्रेषित किया जाता है।”

उद्देश्य— इसका उद्देश्य किसी कार्य सम्पादन की ओर विशेष ध्यान आकर्षित कर सम्बन्धित सूचना का सम्प्रेषण या प्राप्त करना होता है।

क्यों भेजा जाता है?— ये पत्र किसी बात की ओर विशेष ध्यान दिलाने, आपस में सलाह-मशविरा करने, विचारों या सूचनाओं का आदान-प्रदान करने, कोई सूचना देने या किसी प्रकार का स्पष्टीकरण देने या चाहने की स्थिति में लिखे जाते हैं।

विशेषताएँ

  • अर्ध-सरकारी पत्र एक अधिकारी द्वारा दूसरे अधिकारी को लिखा जाता है न कि एक दूसरे विभाग या कार्यालय को।
  • यह पत्र तब लिखा जाता है जब मामला गोपनीय हो या शीघ्र कार्यवाही करना हो या किसी विशेष मामले पर प्रेष्य का ध्यान आकर्षित करना हो।
  • अर्ध-सरकारी पत्र प्राय: समान स्तर के अधिकारियों के मध्य लिखे जाते हैं।
  • यह पत्र किसी अधिकारी विशेष के नाम से प्रेषित होता है। अत: यह पत्र वह अधिकारी स्वयं खोलता हैं जिसके नाम से भेजा गया है न कि कोई अन्य।
  • कभी-कभी यह पत्र गोपनीय भी होता है।
  • यह पत्र व्यक्तिगत शैली में लिखा जाता है; अर्थात् उत्तम पुरुष और द्वितीय पुरुष में — ‘मैं’ और ‘आप’। अन्य पुरुष शैली का प्रयोग नहीं किया जाता है।
  • आमतौर पर इसमें औपचारिकता नहीं बरती जाती है।
  • ये नितांत आत्मीय ढंग से लिखे गये सरकारी-पत्र होते हैं। इसमें अभिवादन के लिए ‘प्रिय श्री’; ‘प्रिय महोदय’ जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।
  • अर्ध-सरकारी पत्र गैर-सरकारी व्यक्तियों को भी लिखे जाते हैं, परन्तु उनका विषय सरकारी होना चाहिए।
  • पत्र संख्या सामान्यतः विभाग के ऊपर लिखा जाता है।
  • स्थान और तिथि, सरकारी-पत्र की ही तरह लिखा जाता है।
  • पत्रांत व्यावहारिकता के लिए ‘भवदीय’; ‘भवानिष्ठ’ या ‘आपका सद्भावी’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। 

अर्ध-सरकारी पत्र का प्रारूप

अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ …..

प्रेषक का नाम ……,

पदनाम …………….,

पता ………………..।

मुहर

विभाग/कार्यालय ….

लखनऊ, दिनांक …..

विषय : …… …… …… …… …… …… …… …… …… ….. …. … …. …. ….।

प्रिय श्री क॰ ख॰ ग॰ जी,

उपर्युक्त विषयक आपके पत्र संख्या ……. दिनांक ………. पर स्थगित पत्र-व्यवहार के संदर्भ में मुझसे यह कहने की अपेक्षा की गयी है कि ……. ……….. …………. ……. …….. ………….. …….. ……… …….. …………..।

2. ….. …. ….. ….. ….. ….. ….. ……. ……… …….. ……. ……… ……. ……. ……. …… ……… …… …… …….।

सद्भावनाओं सहित,

भवदीय

ह॰ …………

(प्रेषक का नाम ….)

विषय को लेकर भ्रम

विषय’ लिखा जाय या नहीं ?

जहाँ तक अर्ध-शासकीय पत्र में ‘विषय’ के लिखे जाने का सम्बन्ध है, इस सम्बन्ध में कोई निश्चित निर्देश दिया जाना सम्भव नहीं है।

  • जब अर्ध-शासकीय पत्र छोटा हो तो वह सम्बन्धित अधिकारी के विवेकानुसार मुख्य आलेख आरम्भ करने के पूर्व बिना ‘विषय’ के लिखे भी भेजा जा सकता है।
  • परन्तु यदि अर्ध-सरकारी पत्र लम्बा हो और उसमें बृहत विवरण आदि दिये गये हों तो आलेख शुरू करने के पूर्व ही सबसे ऊपर बीच में विषय उल्लेख किया जाना उचित होगा। इससे अर्ध-शासकीय पत्र को आसानी से समझे जाने योग्य बनाया जा सकता है।

सरकारी व अर्ध-सरकारी पत्र

समानता

  • दोनों पत्रों की विषयवस्तु सदैव शासकीय प्रयोजनार्थ होती है।
  • दोनों के माध्यम से निर्णय लेने और क्रियान्वित करने की प्रक्रिया सरल, सुगम और तीव्र होती है।
  • दोनों पत्र अभिलेखीय महत्त्व के होते हैं।
  • दोनो पत्रों में व्यक्तिगत तथ्य या सूचनाओं का सदैव अभाव होता है।
  • दोनों पत्रों से शासन की कार्यकुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

अन्तर

आधारसरकारी-पत्रअर्ध-सरकारी पत्र
उद्गमपद से होता है।अधिकारी / व्यक्ति के स्तर से होता है।
संचालन सदैव पद से पद को प्रेषित होता है। ऐसे में तीन स्थितियाँ हो सकती हैं—
  • क. समान पदों के बीच
  • ख. वरिष्ठ से कनिष्ठ पद के बीच
  • ग. कनिष्ठ से वरिष्ठ पद के बीच
प्रायः समान स्तर के अधिकारियों के बीच अथवा किसी अशासकीय व्यक्ति को भी सरकारी कार्य हेतु प्रेषित।
विषय-वस्तुशासकीय प्रयोजन और पदीय दायित्वों की पूर्ति से सम्बन्धित।शासकीय प्रयोजन हेतु ध्यानाकर्षण, विचार-विमर्श और गोपनीय मामलों में वार्ता से सम्बन्धित।
भाषा-शैली औपचारिक भाषा में, रूढ़ व अन्य पुरुष शैली में तटस्थ भाव से लिखा जाता है। वैयक्तिक भावों का कोई स्थान नहीं। अनौपचारिक भाषा में व्यक्तिगत, मैत्री व आत्मीय भाव से उत्तम व मध्यम पुरुष शैली में लिखा जाता है।
प्रेषितीपत्र को प्रेषिती कार्यालय का नियत प्राधिकारी खोलता है।व्यक्तिगत होने के कारण पत्र को सदैव प्रेषिती ही खोलता है।
सम्बोधनइसमें मात्र औपचारिक शब्दावली ‘महोदय’ का प्रयोग सम्बोधन के लिए होता है।इसमें अनौपचारिक शब्द ‘प्रिय श्री …’ अथवा ‘प्रिय महोदय’ से सम्बोधन किया जाता है।
समापनसमापन के लिए मात्र औपचारिक शब्द ‘भवदीय’ का प्रयोग होता है। समापन के लिए आदरसूचक ‘सादर’, ‘ससम्मान’ अथवा ‘सद्भावनाओं सहित’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
उद्देश्यअधिकारी अपने पदीय दायित्व का निर्वहन तटस्थ भाव से करते हैं।अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेते हुए शासकीय समस्याओं का निर्वहन करते हैं।

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PYQs

UPPSC (Mains) – 2010

प्रश्न— अर्द्ध सरकारी पत्र के उद्देश्य और रचना-शैली की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए एक नमूना प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर—

अर्ध-सरकारी पत्र

परिभाषा— “अर्ध-सरकारी पत्र किसी कार्यालय के अधिकारी द्वारा किसी अन्य अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से लेकिन सरकारी कार्य हेतु प्रेषित किया जाता है।”

उद्देश्य—

  • किसी कार्य सम्पादन की ओर विशेष ध्यान आकर्षित कर सम्बन्धित सूचना का सम्प्रेषण / प्राप्त करना होता है।
  • ये पत्र किसी बात की ओर विशेष ध्यान दिलाने, आपस में सलाह-मशविरा करने, विचारों या सूचनाओं का आदान-प्रदान करने, कोई सूचना देने या किसी प्रकार का स्पष्टीकरण देने या चाहने की स्थिति में लिखे जाते हैं।

रचना शैली—

  • यह पत्र व्यक्तिगत शैली में लिखा जाता है; अर्थात् उत्तम पुरुष और द्वितीय पुरुष में — ‘मैं’ और ‘आप’। अन्य पुरुष शैली का प्रयोग नहीं किया जाता है।
  • आमतौर पर इसमें औपचारिकता नहीं बरती जाती है।
  • ये नितांत आत्मीय ढंग से लिखे गये सरकारी-पत्र होते हैं। इसमें अभिवादन के लिए ‘प्रिय श्री’; ‘प्रिय महोदय’ जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।
  • पत्रांत व्यावहारिकता के लिए ‘भवदीय’; ‘भवानिष्ठ’ या ‘आपका सद्भावी’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है। 

अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ …..

च॰ छ॰ ज॰,

स्वास्थ्य सचिव,

स्वास्थ्य मंत्रालय,

उ॰प्र॰ सरकार, लखनऊ।

मुहर

उत्तर प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय, अनुभाग- …

लखनऊ, दिनांक …..

विषय : उत्तर प्रदेश में कुपोषण से जूझते बच्चों के इलाज के संदर्भ में।

प्रिय श्री क॰ ख॰ ग॰ जी,

मुझसे, आपसे यह कहने की अपेक्षा की गयी है कि पूर्व प्रेषित पत्र सं॰ – …….. के संदर्भ में यथाशीघ्र निर्णय लेने का कष्ट करें जिससे उत्तर प्रदेश में 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों में कुपोषण की व्याप्त समस्या का निराकरण शीघ्र हो सके। इस सम्बन्ध में पूर्ण विवरण को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाये। प्रदेश में लगभग ….. लाख बच्चे अति कुपोषण तथा कुछ अल्प पोषण की समस्या से ग्रस्त है।

2. इन बच्चों के इलाज के संदर्भ में प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं हो पा रहे हैं।

3. ऐसे में केन्द्र सरकार से सहायता अपेक्षित है।

4. अतः आपसे अनुरोध करना है कि तत्काल सहायता स्वीकृत करने की कृपा करें।

सद्भावनाओं सहित,

भवदीय

ह॰ …………

(च॰ छ॰ ज॰)

UPPSC (Mains) – 2011

प्रश्न— सरकारी एवं अर्द्ध-सरकारी पत्र का अन्तर स्पष्ट करते हुए अर्द्ध-सरकारी पत्र का एक उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर—
आधारसरकारी-पत्रअर्ध-सरकारी पत्र
उद्गमपद से होता है।अधिकारी / व्यक्ति के स्तर से होता है।
संचालन सदैव पद से पद को प्रेषित होता है। ऐसे में तीन स्थितियाँ हो सकती हैं—
  • क. समान पदों के बीच
  • ख. वरिष्ठ से कनिष्ठ पद के बीच
  • ग. कनिष्ठ से वरिष्ठ पद के बीच
प्रायः समान स्तर के अधिकारियों के बीच अथवा किसी अशासकीय व्यक्ति को भी सरकारी कार्य हेतु प्रेषित।
विषय-वस्तुशासकीय प्रयोजन और पदीय दायित्वों की पूर्ति से सम्बन्धित।शासकीय प्रयोजन हेतु ध्यानाकर्षण, विचार-विमर्श और गोपनीय मामलों में वार्ता से सम्बन्धित।
भाषा-शैली औपचारिक भाषा में, रूढ़ व अन्य पुरुष शैली में तटस्थ भाव से लिखा जाता है। वैयक्तिक भावों का कोई स्थान नहीं। अनौपचारिक भाषा में व्यक्तिगत, मैत्री व आत्मीय भाव से उत्तम व मध्यम पुरुष शैली में लिखा जाता है।
प्रेषितीपत्र को प्रेषिती कार्यालय का नियत प्राधिकारी खोलता है।व्यक्तिगत होने के कारण पत्र को सदैव प्रेषिती ही खोलता है।
सम्बोधनइसमें मात्र औपचारिक शब्दावली ‘महोदय’ का प्रयोग सम्बोधन के लिए होता है।इसमें अनौपचारिक शब्द ‘प्रिय श्री …’ अथवा ‘प्रिय महोदय’ से सम्बोधन किया जाता है।
समापनसमापन के लिए मात्र औपचारिक शब्द ‘भवदीय’ का प्रयोग होता है। समापन के लिए आदरसूचक ‘सादर’, ‘ससम्मान’ अथवा ‘सद्भावनाओं सहित’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
उद्देश्यअधिकारी अपने पदीय दायित्व का निर्वहन तटस्थ भाव से करते हैं।अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेते हुए शासकीय समस्याओं का निर्वहन करते हैं।

अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ …..

च॰ छ॰ ज॰,

स्वास्थ्य सचिव,

स्वास्थ्य मंत्रालय,

उ॰प्र॰ सरकार, लखनऊ।

मुहर

उत्तर प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय, अनुभाग- …

लखनऊ, दिनांक …..

विषय : उत्तर प्रदेश में कुपोषण से जूझते बच्चों के इलाज के संदर्भ में।

प्रिय श्री क॰ ख॰ ग॰ जी,

मुझसे, आपसे यह कहने की अपेक्षा की गयी है कि पूर्व प्रेषित पत्र सं॰ – …….. के संदर्भ में यथाशीघ्र निर्णय लेने का कष्ट करें जिससे उत्तर प्रदेश में 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों में कुपोषण की व्याप्त समस्या का निराकरण शीघ्र हो सके। इस सम्बन्ध में पूर्ण विवरण को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाये। प्रदेश में लगभग ….. लाख बच्चे अति कुपोषण तथा कुछ अल्प पोषण की समस्या से ग्रस्त है।

2. इन बच्चों के इलाज के संदर्भ में प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं हो पा रहे हैं।

3. ऐसे में केन्द्र सरकार से सहायता अपेक्षित है।

4. अतः आपसे अनुरोध करना है कि तत्काल सहायता स्वीकृत करने की कृपा करें।

सद्भावनाओं सहित,

भवदीय

ह॰ …………

(च॰ छ॰ ज॰)

UPPSC (Mains) – 2017 (Cancelled)

प्रश्न— अर्ध-सरकारी पत्र किसे कहते हैं ? सोदाहरण समझाइए।  

उत्तर—

“अर्ध-सरकारी पत्र किसी कार्यालय के अधिकारी द्वारा किसी अन्य अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से लेकिन सरकारी कार्य हेतु प्रेषित किया जाता है।”

ये पत्र प्राय: सम्बन्धित कार्याधिक्य अथवा किसी अन्य कारण से समय पर वांछित सूचना न मिलने और कार्यालय की ओर से अनुस्मारक भेजने पर भी उचित उत्तर न प्राप्त होने की दशा में भेंजे जाते हैं।

इसका उद्देश्य किसी कार्य सम्पादन की ओर विशेष ध्यान आकर्षित कर सम्बन्धित सूचना का सम्प्रेषण / प्राप्त करना होता है।

ये पत्र किसी बात की ओर विशेष ध्यान दिलाने, आपस में सलाह-मशविरा करने, विचारों या सूचनाओं का आदान-प्रदान करने, कोई सूचना देने या किसी प्रकार का स्पष्टीकरण देने या चाहने की स्थिति में लिखे जाते हैं।

अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ …..

च॰ छ॰ ज॰,

स्वास्थ्य सचिव,

स्वास्थ्य मंत्रालय,

उ॰प्र॰ सरकार, लखनऊ।

मुहर

उत्तर प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय, अनुभाग- …

लखनऊ, दिनांक …..

विषय : उत्तर प्रदेश में कुपोषण से जूझते बच्चों के इलाज के संदर्भ में।

प्रिय श्री क॰ ख॰ ग॰ जी,

मुझसे, आपसे यह कहने की अपेक्षा की गयी है कि पूर्व प्रेषित पत्र सं॰ – …….. के संदर्भ में यथाशीघ्र निर्णय लेने का कष्ट करें जिससे उत्तर प्रदेश में 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों में कुपोषण की व्याप्त समस्या का निराकरण शीघ्र हो सके। इस सम्बन्ध में पूर्ण विवरण को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाये। प्रदेश में लगभग ….. लाख बच्चे अति कुपोषण तथा कुछ अल्प पोषण की समस्या से ग्रस्त है।

2. इन बच्चों के इलाज के संदर्भ में प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं हो पा रहे हैं।

3. ऐसे में केन्द्र सरकार से सहायता अपेक्षित है।

4. अतः आपसे अनुरोध करना है कि तत्काल सहायता स्वीकृत करने की कृपा करें।

सद्भावनाओं सहित,

भवदीय

ह॰ …………

(च॰ छ॰ ज॰)

UPPSC (Mains) – 2017 (Re-exam)

प्रश्न— सरकारी और अर्ध सरकारी-पत्र का अंतर स्पष्ट करते हुए अर्ध सरकारी-पत्र का एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर—
आधारसरकारी-पत्रअर्ध-सरकारी पत्र
उद्गमपद से होता है।अधिकारी / व्यक्ति के स्तर से होता है।
संचालन सदैव पद से पद को प्रेषित होता है। ऐसे में तीन स्थितियाँ हो सकती हैं—
  • क. समान पदों के बीच
  • ख. वरिष्ठ से कनिष्ठ पद के बीच
  • ग. कनिष्ठ से वरिष्ठ पद के बीच
प्रायः समान स्तर के अधिकारियों के बीच अथवा किसी अशासकीय व्यक्ति को भी सरकारी कार्य हेतु प्रेषित।
विषय-वस्तुशासकीय प्रयोजन और पदीय दायित्वों की पूर्ति से सम्बन्धित।शासकीय प्रयोजन हेतु ध्यानाकर्षण, विचार-विमर्श और गोपनीय मामलों में वार्ता से सम्बन्धित।
भाषा-शैली औपचारिक भाषा में, रूढ़ व अन्य पुरुष शैली में तटस्थ भाव से लिखा जाता है। वैयक्तिक भावों का कोई स्थान नहीं। अनौपचारिक भाषा में व्यक्तिगत, मैत्री व आत्मीय भाव से उत्तम व मध्यम पुरुष शैली में लिखा जाता है।
प्रेषितीपत्र को प्रेषिती कार्यालय का नियत प्राधिकारी खोलता है।व्यक्तिगत होने के कारण पत्र को सदैव प्रेषिती ही खोलता है।
सम्बोधनइसमें मात्र औपचारिक शब्दावली ‘महोदय’ का प्रयोग सम्बोधन के लिए होता है।इसमें अनौपचारिक शब्द ‘प्रिय श्री …’ अथवा ‘प्रिय महोदय’ से सम्बोधन किया जाता है।
समापनसमापन के लिए मात्र औपचारिक शब्द ‘भवदीय’ का प्रयोग होता है। समापन के लिए आदरसूचक ‘सादर’, ‘ससम्मान’ अथवा ‘सद्भावनाओं सहित’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
उद्देश्यअधिकारी अपने पदीय दायित्व का निर्वहन तटस्थ भाव से करते हैं।अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेते हुए शासकीय समस्याओं का निर्वहन करते हैं।

अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ …..

च॰ छ॰ ज॰,

स्वास्थ्य सचिव,

स्वास्थ्य मंत्रालय,

उ॰प्र॰ सरकार, लखनऊ।

मुहर

उत्तर प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय, अनुभाग- …

लखनऊ, दिनांक …..

विषय : उत्तर प्रदेश में कुपोषण से जूझते बच्चों के इलाज के संदर्भ में।

प्रिय श्री क॰ ख॰ ग॰ जी,

मुझसे, आपसे यह कहने की अपेक्षा की गयी है कि पूर्व प्रेषित पत्र सं॰ – …….. के संदर्भ में यथाशीघ्र निर्णय लेने का कष्ट करें जिससे उत्तर प्रदेश में 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों में कुपोषण की व्याप्त समस्या का निराकरण शीघ्र हो सके। इस सम्बन्ध में पूर्ण विवरण को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाये। प्रदेश में लगभग ….. लाख बच्चे अति कुपोषण तथा कुछ अल्प पोषण की समस्या से ग्रस्त है।

2. इन बच्चों के इलाज के संदर्भ में प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं हो पा रहे हैं।

3. ऐसे में केन्द्र सरकार से सहायता अपेक्षित है।

4. अतः आपसे अनुरोध करना है कि तत्काल सहायता स्वीकृत करने की कृपा करें।

सद्भावनाओं सहित,

भवदीय

ह॰ …………

(च॰ छ॰ ज॰)

UPPSC (Mains) – 2018

प्रश्न— स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ की ओर से सचिव, स्वास्थ्य मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली को भेजने के लिए एक अर्ध सरकारी पत्र का प्रारूप तैयार कीजिए जिसमें उत्तर प्रदेश में कुपोषण से जूझते बच्चों के इलाज के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य मन्त्रालय से पूर्व में माँगी गई सहायता को यथाशीघ्र स्वीकृत करने के लिए आग्रह किया गया हो।

उत्तर—

अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ …..

च॰ छ॰ ज॰,

स्वास्थ्य सचिव,

स्वास्थ्य मंत्रालय,

उ॰प्र॰ सरकार, लखनऊ।

मुहर

उत्तर प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय, अनुभाग- …

लखनऊ, दिनांक …..

विषय : उत्तर प्रदेश में कुपोषण से जूझते बच्चों के इलाज के संदर्भ में।

प्रिय श्री क॰ ख॰ ग॰ जी,

मुझसे, आपसे यह कहने की अपेक्षा की गयी है कि पूर्व प्रेषित पत्र सं॰ – …….. के संदर्भ में यथाशीघ्र निर्णय लेने का कष्ट करें जिससे उत्तर प्रदेश में 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों में कुपोषण की व्याप्त समस्या का निराकरण शीघ्र हो सके। इस सम्बन्ध में पूर्ण विवरण को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाये। प्रदेश में लगभग ….. लाख बच्चे अति कुपोषण तथा कुछ अल्प पोषण की समस्या से ग्रस्त है।

2. इन बच्चों के इलाज के संदर्भ में प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं हो पा रहे हैं।

3. ऐसे में केन्द्र सरकार से सहायता अपेक्षित है।

4. अतः आपसे अनुरोध करना है कि तत्काल सहायता स्वीकृत करने की कृपा करें।

सद्भावनाओं सहित,

भवदीय

ह॰ …………

(च॰ छ॰ ज॰)

UPPSC (Mains) – 2021

प्रश्न— अर्ध सरकारी पत्र किसे कहते है? यह सरकारी पत्र से किस प्रकार भिन्न होता है? दोनों का अलग-अलग प्रारूप तैयार कीजिये।

उत्तर—

अर्ध सरकारी पत्र किसे कहते है?

“अर्ध-सरकारी पत्र किसी कार्यालय के अधिकारी द्वारा किसी अन्य अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से लेकिन सरकारी कार्य हेतु प्रेषित किया जाता है।”

ये पत्र प्राय: सम्बन्धित कार्याधिक्य अथवा किसी अन्य कारण से समय पर वांछित सूचना न मिलने और कार्यालय की ओर से अनुस्मारक भेजने पर भी उचित उत्तर न प्राप्त होने की दशा में भेंजे जाते हैं।

इसका उद्देश्य किसी कार्य सम्पादन की ओर विशेष ध्यान आकर्षित कर सम्बन्धित सूचना का सम्प्रेषण / प्राप्त करना होता है।

ये पत्र किसी बात की ओर विशेष ध्यान दिलाने, आपस में सलाह-मशविरा करने, विचारों या सूचनाओं का आदान-प्रदान करने, कोई सूचना देने या किसी प्रकार का स्पष्टीकरण देने या चाहने की स्थिति में लिखे जाते हैं।

सरकारी पत्र और अर्ध-सरकारी पत्र : अन्तर

आधारसरकारी-पत्रअर्ध-सरकारी पत्र
उद्गमपद से होता है।अधिकारी / व्यक्ति के स्तर से होता है।
संचालन सदैव पद से पद को प्रेषित होता है। ऐसे में तीन स्थितियाँ हो सकती हैं—
  • क. समान पदों के बीच
  • ख. वरिष्ठ से कनिष्ठ पद के बीच
  • ग. कनिष्ठ से वरिष्ठ पद के बीच
प्रायः समान स्तर के अधिकारियों के बीच अथवा किसी अशासकीय व्यक्ति को भी सरकारी कार्य हेतु प्रेषित।
विषय-वस्तुशासकीय प्रयोजन और पदीय दायित्वों की पूर्ति से सम्बन्धित।शासकीय प्रयोजन हेतु ध्यानाकर्षण, विचार-विमर्श और गोपनीय मामलों में वार्ता से सम्बन्धित।
भाषा-शैली औपचारिक भाषा में, रूढ़ व अन्य पुरुष शैली में तटस्थ भाव से लिखा जाता है। वैयक्तिक भावों का कोई स्थान नहीं। अनौपचारिक भाषा में व्यक्तिगत, मैत्री व आत्मीय भाव से उत्तम व मध्यम पुरुष शैली में लिखा जाता है।
प्रेषितीपत्र को प्रेषिती कार्यालय का नियत प्राधिकारी खोलता है।व्यक्तिगत होने के कारण पत्र को सदैव प्रेषिती ही खोलता है।
सम्बोधनइसमें मात्र औपचारिक शब्दावली ‘महोदय’ का प्रयोग सम्बोधन के लिए होता है।इसमें अनौपचारिक शब्द ‘प्रिय श्री …’ अथवा ‘प्रिय महोदय’ से सम्बोधन किया जाता है।
समापनसमापन के लिए मात्र औपचारिक शब्द ‘भवदीय’ का प्रयोग होता है। समापन के लिए आदरसूचक ‘सादर’, ‘ससम्मान’ अथवा ‘सद्भावनाओं सहित’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
उद्देश्यअधिकारी अपने पदीय दायित्व का निर्वहन तटस्थ भाव से करते हैं।अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेते हुए शासकीय समस्याओं का निर्वहन करते हैं।

अर्ध-सरकारी पत्र : प्रारूप

अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ …..

प्रेषक का नाम ……,

पदनाम …………….,

पता ………………..।

मुहर

विभाग/कार्यालय ….

लखनऊ, दिनांक …..

विषय : …… …… …… …… …… …… …… …… …… ….. …. … …. …. ….।

प्रिय श्री क॰ ख॰ ग॰ जी,

उपर्युक्त विषयक आपके पत्र संख्या ……. दिनांक ………. पर स्थगित पत्र-व्यवहार के संदर्भ में मुझसे यह कहने की अपेक्षा की गयी है कि ……. ……….. …………. ……. …….. ………….. …….. ……… …….. …………..।

2. ….. …. ….. ….. ….. ….. ….. ……. ……… …….. ……. ……… ……. ……. ……. …… ……… …… …… …….।

सद्भावनाओं सहित,

भवदीय

ह॰ …………

(प्रेषक का नाम ….)

टिप्पणी— यहाँ पर हमने अर्ध सरकारी पत्र किसे कहते है? अर्ध सरकारी पत्र और सरकारी पत्र का अंतर और अर्ध सरकारी पत्र का प्रारूप ही लिखा। पूरे प्रश्न के हल के लिए देखिए— सामान्य हिंदी | UPPSC (Main) Examination 2021: Question Paper and Solution

UPPSC (Mains) – 2025

प्रश्न— सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से संयुक्त सचिव (नीति), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार को प्रेषित किए जाने वाले एक अर्ध-सरकारी पत्र का प्रारूप प्रस्तुत कीजिए, जिसमें आयात नीति निर्धारण विषयक सूचनाएँ शीघ्र भेजने का संदर्भ हो।

उत्तर—

अर्ध-शा॰ प॰ सं॰ …..

च॰ छ॰ ज॰,

सचिव,

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय,

भारत सरकार, नई दिल्ली।

मुहर

भारत सरकार, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

लखनऊ, दिनांक …..

विषय : आयात नीति निर्धारण विषयक सूचना के संदर्भ में।

प्रिय श्री क॰ ख॰ ग॰ जी,

कृपया आगामी वित्तीय वर्ष हेतु ‘आयात नीति निर्धारण’ विषयक संदर्भित प्रस्ताव एवं उससे संबंधित अपेक्षित सूचनाओं का संदर्भ ग्रहण करें।

2. जैसा कि आपको विदित है, आगामी आयात नीति के समयबद्ध निर्धारण एवं क्रियान्वयन हेतु विभिन्न हितधारकों एवं विभागों से प्राप्त आँकड़ों तथा रिपोर्टों का संकलन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इस सम्बन्ध में नीति प्रभाग से माँगी गई विस्तृत विवरण तथा विश्लेषणात्मक रिपोर्ट अभी तक इस कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है।

3. आयात नीति के समय पर अंतिम रूप दिए जाने की संवेदनशीलता को देखते हुए, यह आवश्यक है कि सभी सम्बन्धित सूचनाएँ अविलंब उपलब्ध कराई जाएँ।

4. अतः आपसे अनुरोध है कि आप इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए सम्बन्धित सूचनाएँ एवं रिपोर्ट आगामी तीन कार्यदिवसों के भीतर भिजवाने का कष्ट करें, ताकि नीति निर्धारण की प्रक्रिया में अनावश्यक विलम्ब न हो।

सद्भावनाओं सहित,

भवदीय

ह॰ …………

(च॰ छ॰ ज॰)


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